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160 वें मर्यादा महोत्सव का तृतीय दिवस

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*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन* *📿 पूज्य प्रवर द्वारा नमस्कार महामन्त्र के समुच्चारण के साथ तृतीय दिवस के कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ* *🌀 पूज्य प्रवर द्वारा खड़े होकर गुरुदेव तुलसी द्वारा विरचित "भीखण जी स्वामी भारी मर्यादा बांधी संघ" में गीत का हुआ संगान*  *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन* *📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम* *🌀  समणी वृन्द द्वारा गीत संगान*  *सारी धरती पर बिछी अंशुमाला* *मिला है पन्थ भिक्षुवाला* *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन* *📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम* *🌀  साध्वीवृन्द  द्वारा गीत संगान*  *जय भिक्षु का गण अनुशासन* *अब सारे जंहा में गूँजेगा* *📜 मर्यादा ...

160 वें मर्यादा महोत्सव का द्वितीय दिवस

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*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "मर्यादा महोत्सव"* *📿 गुरुदेव के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्रोच्चार के साथ द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का शुभारंभ* *🌀 मुमुक्षु बहिनों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति* *"श्री भिक्षु का यह शासन है, प्राण अनुशासन है। "*  👉🏻 *160 वां मर्यादा महोत्सव - द्वितीय दिवस* *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"* *🌀मुख्य मुनि श्री महावीरकुमार जी ने मर्यादा महोत्सव के उपलक्ष में दी सारगर्भित प्रस्तुति*  *तेरापंथ के प्राण तत्व है - आज्ञा, अनुशासन और मर्यादा : मुख्य मुनिश्री महावीरकुमारजी* *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"* *🌀पूज्य गुरुदेव ने आचार्य श्री महाप्रज्ञजी को उनके पदारोहण दिवस पर याद करते हुए फरमाया कि मर्यादा म...

160 वें मर्यादा महोत्सव का प्रथम दिन

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 *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन* *📿 पूज्य गुरुदेव द्वारा नमस्कार महामंत्रोच्चार के उच्चारण एवं आचार्य भिक्षु द्वारा लिखित ऐतिहासिक "मर्यादा पत्र" की स्थापना के पश्चात मर्यादा महोत्सव के शुभारंभ की घोषणा के साथ हुआ 160 वें मर्यादा महोत्सव का भव्य आगाज* *🌀 हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्रावक समाज बन रहा है ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी* *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन* *📿 मुनिश्री दिनेशकुमारजी द्वारा "मर्यादा गीत" के संगान के पश्चात उपासक श्रेणी द्वारा "हम उपासक साधना में आगे बढ़ते जाए" गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति* *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्...

जैन जयतु शासनम्’ कार्यक्रम में जैन धर्म के दो आचार्यों का आध्यात्मिक मिलन

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स्वयं की आत्मा को बनाएं मित्र : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण नवकार मंत्र से चलता है जिन शासन : ज्योतिषाचार्य प्रणामसागरजी 15.12.2023, शुक्रवार, दादर (पूर्व), मुम्बई (महाराष्ट्र), जन-जन में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की अलख जगाने वाले, जन-जन को सन्मार्ग दिखाने वाले, मोक्ष प्राप्ति का साधन बताने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता की मंगल सन्निधि में दादर प्रवास के दूसरे दिन दिगम्बर सम्प्रदाय के ज्योतिषाचार्य प्रणाम सागरजी महाराज भी उपस्थित हुए। जैन सम्प्रदाय के दो आध्यात्मिक गुरुओं का आध्यात्मिक जन-जन को आह्लादित कराने वाला रहा। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में दोनों आचार्यों ने उपस्थित श्रद्धालु जनता को पावन प्रेरणा भी प्रदान की व जैन एकता का मंगल संदेश प्रदान किया।  शुक्रवार को प्रातःकाल श्री साउण्ड सिने स्टूडियो में बने वर्धमान समवसरण में आज ‘जैनम् जयतु शासनम्’ का समायोजन हुआ। इस जैन शासन के प्रभावक कार्यक्रम में उपस्थित जनता को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में हर किस...

तत्त्ववेत्ता, अध्यात्मवेत्ता व विधिवेत्ता थे श्रीमज्जयाचार्य : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

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11.09.2023, सोमवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र), भाद्रपद कृष्णा द्वादशी अर्थात् सोमवार को नन्दनवन परिसर में बने तीर्थंकर समवसरण में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने चतुर्थ आचार्य श्रीमज्जयाचार्य के महाप्रयाण दिवस पर उनका स्मरण करते हुए जनता को पावन प्रेरणाएं प्रदान कीं। सोमवार को तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को वर्तमान अनुशास्ता ने भगवती सूत्राधारित अपने पावन प्रवचन में मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि भगवान महावीर से प्रश्न किया गया कि कर्म प्रकृतियां कितनी प्रज्ञप्त हैं? भगवान महावीर ने समाधान प्रदान करते हुए कहा कि आठ कर्म बताए गए हैं। सभी जीवों की स्थिति के अनुसार कर्म उनसे जुड़े हुए रहते हैं। इन आठ कर्मों का पर्याय के परिवर्तन में बड़ा सहयोग होता है। कोई ज्ञानी होता है, कोई अज्ञानी होता है, कोई धनवान तो कोई निर्धन, कोई बलवान तो कोई कमजोर होता है। यह सारी स्थितियां कर्मों के आधार पर होती हैं। भव्य को अभव्य बनाना या अभव्य को भव्य बनाना यह किसी के वश की बात नहीं होती। यहां पुरुषार्थ समाप्त हो जाता है। यह नियति पर न...

धर्म के आधार स्तम्भ हैं आत्मवाद व कर्मवाद : अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमण

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पूज्य सन्निधि में पहुंचे इस्कॉन संत श्री गौर गोपालदासजी 10.09.2023, रविवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र), मानवता के उत्थान के लिए संकल्पित जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में मानवों का मानों रेला-सा उमड़ रहा है। केवल तेरापंथी ही नहीं, अन्य जैन एवं जैनेतर समाज के लोग भी बड़ी संख्या में ऐसे महापुरुष के दर्शन और मंगल प्रवचन श्रवण का लाभ प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।  रविवार को नन्दनवन परिसर विशेष रूप से गुलजार हो जाता है। कामकाजी लोगों की छुट्टियां वर्तमान समय में आध्यात्मिक वातावरण में व्यतीत हो रही हैं। पूरे परिवार के साथ नन्दनवन में पहुंचकर श्रद्धालु धार्मिक-आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। तीर्थंकर समवसरण पूरी तरह जनाकीर्ण बना हुआ था। नित्य की भांति तीर्थंकर समवसरण में तीर्थंकर के प्रतिनिधि अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी मंचासीन हुए। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित किया।  जैन भगवती आगम के आधार पर अध्यात्मवेत्ता आचार्...

न्याय और नीति से कमाया धन होता है शुद्ध : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

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20.08.2023, रविवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र), जन-जन को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की प्रेरणा प्रदान करने वाले, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने रविवार को तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित विशाल जनमेदिनी को भगवती सूत्र आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि यह दुनिया आकाश में स्थित है। जैन दर्शन के अनुसार आकाश का कोई ओर-छोर नहीं है, वह अनंत है। आकाश को दो भागों में बांटा जाता है- लोकाकाश और अलोकाकाश। इस अनंत अलोकाकाश में लोकाकाश एक छोटे-से टापू के रूप में स्थित है। अलोकाकाश में कोई पुद्गल आदि नहीं होता। लोकाकाश के चारो ओर अलोकाकाश है। लोकाकाश में स्वर्ग, नरक, पृथ्वी ही नहीं सिद्ध क्षेत्र में जाने वाली आत्माएं भी इसी लोकाकाश में हैं।  जीवों को धर्मास्तिकाय के कारण गति मिलती है और ठहराव की स्थिति अधर्मास्तिकाय के सहायता से प्राप्त होती है। आकाश ठहरने के लिए स्थान देता है। काल का कार्य बीतना होता है। कोई भी कार्य करने के लिए काल अर्थात समय की आवश्यकता होती है। जो आंखों से दिखाई दे रहा, वे सभी पुद्...

अधार्मिक का सोना और धार्मिक का जगना अच्छा : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

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17.08.2023, गुरुवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र), जन-जन के आस्था के केन्द्र, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य, समता के साधक, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का वर्ष 2023 का चतुर्मास भारत पश्चिम-दक्षिण भाग में स्थित महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई में हो रहा है। भौगोलिक रूप से पठारी भाग पर बसा मुम्बई महानगर अरब सागर से भी जुड़ा हुआ है। इस कारण मुम्बई को भारी वर्षा के लिए भी जाना जाता है। जुलाई महीने में भारी वर्षा से आप्लावित रही मुम्बई में पूरे दिन धूप तो अभी भी दिखाई नहीं देती, लेकिन सूर्य की रोशनी कभी-कभी कुछ समय के लिए धरती का स्पर्श अवश्य करती है। दूसरी ओर तेरापंथ देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी की आध्यात्मिक रश्मियां चहुंओर बिखर रही हैं। इनके आलोक में आने वाली जनता अपने आंतरिक अंधकार से मुक्त महसूस करती है। इसलिए तो नन्दनवन परिसर में ही पूरा भारत देखने को मिल जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम और भारत के सुदूर कहे जाने वाले पूर्वोत्तर के राज्यों के श्रद्धालु भी गुरु सन्निधि में पहुंचे हुए हैं। इसके अलावा विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी प...

अपनी आत्मा को पापों के भार से बचाने का प्रयास कर सकते हैं - शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

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16.08.2023, बुधवार, घोड़बंदर रोड, मुम्बई (महाराष्ट्र), भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई को आध्यात्मिक रूप से सम्पन्न बनाने के लिए अपनी धवल सेना के साथ मुम्बई में चतुर्मास प्रवास कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी प्रतिदिन आगमवाणी के माध्यम से अध्यात्मक की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। सागर तट पर प्रवाहित होने वाली यह निर्मल ज्ञानगंगा जन-जन के मानस के संताप का हरण करने वाली है। इस ज्ञानगंगा में डुबकी लगाने के लिए मुम्बईवासी ही नहीं, देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।  महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में तपस्याओं की अनुपम भेंट भी श्रद्धालुओं ने इस प्रकार चढ़ाई हैं, जिसने तेरापंथ धर्मसंघ में एक नवीन कीर्तिमान का सृजन कर दिया है। इसके अतिरिक्त अनेकों प्रकार की तपस्याओं में रत श्रद्धालु अपने आराध्य से नियमित रूप से तपस्याओं का प्रत्याख्यान कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।  युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित श्रद्धाल...

मोहनीय कर्म की तीव्रता से बचने का हो प्रयास : महातपस्वी महाश्रमण

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28.07.2023, शुक्रवार, मीरा रोड (ईस्ट), मुम्बई (महाराष्ट्र), भारत की आर्थिक राजधानी के विख्यात मायानगरी मुम्बई महानगर बरसात के दिनों में भारी वर्षा के लिए भी जानी जाती है। इन दिनों मुम्बई में लगातार वर्षा का क्रम जारी है। इसके बावजूद भी मुम्बईवासी श्रद्धालु नन्दनवन में विराजमान अपने अराध्य, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में उनकी अमृतवाणी का रसपान करने के लिए नियमित रूप से उपस्थित होते हैं। अपने आराध्य के श्रीमुख से आगमवाणी और अपने पूर्वाचार्यों के जीवनवृत्त का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बना रहे हैं।  शुक्रवार को नन्दनवन परिसर में बने तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित श्रद्धालु जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने भगवती सूत्र के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि तीन कर्म बंधनों की चर्चा के उपरान्त अब प्रश्न चौथे मोहनीय कर्म बंध के संदर्भ में प्रश्न किया गया कि मोहनीय कर्म का बंध कैसे होता है? उत्तर दिया गया कि तीव्र क्रोध, तीव्र मान, तीव्र लोभ, तीव्र मोह और तीव्र माया के कारण मोहनीय कर्म का बंध होता है। आठ ...