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Showing posts from September, 2014

सर्व धर्म सौहार्द दिवस एवं शपथ ग्रहण

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सर्व धर्म सौहार्द दिवस एवं तेरापंथ सभा का शपथ ग्रहण समारोह नाथद्वारा:-स्थानीय तेरापंथ भवन में मुनिश्री दर्शन कुमार जी के सानिध्य में अनुव्रत समिति नाथद्वारा द्वारा सर्व धर्म सौहार्द का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम दो चरण में चला प्रथम चरण सर्व धर्म सौहार्द में मुस्लिम समाज से जनाब नसीम अख्तर, बोहरा समाज से मोहम्मद इकबाल, सिक्ख समाज से हरमिंदर सिंह, सरदार सुखदेव सिंह, अम्बालाल लोढ़ा, राजसमन्द अणुव्रत प्रभारी लाडजी मेहता ने अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश शैलेश व्यास ने कहा की अणुव्रत और सर्व धर्म को एक दुसरे का पर्याय कहा जा सकता है। क्योकि अणुव्रत ने सम्प्रदाय से बाहर आकर अपना असर दिखाया। वेसे तो जैन समाज सभी धर्मो के प्रति आदर का भाव रखता है पर ऐसे कार्यक्रमों में वो सम्मान दिखाई देता है। मुनिश्री ने अपने प्रवचन में फ़रमाया की व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म समाज का हो उसके खून का रंग लाल ही होता है। वेसे ही सभी धर्मो का सार भी समान ही है प्रत्येक धर्म प्रेम से रहना ही सिखाता है। कोई भी धर्म आपस में लड़ना नहीं सिखाता धर्म को तो इंसानों ने सम्प्...

विद्यार्थियों का हो सर्वांगीण विकास - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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नई दिल्ली, 25 सितम्बर, 2014 अध्यात्म साधना केंद्र के वर्धमान समवसरण में पूज्य प्रवर आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सानिध्य में जीवन विज्ञान सेमिनार का आयोजन हुआ। मंगलाचरण द्वारा कार्यक्रम का प्रारंभ केन्द्रीय सदस्य श्रीमती राज गुनेचा ने किया। जीवन विज्ञान को निरंतर अपना समय देने वाले मुनि श्री किशन लाल जी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में बताया कि जीवन विज्ञान जीने का श्रेष्ठतम विज्ञान है जिसके द्वारा हम अपने जीवन को शांत, सुन्दर एवं आनंदपूर्ण बना सकते हैं। जीवन विज्ञान शरीर, मन और बुद्धि के सम्बन्ध में औषधि बना है। जीवन विज्ञान एक प्रायोगिक शिक्षण है जिसमें प्रयोग के माध्यम से परिणाम आता है। जीवन विज्ञान में मुख्यत: मुद्रा का सही होना, श्वास का सही होना एवं सकारात्मक सोच का होना जरूरी है। "जीवन में हो नैतिक मूल्यों का विकास"/"विद्यार्थियों का हो सर्वांगीण विकास" आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फ़रमाया कि जो अविनीत होता है उसे विपदा प्राप्त होती है। वह विपति का भागीदार बनकर चलता है। जो विनीत होता है उसे संपत्ति मिलती है। यह सिद्धांत जिसके समझ में आ जाए वह विद्यार्थी ...

Acharya Mahashraman with Dalai Lama

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धार्मिक कार्यों में हो समय का नियोजन

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नई दिल्ली, 24 सितम्बर 2014 तेरापंथ के महासूर्य, महातपस्वी महाश्रमण जी ने जनता को संबोध प्रदान करते हुए फ़रमाया- आर्हत वाड्मय में कहा गया कि जो रात्रि बीत जाती है, वह वापस नहीं आती। धर्म करने वाले की रात्रियाँ सफल हो जाती हैं। हमारे जीवन में समय का महत्त्व है। और समय थोड़ा नही है। अनंत है। और समय का गुण होता है बीतना। जैन पारिभाषिक शब्दों में जो समय है। वह समय तो इतना सूक्ष्म है कि एक सेकंड में असंख्य समय बीत जाते हैं। पंडित आदमी समय को पहचाने और उसे सार्थक करने की कोशिश करें। हम समय का सदुपयोग करने की कोशिश करें। जो समय बीत गया उसकी कितनी भी प्रतीक्षा कर लो लौटने वाला नहीं। जो आदमी अच्छे कार्यों में समय को नियोजित करता है, वह आदमी अच्छा होता है। संस्कृत साहित्य में कहा गया जो व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं, उनका समय ज्ञान की चर्चा में बीतता है। अज्ञानी, प्रमादी का व्यसनों, लड़ाई-झगड़े या आलस्य में जाता है। परम पूज्य गुरुदेव ने काल व मृत्यु को बहुत निष्पक्ष व समवर्ती बताया। तथा कहा कि हर व्यक्ति को दिन में 24 घंटे मिलते हैं। हर घंटे से 2-2 मिनट निकालें तो एक सामायिक का कालमान यान...

समय का सदुपयोग करे - आचार्य महाश्रमण

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दिल्ली, 24 सितम्बर। व्यक्ति के जीवन में समय का बड़ा महत्त्व है। समय का सदुपयोग, दुरुपयोग और अनुपयोग किया जाता है। समय अनंत है उसका स्वभाव है बितना, समय को पकड़ना कठिन काम है। पण्डित आदमी वह होता है जो समय को पकड़ना जानता है, समय का सदुपयोग करना जानता है। जो व्यक्ति आलस्य में रहता है वह समय का अनुपयोग करता है। समय बीत जाने के बाद समय लौट कर नहीं आता। जो व्यक्ति समय का दुरुपयोग करता है वह घटिया आदमी है। हम समय को बढिया बनाने का प्रयास करें। समय व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। उक्त विचार आचार्यश्री महाश्रमण ने अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान समवसरण में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। आचार्य श्री ने कहा कि जो बुद्धिमान होते हैं वे समय को ज्ञानचर्चा में व्यतीत करते हैं। जो व्यक्ति अज्ञानी होते हैं वे समय को व्यसन में गंवाते, लड़ाई-झगड़े में समय को व्यतीत करते हैं। हम समय का अच्छे कार्यों में नियोजन करें। समय किसी के साथ पक्षपात  नहीं करता वह अमीर गरीब सबको बराबर मिलता है। समय के प्रति आदमी को जागरूक रहना चाहिए। मनुष्य के जीवन में धार्मिकता, अहिंसा, नैतिकता, ईमानदा...

‘‘संगठन व समूह के लिए अनुशासन आवश्यक: आचार्य महाश्रमण’’

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दिल्ली, 23 सितम्बर, 2014 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक माननीय मोहन भागवत जी और जैनाचार्य अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के संयुक्त तत्वावधान में मानवीय मूल्यों एवं राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, नैतिकता और सौहार्द पर विशेष चिन्तन गोष्ठी का आयोजन हुआ। आध्यात्मिक साधना केन्द्र महरोली के वर्धमान समवसरण में उपस्थित विशाल जनसमुदाय को संबोधित करत हुए आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन अधुर्व है शाष्वत नहीं है। आत्मा और शरीर ये दो तत्व हैं। आत्मा का अलग तत्व है और शरीर अलग तत्व है। आत्मा व शरीर का संयोग जीवन है, वियोग मृत्यु है। मनुष्य यह चिंतन करे कि जब तक बुढापा पीडि़त न कर दे, इन्द्रियां क्षीण न हो जाए तब तक धर्म की साधना करनी चाहिए। शरीर सक्षम है तब तक सेवा आदि अच्छा काम कर लेना चाहिए। अनुशासन हम सबके लिए आवश्यक है। व्यक्ति पहले स्वयं पर अनुशासन करे, फिर दूसरों पर अनुशासन करे। अनुशासन देश व संगठन के लिए जरूरी है। तेरापंथ में अनुशासन का महत्व रहा है। अनुशासन के बिना लोकतंत्र का देवता विनाश को प्राप्त हो जाता है। लोकतंत्र में अनुशासन अति आवश्यक है। अनु...

‘‘भारतीय संस्कृति को बचाने में अणुव्रत सहायक’’ - सरसंघ चालक मोहन भागवत

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भारतीय संस्कृति विविधता में एकता की संस्कृति है। हमारा तेरापंथ से घनिष्ठ संबंध रहा है। जैसे सीमेन्ट और इंट मिलकर एक सेतु का निर्माण करते हैं वैसे भारतीय मूल्य मानकों एवं संस्कृति के संरक्षण प्रसार व परिवर्धन के कार्य में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं तेरापंथ का संबंध है। हमारे संगठन के मूल तत्वों में एक तत्व है अनुशासन - दोनों ही संगठनों का प्राणतत्व आचरण का सामुहिकता का अनुशासन है। हम विविधता में एकता को स्वीकारते हैं। परिश्रम को बहुत महत्व देते हैं और हमारे चिन्तन, विचार व सोचने का तरीका भी समान है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में हम कहते हैं पहले छोटी-छोटी बातें ठीक करो बड़ी अपने आप ठीक हो जाएगी वैसे ही है - अणुव्रत अर्थात नैतिकता के छोटे-छोटे नियम। अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य तुलसी की तीन बातें बहुत प्रषंसनीय है। उनका मानना था कि हम सब एक हैं और इसी दृश्टि में उन्होंने विविधता को मान्य करते हुए एकता के ऐतिहासिक प्रयास किये। एक भव्य उच्च लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने अणुव्रत आन्दोलन का न केवल सूत्रपात किया बल्कि अणुव्रत को जीवन में उतारने के लिए कठोर परिश्रम किया। वह फलीभूत भी हु...

आध्यात्मिक परम्पराओं के सम्मेलन में आचार्य महाश्रमणजी के विचार

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दिल्ली। २० सित.। बौद्ध धर्मगुरु श्री दलाई लामा के निर्देशन में विभिन्न आध्यात्मिक परम्पराओं का सामूहिक सम्मेलन आज दिल्ली के ग्रैंड हयात होटल में आयोजित हुआ, जिसमे करीब १०३ धर्मगुरु सम्मिलित हुए। इस अवसर पर अपने संबोधन में आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि- आज विभिन्न धर्मों का सम्मेलन हो रहा है और मेरा ऐसा सोचना है कि संप्रदाय अलग अलग है परन्तु सम्प्रदायों में परस्पर मैत्री का भाव रहना चाहिए। संप्रदाय उन्माद को कहीं भी अवसर नहीं मिलना चाहिए। जैसे गाय, कोई गाय काली होती है कोई गाय पीली होती है परन्तु सभी गायों के दूध का असर आप लोगो पर समान होता है। वैसे ही विभिन्न संप्रदाय है, उपासना की पद्धतियाँ अलग अलग हो सकती है किन्तु हम सब धर्मों का मूल आधार अहिंसा, सत्य यह मुझे प्राय: सब समाजों में समान रूप में अनुमानित हो रहे है। हम इन तत्वों का विकास करे। मानवीय मूल्य ईमानदारी, अहिंसा आदि आदि तत्वों का हम प्रसार करे और अपने अपने अनुयायी है उन्हें विशेषतया नशामुक्त रहने का उपदेश दे, ईमानदारी के रस्ते पर चलने का उपदेश दे और धर्म के पथ पर चलने का, धर्म को अपनाने का उपदेश दे। श्री दलाई लामाज...

हिरीयुर में अणुव्रत का प्रचार प्रसार

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अणुव्रत का प्रचार प्रसार हेतु अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री डालमचन्दजी कोठारी  व राष्ट्रिय महामंत्री एवं JTN के परामर्शक श्री मर्यादाजी कोठारी व अणुव्रत महासमिति के कार्यसमिति सदस्य एवं JTN के परामर्शक श्री राजेश जी सुराणा आज हिरीयुर पधारे। कार्यक्रम का प्रारम्भ स्थानीय महिला मंडल की  बहनों द्वारा मंगलाचरण से हुआ। हिरीयुर अणुव्रत समिति के मंत्री श्री मांगीलालजी ने यहाँ चल रही गतीविधियों से अवगत कराया । श्री राजेशजी सुराणा ने स्थानीय लोगों को साथ मे जोडकर सामाजिक कार्य करने पर जोर डाला और अणुव्रत अभियान को जन जन तक पहुँचाने के लीए प्रेरीत कीया। अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रिय महामंत्री श्री मर्यादा जी ने कहा -   निज पर शासन , फिर अनुशासन पहले हम अणुव्रत के नियमो को जाने और अपने जीवन मे अपनाए फिर समाज मे प्रेरणा दे ।  अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री डालमचन्द जी कोठारी ने अणुव्रत महासमिति समिति द्वारा चल रहे कार्यों के बारे मे विस्तृत जानकारीयां दी एवं अगले लक्ष्य नशा मुक्ती के अभियान पर प्रकाश डाला ।  कार्यक्रम का कुशल ...

विश्व मैत्री दिवस का आयोजन मुंबई में

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भारत जैन महामंडल द्वारा मुंबई में विश्व मैत्री दिवस का आयोजन तेरापंथ भवन कांदिवली में किया गया। कार्यक्रम  शासन श्री साध्वी श्री सूरज कुमारीजी मुनिश्री कुंदनऋषिजी म.सा मुनिश्री अक्षय चंद्रसागरजी म.सा मुनि श्री आलोकऋषिजी म.सा मुनि श्री जयकीर्तिजी  म.सा के मंगल सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी चारित्र आत्माओ में क्षमापना के महत्त्व पर प्रकाश डाला,और जीवन में क्षमा के मूल्यों के विकास पर बल दिया। क्षमा मांगने वाला महान होता हे, पर क्षमा प्रदान करने वाला उससे भी ज्यादा महान होता है। हम प्रतिदिन जिसके साथ ज्यादा रहते सबसे ज्यादा क्षमा की आवश्यकता वही होती है। रिश्तो में मान और पैसे को महत्त्व देने से ज्यादा अपनों को महत्त्व दे। दिल्ली में हुई धर्म संसद की चर्चा करते हुए कहा की  वर्षो से ये प्रयास किया जा रहा हे की संवत्सरी एक हो कई बार प्रयास भी किये पर अब वक़्त आ गया हे चिंतन की क्रियान्विति करने का। और ये धर्म संसद नए आयाम से जैन समाज को एक मंच पर लाएगी। कार्यक्रम में भारत जैन महामंडल के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री रमेश जी धाकड़ महामंत्री श्र...

JTN न्यूज़लेटर क्र. २/१४-१५, ०७ सित.२०१४ से २१ सित.२०१४

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जैन तेरापंथ न्यूज़ (E latter)

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|| अर्हम् || अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् जैन तेरापंथ न्यूज़ साप्ताहिक न्यूज़लैटर क्र. १/१४-१५, १५ सित.२०१४ से २१ सित.२०१४ : प्रधान संपादक : अविनाश नाहर : कार्यकारी संपादक : महावीर सेमलानी : सहसंपादक : संजय वैदमेहता युवक संघर्षो से न घबराएं : आचार्य महाश्रमण अभातेयुप स्वर्ण जयंती समारोह पर पूज्यप्रवर ने युवको को आचार संपन्न बनने की दी प्रेरणा नई दिल्ली , 17 सितम्बर 2014 . अध्यात्म साधना केंद्र , महरौली. गुरुदेव ने आज   अभातेयुप के स्वर्णजयंती अधिवेशन के अंतिम दिवस के अवसर पर समुपस्थित विशाल युवाशक्ति को संबोधित करते हुए फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में कहा गया है - पढमं नाणं तओ दया। मनुष्य के जीवन में ज्ञान का बड़ा महत्व है। अज्ञान जीवन का अभिशाप होता है। अठारह पाप बतलाए गए हैं किन्तु कविवर ने कहा- इन पापों से भी अज्ञान सबसे बड़ा दुःख है। ज्ञान के अभाव में हित अहित का भी आदमी विवेचन नहीं कर पाता। ज्ञान बहुत कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं। इसके साथ आचार भी अच्छा होना चाहिए। ज्ञान का सार आचा...