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Showing posts from February, 2015

अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ का दो दिवसीय सम्मेलन चेन्नई में

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सोसियल मीडीया एवं तकनीक पर अभातेयुप जैन तेरापंथ समाचार का दो दिवसीय सम्मेलन शनिवार 28 फरवरी से चेन्नई ट्रिप्लिकेन तेरापंथ भवन में शुरू होगा ! सोसियल मिडिया के इस सम्मेलन में नेपाल दुबाई एवं अमेरिका सहित भारत भर से 110 से अधिक जे. टी. एन. प्रतिनिधियो के चेन्नई पँहुचने की संभावना है ! उद्घाटन सत्र में आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय की उपकुलपति समणी चारित्रप्रज्ञाजी, अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री धरमचन्द लुंकड, सिरियारी संस्थान के अध्यक्ष श्री मूलचन्द नाहर, टी. पी. ऍफ़. अध्यक्ष श्री सलिल लोढ़ा, राजस्थान सरकार के सुचना जनसंर्पक अधिकारी श्री आशीष खण्डेलवाल, इंटरनेशनल मोटिवेटर श्री राकेश खटेड सहित बी.सी. भालावत, हनुमांचन्द लुंकड, सजंय जैन, विमल कटारिया,राजेश सुराणा, गौतमचन्द डागा, दीपचन्द नाहर, महावीर सेमलानी अलंकार अच्छा, सजंय वैद मेहता, धर्मेद्र डाकलिया, आदिअनेक वक्ता भी विषय पर अपनी बात रखेंगे ! अभातेयुप जैन तेरापंथ समाचार के कार्यकारी संपादक श्री महावीर बी. सेमलानी ने बताया की सोसियल मीडीया के युग ...

राग द्वेष मुक्त होकर बने सुखी: आचार्य श्री महाश्रमण

चेतगंज, 20 फर.(JTN)  परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने फ़रमाया कि- हमारी पांच इंद्रिया ज्ञानेन्द्रियाँ एवं कामेन्द्रिया कहलाती है । श्रोत्र, चक्षु, घ्राण, रसन और स्पर्शन ये पांच ज्ञान का माध्यम है, इसलिए ज्ञानेन्द्रियाँ है । इन पांच इन्द्रियों को कामी और भोगी इन दो भागों में विभक्त है । श्रोत से शब्द सुना जाता है, आँख से दूरस्थ रूप को देखा जाता है, नाक से गंध भीतर आती है, जिव्हा से स्वाद आता है एवं शरीर से छुआ जाता है। घ्राण, रसन, स्पर्शन भोगी इन्द्रियाँ है । श्रोत व चक्षु से सीधा भोग नहीं होता है जैसा बाकी तीनों इन्द्रियों से होता है, इसलिए श्रोत व चक्षु कामी इन्द्रियां है । पूज्यप्रवर ने आगे फ़रमाया कि- आदमी गलत को छोड़ने का प्रयास करें, राग-द्वेष को छोड़ने का प्रयास करें । मोह राग को छोड़ने वाला व्यक्ति सुखी हो जाता है ।  पूज्यप्रवर ने आचार्य कालूगणी के जन्मदिवस के उपलक्ष में श्रद्धाभावना अभिव्यक्त करते हुए फरमाया कि आचार्य कालूगणी हमारे धर्मसंघ के महान आचार्य थे । गुरुदेव तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञजी के वे गुरु थे । मैंने भी दीक्षा के समय उनके नाम का जप किया था । कालूगणी ...

Jain Terapanth News Daily Issue 16, 18/02/2015

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Jain Terapanth News Daily Issue 15, 17/02/2015

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अध्यक्ष श्री कमल दुगड़ के नेतृत्व में महासभा टीम पहुँची जसोल

जसोल | 16 फर.। तेरापंथ सभा जसोल की ओर से मंगलवार को स्थानीय तेरापंथ भवन में जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कमल दुगड़, महामंत्री श्री विनोदकुमार, कोषाध्यक्ष श्री सुरेंद्र बोरड़, ट्रस्टी श्री तुलसी दुगड़ सहित पदाधिकारियों का स्वागत अभिनंदन का आयोजन किया गया।  महासभा के अध्यक्ष श्री कमल दुगड़ ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की सबसे प्रमुख संस्था तेरापंथ महासभा है। इसका गठन 100 वर्ष पूर्व हुआ था ।  उन्होंने इस संस्था के माध्यम से की जा रही सेवा गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इसमें आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी कार्यक्रम, रास्ते की सेवा गतिविधि, केद्र की ओर से 101 नए भवनों की निर्माण के आदि के बारे में जानकारी दी। महासभा के महामंत्री श्री विनोदकुमार बैद ने सचिविय प्रस्तुत करते हुए महासभा की ओर से की जा रही आध्यात्मिक गतिविधियों की जानकारी दी। इससे पूर्व समारोह का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल की ओर से भिक्षु अष्टकम के मंगलाचरण के साथ हुआ। तेरापंथ सभा जसोल के अध्यक्ष चंद्रशेखर छाजेड़ ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में महासभा कार्यकारिणी सदस्य श्री दिलीप सिंघवी, श्री शा...

मानव जीवन सफल बनाएं : आचार्य श्री महाश्रमण

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हंडिया । 17 फरवरी । (JTN) आज अपने हंडिया प्रवास के दौरान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने हरप्रतापसिंह यादव महाविद्यालय परिसर में प्रवचन करते हुए फ़रमाया कि- मनुष्य का जीवन अनित्य होता है । कोई भी प्राणी शाश्वत नहीं है । जन्म लेने वाले का अवसान भी होता है । अवसान होना निश्चित है पर अवसान कब होगा यह निश्चित नहीं । जन्म और अवसान के बीच के इस जीवन को हमें सफल बनाना चाहिए । उन्होंने फ़रमाया कि- इस दुर्लभ मानव जीवन को सफल बनाने के लिए जिनेन्द्र पूजन, गुरु उपासना, मैत्री भावना, गुणानुराग, आगमवाणी श्रवण व सुपात्र दान करना चाहिए ।  पूज्यप्रवर के स्वागत में महाविद्यालय की ओर से प्रवक्ता श्री संतोष यादव ने स्वागत उद्गार व्यक्त किए । साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी सहित साध्वियों ने मार्ग में पूज्यप्रवर की वंदना की । उत्तरप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री शशिकान्त शर्मा ने मार्ग में पूज्यवर के दर्शन कर स्वयं में धन्यता का अनुभव किया । हठयोगी संन्यासी जो कि लोट कर अयोध्या की यात्रा में जा रहे है, उन्होंने मार्ग में पूज्यप्रवर के दर्शन कर प्रसन्नता व्यक्त की । 

जीवन में संयम आवश्यक : आचार्य श्री महाश्रमण

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हरिपुर । 16 फर.। (JTN) परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी आज करीब 14.5 किमी का विहार कर हरिपुर पधारें । प्रात:कालीन प्रवचन करते हुए पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि- जीवन में संयम की आराधना बहुत काम्य है । जीव और अजीव तत्व को जानने वाला संयम को जान लेता है ।  उत्त रप्रदेश के लिए पूज्यप्रवर ने फरमाया कि- उत्तरप्रदेश का सौभाग्य है कि उसे भगवान राम, भगवान ऋषभ आदि महापुरुषों से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । आज हम हरिपुर आए है । हम वीतराग प्रभु का स्मरण करें । कल्याण की दिशा में आगे बढ़ें । संवाद व फोटो: राजू हीरावत ।

Jain Terapanth News Daily Issue 14, 16/02/2015

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कैंसर जागरूकता अभियान : नेपाल  विहार प्रवास  कैंसर जागरूकता अभियान - जालना / पुना  उड़ीसा समाचार  टीपीफ  टीपीफ  महासभा  तेयुप बालोतरा  तेयुप : विजयनगर  अभिनव सामयिक : उत्तर हावड़ा  टीपीफ  बैंगलोर  आध्यात्मिक मिलन

Jain Terapanth News Daily Issue 13, 15/02/2015

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ज्ञानशाला समाचार  सवाई माधोपुर  तेयुप हैदराबाद  अहिंसा यात्रा के समर्थन में पूज्यप्रवर के साथ उपस्थित हुए कई संत महंत

Jain Terapanth News Daily Issue 12, 14/02/2015

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विहार प्रवास  दिल्ली की अक्षिता जैन देश के शीर्ष 50 सोशल मीडिया प्रोफेशनल में शुमार  जैन विश्व भारती  टीपीफ  करने जन जन का कल्याण, पधारे महाश्रमण भगवान  लेख  प्रेक्षाध्यान शिविर  तेयुप गुवाहाटी द्वारा पूज्य प्रवर के रास्ते की सेवा

Jain Terapanth News Daily Issue 11, 13/02/215

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अभातेयुप शाखा परिषदों द्वारा अहिंसा यात्रा में सहभागिता  रतलाम : तेरापंथ सभा भवन मे उपासक श्री निर्मल जी नवलखा ने प्रशिक्षण दिया।  गुवाहाटी / साउथ हावड़ा समाचार  आध्यात्मिल मिलन : चारभुजा  ज्ञान जीवन के लिए महत्वपूर्ण  विहार प्रवास  स्थानीय समाचार विविधा  आध्यात्मिक मिलन : गांधीनगर  प्रवचन अभातेयुप के राष्ट्रिय अध्यक्ष का संदेश  लेख