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Showing posts from March, 2015

धर्म है सबसे बड़ा मंगल : आचार्य श्री महाश्रमण जी

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बिरगंज , 31 मार्च (जेटीएन) परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी के अहिंसा यात्रा सह नेपाल प्रवेश पर मंगलवार सुबह नेपाल और भारत के श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। नेपाल पदार्पण पर आचार्य श्री  महाश्रमण जी की अगवानी हेतु नेपाल के उपप्रधानमन्त्री प्रकासमान सिंह, समणी वृंद सह हजारों श्रावक-श्राविकाएं  बिरगंज के शंकराचार्यद्वार पर उपस्थित थे । पारम्परिक नेपाली वेशभूषा में सजे लोग, मनोरम झांकियां, हजारों श्रावक श्राविकाओं की कतारें, वातावरण में जयघोष और स्वागत गीतों की स्वर लहरियों के साथ नेपालवासियों का उत्साह चरम पर था। बिरगंज के आर्दशनगर स्थित पुरानें बस पार्क में आयोजित सभा में उपप्रधानमन्त्री श्री सिंह ने आचार्य श्री महाश्रमणजी का नेपाल की जनता की ओर से स्वागत किया । उन्होंने पूज्यप्रवर की यात्रा को चरित्र निर्माण का अभियान बताते हुए इससे समाज में होने वाले विकृति का अन्त होकर नेपाल में बड़ा क्रान्तिकारी रुपान्तरण होगा ऐसा विश्वास व्यक्त किया।  मानवीय एकता, नैतिकता और नशामुक्त समाज निर्माण के विषय में आचार्य श्री की शिक्षाओं से आम नेपाली लाभान्वित होंगे ऐसा उ...

भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस विशेष

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जहाँ श्रद्धा बोलती है ; वहाँ शब्द मूक हो जाते हैं   जब जब धर्म में शिथिलता आती है, जब जब समाज अंध रूढ़ियों की जकड़ से आक्रांत हो जाता है, तब तब समाज में भटकी हुई धार्मिक व्यवस्था को सही मार्ग पर अवस्थित करने के लिए नई चेतना व स्फुरणा का संचार करने वाला, समाजोद्धारक, क्रांतिकारी महापुरुष अवतरित होता है। आचार शिथिलता के विरुद्ध जैन परंपरा में समय समय पर क्रांति होती रही है। इसी क्रम में आचार्य भिक्षु की धार्मिक क्रांति का एक विषिष्ट स्थान है। बात है विक्रम की 19वीं शताब्दी की वह ऐसा समय था जब भारतीय जन- मानस अंध परम्पराओं तथा रुढियों से परिव्याप्त होकर ह्रासोन्मुख हो चुका था। धार्मिक शिथिलता ने अपने पैर पसार लिए थे। धार्मिक संगठन वृद्धावस्था से जर्जर हो लड़खड़ा रहे थे। इस परिपेक्ष्य में धार्मिक क्रांति के बीज क्रांत दृष्टा आचार्य भिक्षु के अंतर्मन में अंकुरित हुए। सम्यग आचार और विचार की पुनः स्थापना हेतु उन धार्मिक उन्माद की विषम सामाजिक स्थितियों में भी आचार्य भिक्षु ने सत्य के विषम व दुर्गम मार्ग को चुना। और अपनी युग प्रतिबोधक क्षमता के आधार पर  समाज में धर्म की नई परिभ...

Acharya Bhikshu quotes

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Acharya Bhikshu quotes wallpapers by Jain Terapanthi I Proud to Be Facebook page.

Terapanth Acharaya Wallpaper 01

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Beautiful wallpaper by Jain Terapanthi I Proud 2 Be Facebook page having Acharya Bhikshu, Acharya Tulsi, Acharya Mahapragya and Acharya Mahashraman images.

JTN Wallpapers for Ahimsa Yatra

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Ahimsa Yatra led by Acharya Mahashramanji, the 11th head of the Terapanth sect of Jainisim.

Daily News Issue 25/03/2015

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Daily News Issue 26/03/2015

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Daily News Issue 23/03/2015

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Seven Types of Addiction : H.H Acharya Mahashraman

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Date: 25 march 2015 Place: Sangrampur , Bihar (JTN). Great Ascetic H.H Acharya Mahashraman addressing the present mass stated that there are 7 types of addictions or inclinations: First type of addiction is- Gambling. Seccond one is consumption of Nonveg. Third one is habit of drinking Alcohol. Fourth sin is prostitution. Fifth addiction is hunting. Sixth one is habit of stealing/ burgling. Seventh sin is cheating the spouse. He further clarified why hunting, has been stated as an addiction. Living beings fear from being hunted. One should neither get scared nor threaten others. Fear is a weakness and threatening is a sin. So, one should not frighten any living being in this world. On being asked by saints - "whom does organisms fear from?", Lord Mahavira gave the solution, "Living creatures are afraid of grievances. I don't get hurt, i shouldn't die or get sick. They are afraid of this." The question is - From where is sadness born? The answer...

संसार एक मेला है : मुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक

चंडीगढ, 25 मार्च-यह संसार है,यहां अनगिनत लोग हैं। तरह-तरह के जीवन हैं। तरह-तरह की जातियां हैं। तरह-तरह के विकार हैं। कोई किसी की प्रकृति का है, तो कोई विकारों से युक्त है। कहीं मनुष्यों का मेला है, कहीं पेड़-पौधों का जंगल। कहीं पानी का सुंदर प्रवाह है, तो कहीं सागर की लहरों का खेल। संसार के सभी लोग इन विभिन्नताओं का उपयोग नहीं कर सकते। सबके अपने-अपने क्षेत्र हैं। अपना-अपना संस्कार है। अगर आप इसका अतिक्रमण करेंगे, तो भटक कर रह जाएंगे। इसलिए आपके आस-पास एक विराट दुनिया है, जो आपके साथ चल-फिर रही है। उस दुनिया में आप कितने को जानते हैं। अगर आप सभी को जानने की कोशिश करेंगे, तो समय साथ नहीं देगा, क्योंकि जिंदगी इतनी लंबी नहीं है। संस्कार भूमि इतनी विराट नहीं है। इसमें कुछ ही लोग आपके हैं। अगर इनसे अधिक और अपेक्षाएं करेंगे, तो अपेक्षाओं में ही जीवन समाप्त हो जाएगा। इसलिए आज तक किसी को पूरी तरह सुखी और संतुष्ट नहीं देखा होगा। लोगों को चिंताएं जला रही हैं।  अपनी भोग तृप्तियों की गुलामी में खट रहे हैं, पर वे अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अपने परिवार, अपने बच्चों और समाज ...

तेरापंथ किशोर मंडल अधिवेश को लेकर विशेष बैठक

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अहमदाबाद । 22 मार्च । अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में दिनांक 17-18 मई को आयोजित होने जा रहे तेरापंथ किशोर मंडल के 10 वें राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों को लेकर विशेष बैठक आयोजित हुई । आयोजक शाखा परिषद् तेयुप अहमदाबाद द्वारा इस अधिवेशन के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही है एवं पूरी परिषद् का उत्साह चरम पर है । देश भर से संभागी बनने वाले किशोरों के सर्वांगीण निर्माण के लिए  इस अधिवेशन को अधिक उपयोगी बनाने हेतु व्यक्तित्व विकास, कैरियर निर्माण, संस्कार निर्माण, सामाजिक सरोकार आदि अनेक विषयों पर सत्रों के  साथ साथ मनोरंजक प्रतियोगिताए एवं कार्यक्रम भी इस अवसर पर आयोजित करने की योजना है । प्रेक्षा विश्व भारती कोबा के रमणीय परिसर में आयोजित होने वाले इस अधिवेशन के विभिन्न सत्र राजभवन, विश्व प्रसिद्द अक्षरधाम मंदिर, साबरमती रिवर फ्रंट आदि जैसे दर्शनीय स्थलों पर करने हेतु निर्णय लिए गए ।  अभातेयुप कनिष्ठ उपाध्यक्ष श्री नरेंद्र मांडोतर, महामन्त्री श्री हनुमानचंद लूंकड़, किशोर मंडल राष्ट्रीय प्रभारी श्री नवीन वागरेचा, सहप्रभारी श्री श्रेयांस कोठारी, अधिवेशन ...

अंतरक्रिया कार्यक्रम आयोजक - आवास व्यवस्था समिति,काठमांडू,नेपाल

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आवास व्यवस्था समिति,काठमांडू,नेपाल ने समणी निर्देशिका श्री कमल प्रज्ञा जी , समणी श्री करुणा प्रज्ञा जी, समणी श्री सुमन प्रज्ञा जी के सान्निध्य में अंतरक्रिया कार्यक्रम का आयोजन किया। आवास व्यवस्था समिति,काठमांडू के संयोजक श्री जगजीत जी सुराना ने आवास की संपूर्ण जानकारी प्रधान की। अबीजीत सुराणा ने आवास व्यवस्था समिति की कार्यशैली के बारे मैं प्रेजेंटेशन दिया  और संजय नाहर ने होटल्स एवं भवन की जानकारी प्रधान की। समणी निर्देशिका कमल प्रज्ञा जी एवं समणी सुमन प्रज्ञा जी ने सुमधुर गीतिका से सभी स्रोता को मंत्र मुक्त कर दिया और प्रेरित किया। ​कार्यक्रम का सञ्चालन श्री पवन जी सुराणा ने बहुत ही उत्शा के साथ किया। आवास व्यवस्था समिति,काठमांडू,नेपाल संपर्क :- 1. श्री जगजीत सुराना - +9779851022532 2. श्री पवन सुराणा - +9779851033130 3. श्री किशोर दुगड़ - +9779851077762 Email :- pravasktm@gmail.com

सारा संसार अपनी उदासी और अपने दुखों का कारण दूसरे व्यक्ति को मान रहा है - मुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक

चंडीगढ,22 मार्च, सारा संसार अपनी उदासी और अपने दुखों का कारण दूसरे व्यक्ति को मान रहा है। वह दुखी क्यों है, उदास और हताश क्यों है? इसके लिए वह दूसरों को कारण मानता है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति उसके दुख का कारण है। वह उदास है, इसलिए नहीं कि उसने अपने मन में विकार पाल रखा है, बल्कि इसलिए कि संसार के लोग नहीं चाहते कि वह खुश रहे। चौराहे पर खड़े लोग एक-दूसरे को अपने दुख और अपनी उदासी के लिए उलाहना दे रहे हैं। - प्रत्येक व्यक्ति यही कह रहा है कि आजकल सभी लोग बुरे हो गए हैं और केवल वही सही है। ऐसे ही लोग मानसिक रूप से दरिद्र होते हैं। अगर वे दरिद्र हैं तो अपने कारण से किसी दूसरे के कारण नहीं, लेकिन अपनी भूल कोई नहीं मानता। अपना चेहरा कोई नहीं देखना चाहता, क्योंकि उसे अपनी कुरूपता से डर लगता है। दूसरे की कुरूपता से उसे मजा आता है। यह बड़ी अजीब बात है। लोग दूसरे की प्रसन्नता में मजा लेते हैं और ऐसे लोग अपनी ही उदासी और दुख में मजा लेते हैं।यह एक तरह की मानसिक कुरूपता है जिससे हमें मुक्ति पाना बेहद जरूरी है। ऐसे लोगों के जीवन में न कोई प्रेम होता है और न कोई आकर्षण ...

मनुष्य संघर्ष की आंच में तपकर मनुष्य बनता :मुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक

चंडीगढ,21 मार्च, संघर्षमय जीवन अपने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जैसे आंच में तप कर सोना कुंदन बनता है वैसे मनुष्य भी संघर्ष की आंच में तपकर मनुष्य बनता है। उसमें जीवनोपयोगी गुणों का विकास होता है, जो उसे परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाते हैं। ऐसा व्यक्ति निर्भीक, स्पष्टवादी और विचारक होता है और बाद के जीवन में दुखों को बड़ी आसानी से बर्दाश्त कर लेता है। संघर्ष चाहे स्वयं के लिए किया गया हो या दूसरों के उत्थान के लिए, यह अंतत: हमारे स्वास्थ्य और संवृद्धि में सहायक होता है। संघर्ष के बाद सफलता मिलती है, जो हमें खुशी प्रदान करती है। चुनौती को स्वीकार किए बगैर जीतना असंभव है। इसलिए संघर्ष दुख नहीं, दुख से बाहर आने का प्रयास है, यानी सुख और आनंद पाने का प्रयास है। तो क्यों न संघर्ष को आनंद का उद्गम कहा जाए।  ये शब्द मनीषी संत मुनिश्रीविनयकुमारजी आलोक ने कहे। मनीषी श्री संत ने कहा- आज संसार प्राय- सुख के लिए दिन रात भागदौड किए हुए है। लेकिन असली सुख क्या हेै उसे मालूम नही क्योकि जिस सुख के पीछे इंसान भाग रहा हेै वह क्षण भंगुर है आने जाने वाला है,क्योकि जब पूरा संसार की ही ...

शिखर सम्मेलन : जोधपुर

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष  में शासन गौरव मुनि श्री विमल कुमार जी के पावन सानिध्य में शिखर सम्मेलन का आयोजन मेघराज तातेड़ भवन में किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मंगलाचरण से हुई। मुनि श्री विमल कुमार जी ने फरमाया कि प्राचीन काल की नारी और आज की नारी में तुलना करें तो हम देखते हैं कि आज की नारी का रूप ही बदल गया। आज की नारी विकास की ओर अग्रसर है।  शिक्षित होकर कोई वकील बन रही है तो कोई पुलिस में, यह एक रूप है विकास का और इसके लिए परिवार में आपसी समन्वय भी जरूरी है। महिला मण्डल की मंत्री श्रीमती संतोष मेहता ने अपने वक्तव्य में कहा कि क्या खुश रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने जीवन की बागडोर दूसरे के हाथों में दे दें ? ऐसा बिल्कुल नहीं है हमें अपने जीवन का नियंत्रण स्वयं के हाथ में ही रखना चाहिए। श्रीमती कनक बैद ने कहा नारी है तो सृष्टि है ।हम अपने आप में संपूर्ण हैं तो हम क्यूं रोएं। क्यूं हम अपनी कमजोरियों का बखान करें। हमें अबला नहीं बनना चाहिए। हर कठिनाई का सामना करना चाहिए। लायंस क्लब की मंजू जी जोशी ने कहा कि क्या एक दिन के सम्मान देने से महिला दिवस...

जीवन के अंदर प्रेम रूपी रस बढाये : मुनिश्री विनयकुमार जी आलोक

चंडीगढ,20 मार्च, आज संसार भोग विलास के साधनो को जुटाने मे लगा हुआ हेेै संत मुनियो का मत है कि संसार मे रहते हुए इंसान को सब प्रकार की वस्तुओ चाहिए बशर्ते कि वह जो असली मकसद है उसे ना भूल जाए। क्योकि जिस उददेश्य के लिए यह मानव चोला मिला है यह बार बार मिलने वाला नही है, आज इंसान घंमड मे चूर है कि वह यह सब भूल गया है कि वह एक मुसाफिर है जो संसार के अंदर विचरण हो रहा हेै वह सब यात्री है जिनका भी स्टेशन आज जाता है(मौत का बुलावा) वह उतर जाता है, इसलिए हे इंसान तो अब भी संभल जा, आज इंसान सोचता है कि पूजा पाठ करने से मन को शुद्धि मिलती है लेकिन जिस पिता की हम संतान है अर्थात जो हमे बनाने वाला है उसके बच्चो के साथ हम दुव्र्यवहार कर क्या पिता को खुश कर सकते है कदापि नही। ये शब्द मनीषी संत मुनिश्रीविनयकुमारजी आलोक ने कहे। मनीषी श्री संत ने कहा- जब तक जीवन के अंदर प्रेम रूपी रस है। जब तक जीवन में आंनद रूपी रस बना रहता है तब तक जीवन में फूल खिलते रहते हैं। रस के सूखते ही जीवन नष्ट हो जाता है। हमें प्रयास करना है कि हमारे जीवन में प्रेम की कमी न हो, क्योंकि प्रेम ह...

पाथेय मार्च - अप्रेल 2015

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