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Showing posts from May, 2015

किशोर मंडल के 10 वें राष्ट्रीय अधिवेशन का सफल आयोजन

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17 मई । अहमदाबाद ।अभातेयुप द्वारा तेयुप अहमदाबाद के आतिथ्य में आयोजित किशोर मंडल के 10 वें राष्ट्रीय अधिवेशन का आज अहमदाबाद स्थित राजभवन में शुभारम्भ हुआ। साध्वीश्री रामकुमारीजी एवं साध्वी लब्धिश्रीजी के सान्निध्य में आयोजित इस दो दिवसीय अधिवेशन में देश भर से करीब 600 से अधिक किशोर सम्मिलित हुए । इस अवसर पर अभातेयुप अध्यक्ष अविनाश नाहर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष-I श्री बी.सी. भालावत, उपाध्यक्ष-II श्री नरेंद्र मांडोतर, महामंत्री श्री हनुमान लूंकड़, कोषाध्यक्ष विमल कटारिया, सहमंत्री श्री सुरेन्द्र सेठिया, पारमार्थिक शिक्षण संस्था के कोषाध्यक्ष श्री जसराज बुरड़, युवक रत्न श्री प्रवीण छाजेड़ आदि सहित अभातेयुप के पदाधिकारी एवं राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य, क्षेत्रीय सहयोगी आदि उपस्थित थे । उद्घाटन सत्र:  अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर द्वारा ध्वजारोहण के साथ अधिवेशन का आगाज हुआ । अधिवेशन संयोजक श्री मुकेश गुगलिया एवं तेयुप अहमदाबाद अध्यक्ष श्री दिनेश बुरड़ ने स्वागत वक्तव्य किया। किशोर मंडल के राष्ट्रीय प्रभारी श्री नवीन वागरेचा ने अधिवेशन के उद्देश्यों एवं भूमिका क...

प्रतिकूल परिस्थितियों में अडिग रहते हैं महापुरुष

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After Nepal Earthquake, H.H. Aacharya shri Mahashraman ji with monks and nuns of Jain Terapanth Religion, at Kathmandu, Nepal जन जन के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध , विश्व में अहिंसा , शांति एवं नशामुक्ति जैसे समाज कल्याण के कार्य के लिए कटिबद्ध महातपस्वी आचार्य महाश्रमण जी द्वारा 9   नवंबर 2014 को भारत की राजधानी दिल्ली से अहिंसा यात्रा का शुभारम्भ हुआ । लंबी पैदल यात्रा द्वारा भारत के कई राज्यों में पाथेय प्रदान करते हुए एक महापुरुष का 31 मार्च 2015 को नेपाल की धरा पर प्रवेश हुआ । जो तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में सर्वप्रथम बार था । नव इतिहास के सृजन के लिए सदन्तर गतिमान ज्योतिचरण ने हिमालय की दुर्गम घाटी के लांघते हुए , अक्षय तृतीय के पावन प्रसंग हेतु 21 अप्रैल 2015 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रवेश हुआ। कुछ दिन ही बीते थे की मानो प्रकृति का विकराल स्वरूप देखने को मिला , भयंकर भूकंप के विनाशक झटके ने नेपाल सहित भारत के कई राज्यों को हिला दिया । इस भयंकर परिस्थिति में भी ससंघ आचार्य श्री महाश्रमण जी एवं सभी साधू संत पूज्य गुरुदेव की छात्र छाया में सुरक्षित रहे। मानो ज्य...

सफल निष्पत्तियों के साथ कन्या शिविर सम्पन्न

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सिवांची मालाणी (बालोतरा) 22 मई 2015  महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की शतावधानी सुशिष्या साध्वी श्री कनकरेखा जी के सान्निध्य में सिवांची मालाणी संस्थान के तत्वाधान में कन्या संस्कार निर्माण शिविर का समापन समारोह मनाया गया। इस अवसर पर कन्याओं का उत्सावर्धन करने पदाधिकारी एवं श्रद्धालु विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारम्भ जसोल कन्या मंडल सुमधुर मंगलाचरण से हुआ। संस्थान के अध्यक्ष डुंगरचंद जी भंसाली ने सबका स्वागत किया। साध्वी श्री कनकरेखा जी ने शिविरार्थियो को संबोधित करते हुए कहा-आज के युग की भाग है-कन्याओं के जीवन का निर्माण हो। इस पंच दिवसीय कन्या निर्माण शिविर में विविध प्रशिक्षण के साथ व्यक्तित्व निर्माण के कुछ टिप्स बताये गए,आज उनकी प्रस्तुति बहुत ही रोचक रही। सभी शिविरार्थी कन्याओं को साधुवाद। सद्संस्कारो की सौरभ से हर कन्याएँ अपनी जीवन बगियां को सुरभित करें। इस शिविर को सफल बनाने में सभी साध्वियों का श्रम लगा। श्रम की बूंदों से ही हम सफलता हासिल कर सकते है। इसके बाद पारमार्थिक शिक्षण संस्था की मुमुक्षु बहनो की सुदंर प्रस्तुति रही। इस अवसर पर बालोतरा, बाड़...

रत्नाधिक मुनि है माननीय और पूज्य- आचार्य महाश्रमण

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  Shantidoot Aacharya Shri Mahashraman Ji at Kathmandu, Nepal 17 मई 2015, काठमांडू , परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण ने फरमाया कि आचार के प्रति निष्ठा आत्म निष्ठा का भाव होना साधु के लिए प्राणवत्ता की बात है। चलते समय मौन रहना, अच्छी साधना, संयम, अहिंसा, दया का प्रयोग है, मौन का अभ्यास है। बातों से रास्ता तो आसानी से कट सकता है, पर हमारा लक्ष्य रास्ता काटना नही है। साधना करना है। इसलिए चलते चलते बातों से बचना चाहिए। गृहस्थ भी इस बात पर ध्यान दें।  पूज्यवर ने प्रसंगवश  कहा कि आचार्य के लिए बड़े साधु तिक्खुतो से नमस्कारणीय होते हैं। सम्मान की दृष्टि से रत्नाधिक मुनि आचार्य का सम्मान करते हैं। आचार्य रत्नाधिक मुनियों को स्वामी कहते हैं। स्वामी शब्द का प्रयोग करते हैं। छोटे संतो को स्वामी नहीं कहना चाहिए। छोटे संतो को स्वामी कहने से बड़े  संतो का असम्मान हो जाता है। हमें रत्नाधिकों के प्रति सम्मान रखना चाहिए। रत्नाधिक मुनि हमारे लिए माननीय, पूज्य होते हैं। बड़ों के प्रति विनय व सम्मान करना चाहिए।  आचार्य अधिकारी होते हैं इसलिए वे परम सम्मानीय होते ह...

शांतिदूत के सानिध्य में विशेष शांति प्रार्थना का आयोजन काठमांडू के प्रख्यात पशुपतिनाथ मंदिर में

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In the pious presence of His Holiness Aacharya shri Mahashraman ji, a Prayer for peace Program held for the people of Nepal who have lost their lives or got injured, at the World Famous Pashupatinath Temple of Kathmandu, Nepal. Aacharya shri Mahashraman ji with his monks at World Famous Pashupatinath Temple, Kathmandu Nepal 16 मई 2015, आज सुबह परमपुज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी पशुपत्तिनाथ मंदिर पधारे। मंदिर परिसर में आयोजित बाग्मति सफाई महाअभियान में उपस्थित सैकड़ों नेपाल प्रहरियों व जनमानस को पूज्यवर ने संबोधित किया। तथा भुकम्प से पीड़ित व काल कवलित व्यक्तियों के लिये आयोजित विशेष प्रार्थना कार्यक्रम में आध्यात्मिक मंगलभावना करते हुये कहा कि पिछले दिनों जो आत्माएं आगे जा चुकी हैं उन आत्माओं को शान्ति मिले। पीड़ितों को समाधि मिले। कार्यक्रम में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा ने पूज्यवर को वंदना कर कहा कि आपकी सन्निधि शान्ति प्रदान करने वाली है। कार्यक्रम में बौद्धधर्म की भिक्षुणी आनी चोइंग डोल्मा ने शान्ति पाठ किया। सफाई अभियंता राजु अधिकारी ने व...

सत्संगति चित को प्रसन्न करने वाली होती है - आचार्य श्री महाश्रमण

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Aacharya Mahashraman ji at Kathmandu Nepal, during Non-Violence March (Ahinsa Yatra) 16 मई 2015, JTN काठमांडू,  परमपुज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण ने फरमाया कि सत्संगति महत्वपूर्ण होती है। साधु तो चलते फिरते तीर्थ होते हैं। साधुओं का सम्पर्क अच्छा है, वाणी श्रवण का मौका मिलना और भी अच्छा है। साधु की वाणी बुद्धि की जड़ता को दूर करती है और भाषा में सच्चाई आती है। सत्संगति चित को प्रसन्न करने वाली होती है। अच्छे मनुष्यों की संगति भी अच्छी है। अच्छा साहित्य पढ़ना भी अच्छा है। पुज्यवर ने "सत्संगत की महिमा अपरमपार है" गीत का संगान किया। पुज्यवर ने कहा कि व्यक्तियों को अच्छे आदर्शों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। पुज्यवर ने कार्यक्रम में उपस्थित नेपाल सरकार के मंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति सेवा का माध्यम है। राजनीति में नैतिकता रहे। कार्यक्रम में उपस्थित नेपाल सरकार के मंत्री ने पुज्यवर को वंदना कर कहा कि मेरा यह पुण्यकर्म था कि आपका प्रवचन सुनने का मौका मिला। आपके सूत्रों से मुझे प्रेरणा मिलती है। आचार्य श्री का पूर्व नाम मुदित था। आपको देखकर लगता है...

उदारता होने से दिया जाता है दान - आचार्य श्री महाश्रमण

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His Holiness Aacharya shri Mahahsraman ji Addressing the People at Kathmandu Nepal. 15 मई 2015, काठमांडू , JTN. जीवन में दान के महत्व को बताते हुए परमपावन आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि दान का एक अर्थ त्याग है। दान का सीधा अर्थ है देना। दान साधु संस्था के संदर्भ में भी चलता है और गृहस्थ में भी चलता है। दान देने के पीछे उदारता की वृत्ति होती है, सहयोग की भावना होती है, तब दान दिया जाता है। कभी कभी दुर्भावना से भी दान दिया जाता है। सद्भावना से दान देना सहयोग करना उपकार की बात होती है। दान देना कईयों के लिये संभव हो सकता और कईयों के लिए नहीं भी होता है। दान नहीं देने वालों में या तो उदारता की वृत्ति नहीं होती या अपना कोई सिद्धान्त होता है। लौकिक दान : दान के दो प्रकार- लौकिक और लौकोत्तर की व्यख्या करते हुए पूज्यवर ने फरमाया कि संसारिक दान जो लोक में स्तुत्य है वह लौकिक दान होता है। दुनिया में व्यवहार को अच्छा बनाने वाला व्यवहार में चलने वाला दान। जैसे गरीब है, भुखा है उसको रोटी, कपड़ा, पानी और निराश्रित को मकान आदि देना दान है। इस दान का गृहस्थ के लोक व्यवहार में महत्व है। आ...

आत्मा के साथ रिश्ता बनायें-आचार्य श्री महाश्रमण

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रिश्तों को मजबूत बनाने के बताये उपाय, कषाय मुक्त बनने की दी प्रेरणा H.H. Aacharya shri Mahashraman ji, at the Capital of Nepal, Kathmandu. 12 मई 2015 काठमांडू, परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने "रिश्तों को मजबूत कैसे बनाएं"विषय पर तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फरमाया कि व्यक्ति अपनी आत्मा के साथ रिश्ता बनाए या फिर परमात्मा के साथ रिश्ता बनाए क्युंकि आत्मा तत्व सबसे बड़ा हितकारी है। इसलिए व्यक्ति आत्मस्थ रहने का प्रयास करे। पूज्यवर ने कहा कि व्यक्ति अपनी आत्मा की स्थिति के बारे  मे सोचे। अपनी साधना के बारे में सोचे। आत्मा को पापों से बचाने का प्रयास करे। कषायों से आत्मा को बचाए रखे। पूज्यवर ने सभी महिलाओं एवं उपस्थित जनमेदनी को रिश्तों को मजबूत बनाने के गुर देते हुये कहा कि रिश्ते वहाँ मजबूत रह सकते है जहाँ हितैषिता की भावना होती है। सेवा भावना रिश्तों को मजबूत करने वाली है। संकट ग्रस्त का सहयोग रिश्तों को मजबूत करता है। एक झटके को सहन करने, सहनशीलता होने से रिश्ते मजबूत बनते हैं। आदमी में क्षमता का विकास भी होना चाहिए। पूज्यवर न...

शुद्ध भावों से की गयी क्रिया का परिणाम शुभ : आचार्य श्री महाश्रमण

11 मई । काठमांडू । पूज्यवर ने आज प्रवचन देते हुए फरमाया कि- जीवन में भावना एवं मन की पवित्रता का बड़ा मूल्य है । जैसी क्रिया होती है वैसा फल मिलता है । भावना, क्रिया और परिणाम की एक श्रृंखला  है ।  कार्य का परिणाम प्राय: भावना पर आधारित रहता है । शुद्ध भावना से किया गया कार्य शुभ परिणाम देने वाला होता है । पूज्यप्रवर ने आगे फ़रमाया कि- आत्मोत्थान के सन्दर्भ में श्रावक का स्थान राजा से भी ऊपर हो सकता है । राजा मिथ्यात्वी हो सकता है । व्यवहारिक जगत में शासन में राजा का स्थान ऊंचा हो सकता है किन्तु आध्यात्मिक जगत में श्रावक का स्थान राजा से ऊंचा होता है ।   आज प्रात: पूज्यप्रवर नेपाल के राष्ट्रपति भवन पधारे  मुनि श्री आलोककुमारजी ने पूज्यवर की दृष्टि प्राप्त कर पूज्यप्रवर की राष्ट्रपति भवन यात्रा का  विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि नेपाल के महामहिम राष्ट्रपति श्री रामवरण यादव ने राष्ट्रपति भवन पहुँचने पर पूज्यप्रवर की अभिवन्दना की। राष्ट्रपति महोदय ने जिज्ञासा की कि क्या पूज्यप्रवर भूकम्प के समय नेपाल में विराजित थे। जिस पर पूज्यप्रवर ने फरमाया कि- हाँ ...

अभातेयुप द्वारा नेपाल के भूकम्प प्रभावित गाँवों में राहत किट वितरण

हम ना रुकना जानते है.... 10 मई। काठमांडू। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के निर्देशन में तेयूप काठमांडू द्वारा संचालित भूकंप आपदा राहत सामग्री वितरण के अंतर्गत आज अभातेयुप महामंत्री हनुमान लुंकड के साथ तेयुप काठमांडू अध्यक्ष सुशील लालवाणी, भूतपूर्व अध्यक्ष सुशील नाहटा, मंत्री राकेश लालवाणी, उपाध्यक्ष पवन सुराणा व कई कार्यकर्ता अभातेयुप द्वारा पीड़ित परिवारों हेतु विशेष रूप से तैयार किए गए 'फेमिली राहत किट' लेकर रवाना हुए । इन सब के साथ नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधवकुमारजी नेपाल भी चले । युवा साथियों ने आज चार देहाती दलित गाँवो में किट बांटे। तत्पश्चात अचानक ही प्रकृति की हरितिमा से आच्छादित रमणीय वातावरण ने अपना रुख बदला । तेज बारिश ,तूफान व ओलवृष्टि होने लगी ।  युवा साथी इस विषम वातावरण में भी धैर्य रखते हुए विवेकपूर्ण आगे बढ़ रहे थे । जगह जगह उबड़ - खाबड़ मार्ग में पानी भर चूका था । पहाड़ो से पानी लैंड स्लाइडिंग करता हुआ गिरने लगा । अँधेरा सा भी होने लगा पर युवाओ ने हार न मानी और पूरी 108 किट्स का वितरण किया । युवाओं के इस जज्बे , धैर्य व विवेक को देखते हुए पूर्व प्रध...

Classroom sessions of Jeevan Vigyan in Schools of Dubai

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Dubai. May 10.  Under the guidance of Samani Shukla Pragya Ji and Samani Unnat Pragya Ji, disciples of H.H. Acharya Mahashramanji, sudents of Grade X of the Indian High School today learnt the principles of the Science of living better known as Jeevan Vigyan.  The sessions today were organised with a unique approach of class room training and accordingly the Science of living was taught as a subject in all the 4 secrions of Grade X.  Shri Rakesh Bohra, convenor of Jeevan Vigyan Academy UAE told that total 144 students got benefited from these sessions. The joy of students was audible during the sessions.  Both Samani ji are on a 10 days visit to Dubai for Jeevan Vigyan and Preksha meditation programs in schools.

संवेदना, करुणा, दया होने से होती है सेवा- आचार्य श्री महाश्रमण

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Aacharya shri Mahashraman ji addressing the huge gathering at The Capital of Nepal, Kathmandu while Non Violence March (Ahimsa Yatra) पूज्यप्रवर ने ली परीक्षा; कहा शिविरार्थी भी ले दीक्षा 9 मई 2015, जैन भवन काठमांडू, नेपाल। JTN. पूज्यप्रवर ने उपस्थित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए फ़रमाया कि जीवन में दया और करुणा का गुण होना चाहिए। किसी की हिंसा करना ,कष्ट देना, दुःख देना जीवन का अवगुण होता है। आदमी को किसी का दुःख देखकर ख़ुशी नहीं मनानी चाहिए। सभी को चित्त समाधि मिले ऐसा प्रयास करना चाहिए। दयावान आदमी के पाप कम लगता है। निर्दयी आदमी के पाप ज्यादा लगने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा व्यक्ति के भीतर दया कि भावना होती है तो सेवा होती है। संवेदना, करुणा होती है तो सेवा होती है। शरीर की सेवा लौकिक सेवा है और किसी की आत्मा का कल्याण कर देना बड़ी सेवा है। देहानुकम्पा- पूज्यवर ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने दया, अनुकम्पा पर विशलेषण किया था न। एक देहानुकम्पा व एक आत्मानुकम्पा होती है। किसी असंयमी के शरीर की सेवा करना भी दया है। भूखे की सेवा करना, कम्बल, तिरपाल, गृहस्थों को चित्त समाध...

पुरूषार्थ विवेकपूर्ण व सम्यक हो: आचार्य महाश्रमण जी

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Aacharya Shri Mahashraman ji at Bhagwan Mahavir Jain Temple, Kathmandu, Nepal 8 मई 2015, काठमांडू, नेपाल.JTN. "आदमी के जीवन में पराक्रम का महत्व है। जीवन में उत्थान हो, पुरूषार्थ हो। पुरूषार्थ के साथ विवेक पूर्ण सम्यक् पुरूषार्थ हो।" यह मंगल वक्तव्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण ने भगवान महावीर जैन निकेतन के अध्यात्म समवसरण में प्रदान किया। पूज्यवर ने कहा कि भगवान महावीर ने साधना काल में बहुत पुरूषार्थ किया था। आज का स्थान भी भगवान महावीर के नाम से जुडा है। भगवान महावीर में पराक्रम था। पूज्यवर ने कहा कि पहले के समय में केवल ज्ञानी साधु भी होते थे।आज नहीं हैं। विशेष लब्धियां साधुओं में होती थी। आज वे कहां हैं? साधना की दृष्टी से ह्रास की ओर गति हुई है। कालचक्र फिरआगे बढेगा तो हम फिर ह्रास से विकास की ओर आगे बढेंगे। भगवान महावीर ने साधना में पराक्रम करके कैवल्य की प्राप्ति की थी। मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी ने कहा कि अज्ञान जनित दुख वह है जिसमें व्यक्ति घटना को एक दृष्टिकोण से देखता है और दुखी हो जाता है। अज्ञान जीवन का एक बडा कष्ट है। पूज्यवर ने...

लव-कुश संस्थान, जोधपुर में महिला मण्डल द्वारा कार्यक्रम का आयोजन

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आज दिनांक 7.5.2015 को तेरापंथ महिला मण्डल जोधपुर द्वारा लव-कुश संस्थान में स्वस्थ परिवार स्वस्थ समाज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शासनश्री साध्वी श्री गुलाबकंवरजी के निर्देशानुसार साध्वी श्री हेमरेखाजी एवं साध्वी श्री ऋतुयशाजी ने बच्चों को बताया कि बच्चों में अच्छे संस्कार होने से एक स्वस्थ व संस्कारी परिवार का निर्माण होता है और परिवार यदि स्वस्थ होगा तो समाज भी स्वस्थ होगा और निरंतर विकास की ओर बढेगा।लव-कुश संस्थान एक ऐसीे संस्था है जहाँ अनाथ बच्चों को आश्रय दिया जाता है।

अनासक्त बनो - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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While Non Violence March, (Ahimsa Yatra) Giving the message of Peace at the Capital of  Nepal Kathmandu, His Holiness Acharya Shri Mahashraman ji. 6 मई 2015, काठमांडू, नेपाल, Jain Terapanth News. परमपूज्य महातपस्वी आचार्य प्रवर ने अनासक्ति का संदेश देते हुए फ़रमाया कि जीवन सापेक्ष है। जीवन एक-दूसरे सहयोग से चलता है। व्यक्ति को जीवन में पदार्थ भी चाहिए। पर वह पदार्थों के प्रति आसक्ति ना करे। अनासक्त भाव से जीवन यापन करने का प्रयास करे।  मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुत विभा जी ने कहा कि व्यक्ति अनेक प्रकार की प्रवृतियाँ कहता है, अनेक प्रकार का चिंतन करता है परन्तु उसका चिंतन, प्रवृति सकारात्मक होनी चाहिए। आज से पुज्यप्रवर ने रात्रिकालीन कार्यक्रम में प्रवचन व प्रेक्षाध्यान प्रयोग प्रारम्भ करने की घोषणा की।

दुराग्रह को त्याग, सत्याग्रही बनें - आचार्य श्री महाश्रमण

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Aacharya Shri Mahashraman ji Addressing the People of Kathmandu, Nepal in his Non Violence March. 5 मई 2015, काठमांडू, नेपाल, Jain Terapanth News. परमपूज्य महातपस्वी आचार्य प्रवर ने फ़रमाया कि जीवन में यथार्थवाद के प्रति आकर्षण होता है तो व्यक्ति में सम्यक्त्व की निर्मलता का विकास होता हैं। व्यक्ति को आग्रही, दुराग्रही नहीं होना चाहिए। वह सदाग्रही बने। दुराग्रह का त्याग कर सत्याग्रही बने। सम्यक्त्व के प्रति हमारा सम्मान होना चाहिए। ऐसा होने पर हम सम्यक्त्व के दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। मुख्य नियोजिका जी साध्वी विश्रुत विभा जी का सकारात्मक चिंतन पर प्रेरणादायी वक्तव्य हुआ। एकता संचेती, विनोद छाजेड़ ने कविता प्रस्तुत की। Listening to His Holiness Aacharya shri Mahashraman ji people of Kathmandu, Nepal. 

नेपाल भुकम्प पीड़ितों हेतु अभातेयुप द्वारा राहत सामग्री किट रवाना

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सिलीगुड़ी 4 मई ।  अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाशजी नाहर के दिशा निर्देशन में सिलीगुड़ी तेयुप के श्रम नियोजन से भुकंप पीड़ितो की सहायतार्थ राहत सामग्री लेकर पहले ट्रक को राष्ट्रीय महामंत्री श्री हनुमान जी लुंकड़ द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया । इस अवसर पर पावन सानिध्य मिला समणी डाॅ निर्वाण प्रज्ञा जी और समणी मध्यस्थ प्रज्ञा जी का । समणी जी ने अपने उद् बोधन मे प्राकृतिक संसाधनो का उपयोग  संयम के साथ करने की प्रेरणा दी और अभातेयुप के इस मानवीय कार्य के लिए मंगलभावना व्यक्त की ।  इस अवसर पर स्थानीय विधायक रुद्रनाथ भट्टाचार्य, सिलीगुड़ी नगर निगम के पार्षद प्रदीप कुमार गोयल, सीमा साहा, खुशबू मित्तल, अभातेयुप के क्षेत्रीय सहयोगी श्री राजेश जी बैद, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जी छाजेङ ,मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष आनन्द जी अग्रवाल, दिगम्बर जैन समाज के श्री प्रसन्न जी जैन, साधुमार्गी समाज के श्री लाभचन्द जी सुराणा, एजेन्ट एसोसिएशन के खोखन दा, मस्त मंडल के अध्यक्ष विजय जी सेठिया, महावीर जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष श्री दिनेश जी ललवानी, अणुव्रत समिति...

चार कषायों में राष्ट्रपति है लोभ - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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Aacharya Shri Mahashraman ji at Kathmandu with His Non Violence March (Ahimsa Yatra) 4 मई 2015, काठमांडू, नेपाल। Jain Terapanth News. पूज्यवर ने आज के अपने मंगल प्रवचन में फरमाया कि गुस्सा भी कषाय होता है व माया, मान, लोभ भी कषाय होते हैं। चार कषायों में राष्ट्रपति है -लोभ। चौदह गुणस्थानों में ग्यारहवां गुणस्थान है - उपशांत मोह गुणस्थान। यह बंद गली के सामान है। इस गुणस्थान में एक बार आत्मा चली गई तो उसे एक बार तो वापिस लौटना ही पड़ेगा। क्षायिक श्रेणी वाली आत्मा ग्यारहवें गुणस्थान का उलंघन कर सीधी बाहरवें गुणस्थान में प्रवेश कर लेती है। गुरुदेव ने कहा कि तीन गुणस्थान अमर होते है - तीसरा, बाहरवां और तेरहवां। इन गुन्स्थानों में कोई मर नहीं सकता। हमारे हमारे पुनर्जन्म का आधारभूत कारण है- कषाय और उसका मुखिया है - लोभ। इसलिए साधना के क्षेत्र में लोभ को जीतने का प्रयास करना चाहिए। अनेक आकांक्षाएं आदमी के मन में आती रहती हैं- नाम व ख्याति की भी इच्छा रह सकती है। हम साधनैषणा करें। साधना की इच्छा करें। गुरुओं ने हमें साधना का मार्ग बताया। साधना का मार्ग बताना मुख्य बात है। हम वीरगंज से क...

अभातेयुप द्वारा नेपाल आपदा राहत हेतु सिलिगुडी में आधार शिविर स्थापित

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"अभातेयुप द्वारा नेपाल आपदा राहत हेतु सिलिगुडी में आधार शिविर (Base Camp) स्थापित" सिलिगुडी । 2 मई । नेपाल में आई भुकम्प त्रासदी से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने हेतु अभातेयुप अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर के नेतृत्व में युवा शक्ति द्वारा सतत प्रयास जारी है । इसी कड़ी में अभातेयुप द्वारा सिलिगुडी में आधार शिविर (Base Camp) स्थापित किया गया है ।  अभातेयुप महामंत्री श्री हनुमान लूंकड़ ने बताया कि इस केम्प में पीड़ित परिवारों हेतु विशेष किट तैयार किए जा रहे हैं जिनमें खाद्य सामग्री, बर्तन, लालटेन, स्टोव, टेंट सामग्री आदि का समावेश है । प्रथम चरण में करीब 3500-4000 रु. लागत मूल्य के 1000 से 1500 किट पीड़ितों को वितरित किए जाएंगे और आगे इस क्रम को यथासम्भव जारी रखा जाएंगा । बेस केम्प कॉर्डिनेटर श्री सुभाष सिंघी एवं सब-कॉर्डिनेटर श्री बच्छराज बोथरा ने बताया कि शनिवार को किट तैयार करने का काम शुरू हो चुका है । तेयुप सिलिगुडी अध्यक्ष श्री किशन आंचलिया एवं तेयुप टीम, तेरापंथ सभा व समाज साथ साथ जैन दिगम्बर समाज, मारवाड़ी युवा मंच, मस्त मंडल, साधुमार्गी समाज के सदस्यो का भी पूरा सहयोग ...

बुद्धि का प्रयोग अच्छे व धार्मिक कार्यों में हो - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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H.H. Aacharya Shri Mahashraman ji Praying for the People of  Nepal.    दिनांक ३ मई २०१५, काठमांडू, नेपाल, दुनिया में ऋजुता, सरलता देखने को मिलती है तो माया का प्रयोग भी लोग करते हैं। आदमी कभी कभी यथार्थ को ढकने का प्रयास कार्य है। यथार्थ को ढकने के लिए माया का उपयोग कार्य है। परन्तु वह माया कर्म बंध कारक मानी गई है। पाप कर्म का बांध करने वाली मानी गई है।  आचार्य प्रवर ने फरमाया कि झूठ बोलने वाले को जितना भयभीत होना पड़ता है, जितना दुष्प्रयत्न करना पड़ता है, सत्य बोलने वाले को ऐसा कुछ भी नहीं करना पड़ता। एक प्रकार से माया के प्रयोग करने वालों के बुद्धि का क्षयोपशम है। लेकिन इसका उपयोग माया में नहीं करना चाहिए। बुद्धि वोही अच्छी होती है जो साधना में लगती है, अच्छे कार्यों में लगती है। पाप कर्म में बुद्धि का प्रयोग नहीं होना चाहिए। वह व्यक्ति महात्मा होता है जिसके जो मन में होता है, वही वचन व आचरण में होता है। जिसके मन वचन व आचरण में असमानता होती है वह दुरात्मा होता है। दुनिया में अनेक लोग सामान्य जीवन जीते हैं। बिज़नस करते हैं, नौकरी करते हैं, खाते पीते ह...

अणुव्रत महासमिति की पंजाब इकाई द्वारा नशा मुक्ति अभियान

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तेरापंथ अणुव्रत महासमिति की पंजाब इकाई की तरफ से नशा मुक्ति अभियान का शुभांरभ 26 अप्रैल को पटियाला से नशा मुक्ति अभियान के तहत हर शहर, हर गली,मोहल्ले के घर घर दस्तक देकर युवा वर्ग को नशामुक्त करने के होंगे प्रयास : सुखमिन्द्रपाल सिंह ग्रेवाल लुधियाना-  अणुव्रत महासमिति की तरफ से अणुव्रत, अनुशास्ता आचार्या श्री महाश्रमण जी के दिशा-निर्देशों पर आरंभ किए गए नशा मुक्ति अभियान के तहत पंजाब में राज्य स्तरीय अभियान 26 अप्रैल को पटियाला स्थित अणुव्रत भवन से आरंभ होगा। उपरोक्त जानकारी व्यसन मुक्ति अभियान के पंजाब प्रभारी सुखमिन्द्रपाल सिंह ग्रेवाल ने स्थानीय इकबालगंज चौंक स्थित तेरा पंथ भवन में तेरा पंथ सभा के सदस्यों के साथ अभियान की तैयारियों का जायजा लेने के उपरांत दी। ग्रेवाल ने 26 अप्रैल को आरंभ होने वाले नशा मुक्ति अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि 26 अप्रैल को पटियाला के अणुव्रत भवन से आरंभ होने वाले नशा मुक्ति अभियान के तहत राज्य के हर शहर व गांव, हर गली, हर मोहल्ले में दस्तक देकर समाज को नशा मुक्त करने के प्रयास किए जाएंगे। इस अभियान में अणुव्रत महासमिति के सदस्य,  त...

तेयुप काठमांडू द्वारा नेपाल में राहत कार्य

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काठमांडू । 2 मई । नेपाल त्रासदी के पश्चात् प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से गति पर है । अभातेयुप के निर्देशन में तेयुप काठमांडू भी पहले दिन से तन-मन-धन से पीड़ितों के सहायतार्थ राहत कार्यों में जुटी है ।  आज तेयुप काठमांडू की टीम काठमांडू से 25 किमी की दुरी पर स्थित बागेश्वरी गाँव पहुंची। तेयुप कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार 400 घरों की बस्ती वाले गाँव के करीब 375 मकान बुरी तरह ध्वस्त हो चुके है और 4 मकान तो जमींदोज हो गए है ।  तेयुप काठमांडू ने गाँव वालों को आज करीब 50 थैले चावल, 40 थैले चिवड़ा, 30 कार्टन नूडल्स, बिस्किट्स,दवाएं आदि वितरित की । तेयुप द्वारा करीब 500 लोगों को तैयार भोजन भी खिलाया गया । तेयुप के राहत कार्यों की सराहना करते हुए वहां की बुजुर्ग महिलाओं ने तेयुप कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद दिया एवं गांवजनों ने तेयुप का धन्यवाद किया ।  तेयुप अध्यक्ष श्री सुशील ललवाणी ने गाँव वालों को संबल देते हुए अपनी भावनाएं रखी । गाँव वालों ने आचार्य महाश्रमण और उनकी अहिंसा यात्रा के बारे में जानकार उनके दर्शन की इच्छा जताई । तेयुप अध्यक्ष श्री सुशील ललव...

उपयोगी का महत्व होता है - आचार्य महाश्रमण जी

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H.H. Aacharya Shri Mahashramanji, addressing the people at Kathmandu, Nepal. दिनांक 2-5-2015, काठमांडू, नेपाल पूज्यप्रवर ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन में पैसा का महत्व भी है और उपयोगिता भी है। आदमी को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि मैं उपयोगी हूँ या नहीं। आदमी को दक्ष होने का प्रयास करना चाहिए। उपयोगी पदार्थ का महत्व बढ़ता है और उपयोग शून्य पदार्थ का महत्व खत्म हो जाता है। नए कपडे का महत्व होता है, नए कपड़े लोग चाव से पहनते हैं। कालान्तर में उसके जीर्ण शीर्ण होने पर उसका महत्व पहले से कम हो जाता है। आदमी जो उपयोगी होता है उसका महत्व होता है। उन्होंने कहा की जिसकी उपयोगिता होती है उसका महत्व होता है। उपयोगिता हीन का महत्व नहीं रहता। पुत्र पिता की सेवा करने वाला, सम्मान का भाव रखने वाला, निर्व्यसनी, पढ़ा - लिखा एवं कमाई करने वाला हो तो पिता के लिए उस पुत्र का महत्व हो जाता है। साधू संस्था में भी जो साधू-साध्वी उपयोगी होता है उसका महत्व बढ़ता है। सेवा करने वाले के सेवा के क्षेत्र में, व्याख्यानी की व्याखान के क्षेत्र में महत्ता हो जाती है। जो बहुश्रुत है, विद्वान है, उनकी ज्ञान ...

पैसे, पद, प्रतिष्ठा से इतना सुख नहीं - आचार्य महाश्रमण जी

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परमपूज्य आचार्यप्रवर मालचंद दुगड के निवास पर प्रवासित हैं। दुगड़ परिसर में आज का प्रवचन हुआ। 25 अप्रेल के बाद पूरे पांच दिनों के अंतराल पश्चात आज पूज्यप्रवर का प्रवचन श्रवण लाभ जनमानस को प्राप्त हुआ। पर रात्रीकालीन प्रवचन अभी भी कुछ दिनों तक स्थगित रह सकेगा। परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रेरणादायी पाथेय में कषाय मुक्त होने की प्रेरणा देते हुऐ फरमाया कि अर्हतों, सिद्धों को जो सुख प्राप्त है वह सुख हमें भी नही प्राप्त है क्यूंकि हमारे में कषाय है पैसे, पद, प्रतिष्ठा से इतना सुख नहीं, जितना सुख अर्हतों व सिद्धों के पास है। वे परमसुखी हैं इसलिए हमें भी जल्दी वीतराग होने का प्रयास करना है। हम केवल ज्ञानी बन जाऐं। हम तीर्थंकर बनने की तो वांछा नहीं करते पर मोक्ष की वांछा करते हैं। हम राग-द्वेष मुक्त बनने का प्रयास करें। केवली बनने पर यथार्थ सामने आ जाऐगा हमें सर्वज्ञता प्राप्त हो, यह हमारे लिऐ काम्य है। हम पंचपरमेष्ठी का स्मरण करें। मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभा जी ने कहा कि हमारे यहां गुरू का महत्व है और जो अकिन्चन होता है, वह सच्चा गुरू होता है। सच्चा पथद...