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Showing posts from September, 2015

तेयुप जोधपुर द्वारा सिरियारी में रक्तदान शिविर

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अभातेयुप व तेयूप जोधपुर द्वारा 26 सितम्बर को रक्तदान शिविर का आयोजन सिरियारी में भिक्षु चरमोत्सव के दिन हुआ।जिसमें  213 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। उदघाटन श्री मूलचन्द जी नाहर अध्यक्ष सिरियारी संस्थान,   श्री मदन राठौड़ मंत्री राजस्थान सरकार, श्री केसाराम चौधरी विधायक, श्री धर्मचंद लूंकर अध्यक्ष जैन विश्व भारती, श्री संजय जैन सह मंत्री अभातेयुप, श्री उम्मेद मल सिंघवी प्रायोजक परिवार के कर कमलो से हुआ। फोटो साभार:- मितेश जैन मंत्री तेयुप जोधपुर, जोधपुर से ज्योति नाहटा

पर्युषण महापर्व सरदारपुरा जोधपुर सानिध्य शासनश्री साध्वी श्री गुलाबकंवरजी

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शासनश्री साध्वी श्री गुलाबकंवरजी के पावन सानिध्य में पर्वाधिराज पर्युषण का आगाज महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण से हुआ। पर्युषण पर्व हम जैनियों का प्रमुख त्यौहार है। केन्द्र द्वारा निर्देशित आठ दिनों की श्रृंखला में प्रथम दिन  खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। साध्वी श्री जी ने फरमाया उत्तम ऊनोदरी करके व्यक्ति खाने पर संयम रख सकता है। आज के दिन जहां तक हो सके उपवास करना चाहिए। दूसरे दिन स्वाध्याय दिवसको साध्वी श्रीजी ने अधिक से अधिक स्वाध्याय करने पर जोर दिया और यह भी बताया कि स्वाध्याय के माध्यम सेव्यक्ति अपने जीवन को उत्तम बना सकता है। तीसरे दिन साध्वी श्री जी ने सामायिक से होने वाले लाभ के बारे में बताया और चार चरणों में अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया। चौथे दिन वाणी संयम के बारे में साध्वी श्री जी ने कहा कि हमें बोलते समय अपनी वाणी को नियंत्रित रखना चाहिए। कहां क्या बोलना है इस बात का पूर्ण रूप से ध्यान रखना चाहिए।अणुव्रत चेतना दिवस के दिन साध्वी श्री जी ने फरमाया कि श्रावक के लिए अणुव्रत एवं साधु के लिए महाव्रत होता है।यह भगवान महावीर की देन है और आज के युग में यह आचार्य श्री तु...

पश्चिमांचल श्रावक सम्मेलन का इचलकरंजी में सफल आयोजन

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इचलकरंजी. 6 सितम्बर. परमपूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री मधुस्मिताजी आदि ठाणा 7 के पावन सान्निध्य में तेरापंथ सभा इचलकरंजी द्वारा “पश्चिमांचल श्रावक सम्मेलन” आयोजन दिनांक 6 सितम्बर को किया गया. महाराष्ट्र के इचलकरंजी, जयसिंगपुर, पिंपरी चिंचवाड़, माधवनगर, सांगली, तासगाँव, कोल्हापुर, दापोली, म्हाड, खेड़, मानगांव, चिपलून, मानगढ़, रत्नागिरी सहित कर्नाटक के बेलगाँव, गदग, सौदंती आदि क्षेत्रों के श्रावक-श्राविका सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित थे. साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने उपस्थित श्रावक समाज को उद् बोधित करते हुए कहा कि- श्रावक वह होता है जो श्रद्धाशील हो, विवेकशील हो और क्रियाशील हो. शास्त्रों में चार कोटि के श्रावकों का वर्णन है- सुलभबोधि, समयकत्वी, व्रती एवं प्रतिमाधारी. उच्च कोटि का श्रावक बनने का लक्ष्य रहें. उन्होंने श्रावकत्व के सूत्र बताते हुए कहा- श्रावक आचारनिष्ठ रहें, मर्यादानिष्ठ रहें, आवेश-आग्रह को छोड़ें, अपनी विश्वसनीयता स्थापित करें और जिन आज्ञा का आराधक बनें. साध्वीश्रीजी ने अल्प समय में ही पश्चिमांचल श्रावक सम्मलेन जैसे वृहद कार्यक्रम की कल्पना और उसे ...

पर्युषण आराधना विवरण फॉर्म

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