परिपूर्ण बने शान्ति और शक्ति से -आचार्य श्री महाश्रमण
दिनांक:- 30.12.2015 चैघारा अंचल. अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री के नेतृत्व में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेश को लेकर चल रही अहिंसा यात्रा आज सुबह सुपौल से चैघारा अंचल में स्थित रा.मघ्य विघालय पहुंची। रास्ते में हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के दर्शन किये। अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि दुनिया में जितने भी बुद्व पुरूष हुए है, तीर्थकर हुए है, अतीत काल में और जितने भी अनागत भविष्य में तीर्थकर होगे उनका आधार शान्ति है जैसे प्राणियों का आधार पृथ्वी है। तीर्थकरो का, बुद्वो का आधार शान्ति है। शान्ति एक ऐसा तत्व है जहाॅ दुख का अभाव होता है। हमारे जीवन में शान्ति का बहुत महत्व है। शान्ति है तो आदमी कितना खुशी रहता है। शान्ति पाने के लिए हमे गुस्सा, अंहकार, माया, लोभ इन सब को कम करना चाहिए और पवित्र आत्माओं का स्मरण करना चाहिए। शान्ति का महत्व है फिर शक्ति का भी महत्व है। शान्ति और शक्ति दोनो तत्व जीवन में होते है तो मानना चाहिए जीवन में बहुत कुछ आ गया है। जो ...