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Showing posts from August, 2016

जैन विद्या कार्यशाला परीक्षा : पचपदरा

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पचपदरा, स्थानिय तेरापंथ भवन में साध्वी श्री तिलक श्रीजी के सान्निध्य में अ भा ते यु प लाडनूं के तत्वाधान में तेरापंथ युवक परिषद् पचपदरा द्वारा जैन विद्या कार्यशाला परीक्षा 2016 का आयोजन किया गया।जिसमें 121 कार्यशाला संभागियों ने परीक्षा दी। परीक्षा के पश्चात परीक्षार्थियों को प्रोत्साहन स्वरुप पारितोषिक प्रदान किया गया।

विलेपार्ले दम्पति शिविर

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विलेपार्ले : दम्पति शिविर-गृहस्थजीवन की रीढ है-पति/पत्नी साध्वी श्री अणिमाश्री जी एवं साध्वी मंगलप्रज्ञा जी के सानिध्य में तेयुप विलेपार्ले के सहयोग से वृहद दम्पति शिविर समायोजित हुआ जिसमें मुख्य वक्ता श्री युगराज जैन थे। साध्वी श्री अणिमा श्रीजी ने कहा कि परिवार रूपी भव्य इमारत के दो मजबूत स्तम्भ है पती-पत्नी।जीवन की रीढ है पति-पत्नी,परिवार रूपी रथ के दो पहिये है पति-पत्नी।जिनमें एक की स्थिति दोनों की प्रगति निर्भर करती है।नारी शक्ति है तो पुरूष पौरूष।बिना पौरूष के शक्ति व्यर्थ है तो बिना शक्ति के पौरूष किसी काम का नही। मुख्य वक्ता युगराज जैन ने कहा कि जीवन साथियों के बीच संवाद होना चाहिए। संवादहीनता की स्थिति में कठिनाईयां आ जाती है। कैसी विडम्बना है कि आज पति पत्नी अपनी फेसबुक पासवर्ड एक दूसरे को नही बताते। साध्वी सभत्वयशा जी ने सुमधुर गीत का संगान किया एवं कुशल संचालन साध्वी मैञीप्रभा जी ने किया। तेयुप एवं महिला मंडल का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम के विशेष सहयोगी,गटुबाई भवरलाल,हेमा मनोहरलाल,जय,प्राची कोठारी थे।

"संतोष नगर ज्ञानशाला दिवस"

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"संतोष नगर  ज्ञानशाला दिवस"           दिनांक  २१-८-२०१६ को संतोष नगर में ज्ञानशाला दिवस के अवसर पर रैली निकाली गयी। उसमें  अभिभावकों, ज्ञानशाला के बच्चे व प्रशिक्षिकाओं  ने भाग लिया । ज्ञानशाला रजत जयंती वर्ष के अवसर पर स्लोगन प्रतियोगिता रखी गयी । सभी ज्ञानार्थियों  ने उत्साह  पूर्वक  प्रतियोगिता में भाग लिया ।बच्चों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय  व  प्रोत्साहन पुरूस्कार दिया गया । प्रशिक्षिका नीलम कोठारी, मीन धींग, पूजा सिंघवी, लीला बडाला,ललिता कोठारी, कल्पना चोरडिया, प्रतीक्षा चोरडिया का विशेष सहयोग रहा।

दृष्टि संयम करें: आचार्य श्री महाश्रमण प्रवचन 22.08.16

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धारापुर (असम). 22.08.2016. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में अणुव्रत के 67वें अधिवेशन के दूसरे दिन के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि आदमी के जीवन में दुःख आता है। आदमी के मन में यह प्रश्न भी उठ सकता है कि दुःख पैदा क्यों होता है ? इसका उत्तर शास्त्रकारों ने देते हुए बताया है कि कामानुवृद्धि के कारण दुःख पैदा होता है। अर्थात काम और पदार्थों के प्रति आदमी की आसक्ति ही दुखों के पैदा होने का कारण बन जाती है। आदमी को सुखमय और शांतिमय जीवन जीने के लिए संयम का मार्ग अपनाने का प्रयास करना चाहिए। अणुव्रत के छोटे-छोटे संकल्पों को स्वीकार करे तो संयम पथ पर आगे बढ़ सकता है। अणुव्रत जीवन के विभिन्न कार्यों में संयम करना सिखाता है। इसलिए आदमी को अणुव्रत के संकल्पों को स्वीकार कर संयममय जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमुनिजी ने आचार्यश्री द्वारा लिखी गीत ‘भारत के लोगों जागो तुम’ का सुमधुर स्वर में गान कर श्रद्धालुओं को संगीतमय प्रेरणा प्रदान की। वहीं साध्वीवर्याजी ने लोगों को जीवन में सरलता लाने का ज्ञान प्रदान क...

महासभा अध्यक्ष संगठन यात्रा-उधना

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महासभा अध्यक्ष संगठन यात्रा -उधना महासभा अध्यक्ष श्री किशन लाल जी डागलिया दिनांक 21अगस्त 2016 रविवार को संगठन यात्रा के तहत उधना पधारे सभा अध्यक्ष श्री बसंती लाल जी नाहर ने आप का स्वागत किया आप के साथ सभा कार्यकारिणी ,महिला मंडल, तेयुप,किशोर मंडल, कन्या मंडल पदाधिकारीयो की मीटिंग का आयोजन किया गया आप के साथ महासभा सहमंत्री,गुजरात प्रभारी व महासभा कार्यकारिणी सदस्य भि संगठन यात्रा मे साथ पधारे

तेरापंथी महासभा से बड़ी कोई संस्था नहीं: आचार्यश्री महाश्रमण

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धर्मसंघ की मातृ संस्था तेरापंथी महासभा का वार्षिक सम्मेलन का हुआ शुभारम्भ त्रिदिवसीय सम्मेलन में भाग लेने देश भर के पदाधिकारी व सदस्यगण पहुंचे श्रीचरणों में आचार्यश्री ने चार ‘एम’ तो साध्वीप्रमुखाजी ने तीन ‘ए’ का दिया मंत्र 05.08.2016 धारापुर. तेरापंथी महासभा के त्रिदिवसीय वार्षिक सम्मेलन का शुभारम्भ शुक्रवार को आचार्यश्री के मंगल महामंत्र के साथ हुआ. इसमें देश भर से सभाओं के अधिकारी उपस्थित हुए थे. आचार्यश्री ने इसे धार्मिक/सामाजिक संस्था बताया और सेवा, ईमानदारी व निष्ठा के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए चार ‘एम’  मैन पावर, मनी पावर, मैनेजमेंट पावर व मोरालिटी पावर का मंत्र प्रदान किया तो साध्वीप्रमुखाजी तीन ‘ए’ एक्सेप्ट, एडजेस्ट व एप्रिसीएट का मंत्र प्रदान कर धार्मिक व सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अवगति प्रदान की. वहीं धर्मसंघ के दो नए कल्पवृक्ष मुख्य मुनि मुनिश्री महावीरकुमारजी व साध्वीवर्या साध्वीश्री संबुद्धयशाजी ने भी पाथेय प्रदान किया.  103 वर्षों से निरंतर सेवा में तत्पर है तेरापंथी महासभा 28 अक्टूबर 1913 को तेरापंथी सभा के नाम से आरंभ...