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Showing posts from August, 2017

मनोज्ञ और अमनोज्ञ में समभाव रहने से हो सकती है कर्मों की निर्जरा : आचार्यश्री महाश्रमण

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-आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को आर्त ध्यान में न जाने की दी प्रेरणा -आचार्यश्री के श्रीमुख से ‘तेरापंथ प्रबोध’ का वर्णन सुन श्रद्धालु हुए निहाल -श्रद्धालुओं को साध्वीवर्याजी से मिली अनासक्तिमय जीवन जीने की प्रेरणा  29 अगस्त 2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) (JTN) : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल को अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने श्रीमुख से मनोज्ञ और अमनोज्ञ स्थितियों में भी आर्त ध्यान में न जाने की पावन प्रेरणा प्रदान की तो वहीं दोनों स्थितियों को समभाव से सहन करने से कर्मों को काटने की पावन प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को ‘तेरापंथ प्रबोध’ का संगान व वाचन कर सरल भाषा में उसकी व्याख्या कर भी श्रद्धालुओं को निहाल कर दिया।  वर्तमान में कोलकाता के राजरहाट स्थित ‘महाश्रमण विहार’ में वर्ष 2017 का चातुर्मासिक काल परिसंपन्न कर रहे महातपस्वी के दरबार से नियमित ज्ञानगंगा का प्रवाह होता है जो समूचे मानव जाति का कल्याण करने वाली साबित ...

कुलानुगार नहीं अतिजात पुत्र बनने का हो प्रयास : आचार्यश्री महाश्रमण

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आचार्यश्री ने ठाणं आगम में वर्णित चार प्रकार के पुत्रों का किया वर्णन गुरु-शिष्य के रिश्ते को भी आचार्यश्री ने बताया पिता-पुत्र की तरह तेरापंथ प्रबोध के संगान और व्याख्यान से भी श्रद्धालु हुए लाभान्वित साध्वीवर्याजी ने किया गुरु महिमा का गुणगान 28 अगस्त 2017 राजरहाट , कोलकाता (पश्चिम बंगाल) (JTN) : पर्युषण महापर्व की आराधना पूर्ण हो गई। संवत्सरी और क्षमापना जैसे पर्व भी अब एक साल के लिए पूर्ण हो चुके हैं , किन्तु अनवरत व अबाध रूप से कुछ चल रहा है तो वह है जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य , वर्तमान अनुशास्ता , शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण के श्रीमुख से निकलने वाला ज्ञान पुंज। एक ऐसा प्रकाश जो केवल जैन के लिए ही नहीं , अपितु समूचे मानव जाति का कल्याण कर रहा है। एक ऐसे प्रभावी प्रवचनकार जिनकी वाणी से प्रभावित होकर हर कौम मजहबी भेद-भाव को भूल उनकी वाणी को ध्यान से सुनती है , मनन करती है और अपने जीवन में उतार अपने जीवन को सफल बनाने में जुट जाती है। ऐसे महातपस्वी के श्रीमुख से निरंतर बहने वाली ज्ञानगंगा वर्तमान में हुगली नदी के किनारे बसे कोलकाता महानग...

क्षमामूर्ति ने क्षमापना दिवस पर अपने भक्तों से क्षमायाचना कर बढ़ाया मान

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-लगभग सवा पांच बजे आचार्यश्री पहुंचे अध्यात्म समवसरण -उपस्थित भक्तों और समस्त साधु-साध्वियों संग बाहर के साधु-संतों से भी आचार्यश्री ने की खमतखामणा -आचार्यश्री ने अन्य जैन धर्म के धर्मगुरुओं से भी की खमतखामणा -पूर्व के द्वेष भावों को छोड़ मैत्री भाव को आत्मसात करने की दी पावन प्रेरणा -असाधारण साध्वीप्रमुखाजी से भी आचार्यश्री ने खमतखामणा -अपने आराध्य से सम्मुख खमतखामणा कर श्रद्धालु हुए निहाल -साधु-साध्वियों से लेकर बच्चों तक में पूरे दिन चलता रहा खमतखामणा दौर   27.08.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः जैन धर्म के सबसे प्रमुख महापर्व पर्युषण महापर्व, उसका अंतिम दिन संवत्सरी महापर्व के रूप में समायोजित होने के उपरान्त संवत्सरी के बाद का दिन भी जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस के रूप में उल्लासपूर्ण ढंग से मनाया गया।  आज के दिन तो स्वयं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने भक्तों और साधु-साध्वियों से क्षमायाचना की तो मानों क्षमामूर्ति ने स्वयं क्षमायाचना कर भक्तों और अपने साधु-साध्वियों का...

आध्यात्मिक उल्लासमय माहौल में मना संवत्सरी महापर्व

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-महातपस्वी आचार्यश्री ने बताया संवत्सरी महापर्व का महात्म्य -‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ का आचार्यश्री ने किया मंगल समापन -दूसरी बार प्रवचन पंडाल में पधार आचार्यश्री ने तेरापंथ के आचार्यों की यशोगाथा का किया वर्णन -पूरे दिन साधु-साध्वियों ने धर्मोपदेश से श्रद्धालुओं को दिलाया आध्यात्मिक लाभ -सैंकड़ों तपस्वियों के आचार्यश्री के श्रीमुख से अपनी तपस्या का किया प्रत्याख्यान  26.08.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) (JTN) : पर्युषण महापर्व का अंतिम आठवां दिन संवत्सरी महापर्व के रूप में आध्यात्मिक उल्लासमय माहौल में मनाया गया। कोलकाता के राजरहाट में स्थित ‘महाश्रमण विहार’ परिसर में सूर्योदय के होने पूर्व से ही जो श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और साधु-साध्वियों की उपासना, उपदेश और तपस्याओं के प्रत्याख्यान के द्वारा जो आध्यात्मिक वातावरण बना वह पूरे दिन बना रहा। मानों आकाश का सूर्य लोगों का लौकिक पथ प्रशस्त कर रहा था तो धरती का महासूर्य अपनी आध्यात्मिक पथ पर उन्हें अग्रसर होने की प्रेरणा के साथ उनके मोक्ष पथ को प्रशस्त कर रहा था। ऐसे नव्य-भव्य माहौल में संवत्सरी महापर्व का शुभारम्भ ...