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Showing posts from April, 2018

मैं और सरदारशहर : आचार्य श्री महाश्रमण जी

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साभार : अमृतवाणी

युवा दिवस पर विशेष प्रस्तुति : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज

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आज जैन तेरापंथ के आचार्य श्री महाश्रमण का 45  वां दीक्षा दिवस जो कि पुरे भारत भर में ‘युवा दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। “तेरा जिक्र है कि इत्र है.... जब भी करता हूँ ....महकता हूँ....” आचार्य   श्री महाश्रमण जी के नाम-स्मरण मात्र से हमारी भावधारा विशुद्ध हो जाती है एवं हमारा रोम-रोम खिल उठता है.  आचार्यश्री का जीवन मानवता को समर्पित है  एवं  उनका दरबार हर जाति  एवं  वर्ग के लिए हमेशा खुला रहता है। उनके सान्निध्य में पहुंचने वाला भक्त चाहे वह कोई राजनेता हो सामाजिक कार्यकर्ता हो पूंजीपति हो या कोई विद्वान उनकी सादगी एवं सौम्य आकृति को देख अभिभूत हो जाता है। आचार्यश्री के चेहरे पर आठों याम रहने वाली मुस्कान एवं स्नेह से आप्लावित आंखें श्रद्धालुओं की थकान को हर लेती है। उनके आभामंडल की परिधि में बैठने वाला अशांत व्यक्ति भी शांति का अनुभव करता है। पेसीफिक यूनिवर्सिटी द्वारा इस शांतिवादी नीति के कारण आचार्यश्री को  शांतिदूत  अलंकरण प्रदान किया गया है। आचार्य की प्रज्ञा एवं प्रशासनिक सूझबूझ बेजोड़ है। गौर वर्ण , आकर्...

मंत्र एक समाधान : आचार्यश्री महाश्रमण

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साभार : अमृतवाणी

परिवार में कैसे रहे : आचार्यश्री महाश्रमण

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साभार : अमृतवाणी

सोने जागने का विवेक - समय प्रबंधन : आचार्यश्री महाश्रमण

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साभार : अमृतवाणी

चेतना को पवित्र बनाये : आचार्य श्री महाश्रमण जी

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साभार : अमृतवाणी

सामायिक साधना का एक अनुष्ठान है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

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ज्योतिचरण से पावन हुआ गोतलाम स्थित गायत्री इंस्टिट्यूशन परिसर सामायिक की कमाई को जीवन की दशा को सुधारने का आचार्यश्री ने दिया पावन संदेश 10.04.2018 गोतलाम, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, दक्षिण की धरा पर सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेशों को लेकर गतिमान हो चुके अहिंसा यात्रा के प्रणेता, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ मंगलवार को अपनी धवल सेना के साथ गोतलाम स्थित गायत्री इंस्टिट्यूशन परिसर में पधारे तो मानों इंस्टिट्यूशन परिसर महातपस्वी के ज्योतिचरण से पावन हो उठा। इस इंस्टिट्यूशन ग्रुप से जुड़े हुए पदाधिकारियों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों ने महातपस्वी का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन किया तो आचार्यश्री ने विद्यालय परिसर में अपने पावन प्रवचन में 24 घंटों में कुछ समय धर्म-ध्यान में लगाने की पावन प्रेरणा प्रदान करते साथ ही तेरापंथी श्रद्धालुओं को सामायिक की कमाई करने की भी पावन प्रेरणा प्रदान की।  मानवीय मूल्यों की स्थापना के द्वारा जन-जन का मंगल करने निकले महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अ...

आदमी अपनी गलतियों का प्रयाश्चित कर ले तो उसके जीवन के लिए अच्छा कार्य हो जाता है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

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रामभद्रपुरम में धवल सेना के साथ तेरापंथ के राम का पदार्पण  -श्री वेंकटेश्वर जूनियर काॅलेज से आचार्यश्री ने दिया श्रद्धालुओं को पावन संबोध  07.04.2018 रामभद्रपुरम, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, दक्षिण भारतीयों का मंगल करने, मंगल संकल्पों के साथ मंगलकारी अहिंसा यात्रा के साथ निकले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी दक्षिण की धरा पर पधार चुके हैं। आचार्यश्री की इस दक्षिण यात्रा का प्रथम राज्य बनने का सौभाग्य आंध्रप्रदेश को प्राप्त हुआ है। यों तो अहिंसा यात्रा अब तक भारत के बारह राज्यों की यात्रा सकुशल सुसम्पन्न कर तेरहवें राज्य के रूप में आंध्रप्रदेश में गतिमान हो रही है। महातपस्वी की यह मंगलकारी यात्रा आंध्रप्रदेश के लोगों का मंगल कर रही है।  आंध्रप्रदेश के विजयनगरम् जिले के गांवों और नगरों से गुजरती अहिंसा यात्रा स्थानीय लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग जिस आश्चर्य के साथ इस यात्रा को निहारते हैं, उन्हें जब स्थानीय श्रद्धालुओं व तेलगु भाषा में लिखित प्रचार सामग्रियों के माध्यम से आचार्यश...

किशोर मंडल संगठन यात्रा : मैसूरु

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06 अप्रैल 2018, JTN, अभातेयुप निर्देशानुसार किशोर मंडल संगठन यात्रा के क्रम में तेरापंथ किशोर मंडल (ब्लू ब्रिगेड) टीम आज मैसूरु पहुंची। संगठन यात्रा की शुरुवात नमस्कार महामंत्र से हुई, फिर सभी ने मिलकर विजय गीत संगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तेयूप अध्यक्ष श्री दिनेश दक ने श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया। तेयुप टीम और सभी TKM किशोरों ने अपना परिचय प्रस्तुत किया। श्री अरविंद पोखरना ने टीकम के स्वछ भारत मिशन, महावीर चित्रकला प्रतियोगिता के साथ TKM के आगे होने वाले कार्यक्रम एवं 13वे राष्ट्रीय तेरापंथ किशोर मंडल अधिवेशन की विस्तार से जानकारी दी और अधिक से अधिक किशोरो को इसमे भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया । तत्पश्चात श्री रौनक नाहर ने TTF, CPS और जैन संस्कार विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी और अधिक से अधिक लोगो को इसमे भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया । श्री उज्ज्वल सिंघी ने TGT, सामायिक, तपोयज्ञ के बारे में जानकारी दी और अधिक से अधिक लोगो को इसमे भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया एवं सोशल मीडिया की जरूरत के बारे में विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की। किशोर मंड़ल ...

आदमी को परिमितभाषी बनने का प्रयास करना चाहिए - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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बोबिली की धरा पर पधारे शांतिदूत, दर्शन को पहुंचे बोबिली के युवराज  तेरह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री बोबिली स्थित श्री सूर्य विद्यालय  Great Jain Saint - Aacharya Shri Mahashraman, During His Ahimsa Yatra in Aandhra Pradesh.  06.04.2018 बोबिली, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश) :  आदमी के जीवन में भाषा का बहुत उपयोग है। दुनिया में ऐसे प्राणी भी हैं, जो बोलते नहीं हैं। वे भाषारहित होते हैं। संसार में अनंत-अनंत प्राणी ऐसे हैं जो वचन से विहीन हैं। मनुष्य ऐसा प्राणी है, जिसके पास एक विकसित भाषा का तंत्र हैं और भाषा के शब्द भी हैं। बोल कर आदमी किसी का भला भी कर सकता है और बोलकर बिगाड़ भी सकता है। बोलकर शांति भी प्रदान कर सकता है और बोलकर किसी को दुःखी भी कर सकता है। आदमी को अपना बोलना अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने यह पावन प्रेरणा बोबली स्थित श्री सूर्य विद्यालय परिसर के पास उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रदान की।  शुक्रवार को आचार्यश्री सीतानगरम से पावन प्रस्थान किया तो आसमान में बादल छाए हुए थे। इस कारण सूर्य दिखाई नहीं दिया। सूर्य के रश्म...

आदमी को धन में ज्यादा आसक्ति नहीं रखना चाहिए आचार्यश्री महाश्रमणजी

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महातपस्वी के मंगल चरण से पावन होने लगी आंध्रप्रदेश की धरती 05.04.2018 सीतानगरम, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, अपनी अहिंसा यात्रा के साथ उत्तरप्रदेश, बिहार आदि के गंगा के मैदानी भागों की यात्रा, हिमालय के गोद में बसे नेपाल और भूटान की यात्रा, उसके उपरान्त पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नागालैंड आदि के रूप में भारत सुदूर पूर्वोत्तर राज्यों की विषम यात्रा को सुसम्पन्न बनाने के बाद आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ दक्षिण की धरा पर अपनी धवल सेना के साथ गतिमान हैं तो ऐसा लग रहा है मानों कोई भारत के मस्तक के रूप में स्थापित हिमालय की ऊचंाइयों से सागर की गहराइयों को मापने के लिए अपनी धवल धारा के साथ बहती हुई नदी हो। गंगा, जमुना, सरस्वती (अदृश्य), कोशी, ब्रह्मपुत्र, महानदी जैसी प्रमुख और भारत की पूजनीय नदियों को भी अपने चरणरज से पावन बनाकर आचार्यश्री के ज्योतिचरण अब ऐतिहासिक गोदावरी नदी की ओर बढ़ रहे हैं।  आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जिले के गांवों में गतिमान अहिंसा यात्रा निरंतर गतिमान हैं। अब तक की यात्रा में स्थानीय भाषा के बावजूद भी हिन्दी भाषा आमजन के समझ आती तो स्थानीय लोग आसानी से अहिं...

आदमी अपने जीवन में ज्ञानाराधना, दर्शनाराधना और चारित्राराधना में सफल बने : आचार्यश्री महाश्रमणजी

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03.04.2018 सिवीनी, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, श्रज्छए सोमवार को आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ कोमारदा से प्रातः की मंगल बेला में प्रस्थान किया। मार्ग के दोनों ओर हरे-भरे खेतों और वृक्षों के कारण प्राकृतिक सुषमा बिखर रही थी, मानों आंध्रप्रदेश की धरती महातपस्वी का अभिनन्दन कर रही थी। आचार्यश्री ऐसे मार्ग पर लगभग तेरह किलोमीटर का विहार कर सिवीनी स्थित सनरे हाइस्कूल में पधारे। विद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों ने आचार्यश्री का मंगल अभिनन्दन किया।  विद्यालय परिसर में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में ज्ञान का बहुत महत्त्व होता है। विद्यालयों में विद्यार्थी ज्ञानाराधना करने वाले होते हैं। ज्ञान की आराधना में आने वाले दोषों से बचने का प्रयास करना चाहिए और अपनी ज्ञानाराधना को परिपुष्ट बनाने का प्रयास करना चाहिए। अच्छे-अच्छे ज्ञान का अर्जन करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहने का प्रयास करना चाहिए। श्लोक आदि का उच्चारण शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। किसी पाठ को याद कर लेना अच्छी बात होती है, किन्तु कोरा प...

आदमी को राग-द्वेष से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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02.04.2018 कोमारदा, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, भारत के हृदय कहे जाने वाले दिल्ली से अपनी धवल सेना के साथ भारत के पूर्वाचंल में स्थित राज्यों की व दो विदेशी धरती को अपने ज्योतिचरण से ज्योतित करने वाले अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी, शांतिदूत व तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी सोमवार को अपनी श्वेत रश्मियों के साथ दक्षिणायन हुए तो एक साथ मानों पूरा दक्षिण आलोकित हो उठा। अपनी अहिंसा यात्रा के साथ भारत के पूर्वांचल के बारह राज्यों की यात्रा सुसम्पन्न कर आचार्यश्री ने तेरहवें राज्य के रूप में आंध्रप्रदेश की धरती पर अपने चरण टिकाए तो आंध्रप्रदेश की धरती मानों स्वर्णमय बन गई और पूरा दक्षिण महाश्रमणमय बन गया। इस मंगल सुअवसर को आंध्रप्रदेश ही नहीं, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक से आए सैंकड़ों लोगों के हजारों नेत्रों ने निहारा और संजोया।  रविवार की रात को तेज हवा के साथ बरसात हुई तो ऐसा लगा मानों महातपस्वी को अपनी धरती से विदा करने से पूर्व ओड़िशा अपने अश्रुधारा से महातपस्वी के चरणरज धो रहा था तो वहीं यह बरसात आंध्रप्रदेश के उस हिस्से को स्वच्छ ब...

पाप कार्यों और बुराइयों से बचने का प्रयास करना चाहिए : आचार्य श्री महाश्रमण

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01.04.2018 केरड़ा, रायगढ़ा (ओड़िशा), JTN, उत्कल धरा (ओड़िशा) की धरती को पहली बार अपने चरणरज से पावन बनाने बनाने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ लोगों को मानवता का संदेश देते हुए लगभग तीन महीने से ज्यादा समय से ओड़िशा में आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। इस गंगा में केवल शहरी ही नहीं, ग्रामीण और वनवासी जनता ने भी डुबकी लगाई है और अपने जीवन को अच्छा बनाने धर्म के मार्ग पर चलने को उत्प्रेरित हुए हैं। इस यात्रा के दौरान अब तक आचार्यश्री ने ओड़िशा राज्य के बारह जिलों की यात्रा कर ग्रामीण और जंगलों के बीच में रहने वाले आदिवासी लोगों को भी सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की पावन प्रेरणा से अच्छादित किया है।  रविवार को उत्कल धरा पर अहिंसा यात्रा के निर्धारित यात्रा पथ के अनुसार अंतिम विहार करते हुए लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय कर आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ ओड़िशा राज्य के रायगढ़ा जिले के केरड़ा में पधारे। यहां स्थित सरकारी हाइस्कूल में आचार्यश्री का पावन प्रवास हुआ।  ...