Posts

Showing posts from December, 2019

अंग्रेजी नववर्ष 2020 के प्रथम दिन बृहद मंगल पाठ कार्यक्रम कर्णाटक के बल्लारी शहर में

Image
तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के मुखारविंद से अंग्रेजी नववर्ष सन 2020 के प्रारंभ अवसर पर बृहद मंगल पाठ एवं मंगल उद्बोधन कार्यक्रम कर्णाटक राज्य के बल्लारी शहर में दिनांक 1 जनवरी 2020 को प्रातः 11 बजे आयोजित होगा।   उत्तरी कर्णाटक में स्थित बल्लारी शहर में नववर्ष की शुरुआत में अपने आराध्य के आगमन को लेकर काफी उत्साह है एवं अहिंसा यात्रा के स्वागत हेतु तैयारियां चरम पर है । स्टील सिटी एवं जीन्स नगरी के नाम से प्रख्यात बल्लारी में करीब 70 तेरापंथी परिवार स्थित है ।  परम पूज्य प्रवर का अपनी धवल सेना के साथ 31 दिसंबर 2019 को ही सायंकालीन विहार कर बल्लारी में पदार्पण होना तय है ।

स्वयं को जीतने वाला होता है परम विजयी : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
महातपस्वी महाश्रमण का परस पाकर हीरे ज्यों चमका हिरियूर अहिंसा यात्रा का हिरियूर में भव्य स्वागत 24-12-2019, मंगलवार, हिरियूर, कर्नाटक अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने हिरियूर की धरा पर अपने चरण रखे तो चिरकाल से प्यासे श्रद्धालुओं पर मानों अमृत की वर्षा हो गई। लोग इस दुर्लभ वर्षा की एक-एक बूंद को अपने जीवनघट में अच्छी तरह सहेजना चाहते थे, इसी कारण हजारों लोग आचार्यश्री की राह में पलक पांवड़े बिछाए खडे़ थे। भिन्न-भिन्न समुदायों और वर्गाें के लोगों के परिधान अलग-अलग भले हों, किन्तु सबका उद्देश्य एक ही था-महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी का अपनी नगरी में स्वागत। लोगों को उल्लास के बीच सांप्रदायिक भेद मानों विलुप्त प्रायः बना हुआ था। मानों हिरियूर की गलियां आज इस हीरे रूपी अनमोल अवसर पर महाश्रमणमय बनी हुई थीं। कड़ी धूप की परवाह किए बिना सैंकड़ों-सैंकड़ों लोग भव्य स्वागत जुलूस में सोत्साह संभागी बने हुए थे, क्योंकि उनके आराध्य उन पर शीतल छाया करने जो पधारे थे। आचार्यश्री ने 12 कि.मी. का पदयात्रा सम्पन्न कर हिरियूर के तेरापंथ भवन में अपने चरण रखे थे तो मानों हिरि...

मन को गुलाम बनाएं : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
अहिंसा यात्रा के अंतर्गत की 23 कि.मी. की पदयात्रा 25-12-2019, बुधवार, हार्तिकोटे, कर्नाटक आदमी की नहीं जीती हुई आत्मा आदमी की शत्रु होती है। आदमी को मन का गुलाम नहीं बनना चाहिए, अपितु उसे गुलाम बनाए। जीतना गौरवास्पद बात हो सकती है, किन्तु उसके लिए सामर्थ्य होना चाहिए--ये उद्गार तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को हार्तिकोटे में स्थित श्री पटेल थिप्पया एण्ड कंचम्मा हाई स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने पावन प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चार कषायों से युक्त आत्मा स्वयं की शत्रु होती है। जप, अनुप्रेक्षा, स्वाध्याय, ध्यान आदि के द्वारा नहीं जीती हुई आत्मा को जीता जा सकता है। मिट्टी से मिले हुए सोने को प्रक्रिया के द्वारा उससे अलग किया जाए तो वह शुद्ध सोना हो जाता है। उसी प्रकार आत्मा को प्रक्रिया के द्वारा कषायों से पृथक् बनाया जाता है तो वह शुद्ध, पवित्र बन जाती है। दूसरा कैसा है, उस पर ध्यान देने की अपेक्षा, स्वयं की कमियों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। स्वयं का सुधारकर दूसरों को स...

शक्ति बढ़ाएं और उसका सदुपयोग करें : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
आचार्यश्री महाश्रमण जी के चरणों से पवित्र बना चित्रदुर्गा स्वागत में उमड़ा श्रद्धा और श्रद्धालुओं का सैलाब H.H Acharya Mahashraman during his speech in Chitradurga 22-12-2019, रविवार, चित्रदुर्गा, कर्नाटक खिलते चेहरे, उमड़ता हुआ श्रद्धा का सैलाब, धरा-गगन को गुंजायमान करते हुए जयघोष, नए परिधानों में सजे-धजे श्रद्धालु, चित्रदुर्गा का यह दृश्य अनायास सबको आकर्षित करता हुआ किसी बड़े उत्सव का रूप लिए हुए था। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं, जन-जन के आराध्य हजारों किलोमीटर पैदल चल कर लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन को उद्धार करने वाले अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण आज इस ऐतिहासिक शहर चित्रदुर्गा में पावन प्रवेश कर रहे थे। तीनों ओर पर्वतों से घिरे इस चित्रदुर्गा शहर की सुन्दरता अहिंसा यात्रा के आगमन से और अधिक खिल उठी। चित्रदुर्गा के कनक सर्कल के निकट हजारों जैन एवं जैनेतर लोगों के स्वागत में पलक पांवडे बिछाए खडे थे। कनक सर्कल से प्रारम्भ हुए भव्य स्वागत जुलूस में तेरापंथ समाज के साथ अन्य जैन एवं जैनेतर समाज भी उल्लासपूर्ण सजगता लिए हुए थे। विभिन्न समुदायों के ल...

अभातेयुप के तत्वावधान में तेयुप सूरत द्वारा एक ही दिन में 2 आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा केंद्रों का हुआ लोकार्पण

Image
तेरापंथ धर्म संघ के दशमाधिशास्ता प्रज्ञा पुरुष आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा देश भर में विहार रत साधु साध्वियों के विहार मार्ग में उनके सुखद प्रवास को लक्षित कर देश भर में "आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा केंद्र" की स्थापना का महनीय प्रकल्प प्रारम्भ किया गया है, इसी कड़ी में देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे और गुजरात के प्रथम एवं द्वितीय "आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा केंद्र" का लोकार्पण तेरापंथ युवक परिषद, सूरत द्वारा 21 दिसम्बर 2019, शनिवार को अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी की अध्यक्षता में जैन संस्कार विधि से सम्पन्न हुआ । प्रथम "आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञा केंद्र" का लोकार्पण सूरत के नजदीक पलसाना चौकड़ी पर स्थित एस.डी.जैन इंटरनेशनल स्कूल के भव्य प्रांगण में किया गया । अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी, उपाध्यक्ष श्री महेश बाफना, सहमंत्री श्री अभिषेक पोखरणा, संगठन मंत्री श्री जयेश शाह , एस.डी.जैन इंटरनेशनल स्कूल के चैय...

भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती के अवसर पर प्रेरक उद्बोधन अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप कोठारी की उपस्थिति में तेयुप सूरत के 1056 युवकों ने किये उपवास

Image
ऐसी साधना करें कि आत्मा अनावृत्त हो जाए -- "शासन श्री" साध्वी श्री सरस्वती जी अनंत काल से हम भव-भ्रमण कर रहे हैं। जब तक सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् चरित्र की प्राप्ति नहीं होती तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। मोक्ष में अवरोध रुप है अज्ञान का आवरण, मिथ्या दर्शन का आवरण और असद् चरित्र का आवरण। भगवान पार्श्वनाथ की जन्म जयंती के अवसर पर बैनर का अनावरण किया गया। लेकिन मात्र बैनर के अनावरण से क्या होगा ? हमें आत्मा को अनावृत्त करना है और उसके लिए जरूरी है शुद्ध साधना।भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान महावीर ने हमें शुद्ध साधना का मार्ग बताया। आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या "शासन श्री" साध्वी श्री सरस्वतीजी ने अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा निर्देशित  एवं  तेरापंथ युवक परिषद सूरत द्वारा तेरापंथ भवन, सिटी लाइट में आयोजित "प्रभु पार्श्व प्रणति" कार्यक्रम के अंतर्गत सैकड़ों युवकों और श्रद्धावान श्रावक श्राविकाओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी, राष्ट्रीय उपाध्यक...

भक्ति से प्रकट होती है शक्ति : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
अहिंसा यात्रा के अंतर्गत एक दिन में 25 किलोमीटर की पदयात्रा 23-12-2019, सोमवार, अइमंगला, कर्नाटक साधना के क्षेत्र में शक्ति का भी महत्त्व है। भक्ति से शक्ति भी प्रकट हो सकती है। वीतराग आत्म और वीतरागता के प्रति भक्ति अच्छी बात होती है।भक्ति दिखावटी नहीं भीतरी होनी चाहिए। यथार्थ के प्रति भक्ति का होना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है--ये उद्गार अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण ने अइमंगला में स्थित गवर्नमेंट पी.यू.काॅलेज में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नमस्कार महामंत्र का उच्चारण करना भी एक प्रकार की भक्ति है। नमस्कार महामंत्र का प्राण वीतरागता है। अर्हत् और सिद्ध वीतराग होते हैं। इस महामंत्र के पांचों पद वीतरागता से जुड़े हुए हैं। इसका शुद्ध भावना से जप करने से कर्माें की अच्छी निर्जरा हो सकती है। इस महामंत्र में किसी का नाम नहीं हैं। मानों यह एक असाम्प्रदायिक मंत्र है। वयोवृद्ध लोग लेटे-लेटे ही नमस्कार महामंत्र का जप कर सकते हैं। जप वृद्धों के लिए तो मानों टाॅनिक होता है। पवित्र जप से भावना शुद्ध बन सकती है और आगे की गति अच्छी होने की संभावना बन ...

विरोधी के प्रति भी द्वेषभाव न लाऐ : आचार्य महाश्रमण

Image
जन्म जयंती पर भगवान पार्श्व के चरणों में श्रद्धार्पण अहिंसा यात्रा के दौरान आज लगभग 21 किलोमीटर की पदयात्रा 21-12-2019, शनिवार, टी.नूलेनूर गेट, कर्नाटक जिनशासन प्रभावक तीर्थंकर के प्रतिनिधि अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण ने जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्व की जन्म जयंती के प्रसंग में टी.नूलेनूर गेट में स्थित श्री वीरभद्रस्वामी हायर प्राइमरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में अपने मंगल प्रवचन में कहा कि प्रत्येक अवसर्पिणी और प्रत्येक उत्सर्पिणी काल में चौबीस-चौबीस तीर्थंकर भरत क्षेत्र और ऐरावत क्षेत्र में होते हैं, यह व्यवस्था है। सृष्टि का मानों कि सौभाग्य है कि इसे तीर्थंकरों की उपलब्धि हमेशा प्राप्त होती है। हमारे इस भरत क्षेत्र में वर्तमान अवसर्पिणी काल में 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्व हुए। उनकी आज जन्म जयंती है। भगवान पार्श्व का व्यक्तित्व और कर्तृत्व ऐसा था कि वे एक महापुरुष के रुप में उभर कर सामने आ गए। भगवान पार्श्व के प्रति विशेष आकर्षण देखने को मिलता है। उन्हें पुरुषादानीय विशेषण से विशेषित किया जाता है। उनका लोकप्रिय व्यक्तित्व हमारे सामने ह...

साधनों से सुविधा और साधना से शांति मिलती है : आचार्य महाश्रमण

Image
अहिंसा यात्रा प्रणेता का उत्तर कर्नाटक में भव्य स्वागत 20-12-2019, शुक्रवार, होललकेरे, कर्नाटक हिन्दुस्तान के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण हर छोर को ही नहीं, नेपाल और भूटान को भी पावन करने वाले शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कर्नाटक के दक्षिणी भाग और मलनाड़ क्षेत्र को पावन करने बाद आज उत्तर कर्नाटक में अपने चरण रखे तो ऐसा लगा कि सूर्य के उत्तरायण होने के कुछ दिनों पूर्व ही अध्यात्म जगत का महासूर्य उत्तराभिमुख बन गया है। इस महासूर्य के आगमन से उत्तर कर्नाटकवासी सूर्यमुखी फूल की भांति खिल उठे और बढ़ चले उसके स्वागत में। डुम्मी से प्रस्थान कर अहिंसा यात्रा प्रणेता ज्यों-ज्यों होललकेरे की ओर बढ़ते जा रहे थे, लोगों का हुजूम उमड़ता जा रहा था। पूरा मार्ग महाश्रमणमय बना हुआ था। भक्तों के हृदयों में हर्ष का दरिया लहरा रहा था। होललकेरेवासियों की तो प्रसन्नता का पार ही नहीं था, ऐसा हो भी क्यों नहीं, उनके आराध्य उनके शहर से उत्तर कर्नाटक में प्रवेश जो कर रहे थे। सबके श्रद्धाभावों स्वीकार कर आचार्यश्री 14 किलोमीटर की पदयात्रा सम्पन्न कर होललकेरे में स्थित ज्ञान विकास नेशनल स्कूल में पहुं...

अभातेयुप सत्र 2019 - 21 की दो दिवसीय प्रथम कार्यसमिति बैठक

Image
विभिन्न क्षेत्रों के अभातेयुप साथी पहुँचे उदयपुर तेयुप उदयपुर ने सभी आगंतुकों का भव्य स्वागत सत्कार किया अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के सत्र 2019-21 की दो दिवसीय प्रथम कार्यसमिति बैठक का आयोजन 14 दिसंबर 2019 को अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी की अध्यक्षता में झीलों की नगरी उदयपुर में हुआ। देश विदेश के विभिन्न भागों  से चयनित राष्ट्रीय कार्यसमिति के 125 युवा साथियों ने इस आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। आयोजक तेयुप उदयपुर के उत्साही युवा साथियों ने उत्साह के साथ सभी आगंतुकों का भव्य स्वागत सत्कार किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी-प्रबंध मंडल द्वारा जैन झंडोतोलन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र से हुआ। अभातेयुप व तेयुप साथियों द्वारा विजय गीत का संगान किया गया। श्रावक निष्ठापत्र का वाचन श्री मुकेश गुगलिया द्वारा हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी ने सत्र 2019-21 की प्रथम कार्यसमिति बैठक के प्रथम दिन शुभारंभ की विधिवत घोषणा की। तेयुप उदयपुर के कर्मठ अध्यक्ष श्री अभिषेक पोकरणा ने वक्तव्य देते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित सभी आग...

धर्म के द्वारा मानव जीवन का लाभ उठाओ : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
जन-जन का आतप हरने तीव्र आतप में की 23 किलोमीटर की पदयात्रा 17-12-2019, मंगलवार, होलेहोनुर , कर्नाटक न चिलचिलाती धूप की परवाह और न ही ऊबड़-खाबड़ राह की। परवाह है मानव-मानव के कल्याण की। इसलिए अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आज भी मौसम और मार्गस्त कठिनाईयों को नजरंदाज कर करीब तेईस किलोमीटर की पदयात्रा की। शिवमोगा की परिपाश्ववर्ती तुंग नदी के इस पार घुमावदार मार्ग हजारों-हजारों पेड़ों, पहाड़ों, जलाशयों के कारण रमणीय भले था, किन्तु सूर्य अपनी तेजस्विता के साथ आतप बरसा रहा था। यदा-कदा बादल और वृक्ष उसे रोकने का प्रयास भी कर रहे थे। इस मार्ग से अहिंसा यात्रा का कारवां महानायक आचार्यश्री महाश्रमणजी के कुशल नेतृत्व में निरंतर गति करता हुआ प्रातः होलेहोनूर में स्थित विवेकानन्द लाॅयन्स विद्यामस्थे में पहुंचा। यहां आयोजित कार्यक्रम में शान्तिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने पावन प्रवचन में कहा कि आदमी जीवन जीता है और उसके लिए गृहस्थों को कमाई भी करनी होती है। जीवन के लिए भोजन आवश्यक है और भोजन आदि की प्राप्ति के लिए परिश्रम की आवश्यकता है। प्रश्न हो सकता है कि जीवन...

तुंग नदी के किनारे पधारे अध्यात्म जगत के उत्तुंगशिखर : आचार्यश्री महाश्रमण

Image
शिवमोगावासियों को शिवमार्ग पर चलने की दी प्रेरणा आधी सदी बाद तेरापंथ के अनुशास्ता शिवमोगा में आचार्य तुलसी कॉलेज में हर्षोल्लास के साथ मनाया आचार्य तुलसी का दीक्षा दिवस H.H. ACHARYA MAHASHRAMAN 16-12-2019, सोमवार, शिवमोगा, कर्नाटक दुर्लभ अवसर की प्राप्ति कितनी आनन्ददायक होती है, यह तो आज शिवमोगावासी बखूबी बता सकते थे और उनके प्रफुल्लित चेहरों को देखकर भी जाना जा सकता था। जन-जन के कष्टों को हरने के लिए अहिंसा यात्रा के रूप में गतिमान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने कष्टों की परवाह किए बिना  भक्तों की दिली पुकार सुनकर निर्धारित प्रलम्ब यात्रा पथ में अस्सी किलोमीटर की पदयात्रा को और जोड़कर शिवमोगा आने की घोषणा की तो मानों शिवमोगावासियों की खुशियों के पंख लग गए। अपनी इन्हीं खुशियों के इजहार के लिए शिवमोगावासियों ने जो तैयारियां कीं, उन्हें देखकर यह नहीं लग रहा था कि आचार्यश्री ने मात्र पांच दिन पूर्व ही यहां पधारने की घोषणा की है। अध्यात्म जगत के उत्तुंगशिखर आचार्यश्री ने तुंड्गा नदी के इस पार बसे शिवमोगा में ज्योंही चरण रखे, ‘जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण’ के घोष स...

सच्चा मित्र बनाओ : आचार्य महाश्रमण

Image
भिक्षु पट्टधर का इक्षुनगरी में हुआ भव्य स्वागत 15-12-2019, रविवार, भद्रावती, कर्नाटक। कहते हैं ऊपर जब वाला देता है, तब छप्पर फाड़ कर देता है। यही हुआ कर्नाटक के भद्रावती में बसे श्रद्धालुओं के साथ। एक समय था, जब शांतिदूत महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की अहिंसा यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम में भद्रावती में पदार्पण का कार्यक्रम नहीं था, किन्तु कुछ दिनों पूर्व ही आचार्यश्री ने अस्सी किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा स्वीकार कर शिवमोगा, तरिकेरे, भद्रावती आदि क्षेत्रों में पधारने की घोषणा की तो मानों मलनाड़ के इन क्षेत्रों के निवासी भक्तों के भाग्य ही जग गए। इस घोषणा और भद्रावती पदार्पण के बीच भले पांच से भी कम दिनों का अन्तराल रहा हो, किन्तु आचार्यश्री के स्वागत में की गई भव्य तैयारियों को देखकर इसका जरा-सा भी अहसास नहीं हो रहा था।  गुड़ निर्माण के लिए विख्यात इक्षुनगरी भद्रावती में भिक्षु पट्टधर आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने चरण रखे तो मानों चारों ओर हर्ष का पारावार छा गया। भद्रावती के तेरापंथ समाज के साथ अन्य जैन एवं जैनेतर समाज का उल्लास आज अपने चरम पर था। तेरापंथ धर्मसंघ के एक...

भावों के संघर्ष में विजय बने सकारात्मक भाव : आचार्य महाश्रमण

Image
कर्नाटक के गांवों में गूंजा अहिंसा यात्रा का संदेश Attractive posture of H.H.Acharya Mahashraman while delivering his Ahimsa speech 13-12-2019, शुक्रवार, चट्टनहल्ली, कर्नाटक अहिंसा यात्रा का कारवां अपने महानायक शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के नेतृत्व में नगर-नगर, गांव-गांव में पांव-पांव चलकर सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देते हुए कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में एक नई धार्मिक क्रांति ला रहा है। इसी क्रम में आज आचार्य श्री महाश्रमण बिरूर से लगभग 12 कि.मी की पदयात्रा कर चट्टनहल्ली में स्थित गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में पहुंचे। मार्ग में कई गांव के लोगों को आचार्यश्री के दर्शन और मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने का सुअवसर मिला। आचार्यश्री और उनके नेतृत्व में गतिमान धवलवाहिनी के कारण प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण मार्ग और भी खिल उठा। गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री ने अपने मंगल प्रवचन में उपस्थित जनता को संबोधित करते हुए कहा की आदमी के भीतर भावात्मक परिवर्तन होता रहता है। किसी समय आदमी के म...

जीवन के मकान में रहे अच्छाइयों का प्रवास : आचार्य महाश्रमण

Image
कडूर और बिरूर में अहिंसा यात्रा का भव्य स्वागत H.H Aacharya Mahashran ji preaching values to the peoples of Kadur 12-12-2019, गुरुवार, कडूर, कर्नाटक सद्भावना नैतिकता और नशामुक्ति इन तीनों आयामों से जन-जीवन का कल्याण करने वाली अहिंसा यात्रा अपने महानायक शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन नेतृत्व में कडूर पहुंची तो कडूरवासी खुशियों से झूम उठे। आधी सदी बाद अपने आराध्य का अपनी भूमि पर पाकर श्रद्धालुजनों के पांव धरती पर नहीं टिक रहे थे। विभिन्न सम्प्रदायों के लोगों की सहभागिता से स्वागत जुलूस अहिंसा यात्रा के प्रथम आयाम सद्भावना की मिशाल बना हुआ था। आचार्यश्री स्थानीय मूर्तिपूजक समाज की भावभरी प्रार्थना पर कडूर के जैन उपाश्रय में भी गए और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। लगभग 8 कि.मी. की पदयात्रा कर आचार्यश्री महाश्रमण गवर्नमेंट जूनियर कॉलेज में पहुंचे।  कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण जी ने समुपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आदमी के जीवन में अच्छाइयों का प्रवास होना चाहिए। जीवन एक प्रक...

आदमी के जीवन मे अच्छाइयों का प्रवास होना चाहिए - आचार्य श्री महाश्रमण

Image
12 दिसम्बर 2019, JTN, आदमी के जीवन में अच्छाइयों का प्रवास होना चाहिए । हमारा जीवन एक प्रकार का एक मकान है, स्थान है, आदमी इस मकान में निवास करता है । मकान में कूड़ा-करकट भी रह सकता है, मकान में फुल आदि भी निवास कर सकता है । मकान में निवास किसका हो रहा है, यह एक महत्वपूर्ण चिन्तन का,ध्यान का विषय बनता है । पूज्य आचार्य प्रवर ने राजा और राजकुमारों के कथानक के माध्यम से जीवन को सदैव ज्ञान एवं सदाचार से प्रकाशित करने की प्रेरणा दी । कडोर के स्थानीय लोगों को अहिंसा यात्रा एवं अहिंसा यात्रा के दरम्यान दिलाए जाने वाले संकल्पों की जानकारी देते हुए पूज्य प्रवर ने अहिंसा यात्रा के संकल्पों को ग्रहण करने की प्रेरणा दी । कडूर की जनता ने पूज्य प्रवर की प्रेरणा पा अहिंसा यात्रा के संकल्पों को स्वीकार किया । पूज्य आचार्य प्रवर ने सभी से इन संकल्पों को पूर्णतया पालन करने का आह्वान किया ।

क्रोध सभी के लिए हानिकारक है : आचार्य महाश्रमण

Image
आचार्य श्री के आगमन से जंगल में भी हुआ मंगल 11-12-2019, बुधवार, सरस्वतीपुरा, कर्नाटक परमपूज्य आचार्य महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ कर्नाटक राज्य में अहिंसा यात्रा लेकर निरंतर गतिमान हैं। आज सरस्वतीपुरा स्थित गवर्नमेंट गिरिजना आश्रम स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जनता को संबोधित करते हुए पुज्यप्रवर ने फरमाया कि आदमी को ज्यादा गुस्सा नहीं करना चाहिए। कभी प्रशासनिक आदि दृष्टि से कठोरता करनी भी पड़े तो आवेश नहीं करना चाहिए। आवेश व्यक्ति स्वयं के लिए कठिनाई उतपन्न कर सकता है और दूसरों के लिए उससे समस्या पैदा हो सकती है। व्यक्ति के मस्तिष्क में आइस फैक्ट्री और मुंह में शुगर फैक्ट्री रहे अर्थात उसका दिमाग ठंडा और वाणी मधुर रहे। बड़ों के प्रति विनय भाव रखना कल्याणकारी होता है और व्यवहारिक दृष्टि से भी वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। कार्यक्रम में आचार्यश्री ने चतुर्दशी के उपलक्ष्य में हाजरी वाचन किया। गुरु-शिष्यों के बीच एक कक्षा का दृश्य बन गया। जिसे देख कर उपस्थित जनता गदगद हो उठी। साधु-साध्वियों ने लेखपत्र का उच्चारण कर मर्यादाओं के प्रति समर्पित रहने का संकल्प दोहराय...

ज्ञान और ज्ञानी की कभी अवहेलना नही करनी चाहिए - आचार्य श्री महाश्रमण

Image
10/12/2019, JTN, हमारे जीवन मे शिक्षा का महत्व है । ज्ञान विहीन आदमी कुछ खाली खाली सा होता है । "ज्ञानेन् हीन: पशुभिः समानाः" ज्ञान नहीं है तो आदमी कुछ अंशों में पशुओं के समान हो जाता है । अज्ञान एक प्रकार का अभिशाप है और ज्ञान वरदान है । अज्ञान कष्ट है, दुःख है । अंहकार, गुस्सा आदि यों तो कई पाप है परंतु अज्ञान इन सब पापों से बढ़कर है,  क्योंकि अज्ञानी आदमी अपने हित-अहित को भी समझ नहीं  पाता। ज्ञानी आदमी हो और वह कम बोले वह विशेष बात है । ज्ञान होने पर भी अपनी विद्वता का प्रदर्शन करने का प्रयास नहीं  करना अच्छी बात है और शक्तिशाली होने पर भी क्षमाशील रहना , वह भी बहुत अच्छी बात है । शक्ति है फिर भी क्षमाशीलता है, ज्ञान में मौन रखना यानी ज्ञान का दिखावा नहीं करना । मौन वैसे सापेक्ष चीज है, ज्ञान है फिर भी मौन रखना और अज्ञान में भी कई बार मौन उपयोगी होता है , अज्ञानी आदमी के लिए भी मौन उपयोगी होता है । ज्ञान तो है नहीं और फालतू बातें बोल देना, उसकी अपेक्षा नहीं बोलना ठीक है । फालतू बातें बोलना, नासमझ की बातें बोलने की अपेक्षा न बोलना बढ़िया है । पूज्यप्रवर ने अकबर - बी...

दुनिया में सबसे बड़ा मंगल "धर्म" - आचार्य महाश्रमण

Image
शांतिदूत के चरणों से पावन हुई कॉफी बागानों की नगरी चिकमंगलूर जैन शासन प्रभावक आचार्य का हुआ भव्य स्वागत 08-12-2019, रविवार, चिकमंगलूर, कर्नाटक, JTN.  सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की अलख जगाने वाले अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ कर्नाटक की धरा पर सानंद विचरण कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज शांतिदूत श्री महाश्रमण जी का कॉफी स्टेट के लिए प्रसिद्ध एवं मुल्लयनागिरी पर्वत श्रेणीयों की तलहटी में स्थित नगर चिकमंगलूर में पावन पदार्पण हुआ। इससे पूर्व आचार्य श्री ने हीरामंगलूर से प्रभात वेला में मंगल प्रस्थान किया। शहर के मुख्य मार्ग एम.जी. रोड पर विशाल जुलूस में समस्त चिकमंगलूर का जैन समाज 50 वर्षों पश्चात पधारे अपने नाथ का भावभरा स्वागत कर रहे थे। पूज्यवर ने मार्ग में अनेक श्रद्धालुओं के प्रतिष्ठानों पर पावन आशीष एवं मंगलपाठ प्रदान किया। जुलूस के दौरान कर्नाटक के टूरिस्ट मिनिस्टर सी.टी.रवि अहिंसा यात्रा में सहभागी बने। लगभग 4 किमी विहार कर ज्योतिचरण श्री महाश्रमण जी दो दिवसीय प्रवास हेतु तेरापंथ भवन में पधारे। यहां स्वागत समारोह में पावन प...