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Showing posts from May, 2020

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 11

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (11) दिनांक 31 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - माता- पिता ,छव भाई, स्त्री- पुत्र, पोते- पोतियां परिवार छोड़कर दीक्षित होने वाले तपस्वी रामसुख जी स्वामी, दीक्षा वर्ष से अंतिम पड़ाव (वि. सं. 1889 से 1895) तक जीत मुनि के सहयोगी, छाया की तरह साथी, मनोभावों के आराधक -इंगियागार संपन्न, उपशांत कषायी, ऊर्जावान तपस्वी और सिद्ध योगी रहे । मात्र सात वर्षों की संयम- पर्याय में वे जीतमुनि के इतने अंतरंग हो गए , मानो दूध में शक्कर । मिश्री में मिठास- जिसे कोई अलग-अलग जान- पहचान ही न सके , वैसी थी उन दोनों की एकीभाव घुलनशीलता । कहने को दीखने मात्र दो, पर थे एकमेक । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय ...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 10

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (10) दिनांक 30 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उसी परिवार में से थे तपस्वी गणेशलाल जी ,जो 29 वर्षों तक सतत मुनि श्री कालू जी बड़ों की सेवा में रहे । तपस्वी और सेवाभावी ' मणि -कंचन ' योग था उनका जीवन  । तपस्वी गणेशलाल जी तपस्वी शिवचंद जी के संसार पक्षीय बेटे थे । उस अद्वितीय पोरवाल परिवार की ( वि. सं. 1882 से 1927 तक की अवधि में ) 22- 22 दीक्षाएं , जिनमें आठ- आठ तेजस्वी , तपस्वी । धन्य- धन्य था वह परिवार। " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेस...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 9

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (9) दिनांक 29 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - इन्हीं राम सुख जी स्वामी के भतीजे । तपस्वी पन्नालाल जी स्वामी के बेटे । मुनि वृद्धिचंद जी का क्या कहना -भारी-भरकम , ओले- दोले , दूंदाले- फुंदाले, तोंददार , जिनकी अकेलों की कमर थी 90 इंच ,  45-45 इंच की जांघें , 25 -25 इंच की भुजाएं । इस पर भी फुरतीले , आगम पाठी , स्वाध्यायी , उग्र विहारी, ध्यान- योग साधक , जपी । अठारह (18 ) सेर का नाश्ता करने वाले 3 संतों में से एक । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान)...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 8

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (8) दिनांक 28 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - दोनों मस्त मोले , अलबेले , विनोदी । व्यवहार कुशल , पराक्रमी ,भुजबली । मुनि श्री चिमन जी सपत्नीक दीक्षित हुए । उनका पराक्रम देखने योग्य था । आचार्य श्री तुलसी रचित डालिम- चरित्र उस पराक्रम का सजीव चित्रण करता है । वे अपनी दोनों मुठ्ठियों पर दो बराबरी के वजनदार संतो को खड़ा कर उठा लिया करते । चलते ही आठ -आठ की तपस्या पचख देते उस परिवार के सातवें दीक्षित थे - 7. मुनि श्री वृद्धि चंद जी स्वामी । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 7

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (7) दिनांक 27 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - ये चारों सगे भाई , एक ही मां के सहोदर । उनके मां-बाप भी साधुवाद के पात्र हैं । जिन्होंने अपने चार- चार लाल संघ को समर्पित किये । कितना बड़ा कलेजा होगा उनका । जिगर के टुकड़ों का दान , महादान जिन्होंने दिया । कितनी महा- निर्जरा की होगी उन्होंने । दो चचेरे भाई - 5. मुनि चिमनजी स्वामी 6. मुनि चैन जी स्वामी " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www....

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 6

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (6) दिनांक 26 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - चारों भाई- गोरे निचोर , सुडोल , लंबे -चौड़े , भरे पूरे परिवार के , अपने क्षेत्र के सुप्रसिद्ध व्यवसाई और निरोग- स्वस्थ । बेटे पोते- पोतियां- पत्नियां छोड़ छव -छव  जने एक ही परिवार से अणगार बन जाए । एक अतिरेक ही कहना चाहिए । जिनमें थे - 1.तपस्वी रामसुख जी 2.तपस्वी हीरालाल जी 3.तपस्वी शिव चंद जी 4.तपस्वी पन्नालाल जी " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 5

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (5) दिनांक 25 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - सूरवाल (सवाई माधोपुर ) का पोरवाल परिवार अपने आप में एक शानी था । जिस एक ही परिवार से 22 दीक्षाएं तेरापंथ- इतिहास का विशिष्ट - परिशिष्ट बनी । दीक्षाएं भी एक से एक दीपती । अंगुलियों पर गिने जैसी । जिनमें एक ही मां के चार -चार सगे भाइयों ने साधु- व्रत  लिया । एक ही दादा के पोते -पङपोते -नाती 22 व्यक्ति दीक्षित हों , आश्चर्य तो है  ही । उस समृद्ध लासानी परिवार के जन्मजात संस्कार कितने शुद्ध, सात्विक ,प्रेरक ,धर्म- प्रभावक और वैराग्यपूर्ण रहे होंगे ? " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 4

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (4) दिनांक 24 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - इस संदर्भ से लगता है कि मुनि जवान जी का संवत 1889 का चातुर्मास जयपुर था और मुनि जीवो जी उनके साथ थे । उस चातुर्मास में मुनि जवान जी ने मुनि रामसुख जी को दीक्षित किया हो । दीक्षा के बाद झारोल में जब से मुनि रामसुख जी जय मुनि के साथ हुए तब से अंत तक उनके साथ में ही रहे । मुनि रामसुख जी के परिवार की आचार्य रायचंद जी तथा जयाचार्य के शासनकाल में 16 दीक्षाएं हुई । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पे...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 3

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (3) दिनांक 23 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उन्होंने दीक्षा किसके द्वारा ली इसका उल्लेख नहीं मिलता ।  परंतु जय सुयश में ऐसा लिखा है कि सं. 1889 के चातुर्मास के पश्चात वे (रामसुख जी ) मुनि जवान जी और जीवो जी के साथ झारोल (मेवाड़ ) गये ।  तीनों मुनि वहां विराज रहे थे तब मुनि श्री जीतमल जी 6 ठाणों से आचार्य श्री रायचंद जी के साथ गुजरात यात्रा करने के लिए जाते हुए 'झारोल' पधारे ।  जय मुनि ने उन्हें साथ लेकर 7 ठाणों से गुजरात की तरफ बिहार किया । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्क...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 2

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (2) दिनांक 22 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वे गृहस्थावस्था में रहते हुए बहुत वर्षों तक श्रावक धर्म का पालन करते रहे । साथ-साथ सामायिक ,पोषध तथा तपस्या के द्वारा उत्तरोत्तर अध्यात्म भावना को बढ़ाते रहें । उन्होंने माता-पिता , छह भाई तथा पत्नी को छोड़कर वि. सं. 1889 आसोज सुदी 10 ( दशहरा ) के दिन बड़े वैराग्य से जयपुर में दीक्षा स्वीकार की । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.c...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 1

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (1) दिनांक 21 मई 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री रामसुख जी माधोपुर के निकटवर्ती सूरवाल ( ढूंढाड़ ) ग्राम के निवासी जाति से पोरवाल थे । उनके पिता का नाम दयाचंद जी और माता का नाम रूपां जी था । वे सात भाई थे । रामसुख जी का यथा समय विवाह हो गया । साधु - साध्वियों  के संपर्क से उनके दिल में धर्म के प्रति गहरी निष्ठा उत्पन्न हुई । उन्होंने वि. सं. 1881 में पत्नी सहित आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत स्वीकार कर लिया । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 31

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (31) दिनांक 20 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी भीम जी स्वामी का जाप - 1 - मानसिक स्थिरता लाता है -तनाव मिटाता है । 2 - स्वभाव परिवर्तन करता है -प्रेमभाव बनाता है आपस में जोड़ता है । 3 - बौद्धिक विकास देता है- मूल उत्तर गुणों में आस्था जमाता है । 4 - मनोकामनाएं पूरी करता है । 5 - आरोग्य बढ़ाता है। नमस्कार !  नमस्कार !   कोटिश:  नमस्कार !   उस पवित्र, संघ- हितैषी , सेवाभावी , मोक्ष- मार्गी आत्मा को.......। " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 30

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (30) दिनांक 19 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भीम गुण ढा़ल 4-5 में  जयाचार्य  लिखते हैं- तपस्वी ! आप तो हो...... ।  " पूरण मन वांछित दातारी, सुख सम्पति  तणो सहचारी " सुख समाधि के साथी !  मनोभिलाषा  पूरी करने वाले ! वाह रे ! वाह ! तपस्वी भीम जी ! नमन नमन .......अमी. गुण ढा़ल 3-5 में कहा -  'भीम ऋषि भ्रम -भंजनो, जन -मन -रंजन जोग्य । चरण -करण चित्त चातुरी, आनंद , करण  आरोग्य ।।' " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 29

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (29) दिनांक 18 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उपकार से उपकृत  जयाचार्य ने भि. गु .ढ़ा. 9-10  में यों भी माना है ....। प्रीति निभावण, भीम -सरीखा, जग में थोड़ा जीवा, शुद्ध मन  सेती समरण करतां, खुले ज्ञान - घट- दिवा तपस्वी भीम जी स्वामी जैसे प्रीति निभाने वाले भी थोड़े ही होंगे । उनका स्मरण अंतर ज्योति, तृतीय-  विवेक नेत्र खोलने वाला है । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/208846109145516...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 28

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (28) दिनांक 17 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - धर्मोद्योम - सेवा में जुड़े यह शब्द कुछ रहस्य छुपाये हुए हैं।  गहरे पानी में उतरने का संकेत दे रहा है । युवाचार्य श्री उस शक्ति- पीठ का एहसास यों भी भि.  गु . ढ़ा. 4/6 में करते से लगते हैं । "भीम सरीखा सिख सुखकारी , अमीचंद तपधारी  भाव उद्योत भरत में कीधो, उद्यमी अधिक उदारी " तपस्वी भीम जी जैसे सुखकारी शिष्य और अमीचंद जी जैसे तपधारी मुनि भरत क्षेत्र में आभ्यंतर प्रकाश करने अत्यंत उदार -वरैण्य  और सजग प्रयत्नशील -परिश्रमी है। " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏?...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 27

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (27) दिनांक 16 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - क्या वार्तालाप हुआ ,पता नहीं । पर आज से एक अभिनव स्त्रोत खुला । उसी महीने की द्वादशी को अर्थात 5 दिन बाद से तो दोनों में खुले दिल -चर्चा -वार्ता प्रारंभ हो गई। वहां तपस्वी भीम जी 'संघ- प्रभावना मंडल' के सदस्य हैं- इसका जरा सा इशारा भर करते युवाचार्य जीत ने भिक्षु गुण ढा़ल 2-10/11 में लिखा है - "अमीचंद तपसी गुण दरियो, प्रत्यक्ष उद्योत करियो,  भीम ऋषि पांडव भीम सरीखो, धर्मोधमे  जुरियों" । "गुण- ग्राही, दरियादिली तपस्वी अमीचंद जी ने प्रत्यक्ष उद्योत- प्रकाश किया और पांडु- पुत्र भीम से शक्तिशाली भीम -ऋषि -धर्मोधम- संघ- सेवा में जुड़े"। " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 26

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (26) दिनांक 15 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भीम जी स्वामी ! मेरे मन की इच्छा पूरी करो । क्या आपने मौन ले रखा है ? अब जेज- देरी मत करो ....ज्येष्ठ भ्राता मुनि स्वरूपचंद जी स्वामी को बड़े भाई के नाते पहला सम्मान दिया । सुना है आपका दिव्य रूप देख उन्हें अपार हर्षानुभूति हुई । वह तो होनी ही थी । पर वि. सं. 1898 की चैत्र वद सातम आ गई है। पौण साल हो रहा है । क्या मेरी अभिलाषा .....बस कहने की देरी थी । अजीब सा प्रकाश फूटा । युवाचार्य जीत मुनि के लिए यह पहला पहला अवसर था । तपस्वी भीम जी स्वामी सामने खड़े थे| " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 25

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (25) दिनांक 14 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वे कह रहे थे -"क्यों जीतू जी ! मैं पहले लाडनूं स्वरूपचंद जी स्वामी की सेवा में गया था न !" उस साक्षात् की कहानी जयाचार्य की जुबानी ही नहीं , लिखित शब्दों में पढ़ना चाहें तो भीम गुण ढा़. 1- 4,3,5 में यों मिलेगी - 'स्वरूपचंद सहोदर भणी, तें दीधो  दीसै छै सम्मान,  दिव्य रूप देख्यां छतां, हर्ष थयो असमान " ।  " मुनि वत्सल गुण बालहा,  अल्प भाषी दीसो छो आप ? " " चेत वद सातम गुण गाविया, अठाणूं संवत अठार , अभिलाषा हिव पूरिये म करो जेज लिगार " । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 24

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (24) दिनांक 13 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - कुछ समय बाद- लाडनू से स्वरूप चंद जी स्वामी के संवाद मिले- " तपस्वी भीम जी आए थे । उनका दिव्य स्वरूप देख अपार हर्ष हुआ " युवाचार्य जीत मुनि के मन में खिन्नता हुई । ' मेरा क्या अपराध ? ' चातुर्मास पूरा हुआ । युवाचार्य जीत वि. सं. 1898 चैत्र कृष्णा सातम को एक गीत लिखने बैठे । गीत लिखते- लिखते स्व. भीम जी स्वामी ने सहसा साक्षात देखकर विस्मित कर दिया । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.f...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 23

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (23) दिनांक 12 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - युवाचार्य जीत मुनि ने डीडवाना से विहार किया । उन्हें वि. सं. 1898 का चातुर्मास जयपुर करना था । मन में एक चिंतन- पीड़ा बार-बार उभरती रही ' भीम जी स्वामी इतने नीपीते / निस्पृह कब से  ? तपस्वी भागचंद जी तो स्वर्ग से संवाद देने आये । भीम जी स्वामी क्यों नहीं आये ? क्या मैं कुछ नहीं लगता था  ? उनका छोटा भाई नहीं था ?' " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/208846109...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 22

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (22) दिनांक 11 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जिस समय तपस्वी भागचंद जी ने ( दिव्य देव रूप में ) आचार्य श्री ऋषिराय को डीडवाना में दर्शाव दिया, उस समय युवाचार्य जीत मुनि भी वही डीडवाना में ही थे ।  उन्होंने भी गाया - 'भीम आउखो पूरो कियो, सांभल्यो  पूज महाराज । मन मांही करड़ी लागी घणी, भीम हुंतो गुण जिहाज ।।' 'भीम -ऋषि के आयुष्य पूर्ण- देवलोक होने के समाचार पूज्य आचार्य ऋषिराय को बहुत अटपटे ,मन को असुहावने लगे । उनके श्रीमुख से खेद के साथ निकला -तपस्वी भीमजी गुण- भरी जहाज थे ।' " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 ...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 21

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (21) दिनांक 10 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उसी समय जीवो जी स्वामी ने गीत लिखना प्रारंभ किया । जिसमें वे स्वयं इस बात का उल्लेख करते हैं - "श्री पूज हुकुम फरमायो, तिण स्यूं मैं मुनिवर गायो  आषाढ़ सुद लाडनूं आया, सुद तेरस दिन गुण -गाया"  'श्री पूज्य आचार्य रिषिराय ने आदेश फरमाया इसलिए मैंने मुनिवर- तपस्वी भागचंद जी के गुणानुवाद गाये । हम आषाढ़ सुदी तेरस को डीडवाना से लाडनूं आये, उसी दिन मैंने तपस्वी गुण- गीत संपूर्ण किया ।' " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज क...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 20

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (20) दिनांक मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - संत जीवो जी भी अल्हड़- अक्खड़ कवि थे । वे बोले- महाराज ! मैं क्यों बनाऊँ तपस्वी के लिए स्मृति-गीत ?  आपके पास वे आये, तो आप बनाओ । मेरे पास थोड़े ही आएं हैं , जो मैं बनाऊं ? जीवो जी अभी अपने आसन पर आकर बैठने ही वाले थे कि स्वर्गीय तपस्वी भागचंद जी सामने आ खड़े हुए । प्रकाश ! प्रकाश ! सचन्नण हो गया । बोले - "क्यों ? नहीं लिखोगे गीत ? " " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 19

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (  19  ) दिनांक 8 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - आचार्य रिषिराय उन दिनों डीडवाना विराज रहे थे । डीडवाना के सिंघी नोहरे में पूज्य श्री के दर्शन कर तपस्वी भागचंद जी ने अपनी तथा भीमराज जी स्वामी के स्वर्गवास की सूचना दी । आचार्य रिषिराय ने जीवो जी स्वामी को बुलाया और फरमाया - जीवा ! तपस्वी भागचंद जी के लिए एक ढाल ( गीत ) लिखो । वे अभी- अभी आये थे । दर्शन किए थे ।  वे देवलोक हो गए हैं । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 18

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 18) दिनांक 7 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - यहां नहीं ,वहां भी ये दोनों भाग्यवान वैरागी हैं । जिन्दे ही साथी  नहीं, मरने में भी साथी ।  यहां भी साथी ,वहां भी साथी । उनके मन में शासन सेवा कि आज भी उमंग है । वे चतुर्विध  संघ की साता -सुख शांति चाहते हैं । अपना स्वरूप दिखाते -से, अहसास जताते- लगते हैं । कहते हैं -मैं अकेला नहीं ,औरों को भी साथ लाता हूँ ।  हम च्यार तीर्थ की सुरक्षा सेवा- चाकरी करते हैं । संघ का हम पर एहसान है । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 17

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (  17  ) दिनांक 6 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - संतो ने कहा - तपस्वी ! क्या भोली बात कर रहे हो ? यों कोई जाया जाता है ? तपस्वी बोले- वे बुला रहे हैं रे ! हे !...मैं तो ये चला । ठीक से रहना...। कहते-कहते तपस्वी भागचंद जी ने एक लंबा श्वास खींचा और इच्छा मृत्यु पा ली । 'भीम ,भागचंद री जोरी , एहवी मिलनी जग में दोरी  त्यांरी प्रीत न टूटै तोरी, ऋष भागचंद जी ने भीम  री "  तपस्वी भीम जी स्वामी और भागचंद जी जैसी जोड़ी दुनिया में दूसरी मिलनी कठिन है वह प्रीति तोड़े भी नहीं टूट सकती । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मि...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 16

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 16 ) दिनांक 5 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - अष्टमी को लोग  दाह- संस्कार करने गए । पीछे तपस्वी भागचंद जी उदास- उदास, बे -चैन से बैठे थे ।  किसी गंभीर चिंतन में मन नहीं लग रहा था । उन्होंने बैठे-बैठे आवाज़ लगाई- संत नंदू जी आये । "तपस्वी बोले- नंदू ! मन नहीं लग रहा है। भाई ! पूंजो जी को बुलाओ तो ? " मुनि पूंजो जी आये । तपस्वी बोले- पूंजा ! ये संभाल भाई ! भीमजी स्वामी के पुस्तक- पन्ने अपन तो चले ..भीमजी स्वामी के साथ....। " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 15

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 15 ) दिनांक 4 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 'आलोइ निन्दी नि:शल हुआ , खमत खामणा करै लेले नाम',  महाव्रत फेर आरोपे मुनिवर ,  रिष पूंजै ने कहै करावो संथारो '।  तपस्वी भीम जी ने आलोवणा की , खमत खामणा नाम ले- लेकर किये ।नि:शल्य हुए । महाव्रतों का आरोपण किया । ऋषि -पूंजो जी से अनशन मांगा । जागृत चेता, विलक्षण तपस्वी, तितिक्षु- संत ,अनशन आराधना कर वि. सं.1897 आषाढ़ कृष्णा सातम को सायं काल मुहूर्त भर दिन रहते 40 वर्ष की उम्र में समाधिस्थ  हुए । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 14

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 14 ) दिनांक 3 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री पङिहारा ,रतनगढ़ होते हुए चातुर्मास के पूर्व चूरू पधारे और एक महीना ठहरे । चातुर्मास प्रारंभ होने में बहुत दिन बाकी थे इसलिए वहां से विहार कर बिसाऊ, मैणसर होते हुए रामगढ़ पधारे । एक महीना विराजे।  रामगढ़ से मैणसर होकर वि. सं. 1897  आषाढ़ कृष्णा 6 को बिसाऊ के लिए विहार हुआ । उन्हें चातुर्मास चूरू करना था । भयंकर गर्मी । लूऐं चल रही थी । बिसाऊ पहुंचते-पहुंचते वे लटपटा  गए । उल्टी -दस्त ने शरीर का पानी सोख लिया । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्म...

नेमानन्दन महाश्रमण तुम ऐसे अहिंसा वीर

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कर कमलों में थमी हुई है भावी एक तकदीर युगों युगों तक याद रहेगी ऐसी एक तस्वीर महावीर की वाणी जितनी धीर- वीर -गम्भीर नेमानन्दन महाश्रमण तुम ऐसे अहिंसा वीर तेरापथ की बगिया में खिले नव्य निराले फूल भिक्षु तुलसी महाप्रज्ञ जैसे हीरे अतोल महाश्रमण गुरु मुस्काते , बोलें मीठे बोल विश्वशान्ति का सपना गुरुवर की आँखों में अनमोल भैक्षव शासन का गौरव शिखरों तक पहुचाये दिव्यज्योति आभामण्डल में परम शान्ति है लाये आँच न लगने दे संघ को नैतिकता का पाठ पढ़ाये नशा मुक्ति का संदेशा घर घर खूब फैलाये जातिभेद को दूर हटाये विश्व एकता को समझाए तपते सूरज में चलकर वो अनुशासन की गाथा गाये महाश्रमण गण उपवन की सौरभ खूब लुटाए तेरापन्थ की बगिया के एकादशम आचार्य कहलाये आँच न लगने देवे गुरुवर यही स्वर लहरी सुनाए जागरूक बन हम भी तेरापंथ की बगिया को महकाएं महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी 11वे पदाभिषेक  दिवस पर मंगल कामनाएं JTN प्रतिनिधि श्रीमती अनिता सिंयाल नेरुल

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 13

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 13 ) दिनांक 2 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वे अनेक क्षेत्रों में विचरे ।  अपने अनुभवों का खूब उपयोग किया । तपस्या के साथ-साथ ज्ञान वितरण कर अनेक लोगों को संयम -व्रत- सम्यक्त्व-  बोध देते- देते वे रामगढ़ (शेखावाटी ) पहुंचे ।  उनके परिचय में भीम विलास- 1-15  में लिखा है - ' भीम सरल हिया नो घणो , भीम प्रकृति भदरीक ,  *कार्य करवा उधमी घणा , सूरपणै साहसीक ।' "भीम जी स्वामी ह्रदय के सरल , प्रकृति से भद्र , कार्यक्षम , बहुत परिश्रमी ,  साहसिक और शूरवीर- अग्रिम पंक्ति वाले योद्धा थे ।" " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही ह...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 12

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 12 ) दिनांक 1 मई 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी भीम जी को गुरु- मंडल में तथा हेमराज जी स्वामी के पास 12 वर्ष ज्ञानार्जन का अवसर मिला । वि. सं.1881  में उन्हें अग्रगण्य बनाया गया । भीम विलास 1-21 में जयाचार्य श्री ने लिखा है- ' संवत अठारै इक्यासिये , रिषिराय बधायो तोल , टोलो सूंप्यो भीम नै ,आप्या संत अमोल '। वि. सं. 1881 में आचार्य रिषिराय ने भीम जी स्वामी का तोल -मोल बढ़ाया । मूल्यांकन कर उनको टोला सौंपा- अग्रगण्य बना संतो को वंदना करवायी । संत भी अनमोल अच्छे-अच्छे सौंपे । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻...