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Showing posts from June, 2020

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 10

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (10)  दिनांक 30 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वज्रोपम सीना किया मन दृढ़ मेरु समान । पाई वश कर इन्द्रियां रसना- विजय महान ।  रसना विजय महान विरति बल से वर्चस्वी ।  शांत प्रकृति सुवनीत साधना में तेजस्वी । लगे चलाने देह पर तप -तलवार सजोर । लोह लेखिनी से लिखूं शिव मुनि का तप घोर ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www....

जैन विश्व भारती लंदन द्वारा अंतरराष्ट्रीय भक्ति संध्या का आयोजन

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Mahapragya's Pearls of Wisdom अंतरराष्ट्रीय भक्ति संध्या का  आयोजन आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की जन्म शताब्दी समारोह के अंतर्गत 'महाप्रज्ञ पर्ल्स ऑफ विज़डम' एक अंतरराष्ट्रीय भक्ति संध्या का आयोजन समणी प्रतिभाप्रज्ञा एवं स्वर्ण प्रज्ञा के सानिध्य में हुआ। इसमें सभी गीत आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की रचनाएं थी जिन्हें भारती सेठिया, मीनाक्षी भूतोडिया, नीलेश बाफना, यश बोथरा, ऋषि दूगड़, सोनम पीपाड़ा, संजय भाणावत, विनीता भाणावत, वैभव बाघमार, उज्जवल बालड़ ने प्रस्तुत किए। सभी कलाकारों ने स्वर साधना से इस डिजिटल भक्ति में समा बांध दिया इस कार्यक्रम में कई देशों से लगभग 2000 लोग हमारे साथ जुड़े हुए थे । समणी प्रतिमा प्रज्ञा ने जूम के माध्यम से जुड़े हुए श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा सर्वतोभद्र महात्मा महाप्रज्ञ की कवित्व चेतना ने जन जन तक आध्यात्मिक ऊरधारोहन कराया है उनकी चेतनादीप्त विचारों की किरणें सदैव हमारा पथ प्रशस्थ करती रहेगी । समणी स्वर्णप्रज्ञा स्वरचित काव्यमय  संयोजन कर भक्ति संध्या को आगे बढ़ाया । जैन विश्व भारती लंदन के चीफ ट्रस्टी श्री हंसु भाई बोहरा ने स...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 9

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (9)  दिनांक 29 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वासी लावा ग्राम के गोत्र बाफणा ज्ञेय । धर्म बोध- दायक मिले मुनि श्रमणी श्रद्वेय । मुनि श्रमणी श्रद्धेय श्रेय का पथ अपनाया । भारी गुरु के हाथ सुधा संयम का पाया । शिव उसमें ही रम गए होकर भाव -विभोर । लोह लेखिनी से लिखूं शिव मुनि का तप घोर ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.face...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 8

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (8)  दिनांक 28 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - लोह लेखिनी से लिखूं शिव मुनि का तप घोर । लम्बे चौड़े आंकड़े जोड़ सुनाऊं और ।  जोड़ सुनाऊं और सभी की आंखें खोलूं । भरूं विरति  का रंग वीर रस उसमें घोलूं । खींचू सतयुग चित्र को करके पूरा गौर । लोह लेखिनी से लिखूं शिव मुनि का तप घोर ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www....

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 7

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (7)  दिनांक 27 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उनके लिए छोटी तपस्या मगर अपने लिए बहुत बड़ी तपस्या । उन्होंने सोलह दिनों की तपस्या दो बार । पन्द्रह- तीन बार । चौदह- तीन बार  । तेरह- दो बार  । नो-दस-ग्यारह -बारह   तीन-तीन बार । आठ- छव बार । सात -तीन  बार । छव-सात बार । पांच-इग्यारह बार । चार-आठ बार । तीन- चौंतीस बार ।  दो- बाविस बार ।  उपवासों की संख्या 414  ।  वे निराहार- तप के साथ शीत- तप और आतप- तप भी तपते ।  कड़कड़ाती ठंडक की रातों में केवल एक अधो वस्त्र के अतिरिक्त कपड़ा नहीं ओढ़ते । पश्चिम रात्रि में खड़े-खड़े कायोत्सर्ग व ध्यान करते ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध...

पस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 6

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (6)  दिनांक 26 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री शिवजी स्वामी ने ध्यान , योग , स्वाध्याय और मनस्तोष के साथ एक सौ छिंयासी ( 186 ) तथा एक सौ नब्बे ( 190 ) दिन का लंबा उपवास आछ - ( उबली छाछ पर नितर कर आया हुआ पीला पानी ) पीकर साधा । सुना जाता है उक्त 186 दिन का तप उन्होंने सं. 1886  में किया था ।               " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें ...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 5

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (5)  दिनांक 25 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री शिवजी स्वामी ने   बत्तीस (32) और चालीस (40) की तपस्या  एक - एक बार की  । पैंतालीस-पैंतालीस (45) दिनों का तप नौ (9) बार दुहराया । पच्चास-पच्चास (50) दो बार किये । पिचपन (55) दिन का तप एक बार तथा साठ (60) की तपस्या पांच (5)बार कर दिखाई। पिचहतर (75) दिन का उपवास दो बार किया । नब्बे (90) दिन अर्थात 3 महीनों की तपस्या एक बार की।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏...

आचार्य तुलसी का 24वां महाप्रयाण दिवस अवसर पर अणुविभा द्वारा संयमित जीवनशैली पर वेबीनार आयोजित

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अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसी के 24 में महाप्रयाण दिवस के अवसर पर 23 जून को अणुव्रत विश्वभारती द्वारा एक वेबीनार का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि अणुव्रत विश्व भारती द्वारा प्रतिवर्ष इस अवसर पर ’तुलसी स्मृति’ के नाम से बहु दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वेबीनार का विषय था - ’नए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में संयमित जीवनशैली का महत्व’। वेबीनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आचार्य तुलसी ने 70 वर्ष पूर्व इस विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए अणुव्रत का दर्शन हमें दिया था, यह दुनिया उस दर्शन पर चली होती तो शायद आज हम इस संकट के दौर से नहीं गुजर रहे होते। दूसरे विश्व युद्ध के तुरंत बाद जब आचार्य तुलसी ने अणु बम नहीं, अणुव्रत की बात की तो विश्व प्रसिद्ध मैगजीन टाइम ने इसे प्रमुखता देते हुए आलेख छापा था। श्री मेघवाल ने अपने स्कूल के दिनों की याद करते हुए बताया कि आचार्य तुलसी किस प्रकार स्कूलों में आकर बच्चों और शिक्षकों को संयमित जीवनशैली का पाठ पढ़ाया करते थे। श्री मेघवाल ने आचार्य तुलसी कृत अणुव्रत ग...

नवयुग के महावीर आचार्यश्री महाप्रज्ञ

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    खुले आकाश के नीचे जिन्होंने जन्म लिया, खेल-खेल में जिनका तीसरा नेत्र उद्घाटित हो गया, प्रारंभिक विद्यालय शिक्षा से जो अनभिज्ञ था, कौन जानता था वो बालक नथमल आगे चलकर आचार्य महाप्रज्ञ के नाम से विश्वविख्यात होगा, सच्चाई यह भी है कि वर्तमान का बिम्ब भावी के दर्पण में प्रतिबिंबित हो जाता है। सच ही कहा गया है कि भविष्य के गर्भ में अनेकानेक रहस्य छीपे होते हैं वे समय आने पर ही उद्घाटित होते हैं। राजस्थान के छोटे-से गाँव टमकोर में वि.सं. 1977 आषाढ़ कृष्णा त्रयोदशी (14 जून, 1910) के दिन माँ बालूजी-पिता तोलाराम जी चोरड़िया के आँगन में पुत्र का जन्म हुआ, जिसने व्यवहार जगत में नथमल नाम से पहचान बनाई। ढ़ाई महीने की शिशु अवस्था में बालक नथमल के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार में पिता का न होना अपने आपमें बड़ा संकट था परंतु माँ बालूजी ने इस संकट का अनुभव अपनी संतानों को नहीं होने दिया। उन्होंने न सिर्फ उस स्थिति को समभाव से सहा अपितु अपनी संतानों के संस्कार निर्माण में भी सजगता का परिचय दिया। बचपन में ही बालक नथमल की अद्वितीय प्रतिभा निखर चुकी थी। कुछ विशेष घटना-प्रसंगों के ...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 4

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (4)  दिनांक 24 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री शिवजी स्वामी ! पिछली रात को प्रहर - प्रहर ध्यान लीन रहते । जब तक अभिग्रह पूरा नहीं होता खड़े-खड़े कायोत्सर्ग करते । उनकी तपस्या के लंबे आंकड़े आश्चर्यजनक , जन-जन को विस्मित करने वाले और भगवान महावीर के युग की याद दिलाने वाले हैं । केवल जल के आधार पर उन्होंने बारह (12) बार मास खमण तप किया । छत्तीस(36) की तपस्या दो बार की ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक '...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 3

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (3)  दिनांक 23 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मुनि श्री शिवजी स्वामी ! भरे संवेग -सरोवर से लहराते, आज्ञा -आराधक, नीतिमान, निर्मल क्रियाशील, जनाकर्षी और वाकपटु । कठोर तप के साथ वे ध्यानी, मौनी और योगी भी थे । तपस्वी शिवजी केवल काय- योग तपस्वी ही नहीं थे ,उनका अंतर तप कार्मण शरीर को भी प्रकंपित करता।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://ww...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 2

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (2)  दिनांक 22 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - शिवजी स्वामी ने तप- साधना की कंचन -जंघा चोटी को छू लिया । मुनि श्री हेमराज जी स्वामी ,स्वरूपचंद जी स्वामी, भीमजी स्वामी और जीत मुनि ( जयाचार्य ) का मुमुक्षु- प्रतिबिंब उनमें हिलोरें लेता था । सेवा भावना के साथ वे मजबूत मनोसंकल्पी- तपोबली पुरुष थे । उन्होंने संयम की आराधना के साथ साधना का अनूठा अभियान चालू किया ।              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के ...

तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 1

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री शिव जी स्वामी  जीवन परिचय श्रृंखला (1)  दिनांक 21 जून  2020      शिवंकराय -शिव      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी मुनि श्री शिवजी स्वामी मेवाड़ प्रदेश में लावा सरदारगढ़ के निवासी , जाति से ओसवाल और गोत्र से बाफना थे । उन्होंने संवत 1875 में आचार्य श्री भारीमाल जी के हाथ से चारित्र ग्रहण किया । मुनि श्री शिवजी बड़े विरागी , प्रकृति से कोमल , विनयी , विवेकी , संघ -निष्ठ , उच्च साधक एवं उग्र तपस्वी हुए |              " ॐ अर्हम "     महातपस्वी  मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जु...

आंतरिक शक्तियों का जागरण

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तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 31

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (31) दिनांक 20 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी रामसुख जी का स्थान पंचर्षियों  में मध्यवर्ती है । जिनका स्मरण जयाचार्य श्री करवाते हैं । उन्होंने अपने आने का संकेत शब्द दिया पर आज भी वह रहस्य, रहस्य ही बना हुआ है कि उन्होंने कौन सा संकेत- शब्द बताया ? काश ! हम भी उनका साक्षात कर सकते । जयाचार्य श्री ने गाया:- मुणिन्द मोरा , कोदर तपसी करूर , रामसुख ऋषि रूड़ो रे , स्वामी मोरा ।  राजतो रे , मोरा स्वाम ।। " ॐ अर्हम "   अभी तक हमने महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी मुनि श्री भीम जी स्वामी एवं मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में जाना , पढ़ा ! महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के जीवन परिचय की श्रंखला यहीं पर समाप्त होती है ।  कल से हम पढ़ेंगे मुनि श्री शिव जी स्वामी के तपोमय जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.......... शिवंकराय - शिव  ! क्...

PM pays tribute to Acharya Shri Mahapragyaji Calls People to Implement the Mantra “Build Happy Family towards a Prosperous Nation”

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The Prime Minister paid tribute to Acharya Shri Mahapragyaji on the occasion of  the seer’s birth centenary today. Speaking on the occasion, the Prime Minister said Acharya Shri Maharagya Ji has dedicated his entire life to the service of mankind and the society. Prime Minister recalled his several interactions with the Great Saint and said he was blessed to have had so many interactions with the Acharya and that he could draw many lessons from the Saint’s Journey. Shri Modi said he also had the opportunity to participate in the Saint’s Ahimsa Yatra and Service to humanity. He said, Yug Rishis like Acharya Shri Mahapragya do not acquire anything for their physical selves but that their lives, thoughts and actions are dedicated to the service of the humankind. Prime Minister quoted Acharya Ji, “If you Leave ‘Me and Mine’ in Your Lives, then the Whole World Will Be Yours” Shri Modi said the saint made this the mantra and philosophy of his life and implemented ...

PM's address at Birth Centenary celebrations of Acharya Mahapragya

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नमस्कार । आचार्य श्री महाश्रमण जी, तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष सुरेश चंद्र गोयल जी, और टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस कार्यक्रम में जुड़े सभी महानुभाव,  सभी साथी ! ये हम सभी का सौभाग्य है कि संत प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की जन्म शताब्दी के पवित्र अवसर पर हम सब एक साथ  जुड़े हैं। उनकी कृपा, उनके आशीर्वाद को, आप, मैं, हम सभी अनुभव कर रहे हैं। संत प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को नमन करते हुए, उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए, मैं आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मैं आचार्य श्री महाश्रमण जी को भी विशेष रूप से धन्यवाद करूंगा। कोरोना की परिस्थिति के बीच भी उन्होंने इस कार्यक्रम को technology के जरिए इतने प्रभावी ढंग से आयोजित किया है। साथियों, आप में से अनेक जन ऐसे हैं, जिन्हें आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सत्संग और साक्षात्कार, दोनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उस समय आपने उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव जरूर किया होगा। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि मुझे मेरे जीवन में ये अवसर, आचार्य श्री का विशेष स्नेह और आशीर्वाद का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा है। मुझे...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 30

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (30) दिनांक 19  जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - विघ्नहरण की ढ़ाल में जयाचार्य ने मुनि श्री का स्मरण किया है । 'अ-भी- रा- शि- को- पद्य' में 'रा' अक्षर से रामसुख जी के नाम का संकेत है । सं. 1898 जेठ बदि 14 को जयाचार्य द्वारा रचित दिवंगत साधुओं के स्मरण की ढ़ाल में उनका नाम है:-- रामसुख जी चौविहार उगणीस कै , ऋषिराय तणा प्रताप थी जी । उदक आगारे तेसठ अडसठ पैतालिस कै , तप कर कार्य सुधारियो जी ।। " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के ...

महाप्रज्ञोस्तु मंगलम् कार्यक्रम

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महाप्रज्ञोस्तु मंगलम्  साभार : अमृतवाणी ( Terapanth यूट्यूब चैनल )

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 29

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (29) दिनांक 18 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - राम ढ़ा. 4-3 में आता है - मेरा तुम्हारे पर पूरा विश्वास है । तुम्हारी और मेरी प्रीति- मैत्री अटूट है , पूरी है । तुमने जो निर्मल ज्ञान से दो बात कही, मेरे जी में जी आ गया, चित्त प्रसन्न हो गया ।  पूरण तुझ मुझ आसता , पूरण मुझ तुझ प्रीत  विमल वयण उभय वागरया , चित्त आयो मुझ चीत अगर आप दो शब्द कहो तो चित्त में चैन आये । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उ...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 28

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (28) दिनांक 17 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जयाचार्य श्री ने राम ढा़. 3-4 और 3-9 में लिखा है -  ' हद पाली तूं पूरण प्रीत '  तुमने अपनी सीमा में पूरी प्रीति निभायी । तूं प्रतीतकारी गुणवान , आनंदकारी चित्त सुख स्थान गुण ग्राहक , गिरवो गंभीर,  वचन निभावण तूं  बड़ वीर तपस्वी ! तुम विश्वस्थ ,गुणी, आनंददायी , चित्त -समाधि- स्थल, गुणग्राही , गंभीर और वचन के बड़े पक्के हो। " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 27

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (27) दिनांक 16 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जयाचार्य श्री ने इसे रहस्यमयी ढ़ंग से राम ढा. 6- 7 में अंकित किया है- वचन तणो तूं सूर उदार , निर्मल बुद्धि तुम उंडी विचार,  याद आयां हीयो हरखंत , तो सम विरला जग में संत । वचन संकल्पी !  तपस्वी ! तुम्हारी निर्मल बुद्धि , गंभीर विचारधारा याद आते ही हृदय खुशी से झूम उठता है । तुम्हारे जैसे संसार में विरले ही संत होंगे । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 26

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (26) दिनांक 15 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - सुना है - तपस्वी जी ने पुन: दर्शन किये ।  प्रकाश- दर्शन में वचन दिया " याद करते ही आऊंगा ।" कहते हैं -कोदर तपस्वी के अनशन में बेचैनी बढ़ना , तड़फडा़हट होना , युवाचार्य जीत मुनि का तपस्वी रामसुख जी को याद करना , उनका आना , कुछ बताना , जीत मुनि का प्रयोग करवाना , कोदर तपस्वी को जाति- स्मृति- अवबोध मिलना और जीत मुनि  द्वारा पूर्व जन्म -जनित घटित- घटना- रहस्य का उद्घघाटन करना , यह सब अप्रत्यक्ष रामसुख स्वामी के माध्यम से ही तो हुआ था । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की ...

राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री ने किया आचार्य महाप्रज्ञ के भित्ति चित्र का अनावरण

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जयपुर, 14 जून। राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को शिल्पकार राजेश भण्डारी द्वारा बनाए गए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ आचार्य महाप्रज्ञ के म्यूरल (भित्ति चित्र) का अनावरण किया।   मुख्यमंत्री ने आचार्य महाप्रज्ञ की 100वीं जयंती पर उनका पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि वे ऐसे संत थे जिन्होंने शांति, अहिंसा और सद्भावना का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। आचार्य तुलसी के अणुव्रत आंदोलन को आगे बढ़ाने में भी उन्होंने अहम योगदान दिया।  इस अवसर पर सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डॉ. रघु शर्मा भी उपस्थित थे।

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 25

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (25) दिनांक 14 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - कुछ ही क्षणों बाद बोलते- बोलते मुनि श्री की जबान बंद हो गई । युवाचार्य श्री ने अंतिम समय देखकर उन्हें सागारी संथारा करवाया ।  वे वापस कुछ भी नहीं कह सके । एक घड़ी ( 24 ) मिनट के बाद आषाढ़ शुक्ला 8 के दिन पश्चिम प्रहर में " चूरू " में  वे समाधि - मरण को प्राप्त हुए । मुनि श्री का कुल साधना काल पौने सात साल का रहा । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 24

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (24) दिनांक 13 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उन्होंने आषाढ़ शुक्ला 8 के दिन आत्मालोचन , महाव्रतारोपन एवं सभी के साथ क्षमायाचना की । निर्भयता पूर्वक वार्तालाप कर रहे थे । अकस्मात उनके शरीर में कुछ अस्वस्थता हुई । उस समय युवाचार्य श्री ने पूछा आपके मन में किसी प्रकार की चिंता तो नहीं है ? मुनि श्री तपाक से उत्तर देते हुए बोले- जिसके मन में श्रद्धा- आचार के विषय में संशय होता है अथवा जो कायर होता है वही चिंताग्रस्त होता है । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चु...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 23

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (23) दिनांक 12 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जबरी सूं करायो पारणो जी , आषाढ़ सुदी तीथ तीज ।  चौथ चौविहार  कीधो वली जी , पिण शरीर निपट गयो छीज ।। इस प्रकार मुनि श्री चातुर्मास में विशेष तपस्या करते , उष्ण काल में आतापना लेते और शीतकाल में शीत सहन करते थे । 45 दिन की तपस्या करने के पश्चात मुनि श्री का शरीर अत्यधिक दुर्बल हो गया था फिर भी उनका मनोबल प्रशंसनीय था। " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक क...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 22

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (22) दिनांक 11 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी ने 45 दिन की तपस्या द्वितीय ज्येष्ठ और आषाढ़ महीने में उष्ण पानी के आधार से की । उसमें फिर आतापना भी लेते थे । आषाढ़ शुक्ला तीज को साधु और श्रावकों ने अत्यधिक आग्रह किया तब मुनि श्री ने पारणा किया । चौथ के दिन फिर उन्होंने चोविहार उपवास कर लिया । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups...

तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 21

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ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (21) दिनांक 10 जून 2020 राम -रसायण रामसुख      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जयाचार्य श्री ने अनुभव- वाणी में लिखा- ' यूं खंखंर कीन्ही काया ' ( राम - 9 -18 )  शरीर केवल हड्डियों का ढांचा रह गया । ऐसे उर्जा ,शीत और आतप प्रधान तप करते -करते वि. सं. 1895 के शेषकाल में वे जयाचार्य के साथ " चूरू " पधारे । जेठ की तपती मौसम । आग उगलती धोरों की धरती । धुंआ फैकती धूप । धग -धगती लपटें- लहराती लूएं । वहां उन्होंने कुछ दिन तो एकांतर - तप किया फिर ग्रीष्म ऋतु एवं शरीर में अस्वस्थता होने पर भी 45 दिन का तप किया । " ॐ अर्हम " महातपस्वी मुनि श्री रामसुख जी स्वामी के तपोमय  जीवन के बारे में  और अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ! जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला .......... राम- रसायण  रामसुख  ! क्रमशः..... 👉🏻 शासन समुद्र " एवं "जय जय जय महाराज" पुस्तक से साभार 🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही ह...