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Showing posts from September, 2020

अभातेयुप के अभूतपूर्व अध्यक्ष, अनेकों संघीय संस्थाओं के साथ जुड़े श्रावक कार्यकर्ता दीपचंद जी नाहर का बेंगलोर में आकस्मिक निधन

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युवा गौरव स्व. दीपचन्दजी नाहर (जाणुंदा-बैंगलोर) जन्म: 28.11.1964 , देहावसान: 17.09.2020 युवा गौरव स्व. दीपचन्दजी नाहर एक कर्मठ श्रावक कार्यकर्ता थे जिन्होंने सन 2003-05 के कार्यकाल में अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्य्क्ष के रूप में अपने कुशल और सक्षम नेतृत्व से संगठन को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की । संघ और संघपति के प्रति अटूट समर्पण, सहज प्रसन्नता, मिलनसारिता, विनम्रशीलता, सरलता, आध्यात्मिक जीवन शैली, कुशल नेतृत्व शैली आदि उनके जीवन की ऐसी विशिष्टताएं थी, जो चिरकाल तक उनकी मधुर स्मृतियों को सजीव बनाए रखेगी और हमारी युवा शक्ति में नई प्रेरणा का संचार करती रहेगी। आपके व्यक्तित्व की विशिष्टताओं   के लिए अभातेयुप ने उन्हें सन् 2008 के *युवा गौरवअलंकरण से अलंकृत किया। आपने अपने कार्यकाल युवाओं को पंचसूत्री कार्यक्रम दिया एवं व्यसन मुक्ति के लिए सघन अभियान चलाया। युवाओं में जैन संस्कारों के पोषण हेतु जैन जीवन शैली, विसर्जन, संस्कार निर्माण, जैन संस्कार विधि आदि पर विशेष बल दिया। विभिन्न विषयों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया। इस प्रकार आपका कार्यकाल अभातेयुप के लिए अनेक उपलब्...

मुनि श्री पुलकित कुमार जी ने जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनूं से डॉक्टरेट (Ph.D) की उपाधि की प्राप्त

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Muni Shri Pulkit Kumar Ji Awarded  PhD Degree From JVBI Ladnun. गणाधिपति परम पूज्य गुरुदेव श्री तुलसी के पावन सान्निध्य में परम पूज्य गुरूदेव आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के वरदहस्त से सन 1995 में दीक्षित मुनि श्री पुलकित कुमार जी ने  "भारतीय दर्शन में अपरिग्रह की अवधारणा : एक अध्ययन" विषय पर जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनूं से पीएचडी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त की है । परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा एवं आशीर्वाद से आपने इस विषय पर शोध एवं अध्ययन वर्ष 2016 में शुरू किया था। डॉ. आनंदप्रकाश त्रिपाठी आपके शोध निर्देशक थे ।  आप "शासनस्तंभ" मंत्री मुनि श्री सुमेरमल जी स्वामी की सेवा में 21 वर्ष रहे । आपने मंत्री मुनिश्री के सान्निध्य में जैन बत्तीस आगमों का गहन अध्ययन किया । आप वर्तमान में मुनि श्री उदितकुमार जी के साथ जलगांव, महाराष्ट्र में चातुर्मास हेतु बिराजित है । ज्ञात रहे हाल ही में मुनिश्री ने संयम पर्याय के 25 वर्ष भी पूर्ण किये है ।