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Showing posts from January, 2021

आचार्य श्री महाश्रमण जी ने 50000 किलोमीटर की पदयात्रा कर रचा एक इतिहास

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भारत के 23 राज्यों, नेपाल व भूटान में जगाई अहिंसा की अलख 28 जनवरी 2021। अहिंसा यात्रा के प्रणेता तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आज अपने पावन कदमों से पदयात्रा करते हुए 50000 किलोमीटर के आंकड़े को पार कर एक नए इतिहास का सृजन कर लिया। आज के भौतिक संसाधनों से भरपूर युग में जहां यातायात के इतने साधन हैं, व्यवस्थाएं हैं, फिर भी भारतीय ऋषि परंपरा को जीवित रखते हुए महान परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी जनोपकार के लिए निरंतर पदयात्रा कर रहे हैं। भारत के 23 राज्यों और नेपाल व भूटान में सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की अलख जगाने वाले आचार्यश्री महाश्रमणजी की प्रेरणा से प्रभावित होकर करोड़ों लोग नशामुक्ति की प्रतिज्ञा स्वीकार कर चुके हैं। देश की राजधानी दिल्ली के लालकिले से सन् 2014 में अहिंसा यात्रा का प्रारंभ करने वाले आचार्यश्री ने न केवल भारत, अपितु नेपाल, भूटान जैसे देशों में भी मानवता के उत्थान का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। आचार्यश्री देश के राष्ट्रपति भवन से लेकर गांवों की झोंपड़ी तक शांति का संदेश देने का कार्य कर रहे हैं। यात्रा के दौरान राजनेता हो या अभिनेता...

अणुव्रत चुनाव शुद्धि अभियान के अन्तर्गत पोस्टर का विमोचन : लाडनूं

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लाडनूं- अणुव्रत समिति  के तत्वावधान में जैन विश्व भारती में विराजित मुनि सुमतिकुमार जी के सान्निध्य में अणुव्रत चुनाव शुद्धि अभियान के अंतर्गत पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए मुनि श्री सुमित कुमार जी ने कहा कि अणुव्रत इंसानियत का आंदोलन है। इस आंदोलन के माध्यम से एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना के साथ  स्वस्थ समाज निर्माण की बात कही गई है।  अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी ने अणुव्रत चुनाव शुद्धि अभियान के अंतर्गत उम्मीदवारों के चयन के लिए आचार संहिता का निर्माण कर लोकतंत्र को सच्ची राह दिखाई है।  मुनिश्री ने कहा उम्मीदवार  ईमानदार, नीतिनिष्ठ व नशा मुक्त होना चाहिए।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चीफ शहर काजी मोहम्मद मदनी ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र निर्माण के लिए सही जनप्रतिनि का चयन करना जनता के हाथ में है। उन्होंने कहा कि राजनीति में अच्छे व्यक्तियों के चयन से ही हमारे लोकतंत्र को मजबूती मिल सकती है।  इस अवसर पर विमोचित होने वाले पोस्टर का वाचन समिति के संरक्षक राजेंद्र खटेड ने किया। इससे पूर्व स्वागत वक्तव्य देते हुए अणु...

जैन संस्कार विधि के बढ़ते चरण, अभातेयुप परिवार के संग

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कल्याण परिषद संयोजक, अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष, JTN प्रधान संपादक श्री संदीप कोठारी ने जैन संस्कार विधि से सामूहिक जन्मदिवस कार्यक्रम में अपने जन्मदिन के अवसर पर वर्ष में 108 अतिरिक्त सामायिक करने हेतु संकल्प लिया दिनांक 16/1/2021, शनिवार को ZOOM DIGITAL APP पर रात्री 9:00 बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी, संगठन मंत्री श्री जयेश मेहता, संस्कारक श्री विनीत लुनिया, संस्कारक श्री मिश्रीमल नंगावत, संस्कारक श्री चमन जैन का जन्मदिवस जैन संस्कार विधि से राष्ट्रीय प्रभारी व सहप्रभारी संस्कारकद्वय श्री श्रेयांश कोठारी व श्री राकेश जैन ने मंगल मंत्रोचार से संपादित करवाया। महामंत्री श्री मनीष दफ़्तरी ने सभी को जन्मदिवस की बधाई देते हुए संस्कार विधि टीम की भूरी भूरी प्रशंसा की। श्री श्रैयाँस कोठारी ने भी जैन संस्कार विधि को जन जन  की विधि बनाने के लिए सभी से आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक श्री संजय भंडारी ने सभी अभातेयुप सदस्यों एवं संस्कारकों का स्वागत अभिनंदन किया। अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संदीप कोठारी ने वर्ष में 108 अतरिक्त सामायिक तथा भविष्य में संस्कारक के रूप में सेवा...

शाहपुरा संगठन यात्रा के दौरान अणुविभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा राष्ट्र के नैतिक उत्थान के लिए अणुव्रत आज भी प्रासंगिक

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शाहपुरा,  अणुव्रत विश्व भारती के अध्यक्ष संचय जैन व उनकी टीम का संगठन यात्रा के तहत शाहपुरा पहुंचने पर माताश्रय भवन में स्वागत किया गया। आगुंतक अतिथियों का स्वागत करते हुए स्थानीय समिति अध्यक्ष रामस्वरूप काबरा ने अपनी विगत चार वषोॅ के कार्यकाल की गति प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान माताश्रय भवन में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए अणुव्रत विश्व भारती के अध्यक्ष संजय जैन ने अणुव्रत विश्व भारती की भावी योजनाओं और गतिविधियों से सभी को अवगत कराया। साथ ही उन्होंने अणुव्रत और तेरापंथ के मध्य जो महीन रेखा है उसे भी स्पष्ट किया। संचय जैन ने अणुविभा द्वारा मूल्य समावेशी शिक्षा के सम्बन्ध में किये जा रहे व्यावहारिक कार्यक्रमों और प्रयोगों की जानकारी दी। जैन ने कहा कि राष्ट्र के नैतिक उत्थान के लिए अणुव्रत आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने चारित्रिक विकास, साम्प्रदायिक एकता, सांस्कृतिक समन्वय के साथ साथ जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए अणुव्रत वर्तमान में सबसे प्रासंगिक बताया। जैन ने कहा कि स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद राष्ट्र के नैतिक उत्थान, चारीत्रिक विकास और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के ...