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जीवन में मर्यादा एवं आचार निष्ठा के प्रति जागरूकता रखनी चाहिए - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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भीलवाड़ा का चातुर्मास विरल चातुर्मास चतुर्दशी पर गुरूदेव द्वारा मर्यादा पत्र का वाचन ज्ञान के विकास के लिए पूज्यप्रवर ने किया प्रेरित साध्वीश्री गुणश्री जी की स्मृति सभा 07 अगस्त 2021, शनिवार, आदित्य विहार, तेरापंथ नगर, भीलवाड़ा,  राजस्थान, महातपस्वी परमपूज्य आचार्य महाश्रमण द्वारा प्रतिपादित जिनवाणी का श्रवण व्यक्ति की ज्ञान चेतना को आत्म दर्शन की ओर अग्रसर करने वाली है। पूज्य आचार्यश्री के पावन सान्निध्य में आज चतुर्दशी के अवसर पर "हाजरी" मर्यादा पत्र का वाचन हुआ। इस अवसर पर समस्त साधु-साध्वियों ने गुरूदेव के समक्ष मर्यादा सूत्रों का उच्चारण किया। आचार्यप्रवर के इंगित से नवदीक्षित साध्वीवृन्द ने लेखपत्र का वाचन किया। गुरूदेव ने कृपा करते हुवे साध्वीवृन्द को इक्कीस-इक्कीस कल्याणक (आध्यात्मिक निधि) की बख्शीश दी। मंगल प्रवचन में पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा- यह भीलवाड़ा का चातुर्मास एक प्रकार से विरल चातुर्मास है। इतने साधु-साध्वियों का बहुत वर्षों बाद गुरुकुवास में चातुर्मास हो रहा है। इस समय को सभी सार्थक बनाने का प्रयास करे। जीवन दो चीजों से जुड़ा हुआ है- शरीर और आत्मा। आ...