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Showing posts from March, 2022

माँ ! यह केवल एक शब्द नहीं अहसास है। अहसास ममत्व का सिंचन का शिक्षण का व शक्तित्व का - साध्वी मौलिकयशा

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माँ ! यह केवल एक शब्द नहीं अहसास है। अहसास ममत्व का सिंचन का शिक्षण का व शक्तित्व का । ममत्व ● उदयपूर चातुर्मास (2007) का प्रसंग है। मैं उस समय पारमार्थिक शिक्षण संस्था में मुमुक्षु के रूप में साधनारत थी। मेरा रीढ़ की हड्‌डी के नीचे एक आपरेशन होना था। मेरे संसारपक्षिय पापा (श्री महेंद्र दुधोडिया) मम्मी (श्रीमती निर्मला दुधोडिया) मुझे लेने आए हुए थे। एक डर का मन में होना स्वाभाविक था। हमारी मनः स्थिती को भांपकर साध्वी प्रमुखाश्रीजी ने फरमाया, "आपणे भिक्खू स्याम को शरणो है, फेर डर की के बात है, सब ठीक होसी।" दक्षिण हावड़ा (संसार पक्षीय घर) जाने के बाद मेरे ईलाज का सारा कार्य इतनी सहजता व सरलता से हो गया जिसे मैं 'आचार्य श्री महाप्रज्ञजी व साध्वी प्रमुखाश्री जी का पुण्य प्रताप मानती हूं। 17/9/2010, भाद्रव शुक्ला दशमी के दिन मेरी दीक्षा हुई। कुछ दिनों पश्चात हम आठों नवदीक्षित साध्वियों ने उपवास किया। मातृहृदया साध्वी प्रमुखाश्रीजी ने कम से कम 10-12 बार हमारी साता पूछवाई । आपश्री के ममत्व को पाकर हम आठों साध्वियां गदगद थी। शिक्षण ● दीक्षा को लगभग 1 - 1 1/2 माह बीते थे। एक बार...

"अद्वितीय व्यक्तित्व शासन माता का" - साध्वी गुप्तिप्रभा

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अध्यात्म की उच्चतम परम्पराओं, संस्कारों और मूल्यवान आदर्शों से जुड़ी एक समर्थ शख्शियत का नाम था शासनमाता। कर्मठता करुणा और कलात्मकता के संगम का नाम था शासनमाता । सहजता, सरलता और सहिष्णुता की अद्भुत प्रतिमूर्ति का नाम था शासन माता। संगम, समता और शांति की त्रिपथगा में अभिस्नात रहने वाली एक पवित्रात्मा का नाम था शासन माता । सृजनशीलता,संवेनशीलता एवं ग्रहणशीलता की महनीयता का नाम था शासन माता । विनय, विवेक और विद्या की अधिष्ठात्री सरस्वती स्वरूपा नारी का नाम था शासन माता। संकल्प की दृढता, व्यवहार कुशलता और अनुशासनप्रियता का अजब नजारा था उनका जीवन। आपने अपने जीवन में सदा सहजता की साधना की। वैराग्य की परिपुष्टता को बरकरार रखते गुरुदृष्टि की सदा आराधना की। गुरुदृष्टि कड़ी तो आपके लिए जीवित ही मरण था । यह विशेषता जिसमें हो उसका संसार में एक दुर्लभतम ग्रंथ बन सकता है। तेरापंथ की राजधानी पवित्रात्मा का जन्म व राष्ट्र की राजधानी में महाप्रयाण और वह भी होली के पवित्र दिन पर यह उन महनीयता का शुभ सूचक है। असाधारण साध्वी प्रमुखा के पद पर आने के बाद भी उनकी सहजता के प्रति जनजन का एक विशेष आकर्षण था। कर्तृ...

असाधारण साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का महाप्रयाण अपूरणीय क्षति - मुनि जिनेश कुमार

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कुछ लोग ज्ञान सम्पन्न होते हैं, किंतु शील सम्पन्न नहीं होते। कुछ लोग शील सम्पन्न होते हैं, किंतु, ज्ञान सम्पन्न नहीं होते। कुछ लोग ज्ञान सम्पन्न भी होते हैं और शील सम्पन्न भी होते हैं। कुछ लोग न ज्ञान सम्पन्न होते है और न ही शीत सम्पन्न होते हैं। जैन तेरापंथ धर्मसंघ की शासनमाता, महाश्रमणी संघ महानिर्देशिका, असाधारण साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ज्ञान सम्पन्न भी थे और शील सम्पन्न भी थे। वे तेरापंथ धर्मसंध की आठवी साध्वी प्रमुखा थी। असाधारण साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी  का जन्म एक साधारण बालिका की तरह वि. सं. 1998 श्रावण कृष्णा त्रयोदशी के दिन कोलकाता में हुआ। उनकी माता का नाम छोटी देवी व पिताजी का नाम सूरजमल जी बैद था। उन्होंने मात्र 15 वर्ष की उम्र अध्ययन हेतु पारमार्थिक शिक्षण संस्था में प्रवेश किया । चार वर्ष अध्ययन के पश्चात् अणुव्रत अनुशास्ता राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी के मुख कमल से राजस्थान के केलवा में 19 वर्ष की उम्र में मुमुक्षु कला ने वि.स. 2017 आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा के दिन  जैन साध्वी दीक्षा स्वीकार की। साध्वी बनने के बाद आचार्य श्री तुलसी ने उनका नाम कनकप्रभा रखा । साध्...