मोहनीय कर्म की तीव्रता से बचने का हो प्रयास : महातपस्वी महाश्रमण
28.07.2023, शुक्रवार, मीरा रोड (ईस्ट), मुम्बई (महाराष्ट्र), भारत की आर्थिक राजधानी के विख्यात मायानगरी मुम्बई महानगर बरसात के दिनों में भारी वर्षा के लिए भी जानी जाती है। इन दिनों मुम्बई में लगातार वर्षा का क्रम जारी है। इसके बावजूद भी मुम्बईवासी श्रद्धालु नन्दनवन में विराजमान अपने अराध्य, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में उनकी अमृतवाणी का रसपान करने के लिए नियमित रूप से उपस्थित होते हैं। अपने आराध्य के श्रीमुख से आगमवाणी और अपने पूर्वाचार्यों के जीवनवृत्त का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बना रहे हैं। शुक्रवार को नन्दनवन परिसर में बने तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित श्रद्धालु जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने भगवती सूत्र के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि तीन कर्म बंधनों की चर्चा के उपरान्त अब प्रश्न चौथे मोहनीय कर्म बंध के संदर्भ में प्रश्न किया गया कि मोहनीय कर्म का बंध कैसे होता है? उत्तर दिया गया कि तीव्र क्रोध, तीव्र मान, तीव्र लोभ, तीव्र मोह और तीव्र माया के कारण मोहनीय कर्म का बंध होता है। आठ ...