नशा नाश का द्वार है: साध्वी सुमनश्रीजी

अणुव्रत समिति जोधपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कैदियों ने लिए नशामुक्ति के संकल्प

 जोधपुर। 25 मई। 'जीवन में अपराध की पृष्ठभूमि में नशा या व्यसन है। व्यक्ति नशे की लत में पड़कर अपराधी बनने की ओर कदम बढाता है। अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी ने अणुव्रत के माध्यम से आचार संहिता के अंतर्गत मानवीय एकता तथा नैतिक मूल्यों के संवर्धन का महनीय कार्य किया। वर्तमान अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी उसी तरह अहिंसा यात्रा के माध्यम से व्यसन मुक्ति का सन्देश दे रहे हैं।  देश भर में हजारों कि.मी. की यात्रा कर लोगों को नशा नही करने का संकल्प करवा कर मानव सेवा का बहुत महनीय कार्य कर रहे हैं।'
उक्त विचार साध्वीश्री सुमनश्रीजी ने जोधपुर सेंट्रल जेल के संस्कार हॉल में समुपस्थित कैदियों को संबोधित करते हुए रखें। साध्वी श्री ने सभी कैदियों को नशामुक्त होने का संकल्प करवाया।
इस अवसर पर साध्वीश्री सुरेखाजी ने प्रायोगिक प्रयोग करवा कर सुधार गृह में कैदियों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अणुव्रत महासमिति के महामंत्री श्री मर्यादाकुमार कोठारी ने अणुव्रत आचार संहिता के नियमों की व्याख्या की। अणुव्रत समिति जोधपुर के अध्यक्ष श्री सोहनराज तातेड़ ने अणुव्रत को जीवनोपयोगी बताते हुए उसके महत्व के बारे में समझाया। इस अवसर पर अणुव्रत समिति द्वारा अणुव्रत आचार संहिता का पट्ट जेल प्रशासन को भेंट किया गया। इस अवसर पर श्री शिखरचंद दुगड़,  केन्द्रीय जेल के अधीक्षक एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अणुव्रत समिति जोधपुर के मंत्री श्री महावीर चौपड़ा ने किया।

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