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Showing posts from June, 2014
अहंकार करता है विनय का नाश: आचार्य श्री महाश्रमण
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Sanjay Mehta
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दिल्ली। पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने आज लक्ष्मीनगर में उपस्थित धर्मसभा को पावन पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि- आदमी के भीतर वृतियों का एक समूह विद्यमान है। उनमे से एक वृति है अहंकार और मान। अहंकार वो तत्व है जो विनय का नाश करनेवाला है। अभिमान कह दे, अहंकार कह दे, मान कह दे, गर्व कह दे, एकार्थक चीजे है। अभिमान मदिरापान के सामान है, मदिरापान है। ये गौरव, गर्व और रौरव नरक के समान है, इन तीनों को छोड़ कर आदमी सुखी बने। कुछ प्राप्त हो जाता है तो कई बार आदमी अहंकार ग्रस्त हो जाता है। ऐश्वर्य मिल गया, सत्ता हाथ में आ गयी तो आदमी मदान्ध बन जाता है हालांकि सब बने ये आवश्यक नहीं है लेकिन सत्ता में मदान्धता हो सकती है। आदमी के पास धन आ जाता है, धन भी घमंड का कारण बन सकता है। एक आदमी के पास धन आ गया और वो धन का परित्याग नहीं कर सकता वह दरिद्र बन जाता है। आचार्य भिक्षु के समक्ष किसी ने कहा- जिसके पास कुछ नहीं होता वह निर्धन होता है उसे दरिद्र कहा जाता है। परन्तु भिक्षु स्वामी ने पद में नयी बात कही । वह पद इस प्रकार है - घर में धन पिण दरिद्री इत्ती ...
दक्षिण हावड़ा में साध्वी अणिमाश्री जी व साध्वी मंगलप्रज्ञा जी के सान्निध्य में चित समाधि कार्यशाला
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PANKAJ DUDHORIA
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दक्षिण हावड़ा 21 जून 2014, साध्वी श्री अणिमा श्री जी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ठाणा – 6 का दक्षिण हावड़ा ऐतिहासिक सफलतम चातुर्मास के पश्चात विभिन्न उपनगरों का भ्रमण करते हुए पाँच दिवसीय प्रवास हेतु दक्षिण हावड़ा पदार्पण हुआ । महासभा भवन से विशाल एवं भव्य जुलुस के साथ दक्षिण हावड़ा तेरापंथ भवन में प्रवेश हुआ। भव्य उपस्थिति चातुर्मास की स्मृति करवा रही थी। तेरापंथ सभा द्वारा स्वागत कार्यक्रम के साथ साथ महिला मण्डल द्वारा काफी संख्या में भाई – बहनों ने भाग लिया। साध्वी श्री अणिमा श्री जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा – जन्म और जीवन दोनों अपने आप में महत्वपूर्ण है किन्तु जन्म जन्म में चित समाधि हो न हो फर्क नहीं पड़ता किन्तु जीवन में उमंग , उत्साह , आनंद और अनुपम संतुष्टि के लिए चित समाधि की जरूरत है। बिना चित समाधि के भी जीवन तो कदम दर कदम आगे बढ़ता ही है किन्तु उसमें समरसता का अमृत नहीं होता। जीवन में जीवटता हो , कर्म में कर्मठता हो , पराक्रम में प्रचण्डता हो इस हेतु चित समाधि की हर दिन ही नहीं हर पल आवश्यकता रहती है। चित समाधि की प्राप्ति के अनेक...
गाजियाबाद में आचार्य श्री महाश्रमणजी का नागरिक अभिनंदन
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Sanjay Mehta
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गाजियाबाद, 19 जून 2014 गाजियाबाद महानगर परिषद के महापौर श्री तेलुराम कम्बोज ने कहा कि वर्तमान की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंसक एवं आतंकवादी गतिविधियों के बीच अहिंसा की शक्ति को तेजस्वी बनाना जरूरी है। अहिंसक समाज रचना से ही अनेक समस्याओं का समाधान संभव होगा। जिस तरह महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में अहिंसा की शक्ति को तेजस्वी बनाया ठीक उसी तरह आचार्य श्री महाश्रमण ने अपने कार्यक्रमों और जीवनशैली से अहिंसा को शक्तिशाली बना रहे हैं। श्री कम्बोज आज सूर्यनगर एज्युकेशनल सोसायटी द्वारा संचालित विद्या भारती स्कूल में अणुव्रत अनुशास्ता, अध्यात्म के महान साधक, समाज सुधारक, राष्ट्रसंत एवं अहिंसा के प्रखर प्रवक्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के नागरिक अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। श्री कम्बोज ने संपूर्ण गाजियाबाद वासियों की ओर से उनका अभिनंदन किया और महानगर परिषद गाजियाबाद की ओर से अभिनंदन पत्र समर्पित किया। विदित हो कि आचार्य श्री महाश्रमण अपनी धवल सेना के साथ राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली की पदयात्रा करते हुए आज गाजियाबाद पधारे। श्री कम्बोज ने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण का गाजियाब...
Mangal Path - Acharya Mahashraman Ji Prastuti : Amritvani
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PANKAJ DUDHORIA
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Uss aadmi ka jivan dhanya hota hai - Aacharya Shree Mahashraman Ji, Prastuti : Amritvani
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PANKAJ DUDHORIA
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Aacharya Shree Mahashraman Ji ki Prerak Kathaye Part - 61, Prastuti : Amritvani
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PANKAJ DUDHORIA
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दिल्ली शाहदरा में आचार्य महाश्रमण ने प्रदान की दो मुनि दीक्षा
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Sanjay Mehta
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दिल्ली। 18 जून। पूज्य आचार्य महाश्रमणजी ने आज दिल्ली के यमुनानगर स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्ष में विशाल जनमेदिनी की उपस्थिति में मुमुक्षु नमन डागा एवं मुमुक्षु जयश बरलोटा को दीक्षा देते हुए फरमाया कि- दसवेआलियं साधू साध्वियों के लिए संजीवनी है। इसका निर्युहण विशेष प्रयोजन से हुआ है। ज्ञान अनंत-अपार है एवं हमारे पास काल कम है। ऐसे में दसवेआलियं जैसा सारपूर्ण आगम बड़ा महत्त्वपूर्ण है। उसमें बताया गया कि - भिक्षु वह होता है जो गृह त्याग कर, संयोग से मुक्त होकर, निष्क्रमण करने वाला एवं आगम वाणी में जिसका चित्त स्थिर हो। आज ये इक्षु जैसे मीठे बालक भिक्षु बन रहे है। आगम में कहा गया कि आठ वर्ष का व्यक्ति केवलज्ञानी बन सकता है, तो हमारे यहा विधान है आठ वर्ष की आयु पूर्ण करने पर दीक्षा हो सकती है। आचार्य प्रवर ने श्रमण संघ के उपाध्याय मुनि रविन्द्रकुमारजी के दीक्षा समारोह में सम्मिलित होने पर हार्दिक प्रसन्नता जताई। पूज्यप्रवर ने कम आयु के विराजित सभी साधू-साध्वियों का नाम लेकर उनके बारे में जनमेदिनी को परिचय दिया एवं उनसे उनके शिक्षा आदि के बारे में पूछा। पूज्यप्रवर ने मुमुक्षु नम...
दीक्षा के कुछ यादगार पलों की तस्वीर
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PANKAJ DUDHORIA
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श्रद्धा, विवेक एवं क्रिया युक्त हो वही श्रावक : आचार्य श्री महाश्रमणजी
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Sanjay Mehta
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दिल्ली। 16 जून। पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने पावन पाथेय में फरमाया कि- जीव को जानने वाला व्यक्ति संयम को जान सकता है। मूलभूत तत्व है जीव। जीव है तभी संयम की बात है। ऐसा जरुरी नहीं की सब साधू बन जाये। कोई कोई भाग्यशाली आत्मा ही ऐसी होती है जिसे साधू बनने का मौका मिलता है। मुमुक्षु बालको का भाग्य है कि उनको ऐसा मौका मिल रहा है। परमपूज्य आचार्य तुलसी 12 साल की उम्र में साधू बन गए थे। आचार्य महाप्रज्ञ जी उनसे भी कम 11वर्ष की उम्र में साधू बन गए।"ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया जैसी बात हो गई।" इस धर्मसंघ को तो छोटी उम्र के ही साधू मिल रहे हैं। जैन शासन में कम से कम 8 वर्ष की उम्र के बाद दीक्षा लेना सम्मत है। हमने 100 दीक्षाओ का संकल्प किया। उस समय नियति का योग था की 43 दीक्षाए एक साथ हुई। मेरा तो मानना है कि जब भाग्योदय होता तब साधू बनने का मौका मिलता है। साधू तो सब नहीं बन सकते पर एक मार्ग खुला है-अणुव्रत का मार्ग-अगार धर्म। श्रावक होना भी बड़ी बात है ,आप लोग साधू न बन सके तो कुछ अंशो में संयमी तो बनें। पूज्यप्रवर ने श्रावक की व्याख्या करते हुए कहा कि - श्रावक कैस...
अणुव्रत अनुशास्ता, गणाधिपति परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर जैन तेरापंथ परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजली
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PANKAJ DUDHORIA
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संपादकीय अणुव्रत अनुशास्ता, गणाधिपति परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर जैन तेरापंथ परिवार की ओर से भावांजली । दीर्घद्रष्टा गुरुदेव श्री तुलसी का विरल व्यक्तित्व, तेजोमय आभामंडल व प्रसन्न मुखमुद्रा जन-जन को आकर्षित करने वाला था। भारत देश की आज़ादी के बाद भी देश रुढीचुस्त परम्परा से प्रभावित था। ऐसे समय पर पूज्य गुरुदेव ने अणुव्रत का सन्देश दे कर पुरे भारत भर में मानव को मानव बनाने के लिए अथक परिश्रम किया, जिनका मानना था "इन्सान पहले इन्सान, फिर हिन्दू या मुसलमान" ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी आचार्य श्री तुलसी के हम जीतने गुण गान करे, वह कम है । आज आचार्य श्री तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर सभी भाई-बहिनों से विनम्र निवेदन है की हम सब "अणुव्रत" का कोई भी एक संकल्प स्वीकार कर युगपुरुष गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करे । गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी सन् 1914 में कार्तिक शुक्ल दूज को चंदेरी (लाड़नूं) की धरती पर जन्म लेने वाले आचार्य तुलसी ने 11 वर्ष की उम्र में भागवती दीक्षा स्वीकार कर जैन...
Uthoo Pramad Mat Karo - Aacharya Shree Mahasrman Ji
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Aachar Ka Darpan - Aacharya Shree Mahasrman Ji
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Utho Pramad Mat Karo - Aacharya Shree Mahasrman Ji
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Dharmik Kaisa Ho - Mantri Muni Sumermal Ji
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Aatma Ka Swabhav - Aacharya Shree Mahashrman Ji
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Anuvrat Se Rastra Utthan - Aacharya Shree Mahashrman Ji
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Dharam Kab Tak Kare - Aacharya Shree Mahashrman Ji
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Jain Sanskar Vidhi Educational Video (जैन संस्कार विधि)
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ABTYP JTN
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बंगाल स्तरीय जैन संस्कार कार्यशाला आयोजित
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Sanjay Mehta
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कोलकाता। ८ जून २०१४. अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वाधान में तेरापंथ युवक परिषद कोलकाता द्वारा साध्वीश्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वीश्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में आयोजित बंगाल स्तरीय जैन संस्कार विधि कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री विमल कटारिया ( कोषाध्यक्ष अभातेयुप ) मुख्य अतिथि श्री विनोद आंचलिया ( युवा उधोगपति ) विशिष्ट अतिथि श्री रतन दुगड़ ( परामर्शक अभातेयुप ) श्री तुलसी दुगड़ ( पंचमंडल अभातेयुप ) मुख्यवक्ता श्री प्रफुल्ला बेताला ( पूर्व महामंत्री अभातेयुप एवं तेयुप कोलकाता शाखा प्रभारी ) उपस्तिथ थे . तेरापंथ भवन के खचाखच भरे प्रवचन हाल में तेयुप कोलकाता के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्तिथ थे। कोलकाता महानगर की विभिन संघीय संस्थाओं के पदाधिकारी गण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्तिथ थे । उपासक वर्ग एवं संस्कारक भी काफी संख्या में उपस्तिथ थे। तेयुप कोलकाता के साथियों द्वारा मंगलाचरण एवं विजय गीत से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम का विधिवत उद्धघाट्न अभातेयुप पंचमंडल श्री तुलसी जी दुगड़ ने किया । उसके पश्चात तेयुप कोलकाता अध्यक्ष श्री पारस बां...
दिल्ली के दिलों दिमाग में छाएँ नैतिकता : आचार्य श्री महाश्रमण
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Sanjay Mehta
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दिल्ली। 08 जून। पूज्य आचार्य महाश्रमणजी के दिल्ली आगमन पर आज तालकटोरा स्टेडियम में अनेक गणमान्यों एवं विशाल जनमेदिनी की उपस्थिति में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया एवं दिल्ली नगर निगम द्वारा प्रतीकात्मक रूप से एक चाबी पूज्यप्रवर को भेंट कर यह निवेदन किया गया कि यह दिल्ली की चाबी आपके हाथों में है और आपको इसका निर्माण करना है। परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी ने इस अवसर पर फ़रमाया कि- हमारे जीवन में ज्ञान का बहुत महत्त्व है और ज्ञान से पवित्र कोई वास्तु दुनिया में नही है। हम प्रदार्थ पर ध्यान देते है पर चेतना पर भी ध्यान देना है। लौकिक विद्या को भी पढ़ना अवश्यक है, किन्तु अलौकिक विद्या का अध्धयन कुछ अंशों में चले तो विद्यार्थियों के लिए कल्याणकारी स्थिति हो सकती है। शरीर विनाशधर्मा है किन्तु चेतना ऐसा तत्व है जो कभी नष्ट नहीं होता है। चेतना एक स्थायी तत्व है जो हमारे भीतर है। हम शरीर को जाने पर कुछ अंशों में चेतना को न जाने तो चेतना के साथ न्याय कैसे होगा? एक जीवन से दुसरे जीवन में आत्मा परिभ्रमण करती है। तब तक ये परिक्रिया चलती है जब तक मोक्ष को प्राप्त न करे। चेतना को समझने के...
आचार्य महाश्रमण जी का किया गया नागरिक अभिनंदन
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Sanjay Mehta
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दिल्ली। 08 जून। पूज्य आचार्य महाश्रमणजी आज प्रात: राजेन्द्र नगर से विहार कर तालकटोरा स्टेडियम पधारे जहां पूज्यप्रवर का नागरिक अभिनंदन समारोह समायोजित था। कार्यक्रम का शुभारम्भ समूह गीत 'ये स्वागत के पल भेट करे हम भावो के मुक्ताफल' के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक विश्लेषक श्री वैदप्रताप वैदिक, पंजाब केसरी समाचारपत्र समूह की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चौपडा, सांसद श्री प्रवेश वर्मा, सांसद उदित राज, पूर्वी दिल्ली के सांसद श्री महेश गिरी, दक्षिणी दिल्ली के सांसद श्री रमेश बिधूड़ी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री बजरंगलाल गुप्ता, दिल्ली सभा एवं प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल जैन, मंत्री श्री शांतिलाल जैन सहित अनेकों मान्यवरों ने पूज्य आचार्य महाश्रमणजी का दिल्ली आगमन पर हार्दिक अभिनंदन किया। वरिष्ठ पत्रकार श्री वेदप्रताप वैदिक ने पूज्यप्रवर से आग्रह किया कि पूज्यप्रवर विदेशों में जाकर भी विशेष कर पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान की यात्रा कर वहा भी अहिंसा, शान्ति, संयम एवं मैत्री का सन्देश प्रसारित करे। सांस...
सेवा, सहिष्णुता, मैत्री एवं अनुशासन अच्छे कार्यकर्ता के गुण: आचार्य महाश्रमण जी
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Sanjay Mehta
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आचार्य श्री महाश्रमण जी के दिल्ली शुभागमन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने उनका हार्दिक अभिनन्दन किया . आचार्य श्री महाश्रमण जी ने केशव कुञ्ज में कार्यकर्ता स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया . आचार्य श्री ने कार्यकर्ताओं के लिये सात सूत्र बताये . उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता में सबसे पहला गुण सेवा भाव का होना चाहिये . कार्य तो हर कोई करता है , भोजन करना , स्नान करना आदि सब अपने लोग अपने काम करते है , उन्होंने पूछा , लेकिन क्या ये सब कार्यकर्ता हो गये ? दूसरों के लिये निष्ठापूर्वक स्वयं अपनी सुविधा को छोड़कर भी काम करने की भावना कार्यकर्ता में होनी चाहिये . सहिष्णुता को दूसरा अनिवार्य गुण बताते हुए जैन मुनि ने कहा कि कार्यकर्ता में कठिनाइयों को झेलने की क्षमता होनी चाहिये . एक कार्यशील व्यक्ति के सामने विपरीत परस्थितियां आ सकतीं हैं . कहीं यात्रा में ऊबड़ - खाबड़ जमीन पर सोना पड़ सकता है , सादा भोजन भी करना पड़ सकता है . इसी प्रकार , कहीं पर अच्छा भोजन , कहीं सम्मा...
संयम से व्यक्तित्व विकास : आचार्य महाश्रमणजी ने पत्रकार वार्ता में कहा
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Sanjay Mehta
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महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के दिल्ली आगमन पर आयोजित नागरिक अभिनंदन के पूर्व दिवस पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन रखा गया. करीब 50 पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों / प्रतिनिधियों ने आचार्य प्रवर की सन्निधि में आयोजित इस प्रेस वार्ता में सहभागिता दर्ज की. पूज्यप्रवर ने प्रेस वार्ता के शुरुआत में कहा कि – जैन तेरापंथ धर्मसंघ के नवम आचार्य श्री तुलसी ने अणुव्रत के माध्यम से मानवता की सेवा की थी. हमारा दिल्ली आगमन का मुख्य कारण आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह मनाने के लिए आना है. यह पूरा वर्ष आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाना निर्णित किया गया है. जिसके दो चरणों की समायोजना हो चुकी है एवं दो चरण दिल्ली में समायोजित होंगे. आचार्य श्री तुलसी ने संयम की प्रेरणा दी. हमने भी आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष पर “जन-जन में जागे विश्वास, संयम से व्यक्तित्व विकास” का उद् घोष दिया है.’ पूज्यप्रवर ने पत्रकार बंधुओं को आगामी चातुर्मासों, मर्यादा महोत्सवों एवं यात्रा की जानकारी भी प्रदान की. संभागी पत्रकारों द्वारा पूज्यप्रवर के समक्ष कुछ जिज्ञासाएं रखी गयी जिसका प...