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Showing posts from July, 2014

आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में विवेक ओबेरॉय के हाथों MBDD II का बैनर अनावरण

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दिल्ली। 28 जुलाई 2014। आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में फिल्म अभिनेता विवेक ऑबेराय के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश नाहर द्वारा ‘मेगा ब्लड डॉनेशन’’ के बैनर का लोकार्पण किया गया। श्री विवेक ओबेरॉय ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि- मैंने कुछ दिनों पूर्व ही पहली बार पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी के दर्शन किए थे और अब बार बार आने का मन करता है। इस अवसर पर अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर, अणुव्रत महासमिति महामंत्री एवं अभातेयुप सलाहकार (मीडिया) श्री मर्यादाकुमार कोठारी, अभातेयुप पूर्व अध्यक्ष एवं सलाहकार (हॉस्टल परियोजना) श्री गौतमचंद डागा,  कोषाध्यक्ष एवं MBDD II के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक श्री विमल कटारिया, सहमंत्री श्री संजय जैन, MBDD II के राष्ट्रीय संयोजक श्री हितेश भांडिया, अभातेमम अध्यक्षा सूरजदेवी बरडिया, दिल्ली प्रवास व्यवस्था समिति अधयक्ष श्री कन्हैयालाल पटावरी, पंजाब लधु उद्योग मंडल के वाइस चेयरमैन श्री सुखविंदर सिंह एवं दिल्ली तेयुप टीम के युवा उपस्थित थे। रिपोर्ट: रिशभ जैन, संजय वैदमेहता, प्रस्तुति: ...

कन्या मंडल राष्ट्रीय अधिवेशन "ओजस" का हुआ आगाज

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पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा आयोजित 28 से 29 जुलाई तक चलने वाले दो दिवसीय 11वें वार्षिक राष्ट्रीय कन्या अधिवेशन ‘ओजस’ का आज शुभारम्भ हुआ।  सैकड़ों की संख्या में उपस्थित कन्याओं के अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमणजी ने फरमाया कि- जिस मनुष्य में कुछ बनने की कामना होती है उसमें जिज्ञासा होनी चाहिए। कुछ करने की भावना व्यक्ति में होनी चाहिए। हाथी विशालकाय होता है किंतु एक छोटा अंकुश बहुत बड़े हाथी को नियंत्रित कर लेता है, अंधेरे को एक दीपक से दूर किया जा सकता है इसी प्रकार युवा अपने जीवन में तेजस्विता का विकास करे, जिस मनुष्य में जितनी तेस्विता होती है वह उतना ही अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भीतर ओज करुणा, संवेदनशीलता, ईमानदारी, नैतिकता का विकास हो, करुणा की चेतना जागृत हो तो अपनी तेजस्विता का विकास हो सकता है। इस अवसर पर मंत्री मुनि सुमेरमल स्वामी ने कहा कि जहां जीवन का प्रारंभ होता है वहां कई उमंग होती है, उमंगों को पूरी करना चाहते हो तो जीवन को संयमित, व्यवहारिक बनाना चाहिए। ...

अपने से अपना अनुशासन ही अणुव्रत : आचार्य श्री महाश्रमण

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65वें अणुव्रत अधिवेशन के दुसरे दिन के पंचम सत्र में पूज्य गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हुआ।देशभर से लगभग 250 अणुव्रत कार्यकर्ता अधिवेशन में उपस्थित रहे। विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।स्वागत व्यक्तव्य अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री डालचंद कोठारी ने दिया।राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में अणुव्रत का योगदान विषय पर विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष श्री नायकजी और राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल ने अपने विचार रखे।मुख्य वक्ता के रूप में डा. ओमप्रकाशजी पाण्डेय(साईंन्टिस्ट) उपस्थित रहे।श्री अशोक सिंघल ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत में अणु का नाम लिया है, जब अणु का प्रसार होता है तो वह विशाल रूप ले लेता है और जब उस अणु के साथ व्रत जुड़ जाता है तो मानव जीवन सार्थक हो जाता है।अणुव्रत किसी सम्प्रदाय विशेष का आन्दोलन नहीं है बल्कि सभी संप्रदायों के लिए है। पूज्य प्रवर ने अपने उदबोधन में फ़रमाया कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत का प्रवर्तन किया और अणुव्रत का अर्थ बताते हुए कहा कि अपने से अपना अनुशा...

मूल्यों की पुन: स्थापना अणुव्रत के द्वारा ही संभव : साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी

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दिल्ली। 26 जुलाई। 65 वें अणुव्रत अधिवेशन के दुसरे दिन के आठ्वें चरण में महाश्रमणी साध्विप्रमुखा कनकप्रभाजी और मुख्य नियोजिका साध्वीश्री विश्रुतविभा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ।संस्कृति की सुरक्षा अणुव्रत के द्वारा विषय पर व्यक्तव्य देते हुए मुख्य नियोजिकाजी ने अपने उद्धबोधन में कहा कि जिस देश में चरित्रबल ऊँचा रहता है वह देश प्रगति करता है और उस देश की संस्कृति सुरक्षित रहती है। अणुव्रत देश के लोगों के चरित्र निर्माण करने का आन्दोलन है।लघु में अगर विराटता का अनुभव करना हो तो अणुव्रत को देखें।छोटे छोटे नियमों द्वारा विराट चरित्रबल का निर्माण हो सकता है।अणुव्रत समिति के कार्यकर्ता अणुव्रत के दर्शन को समझें और अपने जीवन में उतारें। साध्विवृन्द ने अणुव्रत पर गीतिका का संगान किया। महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने अपने उद्धबोधन में कहा अणुव्रत ने एक लम्बी यात्रा तय की है।कोई भी कार्य या आन्दोलन चलता है तो यह प्रशन उठता है कि उसकी प्रासंगगिकता है या नहीं। अणुव्रत के बारे में ये प्रश्न नहीं उठता है। अणुव्रत आन्दोलन के साथ कई और आन्दोलन भी देश भर में चले लेकिन उनका आज कोई अस्तित्व दिखाई नहीं देता...

आचार्य महाश्रमण से साक्षात्कार

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साक्षात्कार: आचार्य महाश्रमण संत साधुत्व की सीमा में रहकर राजनीतिज्ञों का मार्गदर्शन करें: आचार्य महाश्रमण प्रस्तुति: ललित गर्ग आचार्य महाश्रमण इन दिनों अध्यात्म साधना केन्द्र, मेहरौली दिल्ली में अपना चातुर्मास कर रहे हैं। इससे पूर्व वे संपूर्ण दिल्ली में पदयात्रा करते हुए जन-जन को अपने आध्यात्मिक उपदेशों से प्रेरित किया। जिसका सार है- ‘रहें भीतर, जीएं बाहर।’ उन्होंने सगुण-साकार भक्ति और जोर दिया है, जिसमें निर्गुण निहित है। हर जाति, वर्ग, क्षेत्र और सम्प्रदाय का सामान्य से सामान्य व्यक्ति हो या कोई विशिष्ट व्यक्ति हो- सभी में विशिष्ट गुण खोज लेने की दृष्टि आचार्य महाश्रमण में है। गुणों में मधु की भांति संचित कर लेते हैं।ं परस्पर एक-दूसरे के गुणों को देखते हुए, खोजते हुए उनको बढ़ाते चले जाना आचार्य महाश्रमण के विश्व मानव या वसुधैव कुटुम्बकम् के दर्शन का द्योतक है। आचार्य महाश्रमण के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व के अनेक आयाम है उनमें मुख्य हैं- नैतिक मूल्यों के विकास एवं अहिंसक चेतना के जागरण हेतु कटिबद्ध, मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के सजग प्रहरी, अध्यात्म दर्शन और संस...

आचार्य तुलसी थे महान योगी : आचार्य महाश्रमण

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दिल्ली. २३ जुलाई. गांधी सेवा सदन राजसमन्द द्वारा प्रकाशित एवं डॉ. महेंद्र कर्णावट द्वारा लिखित पुस्तक “योगी से युग पुरुष” ले लोकार्पण समारोह में उपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने फरमाया कि- आर्हत वांग्मय के अनुसार मोक्ष का उपाय योग है. योग का सही अर्थ सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन एवं सम्यक चारित्र का योग होना है. इनकी आराधना करनेवाला सच्चा योगी है. योग को केवल आसन प्राणायाम ना माने. अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह की साधना योग की साधना है. योग का अर्थ है जोड़ना, मोक्ष से जोड़ने वाला, मोक्ष की ओर अग्रसर करने वाला योग है. आचार्य तुलसी स्वयं तो योगी थे एवं योगियों का निर्माण करनेवाले थे. आचार्य तुलसी अपने युग के महान पुरुष थे. उन्होंने अणुव्रत यात्रा की. उनके युग में अणुव्रत-प्रेक्षाध्यान-जीवन विज्ञान की पद्धति प्रारम्भ हुई. दक्षिण यात्रा के समय उन्हें युगप्रधान से अलंकृत किया गया. इस अवसर पर श्रद्धेय मंत्री मुनि श्री सुमेरमलजी ने फरमाया कि- आचार्य श्री तुलसी के आयामों को जन-व्यापी बनाना ही उनके प्रति हमारी सच्ची भावांजलि होगी. साध्वीप्रमुखा...

अणुव्रत संकल्प यात्रा

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प्रस्तुति : जैन तेरापंथ न्यूज़ ब्यूरो से प्रमोद छाजेड (पनवेल), पंकज दुधोड़िया (कोलकाता)

तप की विविधता - आचार्य महाश्रमण

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विद्यार्थियों के लिए त्रिपदी - आचार्य महाश्रमण

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श्रावक के बारह व्रत - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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आचार्य महाश्रण जी का दिल्ली चातुर्मास : झलकियाँ : 18.07.14

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आचार्य महाश्रण जी का दिल्ली चातुर्मास  झलकियाँ : 18.07.14

व्यापारी अणुव्रत को अपना प्रमाणिक बने

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मुम्बई:- अणुव्रत महासमिति निर्देशित एवं अणुव्रत समिति मुंबई के तत्वाधान में अणुव्रत उपसमिति उत्तर मुंबई 2 द्वारा तेरापंथ भवन भाईन्दर में मुनिश्री संजय कुमारजी मुनिश्र...

अहंकार विसर्जन है बड़ी तपस्या : आचार्य महाश्रमण

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आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान सभागार में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अहंकार व्यक्ति की चेतना को आवृत्त करता है। अहंकार आनन्द और मुक्ति का बाधक तत्व है। यह व्यक्ति केा पतन के गर्त में डाल देता हैं। इसलिए मनुष्य को अहंकार से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। सुप्रसिद्व जैन आगम ‘गाथा’ पर प्रेरक प्रवचन देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि व्यक्ति को, विद्वता, का सत्ता, का ज्ञान, का किसी का भी अहंकार नहीं करना चाहिए। यहां तक की तपस्वी अपनी तपस्या को भी गुप्त रखे ज्यादा प्रचारित न करें। वास्तव में अहंकार विसर्जन भी बहुत बडी तपस्या है। आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में इस चातुर्मास में तुलसी यशो विलास’‘का वाचन करते हुए आचार्य श्री ने सबको शालीनता एवं विनम्रता का भाव पुष्ट रखने की प्रेरणा भी दी। मुनिश्री दिनेश कुमार जी का सामयिक वक्तव्य हुआ।

धर्म कभी न बने युद्ध एवं अशांति का कारण : आचार्य महाश्रमण

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13 जुलाई, 2014। नई दिल्ली। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान सभागार में अणुव्रत विश्व भारती द्वारा आयोजित ‘'शांति के लिए अंतः धार्मिक समझ एवं सहयोग पर राष्ट्रीय संवाद’’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में आचार्यश्री महाश्रमण ने सम्मेलन में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्नता में एकता है, यहां भिन्न-भिन्न भाषा, भिन्न धर्मों के जैन, बौद्ध, सिक्ख, ईसाई, मुस्लिम आदि सभी धर्मों के लोग रहते हैं। भारत में अनेक जातियां, संप्रदाय हैं यहां अनेकता में एकता की विशेषता है। एकता का आधार बिन्दु अहिंसा भाव, मैत्री भाव है। भारत के सभी धर्मगुरु अपने अनुयायियों को नैतिकता, शांति, अहिंसा और मैत्री के रास्ते पर चलाने का पाठ पढायें। धर्म कभी युद्ध का, अशांति का कारण न बने। धर्म शांति और सौहार्द का कारण बने, सब सम्प्रदायों का मालिक एक है ‘सत्य’ सत्य के अनन्त आकाश में उड़ान भरने के लिए अनेकान्त के पंखों की जरूरत है। सन्त महर्षियों को भूमि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान का खजाना रही है। भारत को पुनः स्वर्ग...

आचार्य भिक्षु जैसा योग्य गुरु ही अपने शिष्य को विश्व कल्याण की दिशा में आगे बढा सकता है

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जैन तेरापंथ न्यूज़ फाइल फोटो  13/07/2014, नई दिल्ली, । अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान सभागार में २५४वां तेरापंथ स्थापना दिवस मनाया गया। खचाखच भरे पण्डाल में जनमेदनी को संबोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि तेरापंथ के आद्यप्रवर्तक आचार्य भिक्षु में पौरूष , तेजस्विता , श्रद्धानिष्ठा , संयम साधना , एवं समर्पण का बल था। तेरापंथ की स्थापना उन्होंने की नहीं स्वतः ही हो गई। उनमें ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षयोपशम बहुत ज्यादा था इसी वजह से उनके सिद्धांत , उनकी मर्यादाएं आज और भी ज्यादा उपयोगी है। आचार्य भिक्षु जैसा योग्य गुरु ही अपने शिष्य को विश्व कल्याण की दिशा में आगे बढा सकता है। आज गुरु पूर्णिमा के दिन हम अपने गुरु को श्रद्धा , सम्मान समर्पित करते हैं और ऐसी मंगल कामना करते है कि हम अपने पुरखों को आज जैसे याद कर रहे हैं। हम भी इतने महान कार्य करें कि आने वाली पीढयां हमें भी सम्मान से याद करें। आचार्यश्री महाश्रमण ने प्रेरक प्रवचन में कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ एक मर्यादित संगठित है , एक आचार्य की आज्ञा में सब चले यह स...

Acharya Mahapragya's Ahimsa Yatra - Shanti Ka Sandesh

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Acharya Mahapragya : Philosophy of Death - Samadhikaran 3/3

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Acharya Mahapragya : Philosophy of Death - Samadhikaran 2/3

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Acharya Mahapragya : Philosophy of Death - Samadhikaran 1/3

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Acharya Tulsi: Bhikshu jis yug mei

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Mahapran Gurudev - Kaise wah Komal Kaya

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Acharya Tulsi: various songs

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Terapanth Historical Clips 3 of 4

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Terapanth - Historical Clips

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Terapanth Historical Clips 2

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Aacharya Shri Tulsi- Jeevan Darshan

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Various Mantra by Acharya MahaShraman

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New Year 2014 Blessings by Acharya Shree Mahashraman नव वर्ष मंगलपाठ

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अमृतवाणी तेरापंथ 04 Path of Religion धर्म पथ आचार्य तुलसी प्रवचनमाला Acharya Tulsi Lectures

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अमृतवाणी तेरापंथ 03 Bhikshu Path भिक्षु पथ Acharya Tulsi Lectures आचार्य तुलसी प्रवचनमाला

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अमृतवाणी तेरापंथ 02 Aagam Path आगम पथ आचार्य तुलसी प्रवचनमाला भाग 02 Acharya Tulsi Lectures

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अमृतवाणी तेरापंथ 01 Path Of Knowledge ज्ञान पथ Acharya Tulsi Lectures (आचार्य तुलसी प्रवचनमाला)

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अमृतवाणी 05 Path of Eternity परम पुरुषार्थ पथ आचार्य तुलसी प्रवचनमाला भाग 05 Acharya Tulsi Lectures

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Amritvani 50 Illumine of Faith श्रद्धा का प्रकाश Acharya Tulsi Lecture

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चातुर्मास है आत्मा के अभ्युदय का अवसर : आचार्य महाश्रमण

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चातुर्मास का शुभारंभ एवं श्रावण मास आत्मा के अभ्युदय का अवसर है, यह एक तपोयज्ञ का अवसर है, जिसमें सिर्फ शरीर ही नहीं, मन, इन्द्रियां कषाय सभी कुछ तपते है। ‘अनशन’ निश्चित ही स्पृहणीय, करणीय और अनुमोदनीय तप है। उपवास, बेला (दो दिन का उपवास), (तीन दिन का उपवास) आदि तपस्याएं उसके अंतर्गत हैं। श्रावण-भाद्रव मास में जैन लोग विशेष रूप से तपस्या का प्रयोग करते हैं। यथाशक्ति, यथास्थिति वह होना भी चाहिए। कुछ लोग शारीरिक दौर्बल्य अथवा अन्य करणीय कार्यों की व्यस्तता के कारण प्रायः तपस्या नहीं कर सकते, उन्हें निरुत्साह होने की जरूरत नहीं। उन्हें ‘ऊनोदरी’ पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। निर्जरा के बारह भेदों में दूसरा भेद है ऊनोदरी। उसे ऊनोदरिका, अवमौदर्य अथवा अवमोदरिका भी कहा जाता है। ‘ऊन’ का अर्थ न्यून, कम। उदर का अर्थ है पेट। उदर को ऊन रखना, खाने में कमी करना ऊनोदरी तप है। ऊनोदरी  का यही अर्थ अधिक प्रचलित एवं प्रसिद्ध है। वहां ऊनोदरी के दो प्रकार बतलाए गए हैैैं- पहला द्रव्य अवमोदरिका एवं दूसरा भाव अवमोदरिका। अवमोदरिका का तात्पर्य है अल्पीकरण अथवा संयम। द्रव्य अवमोदरिका का अर्थ है उपभोग-प...

अहिंसा से विश्वशान्ति संभव : आचार्य श्री महाश्रमण

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पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि- शास्त्रों में बताया गया है:- शस्त्र से उपरत हो जाओ ,परित्याग कर दो । जैन आगम के एक अघ्याय में कहा है ,शस्त्रों को छोड़ दो। उन्होंने फरमाया कि- संपूर्ण विश्व में परमाणु शस्त्र का उपयोग न हो ,अणुबम का प्रयोग हिंसा के लिए न हो तो ही  विश्वशान्ति बनी रह सकती है। अहिंसा के महत्त्व को समझाने हेतु जीव जगत की विवेचना करते हुए बताया कि - जैन जगत में जीव दो प्रकार के बताए गए है -सिद्ध और संसारी। सिद्ध जो जन्म मरण परम्परा से मुक्त है ,जिन्हें केवलज्ञान प्राप्त है ,जो वीतरागी है ,अशरीरी है ,अनाम है और मोक्ष में बिराजमान है। सबसे सुखी जीव दुनिया में वीतराग आत्मा है। वीतरागी को भीतर का सुख मिलता है, वीतराग आत्मा ने भय को जीत लिया है, साथ में राग और द्वेष को भी जीत लिया है। राग, द्वेष और आवेश को जीतने वाला ही सबसे सुखी है। सुखी बनने के लिए अहिंसा और वीतरागता के मार्ग पर चलना होगा। भगवान महावीर वीतरागी थे, फिर भी गोशालक ने उन्हे कष्ट दिए ,क्योंकि वीतरागी पुर्ण अरोगी नही होते ,केवलज्ञानी भी बीमार पड सकते है ,किन्तु सिद्ध पुर्ण अरोग...

ज्ञान, तप और दान से सर्वांगीण विकास : आचार्य श्री महाश्रमण

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गुडगाँव। 7 जुलाई। महाश्रमण ने परस्त्री, पराधान और गरिष्ठ भोजन का लोभ त्यागने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे दुष्कर्म भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं घटेगी साथ ही ज्ञान, तप और दान का लोभ करने से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वागीण विकास होगा।  आचार्य श्री महाश्रमण गुड़गांव स्थित ऎपराज हाउस सेक्टर-44 में अपने त्रिदिवसीय प्रवास के दौरान अभिनदंन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यहां जैन एकता समर्थक के रूप में आचार्य श्री का स्वागत समणसंघ के उ.प्रवर्तक श्री राममुनि जी महाराज ने किया।  गुड़गांव के पुलिस आयुक्त आई.पी.एस. श्री आलोक मेहता ने आचार्य श्री का स्वागत करते हुए कहा कि आचार्य महामश्रमण अपनी धवल सेना के साथ समाज से बुराईयां मिटाने का भागीरथी प्रयास कर रहे है। हम भी इनसे प्रेरणा लेकर स्वच्छ भारत बनाने में अपना योगदान दें। नगर निगम गुड़गांव के आयुक्त डॉ. प्रवीण आर्य (आई.ए.एस.) ने रोचक धर्मचर्चा करते हुए कहा कि आप जैसे महान चितंक धर्मगुरू सरकार का मार्गदर्शन करे तो प्रशासन को स्वस्थ संचालन में सहयोग मिलेगा। क्राइम बं्राच गुड़गाव के उपायुक्त श्री बलवान सिंह राणा ने कहा क...

चातुर्मास में आत्म कल्याण हो लक्ष्य : मुनि श्री संजयकुमार

मुंबई। 09जुलाई। आज मुनिश्री संजयकुमारजी, मुनि प्रसन्नकुमारजी, मुनिश्री प्रकाश कुमारजी एवं समण सिद्धप्रज्ञजी का चातुर्मासिक प्रवेश तेरापंथ भवन भाईन्दर में हुआ। मुनि श्री संजय कुमारजी ने फ़रमाया कि-  साधू साध्वी जहा जाते है वहा अध्यात्म की धारा बहती है. ये गुरुदेव का आशीर्वाद है कि आज यहाँ 2 सिंघाड़े विराज रहे है। गुरु निर्देशानुसार आज हम अपने गंतव्य पर पहुच गए है। मुनि श्री प्रसन्नकुमारजी ने आ. तुलसी जन्म शताब्दी पर ज्यादा से ज्यादा लोगो को अणुव्रती बनने हेतु प्रेरित किया। मुनिश्री प्रकाशकुमारजी ने चतुर्मसिक प्रवास में लोगो को धर्म आराधना एवं तपस्या की गंगा बहाने को कहा। समण सिद्धप्रज्ञजी ने चातुर्मास में आत्म-कल्याण कैसे करे ? उस पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मीरा-भाईन्दर महापौर केटलिन परेरा एवं पूर्व महापौर नरेन्द्र मेहता थे। कार्यक्रम में तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष किशनजी डागलिया,अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष डालचंदजी कोठारी, अभातेमम की उपाध्यक्षा कुमुद कच्छारा, अणुव्रत समिति मुंबई के अध्यक्ष गनपतजी डागलिया, तेरापंथ सभा मुंबई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश जी सुतारिया, अ...

Mahavir Jayanti

प्रस्तुति : जैन तेरापंथ न्यूज़ ब्यूरो से प्रमोद छाजेड, पंकज दुधोडिया

चातुर्मास में बहे अध्यात्म का निर्झर : साध्वी श्री काव्यलताजी

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हुबली। 2 जुलाई। जैतेन्युज। शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमणजी की आज्ञा शिरोधार्य कर साध्वी काव्य्लताजी ने अपनी सहयोगिनी साध्वियों के साथ हुबली तेरापंथ भवन में प्रवेश किया। सूरत चातुर्मास  की परिसम्पनता के बाद लगभग 1300 किलोमीटर की पदयात्रा कर गुजरात, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के अनेको क्षेत्रों का स्पर्श करते हुए,संघ प्रभावना करते हुए हुबली में पदार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित  कार्यक्रम का शुभारम्भ साध्वी श्री जी द्वारा नमस्कार महामंत्रोच्चार हुआ। तत्पश्चात साध्वी ज्योतियशाजी ने मातृह्र्दया साध्वी प्रमुखा कनक प्रभा जी  के मंगल संदेश का वचन करते हुए कृतज्ञता ज्ञापित की। साध्वी श्री ने फ़रमाया कि- प्रसन्नता है कि हम परम पूज्य गुरुदेव की आज्ञा निर्देशानुसार प्रलम्ब विहार कर सकुशल हुबली पहुचे गये। तेरापंथ धर्मसंघ एक आचार्य की आज्ञा में चलने वाला विलक्षण धर्मसंघ है। वर्तमान में परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के कुशल नेतृत्व में धर्मसंघ शतशाखी विकास कर रहा है। साधू साध्वियों के लिये जहाँ विहार चर्या प्रशस्त मानी गयी है। वहीं चातुर्मास का काल एक...

आचाय्र श्री महाश्रमण का दिल्ली चातुर्मासिक प्रवेश

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नई दिल्लीः 2.7.2014. अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश 2 जुलाई 2014 को अध्यात्मसाधना केन्द्र, छतरपुर रोड, मेहरोली नई दिल्ली में अनुशासन यात्रा के साथ हुआ। राष्ट्रसन्त आचार्य तुलसी जन्मशताब्दी पर आधारित इस भव्य जुसुस में पर्यावरण संरक्षण, कन्याभ्रूण रक्षा, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति, आचार्य तुलसी जीवनवृत्त सर्वधर्म समभाव एवं आचार्य महाश्रमण अभिनन्दन विषयक झांकिया, लाइव रोड शो थे। ज्ञानशाला दिल्ली के बच्चों की झांकी अणुव्रत संकल्प यात्रा थी। हजारो-हजारों श्रद्धालुओं के पूर्णतः अनुशासित पंक्तिबद्ध भव्य जुलुस के साथ जैसे ही पूज्यप्रवर का साधना केन्द्र में मंगल प्रवेश हुआ - शंख के तुमुल नाद और आकाशवाणी के रूप में गणाधिपति तुलसी के आर्शीवाद ने शमा बांध दिया। आसमान में उड़ते श्वेत गुब्बारे गुरूदेव के शान्ति संदेश को हवाओं के साथ सर्वत्र फैला रहे थे। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण के मंगल महामंत्रोसार के साथ् वर्धमान सभागार में कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। पूर्व उपप्रधान मंत्री लाल कृष्ण आडवानी ने मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए तेरापंथ से अपने पच्चास...