Posts

Showing posts from August, 2014

भाईन्दर में सम्वत्सरिक ठाठ

Image
अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री संजय कुमार आदि ठाणा 3के सानिध्य मे तुलसी समवसरण तेरापंथ सभा भवन भाईन्दर मे जैन जगत के प्रमुख पर्व पर्युषण महापर्व के नवहन्विक कार्यक्रम का विराट आयोजन हुआ। जहा भाईन्दर के आसपास के क्षेत्र वस्ई नाला सोपारा  मीरा रोड  से आए सेकडो श्रद्धालुओ ने आध्यात्मिक  सुधापान द्वारा इस आध्यात्मिक पर्व पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। खचाखच मरे पंण्डाल मे मुनि श्री ने महावीर स्वामी के सम्यक्तव प्राप्ति के बाद के 27भवो की जानकारी दी।शुभ अशुभ कर्म भोगना ही होगा चाहे जीव तीर्थंकर का ही क्यों न हो,प्रतिदिन के केंद्र द्वारा निर्धारित विषयों पर भी प्रवचन हुआ। आचार्य पट्टावली की जानकारी दी।तेरापंथ इतिहास और आचार्य तुलसी प्रदत अवदानो की जानकारी दी गई। रात्रि में विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओ का आयोजन किया गया। तेरापंथ सभा द्वारा 4 से ऊपर सभी तपस्वियों का सम्मान किया गया व ज्ञान शाला के प्रशिक्षको का सम्मान किया गया।चंदनबाला के तेले एवं तपस्या की लड़ी लग गई। 90 अष्ट पहरी 150 से ज्यादा 6व 4 पहरी पोषध हुए। प्रोग्राम मे मीरा भाईन्दर ...

सच्चाई के मार्ग पर चले : आचार्य श्री महाश्रमण जी

Image
नई दिल्ली , 31  अगस्त , 2014  अध्यातम साधना केंद्र ,  महरौली   परम पूज्य आचार्य प्रवर ने वर्धमान समवसरण में उपस्थित विशाल जन समूह को प्रेरक उद्बोधन देते हुए फ़रमाया कि गाथा ग्रन्थ में दशविद धर्म का विवेचन आता है।दस धर्मों में छठा धर्म है-सत्य। हमारे जीवन में सच्चाई की साधना का बहुत महत्व है। यदाकदा व्यक्ति झूठ का भी सहारा लेता है। जहाँ मन कमजोर पड़ता है , वहाँ फिर झूठ का भी प्रयोग हो जाता है।  पर कुछ लोग सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं। आज भाद्रव शुक्ला छठ के दिन अष्टम आचार्य कालुगणी जी के महाप्रयाण दिवस पर उनको संस्मृत करते हुए कहा कि कालूगणी जी की एक पुण्यता रही की उनके हाथों से दीक्षित दो सदस्य मुनि नथमल और मुनि तुलसी तेरापंथ के युगप्रधान आचार्य बने। कालूगणी जी संस्कृत के अच्छे विद्वान् आचार्य हुए है। उनके युग में ही संस्कृत भाषा का विकास हुआ।संघ में विकास के बीज बोने का काम कालूगणी ने ही किया था। उन्हीं की बदोलत आचार्य महाप्रज्ञ जी और भी कई संत संस्कृत भाषा के परम विद्वान बने। गुरुदेव ने अपना संस्मरण सुनाते हुए कहा आज के ही दिन मैंने साधू बनने का निर...

मंत्र का जीवन व्यवहार में उपयोग

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम : संबोध कार्यशाला  नई दिल्ली , 31 अगस्त , 2014 अध्यातम साधना केंद्र , महरौली के महाश्रमण सदन में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम दिल्ली द्वारा आयोजित की जाने वाली साप्ताहिक कार्यशाला संबोध का इस रविवार का विषय रहा- मंत्र का जीवन व्यवहार में उपयोग। मन्त्र विद्या के ज्ञाता मुनि श्री जय कुमार जी ने प्रस्तुत विषय पर अपने विचारो की अभिव्यक्ति के माध्यम से उपस्थित सदस्यों को जीवन में मंत्रो के उपयोग के बारे में बताते हुए फ़रमाया कि मंत्रो को समझना बहुत जरूरी है। मंत्र कोई चमत्कार नहीं है। मंत्रो को हम शब्दों में नही बाँध सकते। ऐसा कोई अक्षर नही जो मन्त्र नहीं है। मंत्र अपने आप में एक योजना है। योजना के द्वारा हम मंत्र , तंत्र , यंत्र यहाँ तक कि षड्यंत्र को भी समझ सकते है। 3 सूत्रों के माध्यम से हम मंत्रो की साधना करते हुए उन्हें सिद्ध करने का प्रयास कर सकते है- 1) श्रद्धा: मंत्र की सिद्धी के लिए आवश्यक है मंत्र और मंत्र्दाता के प्रति श्रद्धा का होना। गुरु के मुख से निकला हुआ शब्द भी हार्मोन्स को प्रभावित करता है। आस्था , विश्वास और समर्पण के बिना मंत्...

हिरीयुर(कर्नाटक) मे उपासकजी के निर्देशन मे पर्युषण महापर्व मनाया

Image
प पु आचार्य श्री महाश्रमणजी की असीमकृपा से हिरीयुर तेरापंथ भवन मे उपासकजी श्री गणपतलालजी मारू(दादर) एवं श्री पारसमलजी संचेती(उधना) के निर्देशन मे पर्युषण महापर्व मे धर्माराधना का मौका प्राप्त हुआ।इन आठ दिनों मे धर्म की अच्छी प्रभावना हुई।सुबह के प्रवचन मे उपासकजी द्वारा केन्द्र द्वारा निर्देशित विषयों पर व्याख्यानमाला  यहाँ के श्रावको मे धार्मिक प्रवृत्ति का अच्छा प्रभाव डाला।उपासक पारसमलजी ने युवकों को विशेष प्रेरणा दी।रात्रिकालीन कार्यक्रम मे तत्वज्ञानी उपासक श्री गणपतजी मारू द्वारा सरल भाषा मे तत्वज्ञान के बारे मे समझाया ।यहा के श्रावको ने विशेषकर महिलाओं ने तत्वज्ञान के बारे मे अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। उपवास बेला तेला अठाई आदि तपस्याएं हुई। पौषध भी अच्छी संख्या मे हुए। फोटो एवं न्यूज़ प्रस्तुति : पंकज कोठारी, करुणा कोठारी, तेजराज चौपड़ा

आसाम के बंगाईगाँव (दक्षिण) में उपासक श्री सुरेश जी व श्री पंकज जी ने पर्युषण आराधना करवाया ।

Image
आचार्य श्री महाश्रमणजी की आज्ञानुसार लगभग 53 परिवार वाला श्रद्धा का क्षेत्र बंगाईगाँव (दक्षिण) के  तेरापंथ भवन में उपासकजी श्री सुरेश जी ओस्तवाल (मुंबई) व श्री पंकज जी दुधोड़िया (कोलकाता) के निर्देशन मे पर्युषण महापर्व मे धर्माराधना का कार्यक्रम चला ।  इन आठ दिनों में क्षेत्र में धर्म की खूब अच्छी प्रभावना हुई। दैनिक कार्यक्रम निम्नलिखित प्रकार से चला -  5.30 से 6.30 तक ध्यान व योगासन की कक्षा  8.45 से 10.15 तक सुबह का प्रवचन 5.50 से 6.40 तक प्रतिक्रमण  6.45 से 7.45 तक तत्वचर्चा 7.45 से 9.30 तक अर्हत वंदना व रात्रीकालीन प्रवचन  केंद्र द्वारा निर्देशित विषय पर दोनों उपासक जी सारगर्भित प्रवचन विभिन्न कथा व रूपक के माध्यम से देते । आप दोनों के प्रवचनों का सार यही था की हमें अमूल्य मानव जीवन मिला है हम व्यर्थ के राग को वैर को ना बढ़ाए । हम  हृदय की गाँठो को खोल हम निर्मल बन जाए। जिससे भी बैर है उनसे खमत खमना कर लें।  उपासक जी की विशेष प्रेरणा से प्रथम बार अच्छी संख्या में पौषध हुए, इस बार 22 लोगों ने पहली बार प...

संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी है मैत्री दिवस : आचार्य तुलसी

Image
क्षमापना दिवस (30 अगस्त 2014) पर विशेषः   कोई कह सकता है कि हम विश्व-मैत्री की बातें कर रहे हैं, पर आज तो राष्ट्र-रष्ट्र, प्रांत-प्रांत, समाज-समाज, परिवार-परिवार, घर-घर और व्यक्ति-व्यक्ति में विरोध की भावना व्याप्त है। तब फिर विश्व का प्रश्न ही कैसा? इस संदर्भ में मैं कहना चाहूंगा कि विरोध की भावना दो नहीं, एक ही होती है। चाहे वह छोटे क्षेत्र में हों, चाहे बड़े क्षेत्र में। विरोध-भावना व्यक्ति की अपनी आत्मा की ही उपज होती है। अतः उसे अन्मूलित करने का एक ही मार्ग है और वह यह कि लोग ‘मैत्री’ के मूल को समझें और उसे अपने जीवन में स्थान दें। ‘मैत्री दिवस’ जिस भावना का प्रतीक है, उसमें कोई व्यक्ति भी दूसरे व्यक्ति के प्रति विरोध नहीं रखेगा। तभी मैत्री की भावना को बल मिलेगा। इसका पहला कदम होगा-अपनी त्राुटियों के लिए व्यक्ति स्वयं दूसरों से क्षमायाचना करे। भला ऐसा कौन व्यक्ति होगा, जो क्षमा मांगने पर क्षमा नहीं देगा। संयुक्त राष्ट्रसंघ में अनेक देशों के प्रतिनिधि इसी उद्देश्य से आते-जाते हैं, पर ऐसा लगता है कि मौलिक बात को भुला दिया जाता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि विश्व भर में एक...

MBDD 2 को विराग का समर्थन

Image
15 घंटे लगातार गाकर गिनिज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले विराग वानखेड़े ने दिया MBDD 2 I SUPPORT को समर्थन।अर्जुन जी सिंघवी ने भरवाए फॉर्म विराग ने आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शन कर कृतज्ञता ज्ञापित की। प्रस्तुति:करुणा कोठारी फोटो एवं न्यूज़:अर्जुन जी सिंघवी

नेरुल में गूंज MBDD 2 की

Image
नेरुल नवी मुंबई में पालक मंत्री गणेशजी नाइक, महापौर सागरजी नाइक, उप महापौर  अशोकजी, सभापति नैत्रा जी माधुरी जी नगरसेवक सूरजजी सुरेशजी संदीप जी से MBDD 2 I SUPPORT के फॉर्म भरवाते शिक्षण विभाग अधिकारी अर्जुन जी सिंघवी और तेयुप अध्यक्ष प्रवीण जैन। शिक्षण विभाग कमिश्नर नवी मुंबई और विभाग अधिकारी से भी फॉर्म भरवाए गए। प्रस्तुति :करुणा कोठारी फोटो एवं न्यूज़:अर्जुन जी सिंघवी

अभिनव सामायिक वलसाड

Image
उपासिका मीना मेहता एवं शांता मेहता ( सूरत ) के दिशा निर्देश से वलसाड में अभिनव सामायिक का कार्यक्रम एवं समता की साधना के प्रयोग करवाए गए। कार्यक्रम में 76 अभिनव सामायिक हुई ज...

व्यक्तित्व निर्माण के लिए अपेक्षित है अनुशासन : आचार्य श्री महाश्रमण जी

Image
27 अगस्त , 2014 आध्यात्म साधना केंद्र , महरौली , नई दिल्ली   तीर्थंकर महावीर की अध्यात्म यात्रा के प्रसंग का विवेचन करते हुए स्वयं तीर्थंकर के प्रतिनिधि आचार्य श्री महाश्रमण जी ने वर्धमान समवसरण में उपस्थित श्रावक श्राविका समाज के समक्ष फ़रमाया कि जीवन मे अनुशासन की अपेक्षा होती है। उदेश्य होता है कि सामने वाले की गलत आदत छूटे , वह सन्मार्ग पर चले। परिवार मे भी अनुशासन का महत्व होता है। व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनुशासन अपेक्षित है। हमारे बाल साधू साध्वियो पर भी अनुशासन करते है ताकि वे उच्छृंखलता की ओर न बढे , संतुलित व प्रसन्न रह सके एवं विनम्र बन सके। अध्यात्म की साधना में तपस्या का भी बड़ा महत्व है। निर्जरा के 12 प्रकारों मे एक तपस्या भी है। जितना संभव हो तपस्या करे। नवकारसी करे। एक छोटा सा तप नवकारसी यदि जीवन से जुड़ जाये तो अच्छा उपक्रम है। साधू को तो तपोधन कहा गया है। विहार आदि मे अनुकूलता न हो तो विगय वर्जन कर सकते है।   इसी बीच पूज्यप्रवर ने एक शाश्वत सिद्धांत का प्रतिपादन किया कि वासुदेव मर कर नियतिवश नरक में ही उत्पन्न होता है।चाहे वह भगवान की आत्मा ही...

शक्ति के द्वारा दूसरो का कल्याण करे : आचार्य श्री महाश्रमण जी

Image
 अणुव्रत चेतना दिवस विशेष  नई दिल्ली, 26 अगस्त 2014 आ ध्या त्म साधना केंद्र, महरौली परम वन्दनीय आचार्य श्री महाश्रमण जी ने भगवान महावीर की यात्रा के प्रसंग के माध्यम से वर्धमान समवसरण में उपस्थित विशाल जनसभा को बताया कि आदमी के शक्तिशाली होने का अर्थ है उसके सौभाग्य का योग साथ में होना। शरीर की शक्ति के द्वारा दूसरो का कल्याण करना चाहिए। हमारे मन में अपने स्वास्थ्य कि अनुकूलता के अनुरूप दूसरो की सेवा का अहोभाव होना चाहिए। धर्मसंघ मे सेवा की व्यवस्था हेतू सेवाकेंद्र बने हुए है। सौभाग्य से हमारे धर्मसंघ के साधू साध्वियो में सेवा के अच्छे संस्कार है। धन्य है वो साधू साध्वियाँ जो रुग्णों की सेवा करते है , सेवा केन्द्रों में अपनी सेवाए देते है। आचार्य की सेवा करना भी बहुत बड़ी सेवा है। नवदीक्षित साधू साध्वियो को प्रशिक्षण देना , संस्कार देना एवं बाल पीढ़ी का निर्माण करना भी सेवा का काम है। सेवा करते समय प्रतिफल कि आकांक्षा नहीं करनी चाहिए। हमारे जीवन में समस्याए भी आती रहती है। जहाँ जीवन है वहां   कठिन   परिस्थितियों का आना स्वाभाविक है। परन्तु समस्या का ऊपर...

MBDD 2 नाथद्वारा में

Image
नाथद्वारा में typ द्वारा mbdd2 के लिए मेडिकल ऑफिसर ,पीएमओ डॉ बी पी जैन और श्रीनाथ मंदिर के मुख्य अधिकारी से i support का फॉर्म भरवाया। प्रस्तुति करुणा कोठारी न्यूज़ और फोटो राजेंद्र समोता नाथद्वारा

ज्ञानशाला का वार्षिकोत्सव संपन्न

Image
दिनांक २४-०८-२०१४ बेल्लारी तेरापंथ भवन में मुमुक्षु धरती, निकिता,शालिनी वह मिलन के सनिध्य में रात्री कालीन ज्ञानशाला का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम रखा गया। जिसमे ज्ञानशाला के बच्चो ने कव्वाली, नाटक और  गायन की प्रस्तुति दी। छोटे छोटे बच्चो ने भी भाग लिया और उन्होंने सुन्दर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संयोजन शर्मीला छाजेड ने किया। ज्ञानशाला की प्रशिक्षका शर्मीला छाजेड, सरोज खिवेसरा, डिंपल कोठारी, प्रेमलता छाजेड, शांती सालेचा ने गीतिका की प्रस्तुति दी। ज्ञानशाला के संयोजक कमल छाजेड ने ज्ञानशाला के बारे में विस्तार से जानकारी दी, बच्चे ज्ञानशाला में क्या सीखते है और उनको क्या पढाया जाता है। ज्ञानशाला के कही बच्चौ ने जैन विद्या परीक्षा में भाग लिया है। मुमुक्षु धरती ने कहा की यहाँ के ज्ञानशाला के बच्चो ने बहुत सुन्दर तरह से प्रैक्टिस करवाई गयी है, और उनकी प्रस्तुति अच्छी थी। और जो बच्चो को नहीं भेज रहे है, उनको ज्ञानशाला भेजने के लिए जिक्र किया। अंकित खिवेसरा, JTN Pratinidhi, बेल्लारी

वाणी का संयम और विवेक भी जरूरी है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

Image
"वाणी सयंम दिवस"  नई दिल्ली , 25 अगस्त , 2014 दिल्ली के अध्यात्म साधना केंद्र, वर्धमान समवसरण से पूज्य प्रवर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उपस्थित जन समूह के समक्ष तीर्थंकर महावीर की अध्यातम यात्रा के प्रसंग का विवेचन किया। प्रसंग के माध्यम से पूज्य प्रवर ने कहा कि आदमी को ज्योतिष के पीछे ज्यादा नहीं भागना चाहिए। अति विश्वास नहीं करना चाहिए। आदमी को पुरुषार्थ करना चाहिए। आचार्य श्री महाश्रमण ने उपस्थित धर्मसभा को कर्तव्य बोध का ज्ञान करवाते हुए फरमाया कि पिता-पुत्र , गुरु-शिष्य का एक दूसरे के प्रति अपना-अपना कर्त्तव्य होता है। आचार्य तुलसी ने लम्बी - लम्बी यात्राएँ करके समाज के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन किया। शिष्यों का कर्त्तव्य है गुरु की सेवा करना। गुरु इंगित के प्रति जागरूक रहना। प्राणियों का काम परस्पर सहयोग से चलता है। परिवार को स्वर्गतुल्य बनाने का प्रयास करना चाहिए। जिस परिवार के सदस्यों के भीतर सहयोग का भाव हो , शांति हो , सहिष्णुता हो , धार्मिक भावना हो , अनिवार्य अपेक्षाओं की पूर्ति हो , वह परिवार स्वर्गतुल्य हो सकता है। परिवार मे अनावश्यक प्रताडना न हो...

आमेट में अभिनव सामियक संपन्न

Image
आमेट में मुनि अर्हत कुमारजी और मुनि भरत कुमारजी के सानिध्य में अभिनव सामायिक का प्रयोग संपन्न हुआ। फोटो मनिष ढिलीवाल प्रस्तुति करुणा कोठारी

व्यक्ति की साधना प्रबल हो तो देवता भी झुकते है : आचार्य महाश्रमण

Image
23 अगस्त। दिल्ली। परमपूज्य आचार्य श्री ने विशाल जन समूह को तीर्थंकर महावीर की अध्यात्म यात्रा विषय पर प्रतिबोध प्रदान किया।पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि भगवान महावीर की आत्मा ने अनंत अनंत जन्म ग्रहण किये थे। हम सब की आत्मा भी अनंत काल से भव भ्रमण कर रही है।आत्मा का शाश्वत त्रैकालिक अस्तित्व जैन दर्शन में मान्य है।प्रश्न हो सकता है कितनी आत्माएँ हैं?उतर है अनंत आत्माएं हैं।यहाँ तक की जमीकंद में तो सुई टिके उतने भाग में ही असंख्य आत्माएं होती हैं। पूर्ण तथा अनंत जन्मों का विवेचन तो हो नहीं सकता इसलिए भगवान महावीर के 27 भव सम्यक्त्व प्राप्ति के बाद के मुख्य भव हैं। एक बार भगवान महावीर की आत्मा को मानव जन्म मिला।उनका जन्म जम्बू द्वीप में पश्चिम महाविदेह में महावक्र विजय में जयंती नगरी में हुआ।नाम रखा नयसार। इसी बीच गुरुदेव ने अढ़ाई द्वीप का वर्णन किया की यहीं मनुष्य रह सकते हैं।जम्बू द्वीप, धातकी खंड ,अर्ध पुष्कर द्वीप।ये ढाई द्वीप हैं।इनमे 15 क्षेत्र हैं 5 भरत क्षेत्र ,5 एरावत क्षेत्र, 5 महाविदेह।प्रत्येक महाविदेह में 32 विजय होती है।और हर महाविदेह में 1 तीर्थंकर युगपत् हो सकते हैं। इस प्रका...

हाथ की शोभा दान से : आचार्य महाश्रमण

Image
21 अगस्त, 2014। नई दिल्ली। आचार्यश्री महाश्रमण ने अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान समवसरण में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दस प्रकार के श्रमण धर्म में 5वां प्रकार है लाघव अर्थात हल्कापन - शरीर के प्रति ममता व उपकरणों के प्रति साधु आसक्ति कम करे। श्रावक भी अपने शरीर के प्रति मोह एवं आकर्षण को कम करके हलका बने। जो व्यक्ति प्रकृति से विनम्र होता है महान होता है वह बिना ऐशवर्य पैसे के ही अपने आपको विभूषित  कर लेता है। आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि हाथ की शोभा दान से होती है। दाता अथवा याचक कौन है यह  हाथ की मुद्रा ही बताती है। त्यागी संतो के चरणों में प्रणाम करना सिर का आभुषण है। मुंह का आभुषण है मुंह से सत्य व प्रिय बोलना। कानों का आभुषण है अच्छे आध्यात्मिक गीत सुनना। हृदय का आभुषण है हृदय में दया करुणा, स्वच्छ विचारों का होना है। आचार्यश्री महाश्रमण जी के नेपाल के कठमाण्डू में अक्षय तृतीया व  विराटनगर में आगामी चातुर्मास की घोषणा की।अग्रिम जानकारी हेतु उनके दर्शनार्थ नेपाल से बड़ी संख्या में पत्रकारों का समूह उपस्थित हुआ। इस दौरान समणी कुुसुम प्रज्ञा ...

पर्युषण पर्व क्यों? - साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा

Image
भारतीय लोक जीवन में पर्वों का बहुत महत्त्व है। इसलिए वर्श भर में अनेकों पर्व भारत में मनाए जाते हैं। भाद्रमास में लौकिक और लोकोत्तर अनेक पर्व मनाये जाते हैं सबका बहुत महत्त्व है किन्तु पर्युषण का सबसे अधिक महत्त्व है। हमारे मध्य कई तरह के प्रतीक पुरुषों की मान्यता है। जिस प्रकार लोक पुरुष, आगम पुरुष, संघ पुरुष की अवधारणा है वैसे ही हम 'वर्ष पुरुष’ को भी मान सकते हैं। वर्ष के आठ महीने ‘वर्ष पुरुष’ के आठ अंग है। चार महीने चातुर्मास के उनके वस्त्र हैं। पर्युषण पर्व उनके आभुषण हैं। इस पुरुष की प्राण चेतना संवत्सर का दिन होता है। इस प्रकार पर्युषण का पर्व हमारे जीवन में बहुत महत्त्व रखता है। बारह महीने में से पर्युषण पर्व प्रतिस्रोत में आगे बढ़ने का पर्व है। इसमे न मनोरंजन है न क्रीड़ा है। यह आत्मरमण, आत्मालोचन एवं आत्मसाक्षात का पर्व है। इसमें हमें आत्मा के साथ रहने का अभ्यास करना है। जिस प्रकार मार्च में व्यापारी वर्ग अपनी आॅडिट रिपोर्ट से अपना विश्लेष्ण करता है वैसे ही पर्युषण पर्व हमें प्रेरणा देता है कि हम आत्मा की आडिट करें कि हमें किसी के साथ शोषण, छल, कपट तो नहीं किया, इस प्र...