दीपावली के पावन दिवस पर पूज्य प्रवर का संदेश


आर्हत वाड्मय में कहा गया है इस भरत क्षेत्र में 24 तीर्थंकर बने हुए हैं। सिद्धों से और परमात्मा स्वरुप आत्माओं से प्रार्थना की गयी कि तीर्थंकर मेरे पर प्रसन्न रहे, मुझे आरोग्य प्रदान करें, मुझे बोधि का लाभ प्राप्त हो और सिद्धि प्राप्त हो। मुझे निर्वाण प्राप्त हो। सिद्धि मिलनी चाहिए। चंद्रमाओं से भी ज्यादा निर्मल है सिद्ध भगवान। परम उज्जवल होते हैं सिद्ध भगवान। सूर्य से भी ज्यादा प्रकाश करने वाले सिद्ध, सागर के समान गंभीर होते हैं सिद्ध भगवान।

दीपावली के पावन दिवस और भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में पूज्य प्रवर ने फरमाया कि आज कार्तिक कृष्ण अमावस्या है। दीपावली का त्यौहार है। यह प्रकाश का पर्व है। सामान्यत: अमावस्या की तिथि काली तिथि होती है इसका महत्व नही होता परन्तु कार्तिक अमावस्या की तिथि बहुत महत्व रखती है
कार्तिक अमावस्या के साथ भगवान राम, भगवान महावीर जैसे तेजस्वी पुरुष जुड़ गये इसलिए इस अमावस्या का महत्व बढ गया। भगवान महावीर ने केवल ज्ञान रूपी सूर्य प्राप्त किया इसलिए वह लोकोत्तम पुरुष है। भगवान राम भी वनवास से लौटे थे। राम शब्द तो परमात्मा से जुड़ा हुआ है। कितने लोगों की आस्था है इस राम शब्द पर। राम का भजन भी चलता है। जनमानस में राम नाम के प्रति कितना श्रद्धा का भाव है। आचार्य दीप के समान होते हैं एक दीपक से दूसरा दीपक जलता है। आचार्य स्वयं दीपत्व हो और दूसरों को दीपत्व बनाए। भगवान महावीर का निर्वाण आज की रात्रि में हुआ था ऐसी आत्मा जिसने लोगो में प्रकाश बांटा।

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