Posts

Showing posts from December, 2014

नशामुक्त भारत के अथक प्रयास रूप अहिंसा यात्रा

Image
परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी प्रेरित अहिंसा यात्रा विशेष  नशामुक्त भारत के अथक प्रयास रूप अहिंसा यात्रा His Holiness Aachary Shri Mahashraman ji, Started Non Violence March (Ahimsa Yatra) Jain Terapanth News File Photo भारत एक विकासशील देश है। विश्व में विकास की राह पर तीव्र गति से आगे बढ़ने के लिए तत्पर देशों के समक्ष बहुत सारी चुनौतियां हैं। भारत देश जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। यहाँ की करीब आधे से ज्यादा आबादी ग्रामीण इलाकों  में बसी हुई है। जिस देश में नशे को पाप माना जाता था, वहीं अपने ही देश के लोग आज पश्चिमी संस्कृति की चकाचौंध में अपनी महान पुरातन संस्कृति को भूल रहे हैं। 2014 का वर्ष समापन की ओर है। वर्ष 2015 के स्वागत के लिए जोर शोर से तैयारियाँ चल रही है। शहरी क्षेत्रों में तो आज कल न्यू इयर पार्टी का एक क्रेज़ सा बन गया है। जिसमें मादक पदार्थों का सेवन आम बात हो गई है। शराब, ड्रग्स, हुक्का वगैरह आज कल की पीढ़ी का शौख बन गया है। स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है। इस पश्चिमी प्रवाह में बहते युवा जहाँ, अपना स्वास्थ्य विकृ...

विरक्ति हो तो मोक्ष दूर नहीं- आ.महाश्रमण

आचार्य श्री महाश्रमण जी ने प्रात:कालीन प्रवचन में उपस्थित सभा को संबोधित करते हुए फ़रमाया कि कुछ मनुष्यों में इतना वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाता है की वे निष्क्रमण कर देते है । श्रद्धा के साथ घर से निकल पड़ते है और उत्तम पर्याय स्थान साधुत्व को स्वीकार कर लेते है, साधुत्व को जिस श्रद्धा से उसे स्वीकार किया उस श्रद्धा से उसे पालित भी करना चाहिए ओर हो सके तो ओर वैराग्य भाव बढ़ जाये ऐसा प्रयास होना चाहिए । आचर्य श्री ने आगे फ़रमाया की मानव जीवन मिल जाये और फिर साधु तो......कहना ही क्या ? और साधुत्व के साथ वीतरागता प्राप्त हो जाये ओर भी अलग महिमा हो जाती है । आचर्य प्रवर ने आगे कहा जो दुर्लभ मानव जीवन को व्यर्थ में गँवा दे वे आदमी कैसे होते है उसके कुछ उदाहरण देते हुए कहा वे आदमी कैसे लगते है जो सोने के थाल में कूड़ा कर्कट डालता है,जो अमृत को पैर धोने के काम में लेता हैै जो श्रेष्ठ हाथी से लकड़ियो का भार वहन करता है और जो कौवे को उडाने के लिए चिंतामणि रत्न को फेंक देता है ये आदमी जैसे नासमझ होते है उसी प्रकार जो आदमी दुर्लभ मानव जीवन को प्रमाद में गँवा देता है वह भी ऐसा ही आदमी होता है । आचार्य ...

चित्त समाधि शिविर :लूणकरणसर

Image
लूणकरणसर 28 दिसंबर । साध्वी श्री पांन कुमारी जी के सान्निध्य में और महिला मंडल के तत्वाधान में चित्त समाधि शिविर का आयोजन किया गया।जिसमे बताया गया क़ि हमारे अभिभावक जो घर के बड़े है उन्हें चित्त समाधि कैसे मिले ।हम रिश्तों को कैसे मजबूत ,शांत और सुखद बनाये। कार्यक्रम का मंगला चरण महिला मंडल द्वारा गीतिका के माध्यम से किया गया।कन्या मंडल द्वारा मंगल भावना का संगान और मंगल भावना पाए लघु शब्द चित्र प्रस्तुत किया गया।साध्वी श्री जी ने कहा हम पारिवारिक रिश्तों में सामन्जस्य से खुशहाली लाएं।हम रहे भीतर ,जीयें बहार ।प्राप्त करे आनंद अपार ।श्री मति विजय श्री दुगड ने प्रेक्षा ध्यान के प्रयोग करवाये।श्री मति सुरभि राखेचा श्री मति सुमन चोपड़ा ,उम्मेद मल जी बोथरा ने अपने विचार रखे ।संयोजन श्री मति चन्दा भूरा ने किया ।

पराया धन धूल समान : आचार्य श्री महाश्रमण जी

26 दिसम्बर, ग्वालियर. आचार्य श्री महाश्रमण जी अहिंसा यात्रा के साथ शुक्रवार को जैन छात्रावास से मुरार एन्क्लेव पहुंचे। आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने प्रवचन में फरमाया- पराए धन पर कभी भी नजर नहीं गडानी चाहिए क्योंकि ऐसा धन धूल के समान होता है। जिस तरह से धूल को कोई नहीं उठाता है उसी तरह से किसी दूसरे का धन या कोई वस्तु भी चोरी मानी जाती है। चोरी नहीं करने वाला व्यक्ति से विपत्ति दूर भाग जाती है। जैसे सूर्य के आने से अंधकार भाग जाता है। जैन धर्म में 18 पाप बताए गए है। आचार्य श्री ने फरमाया की जीवन में किये गए हर पाप का हिसाब मनुष्य को देना होता है। इस बात का पता किसी को नहीं होता है। मनुष्य का जीवन सीमित है। इस जीवन का मोल समझना चाहिए। क्योंकि वही मोक्ष का माध्यम है। संसार में इस बात को सब समझते है लेकिन उस पर विचार कोई नहीं करता है। इसलिए वह जीव अलग-अलग योनियों में भ्रमण करता रहता है। संस्कारों की सम्पदा अमूल्य होती है। माता-पिता का कर्त्तव्य है कि वह अपने बच्चों में संस्कार रूपी बीज रोपित करें सदाचार के मार्ग पर चले। उसे अत्याचार, दुराचार, भष्टाचार जैसे बुरे काम से बचना चाहिए। स...

अहिंसा यात्रा पर विशेष : हिंसा से झुलसती मानवता को अहिंसा का चंदन

Image
"हिंसा से झुलसती मानवता के घावों को शीतलता दे रहा अहिंसा का चंदन" करुणानिधान अनुकम्पा पुरुष की अहिंसा यात्रा पर विशेष सम्पादकीय  आज कल जैसे आतंकवाद एवं उग्रवाद ने प्रशासन की नींद हराम कर दी है, आये दिन दिल दहला देने वाली आतंकी घटनाओं से लोग भयभीत है, कहीं मासूम बच्चे तो कहीं निर्दोष लोगों को सरेआम मारा जा रहा है, कहीं बम ब्लास्ट तो कहीं गोलीबारी, सरहद पार आतंक तो देश के भीतर में पनप रहा उग्रवाद, विकास की बातों में, विकास के कार्यों में यह सब कहीं न कहीं घातक साबित हो रहा है । आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी फरमाते थे की कोरा भौतिक विकास आदमी को हिंसा, क्रोध की ओर प्रेरित करता है। भौतिक विकास के साथ-साथ उसे संतुलित करने के लिए आध्यात्मिक विकास होना भी जरूरी है । हिंसा को कभी हिंसा से पूर्णतया नहीं थामा जा सकता, आतंकी संगठन हो चाहे उग्रवादी संगठन, उनके साथ अहिंसक एवं शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत कर रोका जाये । भारत देश भी पड़ोसी देश के साथ शांति एवं अहिंसा के पक्ष में कई बार समझौते भी कर चुका है । आये दिन हिंसा, चोरी, आत्महत्या जैसी कई वारदातें अख़बारों की सुर्ख़ियो...

भारत कृषि प्रधान एवं ऋषि प्रधान देश : आचार्य महाश्रमण

Image
ग्वालियर 24 दिसम्बर. संत शिरोमणि परम् पूज्य आचार्य महाश्रमण जी ग्वालियर प्रवास के दौरान अपने प्रातः कालीन प्रवचन में फ़रमाया कि आदमी के भीतर दो वृत्तियाँ होती है एक राग की वृति और दुसरी द्वेष की वृति। इन दोनों के कारण से आदमी दुःखी बनता है, राग द्वेष का विस्तार होता है तो उनके एक तत्व निकलता है अहंकार उसमे आदमी महान्ध बन जाता है, थोड़ा ज्ञान हो तो घमण्ड आ जाता है, थोड़ा पैसा मिल धनवान् हो गया तो घमण्ड आ जाता है, और सत्ता साथ में आ जाए तो कहना ही क्या। शास्त्र में कहा गया है की जीत तो अहंकार मंदिरा पान के समान है अहंकार में उन्नत हुआ आदमी हिंसा में अपराध् में भी चला जाता है, दृढ़ता के द्वारा इस अहंकार को जीत ने का प्रयास करो। जब अहंकार कम होता है तो आदमी में प्रेम आ जाता है , आचार्य श्री ने प्रेम के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की जो इंसान के प्रति अहिंसा मैत्री ना रखे वह भगवान से भी कितना और किस रूप में प्रेम रखेगा, मेरा तो सोचना है की भगवन का नाम तो अच्छा ही है, से प्रेम करना, मैत्री करना उससे ज्यादा अच्छा है, मैत्री भाव का प्रयोग करे। आगे आचार्य वर ने कहा भारत एक ऐसा देश है...

वर्धमान हमारे आचरण में हो : आचार्य महाश्रमण

Image
वर्धमान हमारे आचरण में हो : आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी 23 दिसम्बर, ग्वालियर. आचार्य श्री महाश्रमण जी ने जैन छात्रावास में वर्धमान महोत्सव के अंतिम दिन प्रवचन में प्रमाद के बारे में बताया हुए फरमाया की प्रमादी लोग से ही गलती होती है। इसलिए गलतियों के परिष्कार का अवसर भी दिया जाना चाहिए। वर्धमान की प्रेरणा मिले, वर्धमान हमारे दिल में हो, हमारी वाणी में आए, यह अच्छी बात है लेकिन वर्धमान हमारे आचरण में आए यह जरुरी है। इसके लिए वर्धमान जैसी साधना की जरुरत है। आचार्य श्री ने कहा की वर्धमान महावीर की साधना निराली थी। उनकी साधना की तुलना करना कठिन है, तुलना की बात सोचना भी सामान्य बात नहीं है। साढ़े बारह वर्ष उन्होंने सतत साधना कर कितने कष्ट सहन किए। उन्होंने कहा की साधु का कर्त्तव्य है की वह साधुत्व की सुरक्षा करे, आचरण के प्रति जागरूक रहे और कषाय प्रतनुकरण की साधना करे। प्रमाद देख कर दुर्जन हँसते है जबकि सज्जन व्यक्ति उसका समाधान करते है। मनुष्य से जाने-अनजाने में कोई गलती हो जाए तो उसे स्वीकारने का साहस होना चाहिए। साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभा जी ने सम्पूर्ण धर्मसंघ को व...

तेरापंथ भाग्य विधाता कार्यक्रम आयोजित

Image
सेकड़ो हाथो ने दिए हाथ में लेकर किये अणुव्रत के संकल्प मुम्बई:-अणुव्रत समिति मुम्बई ने अहिंसा यात्रा की मंगलकामना के लिए एक सांस्कृतिक संध्या "तेरापंथ भाग्य विधाता-A journey of Non violence"का आयोजन षन्मुखानंद हॉल मुम्बई में किया।आचार्य श्री महाश्रमण द्वारा लालकिले से प्रारम्भ अहिंसा यात्रा के त्रिसूत्र सद्भावना -नैतिकता-नशामुक्ति को महानगरी के लोगो तक पहुचाना कार्यक्रम का उद्देशय था। संघ गायक कमल सेठिया ने भक्ति रस की धारा के साथ महामना भिक्षु और महामना तुलसी को स्वरांजलि समर्पित की।U V शो दृष्टी परिवर्तन सही प्रस्थान,लेज़र शो-श्रद्धा समर्पण,कन्यामण्डल द्वारा अहिंसा यात्रा भावधारा की कुशल प्रस्तुति दी गई।आचार्य श्री महाश्रमणजी के मंगल सन्देश ने कार्यक्रम में चार चाँद लगाये।अणुव्रत समिति द्वारा किये गए कार्यो की विशेष झलक भी डॉक्यूमेंट्री के रूप में दिखाई गई। कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष श्री डालचंदजी कोठारी,महामंत्री श्री मर्यादाजी कोठारी,उपाध्यक्ष श्री अर्जुनजी बाफना,तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सलिलजी लोढ़ा,श्री जैन श्वेताम्बर तेरा...

तेरापंथ युवक परिषद्, कोलकाता द्वारा सेवा कार्य

Image
सेवा, संस्कार एवं संगठन के क्षेत्र में अग्रणीय संस्था तेरापंथ युवक परिषद्, कोलकाता द्वारा सेवा कार्य अन्तर्गत दिनांक 21 दिसम्बर, 2014 (रविवार) को कोलकाता के उपनगरीय क्षेत्र 55, जी.टी. रोड (पूर्व), कोन्नगर में भोजन वितरण कार्टक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर लगभग 850 लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर भोजन ग्रहण किया तथा उक्त स्थान के निकट स्थित अनाथ आश्रम में 40 वृद्ध महिलाओं को खाद्य सामग्री, नित्य दिन की आवश्यक साम्रगी एवं भोजन वितरण किया गया। नित्य दिन की आवश्यक सामग्री प्राप्त कर असहाय महिलाएं ने अपार हर्ष प्रकट किया। कार्यक्रम में तेरापंथ युवक परिषद्, कोलकाता के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र चोरड़िया, उपाध्यक्ष द्वितीय श्री शैलेन्द्र बोरड़, मंत्री श्री संजय दुगड़, सहमंत्री द्वय श्री अभिषेक मणोत एवं श्री मनोज सुराणा, संगठन मंत्री श्री रतन लाल श्यामसुखा सहित 52 सदस्य उपस्थित थे।  भोजन वितरण कार्यक्रम के प्रायोजक श्री चैनरूप, अमित पारख (अभातेयुप क्षेत्रीय सहयोगी) एवं वृद्धाश्रम में सामग्री वितरण के प्रायोजक तेयुप कोलकाता मंत्री श्री संजय दुगड़ थे।  फोटो व रिपोर्ट स...

सेवा की भावना हो प्रबल : आचार्य महाश्रमण

Image
ग्वालियर। 22 दिसं। आचार्य श्री महाश्रमणजी ने जैन छात्रावास के वर्धमान समवसरण में उपस्थित श्रावक समाज को सेवा का महत्व बताते हुए फरमाया कि गृहस्थ माता-पिता की सेवा करे। समाज की सेवा करे। सेवा करने से जीवन में यश की प्राप्ति होती है। उन्होंने राजनेताओं को भी जनता की सेवा के उनके धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी।  साधू भी ध्यान में रखे कि उनका जीवन धर्म और धर्मसंघ से जुड़ा रहे। धर्मसंघ के साधुओं में सेवा करने की भावना विद्यमान रहनी चाहिए। वे दूर-दूर जाकर भी सेवा करने के लिए तैयार रहे। केवल सहभागी साधू साध्वी ही नहीं अपितु अग्रणी भी सेवा करे।  आज जैन धर्म की दो परम्पराओं श्वेताम्बर एवं दिगम्बर परम्परा का मिलन भी हुआ। श्वेताम्बर तेरापंथ के आचार्य श्री महाश्रमण एवं दिगम्बर आचार्य विमर्श सागर का मिलन हुआ। दोनों ने काफी विषयों पर विचारों का आदान प्रदान किया।  इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री माया सिंह, भान्दौर विधायक श्री घनश्याम पिरौनिया, महापौर श्री विवेक शेजवलकर, डॉ. वीरेंद्र गंगवाल आदि महानुभाव भी उपस्थित थे। महिला मण्डल द्वारा महिला सम्मेलन एवं कन्या ...

हिरीयुर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निःशुल्क नेत्र परिक्षण एवं शस्त्र चिकित्सा शिविर

Image
21-12-2014 हिरीयुर कर्नाटक, सेवा क्षेत्र मे प्रगतीशिल अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के निर्देशन मे एवं हिरीयुर लायन्स क्लब एवं शंकर आई होस्पिटल के सहयोग से हिरीयुर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निःशुल्क नेत्र परिक्षण एवं शस्त्र चिकित्सा शिविर का आयोजन हिरीयुर नगर मे किया गया। लगभग 120लोगों ने नेत्र परिक्षण करवाए एवं 48 लोगों को निःशुल्क नेत्र ओपरेशन के लिए होस्पिटलाइस किया गया। हमेशा सेवा क्षेत्र मे अग्रसर हिरीयुर तेममं के प्रति हिरीयुर नगर के प्रबुद्ध व्यक्ति K.V.अमरेश , श्रीमती सौभाग्यवती देवरू आदि प्रतिष्ठित व्यक्तियो ने मंडल के कार्यो को सराहा । हिरीयुर जैतेस से तेजराज चौपड़ा की रिपोर्ट

तेरापंथ महिला मंडल, मैसूरु द्वारा "चित्त समाधि" कार्यशाला का आयोजन

Image
अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा संचालित "चित्त समाधि" कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ महिला मंडल, मैसूरु द्वारा तेरापंथ सभा भवन में किया गया। दो घंटे की इस कार्यशाला में 60 से अधिक बहनों ने जिज्ञासा के साथ भाग लिया। श्रीमती वनमाला नाहर एवम् श्रीमती मधु देरासारिया ने मंगलाचरण द्वारा कार्यक्रम की शुरुवात की। महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती सन्तोष कोठारी द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। उपासिका कांता नोलख़ा ने मंगल भावना का जाप कराया। श्रीमती दन्तोष कोठारी ने योगिक क्रियाओ के साथ कलर थेरेपी व एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी दी। निकिता पितलिया द्वारा प्रेक्षा ध्यान करवाया गया। L&T कंसल्ट्रेट श्री पिंटू नंगावत ने जीवन के रहस्य के बारे में बताया की स्वयं को देखना एवम् समजना ही "चित्त समाधि" है। बिना सोच समज वाले मूक प्राणियो की तरह ना जी कर अपनी सोच को नकारात्मक होने रोके एवम् सकारात्मक जीवन जिए। श्रीमती पदमा मेहता ने पाये आत्मा का आनंद विषय जानकारी दी एवम् जीवन में त्याग की महिमा का वर्णन किया। मंत्री श्रीमती अनीता कटारिया ने सञ्चालन किया, श्रीमती मीनाक्षी नवलखा...

दिल्ली से पधारी साध्वी निर्वाणश्री जी का शांति निकेतन, गंगाशहर स्वागत अभिनन्दन

Image
  दिनांक १८.१२.२०१४, शांति निकेतन, गंगाशहर, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर द्वारा आज शांति निकेतन सेवाकेंद्र में दिल्ली में परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के साथ में चातुर्मास संपन्न कर यहाँ पधारी विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी का स्वागत अभिनन्दन किया गया. सेवाकेंद्र व्यवस्थापिका साध्वीश्री चंद्रकलाजी के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में साध्वी निर्वाणश्री जी ने फ़रमाया कि गुरुकुल वास में रहना अपने आप में विरल सौभाग्य की बात होती है, इस बार के दिल्ली चातुर्मास में अनेकानेक कीर्तिमानी कार्यक्रम आयोजित हुए. इस बार ना केवल तेरापंथी, ना केवल जैनी अपितु समग्र जन मानस में एक विलक्षण आकर्षण इस चातुर्मास को लेकर बना. आज गंगाशहर पहुँच कर ऐसा लग रहा है कि दिल्ली से आचार्यप्रवर से मंगल पाठ सुनकर चले तो यहाँ आने पर एक इच्छित मंजिल तक पहुँच गये है. और सबसे बड़ी बात यहाँ गंगाशहर आने के लिए हमारा ही नहीं बल्कि हर एक साधू साध्वी और श्रावक श्राविका का आकर्षण बना रहता क्यूंकि यह तो शक्ति पीठ है गुरुदेव श्री तुलसी की पावन धरा है. यहाँ आकर हर कोई अपने भीतर एक नई उर्झा और नई स्फूर्ति क...

नर सेवा ही सच्ची नारायण सेवा-लूंकड़

Image
लाडनूं समाचार द्वारा कंबल वितरण समारोह आयोजित लाडनूं, 17 दिसंबर (प्रतिनिधि)। नर सेवा ही सच्ची नारायण सेवा है। जन सेवा के कार्यों में सहभागिता के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए। ये विचार जैन विश्व भारती के अध्यक्ष धरमीचंद लूंकड़ ने बुधवार को यहां रेगर बस्ती में लाडनूं समाचार द्वारा आयोजित कंबल वितरण समारोह में व्यक्त किए। समारोह की अध्यक्षता करते हुए लंूकड़ ने कहा कि सेवा एवं परमार्थ हमारी संस्कृति की मूल पहचान है। हमारे देश में एक-दूसरे का सहयोग करने के संस्कार हमें विरासत में मिलते हैं।  समारोह के मुख्य अतिथि जैन विश्व भारती के ट्रस्टी रमेशचंद बोहरा ने कहा कि लोकसेवा के कार्य की पहल का जितना महत्व है, उतना ही महत्व सेवा में सहभागी बनने का है। लाडनूं समाचार के संचालक अरविंद नाहर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी अपील पर अनेक लोगों ने तत्परता व उदारता का परिचय देते हुए जनहित के इस कार्य में अर्थ सहयोग देने की पहल की है। उन्होंने बताया कि अनेक लोगों ने इस उपक्रम में अपनी सहभागिता की भावना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य उदारमना लोगों के सहयोग का लाभ समाज के अंतिम...

स्वयं के द्वारा स्वयं को देखना यही चित्त समाधि है - शासन श्री साध्वी गुलाबकुमारी जी

Image
16.12.2014, जोधपुर, हमे हमारे जीवन को देखना है। स्वयं के द्वारा स्वयं को देखना है। कहने वाला सही कहता है, मेरे सुनने में हो सकता है गलती हुई हो, चित्त समाधि में ये बाते महत्त्वपूर्ण है। ये उद्बोधन शासन श्री साध्वी गुलाब कुमारीजी ने तेरापंथ महिला मंडल जोधपुर द्वारा आयोजित चित्त समाधि शिविर में दिया। साध्वी भानुकुमारीजी ने इस अवसर पर कहा की हमारे मन के सूक्ष्म परमाणु अनुप्रेक्षा के द्वारा दुसरे के मन में पहुँच जाते है, जिससे मन स्वस्थ हो जाता है। आत्मा का आनंद प्राप्त होता है। पुरानी बैर की गाँठे भी खुल जाती है। ये सभी होने से चित्त में समाधि रहती है। साध्वि हेमरेखा जी ने चित्त समाधि का अर्थ बताया तथा जप व मंगलभावना के प्रयोग कराए। साध्वी ऋतुयशाजी ने दैनिक चर्या में काम आने वाले आसन बताये तथा मैत्री की अनुप्रेक्षा करवाई। श्रीमती सरिता बैद ने चित्त समधिमय हो- गीत का संगान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सोहनराज जी तातेड़ ने बताया कि प्रेक्षाध्यान के द्वारा हम जीवन में परिवर्तन ला सकते है। जीवन विज्ञान की शिक्षाओं से जीवन को खुशहाल बना सकते है। प्रेक्षाध्यान की पांच उपसम्पदाए है, उन...

'शासनश्री' साध्वी श्री सूरज कुमारी जी, सरदारशहर का जीवन परिचय

संघ सम्राट महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या 'शासनश्री' साध्वी श्री सूरज कुमारी जी, सरदारशहर का जीवन परिचय: जन्म- वि.सं.1986 आश्विन शुक्ला ७, सरदारशहर, राजस्थान माता- श्रीमती धनी देवी नाहटा (साध्वी श्री धन्ना जी) पिता- लक्ष्मी पत जी नाहटा दीक्षा- युगप्रधान आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से वि.सं. 1995 कार्तिक शुक्ला  ३ सरदारशहर (माता धन्नी देवी के साथ) अध्ययन- आचार्य श्री तुलसी के सानिध्य में 5 वर्ष गुरुकुलवास में अध्ययन । साध्वी  श्री केसर जी के सान्निध्य में18 वर्ष आगम आदि का अध्ययन । अग्रगामी- वि.सं. 2020 लाडनूं मर्यादा महोत्सव पर । पद यात्रा- राजस्थान, हरियाणा , पंजाब, गुजरात, भुज, कच्छ, थली, मेवाड़,  मारवाड़, उत्तर प्रदेश, बंगाल , बिहार आदि अनेक प्रान्तों में चातुर्मास व विचरण  किया। महाराष्ट्र मुंबई में सर्वाधिक 15 चातुर्मास किये। कला- कला के क्षेत्र में विशेष रूचि जैसे लिपि कला, सूक्ष्म लिपि कला, डोरी ,  सांकली, रजोहरण, टोपसी , गिलास, तासक कलम बनाना । हरताल(एक विशेष  प्रकार का र...

जो ज्ञानी और त्यागी गुरु होते है, उनको सद्गुरु भी कहा जाता है - आचार्य श्री महाश्रमण जी

15 दिसंबर 2014, सराय छोला गाँव,  धौलपुर में एक दिन का प्रवास संपन्न कर पूज्यपाद आचार्य श्री महाश्रमण जी, धवलसेना को साथ लिए, राजस्थान की सीमा को छोड़कर, मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश कर गए। छोटी बड़ी पहाडियों के मध्य से विचरती हुई चम्बल नदी के विशाल पुल पर, मध्यप्रदेश के श्रावकों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी राजकीय मेहमान (पुज्यप्रवर) का स्वागत किया गया। सराय छोला गाँव के किसान पब्लिक स्कूल के परिसर में पहुँचने पर, गाँव के सरपंच के सुपुत्र श्री रामसेवक जी और स्कूल के संचालक श्री देवेंद्र सिंह जी गुर्जर द्वारा गुरुदेव का स्वागत किया गया। इस अवसर पर पुज्यप्रवर ने फ़रमाया - सारी दुनिया में गुरु को महत्त्व दिया गया है। जो ज्ञानी और त्यागी गुरु होते है, उनको सद्गुरु भी कहा जाता है। ऐसे गुरुओं से पथदर्शन प्राप्त करना कल्याणकारी होता है, अत: ऐसे महापुरुषों के वचनों को आत्मसात करना चाहिए, उनके वचनों को आचरण में उतरना चाहिए। शास्त्र में कहा गया कि आचार्य या गुरु को कभी अप्रसन्न नही करना चाहिए, उनके वचनों की अवहेलना नही करनी चाहिए, क्यूंकि गुरु के वचनों की अवहेलना...

ताजमहल केवल प्रेम का ही प्रतीक नहीं है बल्कि यह प्रतीक है समर्पण का - आचार्य महाश्रमण

ताजमहल से संत ने दिया सौहार्द का संदेश बुधवार, 10 दिसंबर 2014 शोभना, अनुपमा जैन आगरा। प्रेम के अमर स्मारक 'ताजमहल' से एक संत ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, नैतिकता और समाज में सौहार्द कायम करने का संदेश दिया है। जैन मुनि महाश्रमण के ससंघ अपनी  अहिंसा यात्रा' के आगरा पड़ाव में पहुंचने पर ताजमहल के सामने यह संदेश दिया। महाश्रमणजी ने कहा कि ताजमहल केवल दुनियावी प्रेम का ही प्रतीक नहीं है बल्कि यह प्रतीक है समर्पण का, सहिष्णुता का, संबंधों के आदर का, प्रेम के अनवरत प्रकाश का। यह प्रेम मानवता के प्रति है, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव का है, जो जीवमात्र से प्रेम, दया सिखलाता है। ऐसी व्यवस्था की सीख देता है, जहां सिंह और बकरी एक ही घाट से पानी पीते हैं। इससे पूर्व महाश्रमणजी का यहां पहुंचने पर श्रद्धालुओं व विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने भव्य स्वागत किया। आचार्यश्री ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि आज ही के दिन भारत के एक नागरिक को दूर देश नॉर्वे में विश्व में शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है। भारत शांति का प्रणेता रहा है। इन मूल्यों का विश्व-प्रचारक रहा है। हिंस...

अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन यात्रा के तहत इचलकरंजी पहुंचे।

इचलकरंजी। 8 दिस. अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर संगठन यात्रा के तहत आज शाम इचलकरंजी पहुंचे। इस अवसर पर तेयुप इचलकरंजी शाखा परिषद् द्वारा आयोजित समारोह में उपस्थित युवकों को सम्बोधित करते हुए युवकों को संघ सेवा से जुड़ने की प्रेरणा के साथ साथ नशामुक्त जीवन, समय प्रबन्धन, व्यवसायिक-सामाजिक एवं गृहस्थ जीवन के बीच संतुलन के सूत्रों पर भी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने युवकों से अहिंसा यात्रा में रास्ते की सेवा एवं अभातेयुप के विभिन्न सेवा संस्कार संगठन के उपक्रमों से जुड़ने हेतु युवा शक्ति से विशेष आह्वान किया।  इचलकरंजी संगठन यात्रा के तहत अभातेयुप अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर के साथ पधारे अभातेयुप के पूर्व महामंत्री श्री रमेश सुतरिया, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्री राजेन्द्र मुथा, इचलकरंजी शाखा परिषद् प्रभारी श्री मनोज संकलेचा, क्षेत्रीय सहयोगी श्री दिनेश छाजेड़ एवं श्री संजय मलरेचा आदि ने भी अपने विचार रखे। तेयुप इचलकरंजी के अध्यक्ष श्री मनोज संघवी ने स्वागत वक्तव्य किया। अतिथि महानुभावों का स्थानीय सभा की ओर से साहित्य भेंट कर स्वागत किया गया। मंत...

साध्वी श्री प्रमोदश्री जी के सान्निध्य में स्मृति सभा

Image
बालोतरा 6 दिसम्बर 2014, श्रीमती फुंदीदेवी धर्मपत्नी स्व. लालचन्दजी गोलेच्छा का 31 दिन का संथारा सम्पन्न होने पर तेरापंथ भवन में स्मृति सभा आयोजित हुई।  साध्वी प्रमोदश्रीजी ने कहा - श्रावक के तीन मनोरथ है जिसमें से एक है संथारा, व्यक्ति संसार में आता है और चला जाता है। कुछ व्यक्ति बिरले होते है जो अपना नाम स्वर्णक्षरों में लिखा जाता है। ऐसी हलुकर्मी आत्मा थी, आप ऐसी भाग्यषाली पुण्यात्मा की आपको संथारा आया। उनकी आत्मा में इतनी शक्ति थी कि परिवार के साथ प्रेम साथ समय बिताया। ये आत्मा जहाँ भी जाए आध्यात्मिक उच्चगति करते हुए मोक्ष का वरण करें। सभी भाई-बहिन जो उपस्थित हुए है सभी 1-1 नवकार मंत्र की श्री माला का संकल्प ले एवं आत्मा के प्रति मंगलभावना करें। साध्वी संघप्रभाजी ने कहा मृत्यु जीवन का अंग है एक है अकाम मरण एवं एक दे सकाम मरण फुंदीदेवी ने सकाम मरण को प्राप्त किया है। हम एक-एक पल एक-एक क्षण मृत्यु की ओर जा रहे है। फुंदीदेवी ने 31 दिन के संथारे में अपने जीवन का सार निकाला है। आगरा से आचार्य  श्री महाश्रमण के द्वारा प्रेषित संदेश का वाचन ललित ज...

जीवन जीने की अच्छी कला सीखे - आचार्य श्री महाश्रमण जी

ताज नगरी आगरा में आयोजित हुआ बुद्धिजीवी सम्मेलन 06 दिसंबर 2014, आगरा,(उत्तर प्रदेश), आज दोपहर परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में आगरा में बुद्धिजीवी सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें आगरा की प्रमुख संस्थाओ के मुख्य पदाधिकारीगण, न्यूज़ चैनल के माननीय व्यक्तिगण, डॉक्टर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अड्वोकैटे इत्यादि बुद्धिजीवी लोगों की उपस्थिति रही। पूज्य प्रवर ने अपने प्रेरणा पूर्ण वक्तव्य के माध्यम से इन बुद्धिजीवी लोगों को संबोधित करते हुए फरमाया कि आदमी के जीवन में बुद्धि का बडा महत्व होता है। जिसके पास बुद्धि होती है उसके पास एक बल होता है। निर्बुद्धि आदमी के पास वह बल नही होता। बुद्धि एक शक्ति है परंतु हमारे जीवन में IQ (बौद्धिक विकास) के साथ साथ EQ(भावात्मक विकास) का भी महत्व है। बुद्धि के साथ शुद्धि होती है तो बुद्धि अच्छा काम करती है। शुद्ध बुद्धि कामधेनू होती है। बुद्धि एक ऐसा तत्व है जिससे समस्याओं का समाधान निकाला जाता है तथा बुद्धि के द्वारा समस्याओं को पैदा भी किया जा सकता है। बुद्धि समस्या को पैदा करने वाली न बने। आदमी के पास ऐसा दिमाग है जो समस्याओं को सुलझाने में ...

पुनर्जन्म, अध्यात्म, कर्मवाद आदि का ज्ञान अलौकिक ज्ञान है - आचार्य महाश्रमण जी

"ज्ञान से अधिक पवित्र चीज़ नहीं" 3, दिसम्बर 2014, आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज, कीमठ, आगरा, परमपूज्य आचार्य महाश्रमण जी की अहिंसा यात्रा का पदार्पण आनंद  इंजीनियरिंग कॉलेज के विशाल प्रांगण में हुआ। कॉलेज में पधारने पर शिक्षकगण व विद्यार्थियों द्वारा भव्य स्वागत हुआ। इसके पश्चात पूज्यवर कॉलेज के स्टेडियम में व्याख्यान देंने पधारे। गुरुदेव ने अपने मंगल उद्बोधन में समुपस्थित विद्यार्थीगण, शिक्षकगण व जनमेदनी को लक्षित करते हुए फ़रमाया जो विनीत होता है, विनम्र होता है वह सम्पति को प्राप्त करता है। जो अविनीत, उद्दंड होता है वह विपत्ति या विफलता को प्राप्त होता है। मेरा चिंतन है इस दुनिया में ज्ञान से अधिक पवित्र चीज़ कोई नहीं होती। इसलिए आदमी को ज्ञान का अभ्यास करना चाहिए।ज्ञान ला अर्जन करना चाहिए। कितने कितने विद्यार्थी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं। पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि शिक्षा के 3 उद्देश्य होते हैं- ज्ञानवत्ता, आत्मनिर्भरता ओर संस्कार। इन तीन उम्मीदों की पूर्ती जिस विध्यालय से होती है वह शत प्रतिशत सफल विद्यालय है। और जो विद्यालय इनमे सफल नहीं होता तो मा...

अभातेयुप की बेल्लारी शाखा रक्तदान हेतु सन्मानित

बेल्लारी। 1 दिसं। आज विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष में जिला पंचायत एवं डिस्ट्रिक्ट टास्क फ़ोर्स के संयुक्त तत्वावधान में एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर एड्स जागृति करने वाले एवम् रक्तदान के क्षेत्र में विशेष कार्य करनेवाली संस्था संगठनों को सन्मानित किया गया। इसी के तहत 6 सितम्बर 2014 को विशाल रक्तदान करने हेतु अभातेयुप की बेल्लारी शाखा परिषद् को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सन्मानित किया गया। गौरतलब है कि अखिल भारतीय तेरापन्थ युवक परिषद् द्वारा 6 सितम्बर को एक ही दिन में पुरे देश में 600 से अधिक शिविरों का आयोजन कर 1 लाख से अधिक रक्त यूनिट संग्रहित किए गए थे। संवाद: अंकित खीवेसरा

अपने कर्तव्यों का बोध करें- आचार्य श्री महाश्रमण जी

2 दिसम्बर 2014, मुकदम बिहारी महाविद्यालय, परम पुज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी अपने प्रात: कालिन प्रवचन में उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा की पहली शिक्षा दी गई है की नींद को बहुमान न दे शरीर के लिए नींद लेना जरुरी भी है पर नींद को ज्यादा लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जितना संभव हो आदमी अच्छे कार्य करें। जो जाग्रत रहता है उसकी बुद्धि बढ़ती है, जो जागता है वह धन्य है जो सोता है वह धन्य नहीं होता है। शरीर से जागना एक बात है शरीर से सोना भी आवश्यक होता है और जाग्रत रहना भी आवश्यक होता है। एक शरीर से सोना-जागना होता है और दुसरा सोना-जागना भावेषणा से होता है। शरीर से सोना-जागना द्रव्य सोना-जागना है, चेतना से सोना-जागना भावत: सोना-जागना होता है। आदमी मुर्छा में रहता है मोह में रहता है धर्म की बात उसको सुहाती ही नहीं है इसका मतलब है वह व्यक्ति भाव निद्रा में सोया हुआ है, पदार्थों की मुर्छा में सो जाता है। द्रव्य निद्रा को भी बहुमान नहीं देना चाहिए। और दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या में जो जागरूक रहता है वह स्वस्थ रहता है। सोना-जागना जिसका तय समय पर होना है जिसकी दिनचर्या समय पर होती है उसको...

अणुव्रत शिक्षक संसद के 24 वर्ष पूर्ण

Image
1 दिसम्बर 2014,बादगाँव, मथुरा. आज अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण जी ने अणुव्रत शिक्षक संसद के 24 वर्ष पूर्ती के अवसर पर समुपस्थित श्रद्धालु समाज को दिशाबोध देते हुए फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में "संजमो" शब्द आता है। संयम एक बड़ी निधि है। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का प्रवर्तन किया था।अणुव्रत का कोई प्राण तत्व है तो वह है-"संयम"। आचार्य तुलसी ने घोष दिया "संयमः खलु जीवनं"। अभी वर्त्तमान में भी तुलसी जन्म शताब्दी का घोष निर्धारित किया गया था-"जन जन में जागे विश्वास, संयम से व्यक्तित्व विकास"। जन जन के मन में यह विश्वास जागना चाहिए की संयम से ही व्यक्तित्व का विकास, चेतना का उत्थान, आत्मा की निर्मलता संभव है। अहिंसा को एक दीपक से उपमित किया जा सकता है। अहिंसा के दीपक को सभी अपने जीवन में प्रज्वलित करें। आज ही के दिन अणुव्रत शिक्षक संसद जो की हमारी एक संघीय संस्था है, उसकी शुरुवात हुई थी। आज यह संस्था 24 साल की युवा हो चुकी है। किसी भी संस्था के लिए 3 power अपेक्षित होते हैं- 1)man power  2) money power  3) management power  हिं...