जीवन जीने की अच्छी कला सीखे - आचार्य श्री महाश्रमण जी

ताज नगरी आगरा में आयोजित हुआ बुद्धिजीवी सम्मेलन

06 दिसंबर 2014, आगरा,(उत्तर प्रदेश), आज दोपहर परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में आगरा में बुद्धिजीवी सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें आगरा की प्रमुख संस्थाओ के मुख्य पदाधिकारीगण, न्यूज़ चैनल के माननीय व्यक्तिगण, डॉक्टर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अड्वोकैटे इत्यादि बुद्धिजीवी लोगों की उपस्थिति रही। पूज्य प्रवर ने अपने प्रेरणा पूर्ण वक्तव्य के माध्यम से इन बुद्धिजीवी लोगों को संबोधित करते हुए फरमाया कि आदमी के जीवन में बुद्धि का बडा महत्व होता है। जिसके पास बुद्धि होती है उसके पास एक बल होता है। निर्बुद्धि आदमी के पास वह बल नही होता। बुद्धि एक शक्ति है परंतु हमारे जीवन में IQ (बौद्धिक विकास) के साथ साथ EQ(भावात्मक विकास) का भी महत्व है। बुद्धि के साथ शुद्धि होती है तो बुद्धि अच्छा काम करती है। शुद्ध बुद्धि कामधेनू होती है। बुद्धि एक ऐसा तत्व है जिससे समस्याओं का समाधान निकाला जाता है तथा बुद्धि के द्वारा समस्याओं को पैदा भी किया जा सकता है। बुद्धि समस्या को पैदा करने वाली न बने। आदमी के पास ऐसा दिमाग है जो समस्याओं को सुलझाने में सक्षम होता है।

पूज्य प्रवर ने उपस्थित सभा को अहिंसा यात्रा की जानकारी देते हुए इसके तीन महत्वपूर्ण करणीय कार्यो- सद्भावना का संप्रसार, नैतिकता का प्रचार प्रसार तथा नशा मुक्ति अभियान की जानकारी दी। गुरुदेव ने कहा कि कुछ लोग श्रमजीवी होते है और कुछ लोग बुद्धिजीवी होते है। बुद्धिजीवी लोग बुद्धि के आधार पर जीविका प्राप्त करते है। बुद्धिजीवी लोग जीने की कला को अच्छे से पकड़ सकते है। जीवन जीने की अच्छी कला सीखे तथा बुद्धि एवम् ज्ञान से जीवन को आगे बढ़ाए। ईमानदारी को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। दो शब्द आते है- अर्थ और अर्थाभास। न्याय नैतिकता से अर्जित किया धन अर्थ है और अन्याय अनैतिकता से अर्जित किया धन अर्थाभास है। व्यक्ति को अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए। जीवन में संयम होना चाहिए। समय प्रबंधन ऐसा हो कुछ समय धर्म, स्वाध्याय के लिए निकाल सके। जीवन में शरीर के साथ साथ चेतना का भी बड़ा महत्व है। जीवन पूर्ण रूप से स्वस्थ रहे उसके लिए शरीर की स्वस्थता के साथ चेतना की निर्मलता की भी आवश्यकता है।पूर्ण शांति के लिए तीन बातों से मुक्ति आवश्यक है- व्याधि यानि शारीरिक बीमारी, आधि यानि मानसिक बीमारी, उपाधि यानि भावात्मक बीमारी। इनसे मुक्त होते है तो समाधि भी प्राप्त हो सकती है।

गुरुदेव ने सम्मेलन में उपस्थित सभी बुद्धिजीवी लोगों को अहिंसा यात्रा के संकल्प करवाए और इसके उपरान्त उनकी जिज्ञासाओं को समाहित किया। मुनि श्री कमल कुमार जी तथा मुनि श्री अक्षय प्रकाश जी का भी सारपूर्ण वक्तव्य हुआ।

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