बेटियाँ है दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती : साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी

शिक्षक-शिक्षिकाओं का एक दल आज संघमहानिदेशिका साध्वी प्रमुखाश्रीकनकप्रभा जी के दर्शनार्थ पहुंचा.
शिक्षिकाओं में से एक प्रतिभा यादव के साथ आई हुई कल्याणपुर खंड की सुमन यादव ने साध्वीप्रमुखाश्री जी को निवेदन किया कि - महाराजजी, यह आपसे कुछ  वरदान-आशीर्वाद चाहती है.
साध्वीप्रमुखाश्री जी ने कहा- बोलो बाई ! क्या चाहती हो ?
प्रतिभा - महाराज मेरे को बेटा नहीं है, मुझे बेटे का आशीर्वाद दीजिए.
सुमन - महाराजजी, इसने आपके बारे में काफी सूना है, इसलिए आपके पास आई है.
साध्वीप्रमुखाश्रीजी - बेटी है ना आपको ?
प्रतिभा - हाँ, जी है.
सध्वीप्रमुखाश्रीजी- आप अपनी बेटी को ही अपना बेटा मानो. राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर इन महापुरुषों  को आखिर एक औरत ने ही जन्म दिया है. बेटियाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती है. बेटियाँ ही मां का सच्चा-पक्का सहारा होता है. बेटा तो कई बार देखने में आता है कि शादी के बाद पत्नी का हो जाता है. बेटियों को भी सही शिक्षा, उच्च शिक्षा, सद्संस्कार मिले तो वे लड़को की तुलना में कतई कम नहीं है.

साध्वीप्रमुखाश्रीजी से इस प्रकार प्रेरणादायी समाचान प्राप्त कर वह शिक्षिका भाव-विभोर हो उठी और अपनी साथी महिला से बोली कि- मैं अपनी बेटी को खूब योग्य बनाउंगी. मैंने यहाँ दर्शन कर मार्गदर्शन पा लिया. उसके बाद वह साध्वीप्रमुखाश्रीजी के चरणों में नतमस्तक हो गयी. 

Comments

Popular posts from this blog

160 वें मर्यादा महोत्सव का तृतीय दिवस