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Showing posts from April, 2015

खबरें सब तक पहुँचाने वाले सिर्फ खबरों तक नहीं रहते है - पंकज दुधोडिया

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खबरें सब तक पहुँचाने वाले सिर्फ खबरों तक नहीं रहते है संघ सेवा की बात हो तो वे सब कुछ अर्पण कर देते है।। अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश के सफल नेतृत्व में चलता महामंत्री श्री हनुमान के साथ संघीय गतिविधि का प्रचार ये करता।। संघपति की दृष्टि से ही संघ प्रचार का काम है JTN करता कुशल मार्गदर्शन श्री महावीर व श्री संजय का पाता रहता।। सबकी भावनाओं को साथ में ले चल रहा ये परिवार हर प्रतिनिधि करता हर प्रतिनिधि से आत्मिक प्यार।। आपसी सोहार्द के साथ चलाता ये संघ सेवा की भावना लेकर निस्वार्थ सेवा भावना से आगे से आगे बढ़ता ये रुक-झुक कर।। मानव है मानवता का कार्य करने को तत्पर ये परिवार नेपाल के प्रतिनिधियों को करता दिल से सलाम परिवार।। सहयोग भावना के साथ चला नेपाल की सेवा को ये परिवार गुरु महाश्रमण जी ऊर्जा से "पंकज" कार्य करेगा ये परिवार।।

नेपाल त्रासदी के चौथे दिन पर काठमांडू से प्राप्त संवाद

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परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि में सभी साधू-साध्वियां, समण श्रेणी  सानंद और सकुशल है। कल सूर्यास्त के पश्चात पूज्यप्रवर पुलिस मुख्यालय परिसर से प्रस्थान कर लगभग तीन सौ मीटर की दूरी पर स्थित श्री मोतीलाल दुगड़ के निवास पधार गए एवं आज यही विराजमान है। नेपाली समाचार पत्रों के अनुसार भूकंप का भीषण दौर अब गुजर चुका है। तेरापंथ विज्ञप्ति क्रमांक ६ के अनुसार आज मध्याह्न में कुछ तेज वर्षा हुई, किन्तु प्रवास स्थल साताकरी है। TV channels interviewing Acharya Mahashramn in Kathmandu on fourth day after Nepal quack आज पूज्यप्रवर का छठा पदाभिषेक दिवस है। पूज्यप्रवर के निर्देशानुसार आज कोई अन्य कार्यक्रम न कर भूकंप पीड़ितों के लिए आध्यात्मिक मंगलभावना की गयी एवं जप अनुष्ठान के प्रयोग किए गए। भारत के प्रमुख समाचार चैनल्स पर प्रात:कालीन अनुष्ठान को सीधा प्रसारित किया गया। पूज्यप्रवर ने ३० अप्रैल तक काठमांडू में समायोज्य प्रवचन कार्यक्रम स्थगित रखने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व २८ अप्रैल को होनेवाली मुमुक्षु नमन भंसाली की मुनि दीक्षा का कार्यक्रम भी स्थगित रखने...

मनुष्य की सारी अपेक्षाएं प्रकृति से पूर्ण होती हैं - साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी

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26 अप्रैल 2015, तेरापंथ भवन, वीरगंज, नेपाल, JTN. साध्वी प्रमुखाश्री जी ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के अगले दिन आपदाओं के बारे में पूरा विवेचन करते हुए फरमाया कि इन हादसों में एक साथ इतने लोग मारे जाते हैं उसका कर्मशास्त्रीय कारण क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि जब किसी कार्य में अनेक लोगों की सहभागिता रहती है। और उनकी विचारधारा एक जैसी होती है। तो वह सामूहिक रूप में जिस कर्म का बंधन होता है, हालाँकि बंधन सबका अलग अलग होता है, लेकिन एक प्रेरणा से एक वातावरण से, एक अध्यवसाय से बंधन होता है तो कभी कभी ऐसा भी योग होता है कि वह एक साथ उदय में आ जाता है। ऐसा भी हो सकता है सबके अपने अपने कर्म बांधे हुए हैं लेकिन एक निमित से होते समय उदीरणा होके एक साथ उदय में आ गए। तो इस बारे में निश्चित कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन यह निश्चित है कि जो भी होता है अपने कर्मों का फल होता है। अब आपदाएं कितने प्रकार की होती हैं? देवसिक विपत्ति भी हो सकती है, मनुष्येतिक विपत्ति भी हो सकती है, पशु पक्षी तिर्यंच आदि से भी कष्ट मिल सकते हैं। कुछ आपदाएं होती हैं- प्राकृतिक आपदाएं। प्राकृतिक आपदायें क्यों आती ह...

नेपाल भूकम्प के पश्चात आचार्य महाश्रमण जी का धर्मसंघ को सन्देश

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काठमांडू. २५ अप्रैल.  हम लोग जैन श्वेताम्बर संघ के कुछ सदस्य साधू साध्वियां और समण श्रेणी काठमांडू में हैं और आज भयंकर सा भूकंप आया था परन्तु हम प्रायः प्रायः सभी सुरक्षित हैं। यानि मामूली शारीरिक चोट के अलावा हम सभी सुरक्षित हैं और अभी हम प्रायः सभी खुले मैदान में बैठे हैं। और हो सकता है भारत में हमारे साधू साध्वियां समण श्रेणी है और नेपाल में भी अन्यत्र हमारे साध्वी प्रमुखा श्री जी आदि साध्वियां और अन्य भी कोई साध्वियां हो सकती है तो हम उन सभी के सुख संवाद जानना चाहते हैं कि नेपाल में भारत में और अमेरिका आदि में हमारे साधू साध्वियां समण श्रेणी हैं वे सब सुखसाता में हैं ना। कही कोई विशेष बात हो तो हमे सूचना भी मिले और वहाँ जो भी उचित व्यवस्था हो सके उस हिसाब से सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए। और ऐसी कोई चिंता की बात हमारी तरफ से नहीं लग रही है। हालाँकि भूकंप के कुछ झटके थोड़े थोड़े आ रहे हैं फिर भी अभी तक कोई अभी तक चिंता वाली खास बात नहीं लग रही है। हमारे धर्म संघ के साधू साध्वियों और समण श्रेणी को कहीं भी कोई खास कठिनाई हो तो हमे उनका संवाद मिलना चाहिए। जितना संभव हो सके हम उनकी...

बलि प्रथा का अंत हो : आचार्य श्री महाश्रमण

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"बलि प्रथा का हो अंत"- आचार्य महाश्रमण Acharya Mahashramanji at Bal Mandir Kathmandu  दिनांक - २२ अप्रेल २०१५ अध्यात्म समवसरण, बाल मंदिर, काठमांडू, नेपाल। JTN. आर्हत वाड्मय में धर्म को उत्कृष्ट मंगल बतलाया गया है। दुनिया में मंगल वनिर्विघ्नता की कामना की जाती है व उसके लिए किसी शक्तिशाली आत्मा का स्मरण या शरण ली जाती है। दुःख में भक्त अपने प्रभो का स्मरण करते हैं। मेरे मन में आता है कि छोटी-मोटी बाधाओं के लिए महापुरुषों को तंग न करके उन्हें समता से सहने का प्रयास करना चाहिए। सबसे बड़ा मंगल धर्म है जो अहिंसा, संयम व तप में निहित है। अहिंसा एक भगवती है, जो सबका क्षेम-कुशल करने वाली है। न सिर्फ आदमी के प्रति बल्कि पशु के प्रति भी अहिंसा का पालन होना चाहिए। मेरा तो देवी देवताओं से भी यही अनुरोध है कि वे पशु बलि से संतोष का अनुभव न करें व पशुओं को माफ़ कर दें। बलि प्रथा का अंत हो। हम साधुओं को तो यह निर्देश दिया गया है कि उनके कारण से चींटी भी न मर जाए इसलिए देख देख कर चलो। खुले मुंह बोलने से वायु काय की जीव हिंसा हो सकती है, इसीलिए मुख वस्त्रिका रखते हैं। भोजन बनाने में...

वर्ष भर एकान्तर तप करने वालों का गुणानुवाद

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तपस्या महान धर्म है, इसीलिए इसे मुक्ति महल का पथ बताया गया है – साध्वी कनकश्री 'राजगढ़' गंगाशहर, तेरापंथी सभा द्वारा आज सोमवार को प्रातः कालीन व्याख्यान के अंतर्गत शांतिनिकेतन सेवाकेंद्र में साध्वीश्री कनकश्री जी एवं साध्वीश्री जिनबालाजी के सान्निध्य में पिछले पुरे एक वर्ष से एकान्तर तप करने वाले भाई बहिनों के पारिवारिक जनों द्वारा अभिनन्दन का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अवसर पर बोलते हुए साध्वीश्री कनकश्री जी ने बतलाया कि संसार के हर धर्म में तप की महता बतलाई गयी है और जैन धर्म में इसे प्रमुख स्थान दिया गया है. तपस्या की आराधना से पूर्व संचित कर्मों का नाश होता है और व्यक्ति हल्का बनता है. उन्होंने फ़रमाया कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप ये संसार सागर से पार करवाने वाले तत्व है. इनकी सम्यक आराधना व्यक्ति को उज्जवल तम बनाती है. इस अवसर पर  साध्वीश्री जिनबालाजी ने फ़रमाया कि मजबूत मनोबल वाला व्यक्ति ही तप के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है. बिरले और हिम्मतवर इंसान ही तपस्या का स्वाद चखते है, भूखा रहना सरल बात नहीं है. और उसमे भी जब बात एक दिन खाना और अगले पुरे दिन भूखा रहना ...

आचार्य महाप्रज्ञ अध्यात्म जगत के महासूर्य : साध्वीश्री काव्यलता जी

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शांतिदूत, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वीश्री काव्यलता जी के सानिध्य में तथा तेरापंथ महिला मंडल, मैसूर के तत्वाधान में आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की छट्टी पुण्यतिथि का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर साध्वीश्रीजी ने अपने मंगल उदबोधन् में फ़रमाया- तेरापंथ धर्मसंघ के दसवे अधिशास्ता आचार्यश्री महाप्रज्ञजी अध्यात्म जगत के महासूर्य थे। राजस्थान के छोटे स3 कस्बे टमकोर में जन्मा वह अबोध बालक हम सबके लिए प्रेरणा पुरुष बन गया। प्रज्ञा, विनय, समर्पण की त्रिवेणी आचार्यश्री महाप्रज्ञजी एक अनुपम महानयोगी थे। प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान जैसे महान अवदान देकर आपने पूरी मानव जाति का कल्याण किया। अहिंसा यात्रा के माध्यम से आपने जन-जन में अहिंसा व नैतिकता का शंखनाद किया। अपने गुरु आचार्यश्री तुलसी के प्रति आपके अदभुद समर्पण व विनम्रता ने आपको  नथमल से महाप्रज्ञ बना दिया। आचार्यश्री महाश्रमणजी जैसे उत्तराधिकारी को पाकर आप निश्चिन्त बन गए। हम सभी सोभाग्यशाली है कि हमें तीन-तीन महापुरुषो को देखने का व उनके सानिध्य में साधना करने का अवसर मिला। इस अवसर पर आचार्यश्री महाप्रज्ञजी...

आत्मा की ओर जाने पर शांति का अनुभव : आचार्य श्री महाश्रमण

हेटौडा, नेपाल । 7 अप्रैल। JTN । आज प्रात:कालीन प्रवचन में पूज्यप्रवर ने फरमाया कि- आदमी में राग द्वेष के भाव क्षीण हो जाएं।  व्यक्ति की आत्मा से लौं लग जाएं। बाहरी पदार्थों से व्यक्ति को शांति नहीं मिल सकती आत्मा की ओर जाने पर शांति का अनुभव होता है। पूज्य प्रवर ने साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी एवं मुख्य नियोजिका साध्वीश्री विश्रुतविभाजी के संदर्भ में फरमाया कि- 'साध्वीप्रमुखाजी कुछ कालमान के लिए हमें विदाई दे रहे है । यह वीरगंज विहार करेंगे और हम उर्ध्व गति करेंगे । साध्वीप्रमुखाजी कुछ लंबे समय बाद बर्दीवास में मिलेंगे । मुख्य नियोजिका विश्रुतविभा जी व साध्वियां हमारे साथ नहीं हो कर एक हॉल्ट पीछे तक रुक सकेगी।  संघ महानिदेशिका साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने कहा कि आचार्य महाश्रमण जी महान योगी हैे इस लिए जनता का इन के प्रति श्रद्धा का भाव है । एसे योगी ही गुरु बन कर कल्याण कर सकते हैे । साध्वीप्रमुखाजी ने कहा कि हमारा मन तो गुरुदेव के चरणो में है। हमेँ अभी वीरगंज जाना है। गुरुदेव के साथ हमे कुछ सोचना नहीं पडता। अब हमें भी कुछ चिंता रखनी होगी। हमें गुरुदेव का आधार है, प...

मुमुक्षु नमन भंसाली का मंगल भावना समारोह आयोजित

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पक्षीतीर्थ. ११ अप्रैल. आज डॉ. साध्वी श्री पीयूषप्रभाजी के सानिध्य में तेरापंथ सभा द्वारा मुमुक्षु नमन भंसाली का मंगल भावना समारोह आयोजित किया. गया. श्रद्देय आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन कर-कमलों से मुमुक्षु नमन की दीक्षा २८ अप्रैल २०१५ को नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने जा रही है जो कि विदेश की धरती पर सर्वप्रथम दीक्षा होगी. ज्ञातव्य है कि साध्वी पीयूषप्रभाजी के कोइम्बतुर चातुर्मास में भाई नमन को साध्वीश्री की प्रेरणा मिली और भाई नमन संयम पथ की ओर अग्रसर होने को उद्यत हुआ.  इस अवसर पर साध्वीश्री ने फ़रमाया कि- अनुस्त्रोत के मार्ग पर सभी चलते है, किन्तु कुछ बिरले होते है जो प्रतिस्त्रोत का मार्ग अपनाते है और भौतिक सुखों को छोड़ शाश्वत सुख की खोज हेतु प्रस्थित होते है. भाई नमन संयम मार्ग पर अपने कदम बढाने जा रहा है और इसकी इस यात्रा में हमे भी योग मिला है यह गुरुदेव का ही आशीर्वाद है. साध्वीश्री ने मुमुक्षु नमन के संयम जीवन के प्रति मंगलकामना की.  दीक्षार्थी नमन ने पूज्य आचार्यप्रवर, साध्वीवृंद एवं पारिवारिक जनों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की एवं उपस्थित जनमेदिनी को आ...

Kishor Mandal Adhiveshan Online Registration Form

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07/04/2015

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मैसूर में महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव" का आयोजन

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"भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव" का आयोजन साध्वी श्री काव्यलता जी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में तेरापंथ सभा भवन मैसूर में किया गया। सर्वप्रथम सुबह 7.00 प्रभात-फेरी निकली गई, जो मैसूर के विभिन्न मुख्य मार्गो से होते हुए पुनः सभा भवन पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। प्रभात-फेरी में लोगो को अहिंसा एवम् नशा मुक्ति का सन्देश दिया गया। महिला मंडल द्वारा भगवान महावीर की आरती से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कन्या मंडल ने एक नाट्य प्रस्तुति द्वारा महावीर स्वामी के संदेशो एवम् आदर्शो को बताया। साध्वीश्री जी ने कहा की भगवन महावीर के बताये हुए मार्ग पर चल कर किसी को धोखा ना देकर, सदैव सत्य बोल एवम् अहिंसा को अपनाकर कर हम मानव जीवन को सार्थक बना सकते है। कार्यक्रम में मैसूर के आस-पास के क्षेत्रो से भी कई श्रावक पधारे।

भगवान महावीर लोकोत्तम : आचार्य महाश्रमण

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भगवान महावीर के 2614वें जन्म कल्याणक महोत्सव में शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कार्यक्रम में उपस्थित नेपाल के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. रामवरण यादव, भारतीय सांसद श्री जैसवाल जी तथा समुपस्थित विशाल जनमेदनी को संबोधित करते हुए फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में कहा गया है- "लोगुत्तमे समणे णाय पुत्ते"। भगवान महावीर को लोकोत्तम कहा गया है। भगवान महावीर ने अपने जीवन में समता की साधना की थी । प्रभु महावीर की समता के सन्दर्भ में एक श्लोक बहुधा उत्तरित होता है  "पन्नगे च सुरेन्द्रे च निर्विशेष मनास्काय " ।एक और चंडकौशिक सर्प ने डसा तो भी समता और एक और सुरेन्द्र ने चरणों में वंदन किया तो भी समता रखने वाले वीर स्वामी को नमस्कार। संयोग की बात हम वीर स्वामी की जयंती वीरगंज में मना रहे हैं। क्षेत्र का नाम भी वीरगंज और हमारे प्रभु का भी नाम वीर । भगवान महावीर का नाम जैन धर्म से जुड़ा है। लेकिन मेरा यह मानना है कि ऐसी आत्माएं जो होती हैं वे सबकी होती हैं वे किसी एक देश वेश परिवेश की नहीं अपितु सबकी होती हैं। पूरा जगत उनसे प्रेरणा प्राप्त करें। तो ऐसे महापुरुषों के उपदेश सभी के लिए क...

अणुव्रत समिति फारबिसगंज का गठन

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फारबिसगंज तेरापंथ भवन में मानवीय एवं नैतिक मूल्यो के संवर्द्धन को समर्पित संगठन अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री डालचंद कोठारी की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें अणुव्रत समिति फारबिसगंज का गठन हुआ ।श्री खेमचंद भंसाली  को र्निविरोध अध्यक्ष के रूप में चुना गया । चुनाव प्रभारी का दायित्व स्थानीय तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री निर्मल जी मरोठी ने निभाया । राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया की हम सब को मिलकर अणुव्रत अणुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की बिहार- नेपाल-बंगाल- भूटान की यात्रा में सहभागी बन अणुव्रत के प्रचार- प्रसार हेतू कार्य करना एंव नैतिकता-सद् भावना व नशा मुक्त हों भारत देश अभियान को गति देना हैं । बैठक में तेरापंथ महासभा के उपाध्यक्ष श्री अनूप बोथरा , आंचलिक प्रभारी अणुव्रत श्री राकेश मालू , कार्यसमिति सदस्या श्रीमति प्रभा सेठीया , शांतिलाल चिण्डालिया , मनोज भंसाली,भास्कर महनोत,ओम देदानी,सुशील घोषल,चंदा बैद,मुकेश राखेचा,नीलम बोथरा आदि उपस्थित रहे ।नवनियुक्त अध्यक्ष श्री खेमचंद भंसाली ने उन्हें चुने जाने पर सबके प्रति आभार जताया एवं कहा की सबके सहयोग से इस श्रेत्र में अणु...

महावीर जन्म कल्याणक दिवस के अवसर पर तेयुप चेन्नई द्वारा नशामुक्ति अभियान

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चेन्नई महानगर में जैन महासंघ के तत्वावधान में सम्पूर्ण जैन समाज ने हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर विशाल वरघोडा एवं प्रवचन कार्यक्रम ' आयोजित किया। चेन्नई में विराजित जैन धर्म के सभी सम्प्रदाय के साधु-साध्वियों के सान्निध्य में आयोजित इस विराट आयोजन में लगभग 25000 से अधिक लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज की। इस अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद् चेन्नई ने आचार्य महाश्रमण जी की अहिंसा यात्रा के प्रमुख बिंदु नशा-मुक्ति को आत्मसात करते हुए कार्यक्रम स्थल पर "नशा-मुक्ति" की स्टाल लगायी, जिसमें आगंतुक लोगों को नशे से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताकर उन्हें नशा मुक्त रहने की प्रेरणा दी। सैंकड़ों व्यक्तियों ने तेयुप चेन्नई के इस अभियान से जुड़कर तेयुप द्वारा प्रकाशित नशा मुक्ति के फॉर्म भरे और स्वेच्छा से जीवन भर नशे से दूर रहने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम से पूर्व मिन्ट स्ट्रीट स्थित आराधना भवन से लेकर दादावाडी जैन मंदिर तक आयोजित 10 किलोमीटर विशाल वरघोड़े में चेन्नई के विभिन्न जैन संगठनों ने भगवान महावीर के जीवन विषयक और अन्य समाज...

इचलकरंजी में हर्षोल्लास के साथ मनी महावीर जयंती

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इचलकरंजी । 3 अप्रैल । मुनि श्री प्रशांतकुमारजी के सानिध्य में भगवान महावीर के जन्मोत्सव का विशेष कार्यक्रम तेरापंथ भवन इचलकरंजी में आयोजित किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रशांतकुमारजी ने कहा महावीर के विचार और सिद्धांत आज पूरी दुनिया में मान्य हो रहे हैं। स्वतंत्रता, सापेक्षता, समन्वय, सहयोग, समता और सहिष्णुता ये सब महावीर दर्शन के मूल सिद्धांत रहे हैं। इन्हें अंगीकार कर चलना हर राष्ट्र के सभ्य नागरिकों के लिए आज आवश्यकता हो गया है। भगवान महावीर को आज सीमित दायरे से मुक्त कर व्यापक क्षेत्र में लाने की जरुरत है। महावीर स्वामी स्वयं क्षत्रिय थे, उनके अधिकांश शिष्य ब्राम्हण और क्षत्रिय थे। दीन दलितों  में उन्होंने आत्मिक जोश जगाकर स्वाभिमान के साथ पुनः खड़ा किया था। आज जैन धर्म को वैश्य समाज तक सीमित कर दिया गया। मुनि श्री ने मैनेजमेंट के सिद्धांतों की चर्चा करते हुए कहा आत्मविश्वास विल पावर एकाग्रता लक्ष्य निर्धारण जैसे सफलता प्राप्ति के ओर सेल्फ मनेजमेंट के सूत्र आज पढ़ाए सिखाए जाते हैं। जिनका मूल आधार महावीर वाणी और महावीर दर्शन में उपलब्...