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Showing posts from July, 2015

विरत्न विभूति का नाम है आ. भिक्षु - साध्वीश्री अणिमाश्रीजी

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गुवाहाटी 29 जुलाई। साध्वीश्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वीश्री मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन के सुरम्य प्रांगण में सैंकड़ो श्रद्धालूओं की उपस्थिति में आचार्य भिक्षु जन्म दिवस एवं बोधि दिवस का भव्य कार्यक्रम समायोजित हुआ।        साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा मस्तिष्क के सूक्ष्म प्रकोष्ट की सक्रियता को लेकर जन्म लेने वाले तेजस्वी बालक का नाम है आचार्य भिक्षु। सिंह स्वप्न के साथ अपने प्रभावशाली पराक्रम का पैगाम देने वाला महामनस्वी का नाम है आ. भिक्षु। बाहर भटकती चेतना को भीतर की ओर ले जाकर शास्त्रो के समुंद्र में अवगाहन कर बोधि मुक्ताओ को प्राप्त करने वाली विरत्न विभूति का नाम है आ. भिक्षु। आगम वाणी के अमृत को पान कर जन जन में संयम, तप, त्याग की अंतर चेतना को झंकृत करने वाले तपस्वी का नाम है - आचार्य भिक्षु। आज हम सब तेरापंथ के प्राण आ. भिक्षु का जन्मोत्सव एवं बोधि दिवस समारोह युगपत् मना रहे है। जन जन के भीतर आ. भिक्षु के प्रति उमड़ते आस्था के पारावार को देखकर यू लग रहा है कि इस पंचम कलिकाल में आचार्य भिक्षु सतयुग की बहार लेकर आए। ती...

डॉ. अब्दुल कलाम थे वैज्ञानिक आध्यात्मिक व्यक्तित्व : आचार्य महाश्रमण

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परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने देश के पूर्व महान राष्ट्रपति, वैज्ञानिक भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि - डॉ. कलाम का तेरापंथ धर्मसंघ के साथ सम्पर्क बना रहा. गुरुदेव महाप्रज्ञजी के साथ उनका निकटता का सम्बन्ध था. १९९९ में दिल्ली में गुरुदेव महाप्रज्ञजी के पास वे एक वैज्ञानिक के रूप में आएं. वार्तालाप के दौरान गुरुदेव ने उन्हें शान्ति की मिसाइल बनाने की बात कही थी. डॉ कलाम अपने वक्तव्य में इस बात को बार बार कहते भी थे. वे विज्ञान जगत के व्यक्ति थे एवं साथ में उनमे आध्यत्मिकता भी नजर आती थी.  मुंबई एवं अहमदाबाद में भी उन्होंने आचार्य श्री महाप्रज्ञा के दर्शन किये. अपना जन्मदिन मनाने के लिए वे सूरत में  आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के साथ रहे. दिल्ली में २००५ में और आचार्य श्री महाप्रज्ञाजी के महाप्रयाण पर सरदारशहर भी आएं. २०११ में  केलवा में  एवं २०१४ में दिल्ली हमारे पास आएं. बच्चों से उन्हें विशेष प्रेम था. आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के साथ पुस्तक का सह् लेखन भी किया. उनके जाने से भारत...

ज्ञान गोष्ठी का हुआ शुभारम्भ

विराटनगर. २७ जुलाई। परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी की सन्निधि में ज्ञान गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ. सुबह ८:१५ से ८;५५ तक चलनेवाली इस ज्ञान गोष्ठी में स्वयं आचार्यप्रवर अपनी पावन सन्निधि प्रदान करवाते है. ज्ञान गोष्टी का आधार 'भिक्षु विचार दर्शन' है. मुनि दिनेशकुमारजी के पास काफी श्वावकों ने अपने नाम लिखवाएं है. इस ज्ञान गोष्टी में सिर्फ पुरुष वर्ग ही भाग ले सकते है. मुनि श्री सुधांशुकुमारजी भिक्षु विचार दर्शन का प्रतिदिन पाठ करते है.  

चातुर्मासिक प्रवेश इचलकरंजी

22 जुलाई। इचलकरंजी। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री मधुस्मिताजी आदि ठाणा 7 का इचलकरंजी तेरापंथ भवन में चातुर्मासिक प्रवेश आज प्रातः करीब 9:15 बजे उल्लासमय वातावरण में साधवीवृंद की अभिवंदना में स्वागतोत्सुक श्रावक समाज के जुलुस के साथ हुआ।  इस अवसर पर आयोजित समारोह में  इचलकरंजी, जयसिंगपुर, कोल्हापुर, सांगली, तासगांव, माधवनगर आदि से समागत श्रावक समाज को पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने कहा कि- साधू जंगम तीर्थ होते है। साधू की संगति से पाप कर्मो का नाश होता है। पूज्यप्रवर की आज्ञा की आराधना करते हुए आज इचलकरंजी में चातुर्मास हेतु प्रवेश हुआ इसकी हमें प्रसन्नता है। श्रावक श्राविकाएं इस अवसर का पूरा लाभ ले एवं चातुर्मास काल में धर्म-ध्यान-तप-जप आदि के द्वारा आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा में आगे बढे।  इससे पूर्व तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों द्वारा मंगलाचरण के साथ समारोह शुरू हुआ। तेरापंथ सभा इचल. अध्यक्ष श्री जैसराज छाजेड़, तेयुप अध्यक्ष श्री संजय वैदमेहता, मंत्री श्री विकास सुराणा, महिला मंडल अध्यक्षा सुनीता गिड़िया, मंत्री सौ. जयश्...

विद्या व आचार के अनुशीलन से मोक्ष प्राप्ति संभव

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पहले ज्ञान फिर आचार. जैन वांग्मय में कहा गया है कि विद्या व आचार के अनुशीलन से मोक्ष की प्राप्ति हो जा जाती है जो भक्ति से श्रुत की उपासना करते है वे जिनेश्वर देव की आराधना करते है. ज्ञान के साथ आचार भी उन्नत होना चाहिए. यह मंगल प्रेरणादायी वक्तव्य परमपूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समण संस्कृति संकाय, जैन विश्व भारती, लाडनूं द्वारा आयोजित प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय जैन विद्या दीक्षांत समारोह में प्रदान किया. पूज्य्प्रवर ने फरमाया कि- श्रुत को नमस्कार करो क्योंकि ज्ञान से ही आलोक मिलता है. समण संस्कृति संकाय, जैन विश्व भारती द्वारा किए जा रहे कार्य से अनेको विद्यार्थियों को जैन विद्या के सिद्दांत व तत्व विद्या से परिचित होने का मौका मिल रहा है.  जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय संस्थान के भी दूरस्थ पाठ्यक्रम चलते है. जैन विश्व भारतीए एवं विश्वविद्यालय दोनों एक दुसरे के पूरक है.  अनेकों कार्यकर्ता इस कार्य में योगदान देते है. सबका आध्यात्मिक विकास हो. कार्यक्रम में जैन विद्या भाग 9 की परीक्षा उतीर्ण कनेवाले विद्यार्थियों को विज्ञ की उपाधि से,  भाग 1 से भाग 9 की परीक्ष...

सत्य साधना एवं अहिंसा आराधन हेतु अभय आवश्यक : आचार्य महाश्रमण

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25 जुलाई. विराटनगर, नेपाल. परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने प्रवचन देते हुए फरमाया कि- जैन साध्वाचार में अहिंसा पर बहुत ध्यान दिया गया है. जैन साधू को अहिंसा का पालन करना होता है. व्यक्ति भय के कारण हिंसा में चला जाता है और झूठ भी बोलता है. भय एक कमजोरी है उससे मुक्त होने का प्रयास होना चाहिए. सच्चाई व अहिंसा की आरधना के लिए अभय आवश्यक है. व्यक्ति न स्वयं डरे, न दूसरों को डराए. सबके साथ मैत्री का प्रयोग हो.  जनकल्याण प्रतिष्ठान व् एकल विद्यालय योजना  पूज्यप्रवर ने जनकल्याण प्रतिष्ठान व् एकल विद्यालय योजना के कार्यक्रम में फरमाया कि- जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्त्व है. आचार्य तुलसी व् आचार्य महाप्रज्ञजी ने जीवन विज्ञान की बात कही थी. बौद्धिक शिक्षा के साथ भावात्मक विकास भी होना चाहिए तभी संतुलन रह सकेगा. एक अच्छी पीढी का निर्माण हो सकेगा. एकल विद्यालय योजना की ओर से केशरीसिंह दुगड़ ने विचार व्यक्त किए.  जैन विद्या के प्रचार-प्रसार का कार्य महत्वपूर्ण: समण संस्कृति संकाय, जैन विश्व भारती लाडनूं द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन पूज्यवर ने फर...

गुस्से को जीतने न दे : आचार्य महाश्रमण

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विराटनगर, नेपाल.23 जुलाई. परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने मंगलदायी प्रेरणा पाथेय में फ़रमाया कि- आदमी के भीतर कषाय विद्यमान है तो वह दसवें गुणस्थान तक रहने वाले प्राणी है। दसवें गुणस्थान में नाम मात्र का कषाय होता है। छठे गुणस्थान में कषाय उभरता है। सातवें गुणस्थान से कषाय योगो में प्रकट नहीं होता है। साधू सर्वसावद्य योग का त्याग करने वाला होता है। छठे गुणस्थान में हो तो वह नियमानुसार साधू के कषाय योग में आना नहीं चाहिए पर आ भी सकता है। सातवें गुणस्थान से आगे कभी कषाय योगो में आ नहीं सकता। गुस्से को हटाए : गुस्सा भी कषाय है। इसे असफल करने का प्रयास हो। गुस्से व अध्यात्म की चेतना में लड़ाई हो तो आदमी गुस्से को जीतने न दे। गुस्सा आए तो उसे असफल करने का प्रयास करे। गुस्सा व्यक्ति को आये ही नहीं, और अगर मन में आ भी जाये तो वह वाणी और शरीर में न आये। मन में रहे समता : व्यक्ति प्रिय-अप्रिय स्थिति को धारण करने का प्रयास करे। व्यक्ति का मन समता में रहे। हमेशा सुख ही सुख मिले यह कठिन है और हमेशा दुःख मिले एसा भी नहीं होता है। कष्ट व्यक्ति को अप्रिय लगते है प...

जप का है बड़ा महत्व - आचार्य महाश्रमण

फारबिसगंज 18 जुलाई। आचार्य महाश्रमण जी के फारबिसगंज प्रवास के 8वें दिन तेरापंथ कन्यामण्डल के पूर्वांचल प्रभाग की कार्यशाला एवं दो दिवसीय अधिवेशन आरम्भ हुआ।  परमपूज्य  आचार्य महाश्रमण जी ने पावन उद्बोधन देते हुए फरमाया कि-  जप का बड़ा महत्त्व होता है। माला तो गिनती की सुविधा के लिए एक साधन मात्र है। जप श्वास के साथ भी कर सकते हैं। गीत और भजन भी भक्ति का एक प्रकार होता है। शरीर साथ न दे तो बैठ कर ही नहीं लेट कर भी जप किया जा सकता है बस भाव शुद्ध होना चाहिए मन धर्म ध्यान में एकाग्र रहे। यदि साधु संगति ना हो सके प्रवचन सत्संग में ना जा सकें तो भी घर बैठे जप तो किया ही जा सकता है। जप के लिए नवकार या नमस्कार मन्त्र एक बहु उपयोगी महामंत्र है। अधिवेशन में आई कन्याओं को उन्होंने सचेत रहने की प्रेरणा दी कि बिना नवकार मन्त्र के जप के दिन ना समाप्त हो जाये। स्वाध्याय का भी क्रम चले।   फारबिसगंज प्रवास चातुर्मास के सामान- आचार्यश्री ने फारबिसगंज प्रवास की आधे से अधिक अवधि बिता ली है और इतने ही दिनों की अपनी अनुभूति बताते हुए आपने कृपापूर्वक फरमाया कि हालाँकि यहाँ की चातुर...

साधू साध्वियां श्रुत की साधना करें : आचार्य श्री महाश्रमण

फारबिसगंज. 15 जुलाई.  परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने चतुर्दशी के अवसर उपस्थित सभी साधू-साध्वियों, समणियों को प्रेरणा स्वर में फरमाया कि प्रवचन समय पुर शुरू हो एवं निर्धारित समय पर पूरा हो.  प्रवचनकार प्रवचन से पूर्व प्रवचन विषय की तैयारी करके जाएँ. प्रवचनकार का अध्ययन मजबूत हो, वाणी ठीक हो और चित्त में प्रतिभा की स्फुरणा तो प्रवचन अच्छा हो सकता है. प्रवचन में थोड़ा श्रम करना पड़े तो श्रम की परवाह नहीं करनी चाहिए.  पढ़ाने से ज्ञान मजबूत :  अध्ययन-अध्यापन के लिए फ़रमाया कि साधू-साध्वियों को बाल साधू साध्वियों को बाल साधू साध्वियों को पढ़ाने में समय लगाना चाहिए. पढ़ाने से स्वयं का ज्ञान मजबूत बनता है. तेरापंथ धर्मसंघ में उपाध्या पद की व्यवस्था नहीं है पर बहुश्रुत साधू-साध्वियां है. जैन शासन की अन्य परम्पराओं में उपाध्याय की व्यवस्था है. उपाध्याय का काम ज्ञान देने का है. उपाध्याय पद हो या न हो, ज्ञानी साधू-साध्वियों को अध्यययन-अध्यापन के रूप में श्रुत की आराधना करनी चाहिए.  वैराग्य वर्धक गीत गाएं: साधू-साध्वियाओं को ज्ञानवर्धक, वैराग्य्वर्धक एवं श्...

प्रतिस्त्रोतगामी बने

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मानव जीवन में कुछ विशेष प्रयास कर जीवन को सार्थाक बनाने की प्रेरणा देते हुए परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि- व्यक्ति को अच्छा बनने के लिए प्रतिस्त्रोतगामी बनना होता है. ज्यादातर लोग अनुस्त्रोतगामी होते है. पर जिन्होंने प्रतिस्त्रोत का लक्ष्य बनाया है उन्हें प्रतिस्त्रोत के लिए स्वयं को समर्पित कर देना होता है.  भोग भोगना, इन्द्रिय सुख भोगना अनुस्त्रोतगामिता है. अनुस्त्रोत में चलना आसान है. भोग का त्याग, सुख का त्याग प्रतिस्त्रोतगामिता है.  मनुष्य का जीवन पारसमणि है. पर मनुष्य  इस जीवन को भौतिक सुखों के लिए चलाता है. लेकिंन वह ध्यान दे तो इस मनुष्य शरीर से आत्मा का कल्याण कर सकता है.  साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजे ने कहा कि - व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान पाकर आगे बढ़ने का प्रयास करें. यह हम आप सभी का सौभाग्य है कि हमें ऐसे गुरु प्राप्त है जो समस्याओं का समाधान अपने प्रवचन से भी कर देते है. हम स्वयं समस्याओं का समाधान पाकर आने वाली पीढी के लिए मार्ग प्रशस्त करते रहे.  पूज्यप्रवर ने समणी मधुरप्रज्ञाजी के लिए फरमाया कि - ये इस क्षेत्र से...

विवेकपूर्ण सत्पुरुषार्थ करें : आचार्य महाश्रमण

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सोनापुर (सुनसरी,. नेपाल) जीवन में पुरुषार्थ का महत्त्व समझाते हुए परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने फ़रमाया कि- दुनिया में नियति में जो निहित है वो होकर ही रहता है. दुनिया में अनेक नियम है. जन्म-मृत्यु नियति है. नियति दुनिया में संचालन का एक बड़ा फैक्टर है. जैन दर्शंन किसी को दुनिया का नियंता नहीं मानता. पर व्यक्ति को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए. आदमी को विवेकपूर्ण सत्पुरुषार्थ जीवन में करना चाहिए. आदमी को पुरुषार्थ करने के बाद भी सफलता न मिले तो यह व्यक्ति की गलती नहीं है.भाग्य तो जानने की चीज है और पुरुषार्थ करने का होता है. पूज्यप्रवर ने गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी का स्मरण करते हुए कहा कि- गुरुदेव के शासनकाल के प्रारंभ में माइक व्यवस्था नहीं थी. उन्होंने प्रवचन के लिए जितना पुरुषार्थ किया उतना तो हम कर ही नहीं रहे. पूज्यप्रवर का आजा का प्रवास अरिहंत मल्टी फाइबर्स परिसर में हुआ. पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि- फैक्ट्रिया भी पदार्थ बनाती है वह अनेको के काम आता है, अनेकों की अपेक्षा पूर्ति करता है. फैक्ट्री में मालिक मजदुर का व मजदुर मालिक का शोषण न करें. सभी में सम्यक् पुरुषार्थ होगा...

दया कल्याण की जननी है: आचार्य महाश्रमण

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परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी का आज का प्रवास टंकीसिनवारी में दुग्गड़ फेक्ट्री में हुआ. पूज्यप्रवर ने आज प्रवचन प्रदान करते हुए फरमाया कि- दया कल्याण की जननी है. दुःख व पाप रूपी शत्रु का नाश करने वाली कल्याणी है. पूज्यवर ने रजोहरण दिखाते हुए फरमाया कि- यहाँ हमारे अहिंसा का धर्मोपकरण है. जब चलते है तो जमीन को इससे पूज कर चलते है ताकि पैर के नीचे को जीव न आ जाएं.  साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने फ़माया कि- आत्मार्थी व्यक्ति आत्महित के लिए साधक की शरण में आकर मार्गदर्शन प्राप्त कर मंजिल को प्राप्त करते है. आत्मार्थी व्यक्ति अपने जीवन को व्यर्थ नहीं खोते. मुख्य नियोजिका साध्वीश्री विश्रुतविभाजी ने फरमाया कि- पूज्यप्रवर के दर्शन कर व्यक्ति अपने तन,मन, वचन एवं कर्म को पवित्र बना लेते है. साध्वीवृंद द्वारा "अब मानव जीवन मिल्यो जागो" गीतिका का संगान किया गया. पूर्व सांसद एवं फैक्ट्री के मालिक श्री मोतीलाल दुगड़ ने पूज्यप्रवर की अभिवन्दना की. संवाद: राजू हीरावत, प्रस्तुति- अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़.

विवेकपूर्ण तरीके से जीवन को आगे बढाएं: आचार्य श्री महाश्रमण

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०७ जुलाई. तेरापंथ के एकादशाम अधिशास्ता परमपूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का आज का प्रवास तरहरा स्थित चावल मिल में हुआ. पूज्य्प्रवर ने प्रात:कालीन प्रवचन में फरमाया कि- विवेक ही धर्म है. व्यक्ति में विवेक है तो मानना चाहिए कि वह एक बड़ी उपलब्धि से सम्पन्न हो जाता है. व्यक्ति अपनी हर क्रिया विवेकयुक्त करें या ज्ञानियों का मार्गदर्शन लेता रहे. व्यक्ति विवेक्पून्र तरीके से जीवन को आगे बढाएं तो जीवन धन्य व कृतपूण्य बन सकता है. पूज्य्प्रवर ने "भिक्षु बाबा लो हमारी वंदना" गीत का संगान किया. साध्वी प्रबुद्दयशाजी ने "मत कर रे तुं मोह जगत स्यूं." गीत का संगान किया. 

आचार-विचार-व्यवहार में हो सच्चाई: आचार्य महाश्रमण

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आचार्य श्री महाश्रमणजी धरान नेपाल में प्रवचन फरमाते हुए  परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने प्रवचन के दौरान फरमाया कि - गुणी एवं चारित्रसम्पन्न व्यक्ति ही मोक्ष का अधिकारे होता है और जो सम्यक ज्ञान सम्पन्न होता है वही चारित्रसम्पन्न हो सकता है. सम्य्क् दर्शन युक्त व्यक्ति सम्यक ज्ञान वाला होता है. साधना के जगत में सम्यक् दर्शन का परम महत्व है. व्यवहार जगत में भी सम्यक् दर्शन का महत्व है. आदमी का दृष्टिकोण सम्यक होना चाहिए, यथार्थ होना चाहिए. आदमी की यथार्थ दृशी ही सम्यक् दर्शन है. यथार्थ बोध ही सम्यक् ज्ञान है.  उन्होंने फरमाया कि दुनिया में सच्चाई का अत्यंत महत्त्व होता है. आचार,विचार, व्यवहार में सच्चाई का समावेश होना चाहिए. सम्यक्त्व को धार्मिकता में मूल तत्व माना गया है. बिना सम्यक्त्व यदि कोई कपटी तौर पर आचार का पालन भी कर ले तो उसका ज्यादा महत्त्व नहीं है.  श्रीमाद्जयाचार्य राजस्थान भाषा के महान कवि थे. उन्होंने आराधना में सम्यक्त्व के बारे में बताया. सम्यक्त्व के बिना उपरी आचार का विशेष महत्त्व नहीं. सम्यक्त्व हो तो आचार तपस्या का महत्व भी बढ़ जाता है....

धरान की धरा हुयी पावन, गीता भवन से दिया अनासक्ति का सन्देश

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अनासक्त भाव से प्रवृत्ति करे - आचार्य श्री महाश्रमण व्यक्ति प्रवृत्ति करता है। मन, वचन, कर्म शरीर से भी प्रवृत्ति करता है। व्यक्ति भोजन पानी करता है, चलता है, व्यापार-धंधा करता है। शरीरधारी आदमी प्रवृत्ति से लम्बे काल तक मुक्त नहीं रहता। शरीरधारी के लिए सर्वधा प्रवृत्ति मुक्त हो जाना काफी कठिन होता है। उन्होंने कहा की धरान आये है तो पहाड़ के निकट आ गए है। हिमालय की गुफा में साधना करे तो मौन वहाँ चल जाये पर व्यवहार में पूरा मौन करना कठिन होता है। व्यक्ति का बिना प्रवृत्ति काम नहीं चलता और प्रवृत्ति करे तो कर्म बंधन होता है। इसलिए व्यक्ति अनासक्त भाव से प्रवृत्ति करे। जहाँ अपेक्षा है वहाँ देखो, अपेक्षानुसार बोलो। व्यक्ति ऐसा मनोरंजन न करे की दुसरो को तकलीफ पड़े। ऊँची साधना करनी है तो विनोद भी छोड़ देना चाहिए। परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने धरान के गीत भवन में अपने प्रवास के दौरान आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में अनासक्ति का सन्देश देते हुए कहा की भगवद् गीत की महत्वपूर्ण बात है अनासक्ति। भगवद् गीता में साधना का मार्गदर्शन बड़ा अच्छा है। राग दो प्रकार का होता है। एक प्र...

मन में अहिंसा की भावना रहे - आचार्य श्री महाश्रमण

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1 जुलाई, इनरुवा(नेपाल). परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी का आज का प्रवास इनरुवा(नेपाल) में हुआ। पूज्यप्रवर ने अपने दैनिक प्रवचन में फरमाया कि- व्यक्ति को स्वयं की आत्मा का कल्याण करने के साथ दुसरो की आत्मा के कल्याण का प्रयास भी करना चाहिए। व्यक्ति के मन में अहिंसा की भावना रहे। अहिंसा को पाले। इससे जीव शुद्धि को प्राप्त होता है। ओछी नहीं, अच्छी वाणी:-  आज चतुर्दशी के अवसर पर हाजरी के कार्यक्रम में पूज्यप्रवर ने प्रेरणा देते हुए कहा की हमे ओछी (छोटी बोली) वाणी का नहीं, अच्छी वाणी का प्रयोग करना चाहिए। वाणी अच्छी होती है तो मन में साता पहुँचती है। साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने अपने प्रेरणादायी उदबोधन में कहा की गुरु श्रद्धा व भक्ति से आकृष्ट होते है। भक्त की प्रतीक्षा पर भगवान को पधारना ही होता है और गुरु के दर्शन कर उन्हें जो प्रसन्नता होती है उसको शब्दों में नहीं बताया जा सकता है।  साध्वीप्रमुखाश्री जी ने प्रेरणा देते हुए कहा की आप लोग आचार्यप्रवर से प्राप्त ज्ञान को अपने ह्रदय में सहेजकर रखे ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वह आह्लादकारी बन सकेगा। ...

ज्ञानशाला प्रकोष्ठ वार्षिक कार्यशाला का आयोजन दिल्ली में सम्पन्न

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श्रद्धेय मंत्री मुनि सुमेरमलजी के सानिध्य में जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा  के अंतर्गत ज्ञानशाला प्रकोष्ठ की वार्षिक कार्यशाला 2015 का आयोजन कृष्णा नगर दिल्ली स्थित तेरापंथ विकास भवन  में 27-28 जून  को हुआ। दो दिवसीय आयोजन में सात सत्रों में निर्धारित एजेंडा पर विचार मंथन कर कई निर्णय प्रस्तावित किये गए। श्रद्धेय मंत्री मुनि से सभी संभागियों को पथदर्शन प्राप्त हुआ। मुनि उदितकुमारजी एवं सभी संत गण का भी संबोध प्राप्त हुआ। कार्यशाला में राष्ट्रीय संयोजक श्री सोहन चोपड़ा ,राष्ट्रीय प्रशिक्षक श्री निर्मल नोलखा, राष्ट्रीय प्रबंध समिति के  सदस्य श्री गौतम डागा, श्री महेन्द्र कोचर, श्री सुरेन्द्र लुनिया, श्री रमेश सुतरिया तथा भारत -नेपाल के विभिन्न अंचलो से संबंद्ध संयोजको एवं सहसंयोजको ने भाग लिया। प्रातः कालीन कार्यक्रम में दिल्ली तेरापंथ सभा के अध्यक्ष के. ए ल जैन पटावरी ने अपने व्यक्तव के साथ राष्ट्रीय सयोंजक सहित सभी संभागियों का सम्मान किया। कार्यशाला की व्यवस्था तेरापंथी सभा दिल्ली  के  ज्ञानशाला विभाग ने संभाली। फ़ोटो व रिपोर्ट साभार : दी...