चातुर्मासिक प्रवेश इचलकरंजी

22 जुलाई। इचलकरंजी। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री मधुस्मिताजी आदि ठाणा 7 का इचलकरंजी तेरापंथ भवन में चातुर्मासिक प्रवेश आज प्रातः करीब 9:15 बजे उल्लासमय वातावरण में साधवीवृंद की अभिवंदना में स्वागतोत्सुक श्रावक समाज के जुलुस के साथ हुआ। 

इस अवसर पर आयोजित समारोह में  इचलकरंजी, जयसिंगपुर, कोल्हापुर, सांगली, तासगांव, माधवनगर आदि से समागत श्रावक समाज को पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने कहा कि- साधू जंगम तीर्थ होते है। साधू की संगति से पाप कर्मो का नाश होता है। पूज्यप्रवर की आज्ञा की आराधना करते हुए आज इचलकरंजी में चातुर्मास हेतु प्रवेश हुआ इसकी हमें प्रसन्नता है। श्रावक श्राविकाएं इस अवसर का पूरा लाभ ले एवं चातुर्मास काल में धर्म-ध्यान-तप-जप आदि के द्वारा आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा में आगे बढे। 

इससे पूर्व तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों द्वारा मंगलाचरण के साथ समारोह शुरू हुआ। तेरापंथ सभा इचल. अध्यक्ष श्री जैसराज छाजेड़, तेयुप अध्यक्ष श्री संजय वैदमेहता, मंत्री श्री विकास सुराणा, महिला मंडल अध्यक्षा सुनीता गिड़िया, मंत्री सौ. जयश्री जोगड़, अभातेयुप क्षेत्रीय सहयोगी श्री दिनेश छाजेड़, तेरापंथ सभा जयसिंगपुर अध्यक्ष श्री अशोक रुणवाल, नगरसेवक श्री महावीर जैन, मूर्तिपूजक समाज की ओर से श्री पुखराज ललवाणी आदि ने साध्वीवृंद के स्वागत में भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए। तेयुप भजन मंडली द्वारा स्वागत गीतिका का सामूहिक संगान किया गया एवं महिला मंडल द्वारा एक विशेष संगीतात्मक प्रस्तुति द्वारा साध्वीवृंद का स्वागत किया गया । अनेकों भाई-बहिनों ने वक्तव्य, गीतिका आदि के माध्यम से साध्वीवृंद का स्वागत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ सभा इचल. के मंत्री श्री पुष्पराज संकलेचा ने किया ।

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