मंत्र दीक्षा आस्था निर्माण, संस्कार निर्माण और विकास के महापथ का वह प्रकाश- दीप है - साध्वीश्री अणिमाश्रीजी
गुवाहाटी 2 अगस्त: साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में तेरापंथ भवन के सुरम्य एवं विशाल हॉल में मंत्र दीक्षा का भव्य कार्यक्रम समायोजित हुआ। जिसमे लगभग 200 बच्चों ने मंत्र दीक्षा स्वीकार की। तेयुप गुवाहाटी द्वारा सभी बच्चों को मंत्र दीक्षा सामग्री का किट प्रदान किया गया।
साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा - मंत्र दीक्षा आस्था निर्माण, संस्कार निर्माण और विकास के महापथ का वह प्रकाश- दीप है, जो जीवन के हर मोड़ को आलोकित करने वाला है। बचपन वह मिट्टी है, जिसे चाहे जैसा आकार दिया जा सकता है। इस उम्र में नमस्कार महामंत्र के प्रति श्रद्धा का बीज बोया जाता है, जो धीरे धीरे फलवान बनकर ज़िन्दगी के हर पड़ाव में सशक्त सहारा बनकर हमारे आस-पास खड़ा रहता है। महामंत्र के प्रति धनीभूत निष्ठां जब बचपन में ही प्रगाढ़ बन जाती है तो समूची ज़िन्दगी को रोशनी के सफर से जोड़ने में कामयाब हो सकती है। शहरी जीवन शैली से जुड़ा हुआ यह बालक-बालिकाओं का समूह एक साथ सुनुपस्थित होकर कुछ नया करने की उमंग और तमन्ना से भरा हुआ है। जरुरत है अभिभावक एवं प्रशिक्षक बच्चों की रूचि, संस्कार आदि को अनुकूल मार्गदर्शन देकर अध्यात्म के सांचे में ढालने का प्रयास करे।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने कहा - बालक परिवार की आत्मा है। उसकी एक किलकारी घर को बगीचे में चहचाहने वाली चिड़िया जैसा आनंद देती है। वह समाज का मेरुदण्ड है। बालक विश्व की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। विश्व की महत्वपूर्ण इकाई के जीवन को महत्वपूर्ण बनाने के लिए बच्चों को ज्ञानशाला में जरूर भेजे ताकि संस्कारों के आलोक से आपके पुरे कुल को रोशन कर दे।
साध्वी सुधाप्रभाजी ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। तेयुप अध्यक्ष श्री संजय चौरड़िया ने अपने विचार व्यक्त किये। तेयुप के कार्यकर्ताओ ने मंगल संगान प्रस्तुत किया। ज्ञानशाला के बच्चों ने अर्हम गीत की रोचक प्रस्तुति दी। तेयुप मंत्री श्री नीलेश पगारिया ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।
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