आस्तिक हो या नास्तिक - अणुव्रती जरुर बने
| H.H. Acharya Mahashramaji at Katihar |
धार्मिक जगत में आस्तिक विचार धारा आधारभुत तत्व है। अगर आत्मा का शाश्वत अस्तिव नहीं है, पूर्नजन्म नहीं है फिर तो धर्म की आवश्यकता बहुत ही कम रह जाती है। अगर आगे आत्मा का अस्तित्व है इसलिए धर्म की साधना की उपयोगिता है कि कैसे आत्मा मोक्ष में जा सके। परन्तु कोई अधार्मिक कहलाने वाला आदमी जो पुन:जन्म में विश्वास न करने वाला हो तो उसको भी अणुव्रत जैसे वाद को अपनाना चाहिए। नैतिकता, संयम, अहिंसा के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए ताकि उसका जीवन शान्तिमय रह सके।
Vande guruvaram
ReplyDeleteom arham