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Showing posts from July, 2016

दम्पति शिविर--हैदराबाद

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हैदराबाद  आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या डॉ.पीयूषप्रभाजी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में तेरापंथी सभा, महिला मण्डल एवं तेरापंथ युवक परिषद् के संयुक्त तत्वाधान में दम्पत्ति शिविर का आयोजन तेरापंथ भवन,हिमायतनगर में किया गया जिसमें 75 दम्पत्तियों ने भाग लिया। शिविर के प्रथम सत्र का शुभारंभ तेयुप एवं महिला मण्डल सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप के किये गए मंगलाचरण से हुआ। तेयुप अध्यक्ष सुनील लुणिया ने तीनों संस्थाओं की ओर से सभी संभागियों का स्वागत किया। साध्वी भावनाश्रीजी ने प्रेक्षाध्यान का प्रयोग करवाया। साध्वीश्री डॉ.पीयूषप्रभाजी ने अपने मंगल उद्धबोधन में कहा "पति -पत्नी जीवन रथ के पहिये हैं। यदि एक भी पहिया खराब हो जाये तो रथ आगे नहीँ बढ़ पाता,इसलिये पति -पत्नी में तालमेल होना अत्यन्त आवश्यक हैं। सहनशीलता, विनम्रता, सामंजस्य तथा सेवा भावना सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए बहुत जरुरी हैं। यह वह रिश्ता है जो जीवन में रस घोलता हैं। इस रिश्ते को मधुर बनायें रखें। साध्वी दीप्तियशाजी ने कहा कि दाम्पत्य जीवन के खुशहाल रहने के लिये एक-दूसरे की बातों को सहन आवश्यक हैं। मुख्य वक्ता ए...

*मंत्र दीक्षा का अर्थ है - जीवन का निर्माण - साध्वी नगीनाश्रीजी*

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मंत्र दीक्षा का अर्थ है - जीवन का निर्माण - साध्वी नगीनाश्रीजी कांदिवली। आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी नगीना जी  के सानिध्य में डालगणी ज़ोन की 9 ज्ञान शालाओं की मन्त्र दीक्षा का शानदार कार्यक्रम आयोजित हुआ। तुलसी-महाप्रज्ञ ट्रस्ट अध्यक्ष अर्जुन चौधरी, मुंबई TPF अध्यक्ष बलवंत चौरड़िया, मुंबई महिला मंडल अध्यक्षा भारती सेठिया, अभातेयुप संगठन मंत्री योगेश चौधरी आदि विशेष रूप से  उपस्थिति थे। शासन श्री साध्वी नगीना श्री जी ने कहा मंत्र दीक्षा का अर्थ है - मंत्र से अपने आप को भावित करना । हर धर्म में अपना मंत्र होता है। मंत्र के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा आवश्यक है। भावी पीढ़ी में नई चेतना जगाने का अच्छा उपक्रम है -मंत्र दीक्षा । आचार्य तुलसी के इस अनुष्ठान से बच्चों का मानस अनुप्राणित होकर आचार्य श्री महाश्रमण जी का सपना पूरा कर सकेगा। उन्होंने आगे कहा- मंत्र दीक्षा जीवन निर्माण एवं विकास का अच्छा उपक्रम है। श्रद्धा, आस्था और विश्वास  को मजबूत करना है तो उसका एक विटामिन है मंत्र दीक्षा । साध्वी मयंक प्रभा ने कहा बच्चों का सुधार भविष्...

Acharya Shri Mahashraman Pravachan 25.07.16 Guwahati

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निर्ग्रन्थ प्रवचन ही सत्य हैः आचार्य श्री महाश्रमण उपासक शिविर का हुआ शुभारम्भ; उपासको को धर्म की दी प्रेरणा गुवाहाटी। 26जुलाई, 2016। परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित उपासकों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए भगवान जिनेश्वर व आगमवाणी की आराधना का ज्ञान प्रदान करते हुए कहा कि जिनेश्वर भगवान राग- द्वेष से मुक्त होते है, सर्वज्ञ होते है। वे कभी झूठ नहीं बोलते। राग- द्वेष से युक्त आदमी ही झूठ बोलते है और जो राग- द्वेष से मुक्त हो, प्रियता और अप्रियता की स्थिति में मध्यस्थ, आत्मस्थ, अध्यात्मस्थ हो और जो वीतराग बन चुके है, वे झूठ से सर्वथा विरत होते है। उनकी वाणी अर्थात आगमवाणी या निर्ग्रन्थ प्रवचन ही सत्य है। आदमी को वीतराग भगवान और उसकी वाणी की आराधना करनी चाहिए। आचार्य श्री ने झूठ वोलने के चार कारण-क्रोध, लोभ, भय और हास्य को बताते हुए कहा कि जिनेश्वर भगवान इन चारों से मुक्त होते है। वे सदा सत्य ही बोलते है। वीतराग प्रवचन सत्य और पवित्र है।। उपासकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि धर्म की दृष्टि से  निग्र्रन्थ प्रवचन के प्रति श्रद...

श्रावक समाज आत्मा का विश्लेषण करें - आचार्य महाश्रमण जी

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21/7/2016, धारापुर, ABTYP JTN, कोलकाता से  रजत जयंती वर्ष पर जैन कार्यवाहिनी का संघ संबोध यात्रा के रूप में आया। ये संघ प्रवचन पंडाल में जुलुस के साथ प्रवेश किया। जय जय ज्योतिचरण जय जय महाश्रमण के नारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया।  वीतराग समवसरण में विराजित गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमण जी मंगल पाथेय प्रदान करते हुए फ़रमाया की अहिंसा परमो धर्मः। धर्म के तीन प्रकार होते है - अहिंसा, संयम और तप। श्रावक को कभी कभी आत्मा विश्लेषण करना चाहिए। जीवन के बारे मे भी सोचना चाहिए की मैंने अपने जीवन के इस लम्बे काल में धर्म की दृष्टि से क्या किया और क्या करना चाहिए। त्याग व प्रत्याख्यान करते रहना चाहिए। यह भी चिंतन करना चाहिए की जो काम करने के लिए मैंने निर्णय लिया था उसकी क्रियांवती हुई या नही। इसकी अनुप्रेक्षा करते रहना चाहिए  रात्रि व दिन में जब कभी भी समय मिले। चातुर्मास का समय त्याग, तपस्या  व ज्यादा से ज्यादा आध्यात्मिक कार्य करने का समय है। इसमें ज्यादा से ज्यादा सामायिक की साधना का भी उपयोग करना चाहिए। सर्वप्रथम चातुर्मास में अहिंसा की साधना कैसे हो?  चातुर्...

तेयुप कार्यशाला : गुवाहाटी

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गुवाहाटी 17 जुलाई। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद् द्वारा कार्यकर्ता प्रोत्साहन कार्यशाला का आयोजन धारापुर (गुवाहाटी) में किया गया। इस कार्यशाला में तेयुप के अद्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि श्री योगेश कुमार जी ने अपने पवन पाथेय से उपस्थित तेयुप सदस्यों के बीच नयी ऊर्जा का संचार किया और कहा कि एक कार्यकर्त्ता को हमेशा सकरात्मक सोच रखनी चाहिए। इस कार्यशाला में मुनि श्री दिनेशकुमार जी ने भी पावन पाथेय प्रदान किया। इस अवसर पर अभातेयुप के संयुक्त मंत्री श्री सुभाष जी सिंघी, क्षेत्रीय सहयोगी श्री संजय चौरड़िया, क्षेत्रीय सहयोगी श्री रोहित दुगड़, समिती सदस्य श्री रितेश खटेड़ भी उपस्थित थे। जैतस, गुवाहाटी

भिक्षु के बलिदान की कहानी है तेरापंथ- शासनश्री साध्वीश्री नगिना

आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या 'शासन श्री' साध्वी श्री नगीना जी के सानिध्य में आचार्य भिक्षु का 291वां जन्मदिवस एवं 259वां बोधि दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। साध्वी मेरुप्रभा की भिक्षु स्तुति से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। "ॐ भिक्षु जय भिक्षु " की एक लय व एक स्वर की ध्वनि की गुंजायमान से त्रिदिवसीय अनुष्ठान का प्रारम्भ हुआ।साध्वी श्री नगीना जी ने कहा युग की परिस्थितियां ऐसे व्यक्तित्व की प्रतीक्षा में थी जो युगको नया दिशा दर्शन दे सके। संस्थाओं को समाहित कर सके। आचार्य भिक्षु का अवतरण ऐसे ही युग में हुआ। जिन्होंने अनेकांत चिंतन से नई क्रांति का सृजन किया। उस नई को नाम मिला तेरापंथ। तेरापंथ भिक्षु के बलिदान की कहानी है। समता सहिष्णुता की निशानी है। उनकी अंतस्चेतना को स्पंदित में निमित्त थे ये श्रावक लोग। राजनगर का इतिहास अमर है। साध्वी नगीना जी ने कहा आचार्य भिक्षु महान् तपस्वी थे। उनका आभामंडल इतना शक्तिशाली था जिससे हर व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित हो जाता था। साध्वी मयंकप्रभा जीने कहा कि उन्होंने जो कहा वो आर्षवाणी बन गया,जो लिखा वो शास्त्र बन गया,जो देखा वो पंथ बन ग...

तेरापंथ की बुनियाद - मर्यादा की खाद - साध्वीश्री सोमलता

भाईंदर( मुंबई) आध्यात्म से सरोबार विशाल जन समुदाय की उपस्थिति मे साध्वी सोमलता जी ने चातुर्मासिक स्थापना की निर्धारित रस्म अदा की ।मंगल मंत्र , मंगल  वातावरण और मंगल भावो से सभा भवन का कण - कण पुलकित और पवित्र लग रहा था । हाजरी का वाचन करते हुए साध्वी श्री जी ने प्रसंगवश श्रावको को भी संघीय  संस्कारो मे अवगाहन कराया । संघ महल के चार स्तंभो मे दो तो श्रावक , श्राविकाओ के है । चारो स्तंभो की मजबूती मे सतत सहयोगी बने । भिक्षु भक्ति मे अनेको भाई बहिनो ने अपने श्रध्दा सुमन अर्पित किए । इस कड़ी मे अपने भावो की अभिव्यक्ती दी सुंदरलाल जी मेहता , मीठालाल जी बरलोय , उगम आच्छा, अशोक सोलंकी,राजीव गिया  , रनीशा हिंगड़ ,विजयसिंह पुगलिया , प्रदीप कोठारी,  कुलदीप लोढा , मीना जैन, मुद्रा खाब्या आदि ने । मीरा रोड महिला मंडल व ज्ञानशाला द्वारा सामुहिक गीतिका का संगान किया गया । कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री कनक सिंघवी ने किया । संवाद साभार महावीर कोठारी

सजोड़े भक्ताम्बर अनुष्ठान : कांदिवली

आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या साध्वी श्री नगीना जी के पावन सानिध्य में सजोड़े भक्ताम्बर अनुष्ठान से चातुर्मासिक आगाज़ हुआ।मलाड महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। साध्वी श्री नगीना जी ने कहा चार महीने का समय चातुर्मास कहलाता है, यह नव सृजन का देवता है।अहिंसा और संयम की साधना का दुर्लभ अवसर है। वर्षा के कारण अधिकांश स्थान हरी चुनड़ी से भर जाता है। जीवोत्पत्ति अधिक होती है, चलने में कठिनाई होती है।इसीलिए जैन साधू चार माह के लिए एक ही स्थान पर स्थिर हो जाता है।अतः धर्मराधना का समय ह ये चातुर्मास। आत्म शांति का अमोघ समय है।आषाढ़ी पूर्णिमा आते ही नई चेतना जाग जाती है। यह चार महीने का समय आत्म पर्यवेक्षण का है, ज्ञान चेतना के विकास का है। सभी को इन चार महीनों में एक एक क्षण पर सफलता का हस्ताक्षर करना है। साध्वी मेरुप्रभा व मयंकप्रभा ने नगीना पीस शॉप की ओपनिंग इन चारमहीनों के लिए की है। जिसकी प्रस्तुति अत्यंत ही सुंदर थी। 108 सजोड़े भक्ताम्बर का पाठ कर एक नए इतिहास का सृजन हुआ।सफ़ेद व केसरिया पोशाक में युवा दम्पतियों का दृश्य दर्शनीय था।मंच का संचालन साध्वी श्री गवेषणा जी ...

शलाका पुरूष - गुरू भिक्षु -- साध्वी सोमलता

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भाईंदर (मुंबई) 257 वें स्थापना दिवस पर धर्म परिषद् को संबोधित करते हुए साध्वी श्री सोमलता जी ने कहा - आज गुरू पूर्णिमा है । तेरापंथ का जन्मदिन है । मेरे लिए दोनो ही महत्वपूर्ण है । आज के दिन हमे गुरु मिले और गुरु का दरबार मिला । जीवन मे गुरु की प्राप्ति से बढ़कर कोई दौलत नही होती । गुरु सूरज की धूप और चंद्रमा की चाँदनी है । समुद्र की गहराई और आसमां की ऊंचाई है । साध्वी श्री जी ने आगे कहा - तेरापंथ धर्म संघ को शलाका पुरूष एवं परमेश्वर के प्रतिबिम्ब के रूप मे आचार्य भिक्षु मिले । एक गुरु के और एक विधान के बीज का विस्तार है तेरापंथ । गीतिका का संगान साध्वी श्री शकुंतला कुमारी जी ने किया । साध्वी श्री संचित यशा जी , जागृत प्रभा जी , रक्षित यशा ने " अमूर्त भावों की मूर्त पहचान " परिसंवाद करके सबको भाव विभोर कर दिया । अभातेममं की उपाध्यक्षा कुमुद कच्छारा ने आचार्य भिक्षु कुमार प्रति अपनी श्रद्धा भिव्यक्ति दी ।मीरा रोड महिला मंडल,  श्रेष्ठ कार्यकर्ता निर्मल जैन, प्रीति लुणावत आदि ने विविध शैली मे अपने भावो की प्रस्तुति  दी । कार्यक्रम का संचालन अभातेयुप के कार्यकारिणी...

गुरु का महत्त्व-शासनश्री साध्वीश्री नगिना

कांदिवली मुम्बई. आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या शासन श्री साध्वी श्री नगीना जी के सानिध्य में स्वस्तिकार में"नमस्कार महामंत्र"की लयबद्ध ध्वनि के साथ कांदिवली तेरापंथ महिला मंडल के मंगल गान ने त्रिदिवसीय कार्यक्रम का आगाज़ किया।साध्वी श्री नगीना जी ने कहा भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान महत्वपूर्ण होता है, गुरु को हृदय का देवता मानते हैं। अज्ञान रूपी अंधकार की घटाओं में गुरु ज्ञान रूपी सूर्य है।सिन्दूरप्रकरणं में आचार्य सोमप्रभ ने गुरु का दायित्व क्या है अथवा वो क्या करते हैं इसका विश्लेषण करते हुए कहा है विदलयति कुबोधम् बोधयत्यागमार्थ सुगति कुगति मार्गो पुण्यपापे व्यनाक्त अवगम्यति कृष्ण कृष्णभेदम् गुरुर्यो भवजलनिधि पोतस्तं बिना नास्ति कश्चित्। साध्वी नगीना जी ने कहा जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये,अज्ञान से ज्ञान की और बढ़ाए,मिथ्यात्व से सम्यक्त्व की दीक्षा देता है।साध्वी मेरु प्रभा एवं मयंकप्रभा ने गुरु के महत्व को उजागर करते हुए श्रद्धा से गुरु को करे हम वंदना सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की।साध्वी श्री गवेषणा जी ने गुरु गरिमा को व्याख्यायित किया एवं कहा गुरु कुंभकार,शिल्पकार...

मोक्षमार्ग पर चलने के लिए आत्मा को निर्मल बनाना होता हैः आचार्य श्री महाश्रमण

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नवदीक्षितों को सामायिक चारित्र से छेदोपस्थापनीय चारित्र में किया अवस्थित    गुवाहाटी.20 जुलाई, 2016. परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने सात दिन पूर्व दीक्षित साधु- साध्वियों को आज सामायिक चारित्र से छेदोपस्थापनीय चारित्र में अवस्थित करते हुए प्रेरणादायी पाथेय में फरमाया कि साधु- साध्वी को मन, वचन और काय से हिंसा, चोरी, असत्य, अब्रह्मचर्य, परिग्रह और इन्द्रिय सुखों का त्याग कर साधना के पथ पर अग्रसर होने का प्रयास करना चाहिए। मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए आत्मा को निर्मल बनाना होता है और आत्मा को निर्मल बनाने के लिए कषायों को मंद करना जरुरी है। इसके लिए स्वाध्याय, ध्यान, प्रतिलेखन आदि कार्य पूर्ण मनोयोग से करने चाहिए। पूज्यवर ने 5 महाव्रत, 5 समिति और 3 गुप्ति की अखंड आराधना की प्रेरणा देते हुए कहा कि ये 13 करोड़ का खजाना आप सभी को प्राप्त है। अब इस खजाने की सुरक्षा और संवर्धन करना आप सभी का कर्तव्य है। आप लोगों ने जिस जागरूकता के साथ संयम को स्वीकार किया है उसी जागरूकता के साथ सदैव संयम पथ पर अग्रसर रहेंगे तो इस आध्यात्मिक खजाने का संवर्धन हमेशा ...

उत्तर हावड़ा - स्वच्छ भारत अभियान

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अखिल भारतीय महिला मंडल द्वारा निर्देशित स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कल्पना बैद की प्रेरणा से उत्तर हावड़ा महिला मंडल ने सलकिया के सावित्री बालिका विद्यालय में 2 शोचालय का निर्माण करवाया। शोचालय का उदघाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कल्पना बैद, बंगाल प्रभारी श्रीमती गुलाब सुराणा, Deputy Mayor मिनाती अधिकारी, Mayor in Council गौतम चौधरी के द्वारा करवाया।  राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कल्पना जी ने बच्चों को स्वच्छता  का हमारे जीवन में क्या महत्व है और स्वस्थ रहने के लिए हमें स्वच्छ रहना आवश्यक है प्रेरणा दी साथ ही Deputy Mayor को ''नारी लोक भेंट की। '  स्कुल की  प्रिंसिपल श्रीमती वरनाली गोस्वामी , शिक्षक -शिक्षिकाए, उत्तर हावड़ा महिला मंडल की संरक्षिका श्रीमती सुमन बैद, अध्यक्षा श्रीमती बीना भंसाली अपनी पदाधिकारी बहनो के साथ उपस्थित थी।

महासभा की जैन तेरापंथ कार्ड एवं संपोषण योजना का शुभारम्भ

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19 जुलाई, 2016. गुवाहाटी। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के द्वारा सभी तेरापंथी भाई- बंधुओं को जोड़ने और विकास के पथ पर साथ आरूढ़ करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का आगाज आज तेरापंथ स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर परमपूज्य आचार्यप्रवर की पावन सन्निधि में किया गया। महासभा की योजना जैन तेरापंथ कार्ड और सम्पोषण परियोजना के बारे में महासभा के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया; महामंत्री प्रफुल्ल बेताला; जैन तेरापंथ कार्ड के संयोजक विकास पुगलिया; प्रधानन्यासी हंसराज बेताला ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। जैन तेरापंथ कार्ड के प्रथम नम्बर 1 और 13 नम्बर प्राप्तकर्ता क्रमशः हंसराज बेताला और भागचंद बरड़िया के साथ महासभा के पदाधिकारियों ने कार्ड का लोकार्पण किया और दोनों प्रथम कार्डधारकों को कार्ड सुपुर्द किया। इसी प्रकार ’’सम्पोषण परियोजना ’’ का महासभा के पदाधिकारियों द्वारा शुभारम्भ किया गया। महासभा की गतिविधियों में उन्मेष आ रहा है : पूज्यप्रवर मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के पश्चात पूज्यवर ने फरमाया कि जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा की गतिविधियों में उन्मेष आ रहा है। नई योजना, नया चिंतन सामने आ रहा है...

तेरापंथ के आधारभूत सूत्र पुरूष आचार्य भिक्षु

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257वां तेरापंथ स्थापना दिवस मनाने के साथ किया तेरापंथ के प्रथम गुरु को श्रद्धार्पण;   19 जुलाई,2016। परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने तेरापंथ स्थापना दिवस पर अपने उद्बोधन में फ़रमाया कि - जीवन के विकास के लिए भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है। गुरु की सन्निधि, प्रवचन, आशीर्वाद और अनुग्रह जिसे भी मिल जाए उसक जीवन कृतार्थता से भर उठता है। क्योंकि गुरु हितचिंतक, मार्गदर्शक, विकासप्रेरक और विघ्नविनाशक होते है। गुरु का जीवन शिष्य के लिए आदर्श बनता है। आज का दिन गुरु पूर्णिमा का है और आज के दिन ही तेरापंथ की स्थापना हुई और तेरापंथ धर्मसंघ को प्रथम गुरु के रूप में महामना आचार्य श्री भिक्षु मिले और वर्तमान में एकादशम गुरु आचार्य श्री महाश्रमण जी की अनुशासना प्राप्त है। इस पावन अवसर पर महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि 256 वर्ष पूर्व केलवा में संत भीखण जी ने नव्य भव्य दीक्षा ग्रहण की। जिसे हम तेरापंथ स्थापना दिवस के रूप में मनाते है। आचार्य भिक्षु के पास विशेष बल था। उनमें श्रद्धा का बल था। आगमवाणी के प्रति समर्पण का भाव था। ज्ञान बल था। तेरापंथ...

Acharya Mahashraman Pravchan 18.07.16

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18 जुलाई, गुवाहाटी । तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने दैनिक प्रवचन करते हुए फ़रमाया कि ज्ञान, दर्शन, चरित्र व तप से ही मोक्ष मंजिल प्राप्त हो सकती है। अर्हत् वांग्मय में कहा गया है कि मार्ग क्या होता है? दुनिया में अनेक मार्ग होते हैं। यदि सही मार्ग मिल जाये तो मुक्ति निश्चित हैं । अध्यात्म की दिशा में मोक्ष को अंतिम मार्ग बतलाया गया है। ज्ञान, दर्शन, चरित्र व तप से मोक्ष मार्ग मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं। सर्वप्रथम ज्ञान की आराधना करने हेतु  उपाध्यायों की आराधना करनी चाहिए। हमारे धर्मसंघ में उपाध्याय पद की व्यवस्था स्वतन्त्र नहीं हैं, एकमात्र आचार्य ही इस पद का दायित्व निभाते है। आचार्य दो पदों का सुशोभित करनेवाले होते हैं, सूत्र वाचन के कारण वे उपाघ्याय पद में आते है।और अर्थ की दृष्टि से आचार्य पद में। आचार्य व्यवस्थापक भी होते है। उपाधयाय का दायित्व पठन व पाठन का होता है। ज्ञान की आराधना करने का विकास करना चाहिए। कल सांयकालीन चातुर्मास प्राम्भ हो जायेगा इसमें साधू साध्वियों को ज्यादा से ज्यादा ज्ञान की आराधना करने का समय मिल सकता है। श्रा...

सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् के उपासक थे चतुर्भुज आचार्य भिक्षु - साध्वी श्री सोमलता

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भाईंदर( मुंबई) आचार्य महाश्रमण की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में भाईन्दर तेरापंथ भवन में बोधि पुरुष आचार्य श्री भिक्षु का जन्मोत्सव एवं बोधि दिवस पर साध्वी वृन्द सहित भाईन्दर, मीरारोड,दहीसर, वर्ली, दक्षिण मुम्बई के भाई-बहनों ने हर्ष और उल्लास के साथ आचार्य भिक्षु को अभिवंदना की। इस भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ ॐ भिक्षु के जाप एवं तेले के संकल्प के साथ हुआ। वंदना सुराणा ने मंगलाचरण किया। विशाल जन समुदाय को संबोधित करते हुए अपनी ओजस्वी वाणी में साध्वी श्री सोमलता जी ने कहा- चतुर्भुज आचार्य भिक्षु सत्य के उपासक थे। उनका एकमात्र लक्ष्य था सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् की उपासना करना। सत्य देवता से साक्षात्कार करने के लिए उन्होंने पद प्रतिष्ठा,सुख सुविधाओं की तिलांजलि दी।साध्वी श्री जी ने आगे कहा आचार्य भिक्षु तत्वेत्ता, ज्ञानी एवं तपस्वी थे।उनकी तपस्या में उपशम की गंगा प्रवाहित होती थी। वे द्वेषमय वातावरण को भी विनोदमय बना देते थे।उन्होंने दिव्य ज्ञान से जन- जन को आध्यात्म का प्रकाश दिया ।तत्व के रहस्य को समझाया। साध्वी श्री शकुंतला कुमारी जी, जागृत प्रभाजी,रक्षितयशा ...

धर्माराधना का स्वर्णिम समय चातुर्मास - साध्वी श्री सोमलता

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भाईंदर ( मुंबई) तेजस्वी महाप्रतापी आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी का भायंदर तेरापंथ भवन में श्रावक-श्राविकाओं के सम्मिलित जयघोषों और मंगल गीतों के मंगलमय वातावरण में प्रवेश हुआ। स्वागत समारोह का शुभारम्भ आरोग्ग बोहिलाभं, नमस्कार महामंत्र के जप से हुआ। विद्या नाहर, वंदना सुराणा ने मंगलाचरण किया।स्वागत भाषण भायंदर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष हनुमान पारख ने दिया। भायंदर क्षेत्र के पार्षद ध्रुव किशोर जी पाटिल, एरिया पार्षद सुरेन्द्र जी खंडेलवाल की भी उपस्थिति रहे। साध्वी श्री सोमलता जी हृदय स्पर्शी वाणी में जैन समाज को संबोधित करने से पूर्व " पांचू परमेष्ठी प्यारा " गीत का संगान करके कहा- चातुर्मास सृजन का नया देवता है वह जब आता है तो सब कुछ नया-नया लगता है। जब व्यक्ति धर्म के मैदान में दौड़ता है तब ज्ञान की रौशनी प्राप्त करता है। साध्वी श्री जी ने आगे कहा- चातुर्मास धर्म ध्यान का स्वर्णिम काल है। यह आत्म गुणों के बीज वपन का समय है। इसलिए आषाढ़ मास में अध्यात्म की बाड़ लगाकर जीवन रूपी कल्पवृक्ष की सुरक्षा करना है। सावन में संयम, तप, स...

त्रिदिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला : गुवाहाटी

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13 से 15 जुलाई तक त्रिदिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन गुवाहाटी तेरापंथ भवन में हुआ । इस कार्यशाला में उपासक प्राध्यापक द्वय श्री डालमचंद जी नवलखा एवं श्री निर्मल जी नवलखा द्वारा ज्ञानशाला संचालन के विभिन्न पहलुओं के बारे में उपस्थित 11 बहनों को प्रशिक्षण दिया। गौरतलब है कि ज्ञानशाला प्रशिक्षक बनने के लिए त्रिवार्षिक कोर्स पूर्ण करना पड़ता है, जिसके अंतर्गत हर वर्ष यह कार्यशाला आयोजित होती है। फ़ोटो साभार : प्रकाश बरड़िया जैतस, गुवाहाटी

तेयुप नालासोपारा (मुम्बई) द्वारा हेल्थ चेक अप केम्प

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नालासोपारा (मुम्बई) आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा 15,16,17,18 जुलाई को भव्य हेल्थ कैंप का आज जैन संस्कार विधि से विधिवत का उद्धगाटन अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भलावत व अभातेयुप से राजेन्द्र जी मुथा वरिष्ट उपासक सोहनलाल जी सिंघवी व् उद्धगाटन कर्ता धनी देवी मिश्रीमल जी चोरडिया परिवार (चारभुजा) सभा अध्यक्ष हस्तीमल जी सोलंकी मंत्री मदनलाल जी धाकड़ तेयूप अध्यक्ष अनिल जी परमार मंत्री दिनेश जी धाकड़ निवर्तमान अध्यक्ष कमलेश खाब्या संयोजिका सुशीलादेवी खाब्या सह संयोजिका मानसी जी मेहता व् सभा युवक परिषद् महिला मंडल से सभी कार्यकर्ता व् पुरे समाज की सहारणीय उपास्थिति रही

Acharya Mahashraman Pravachan 14.07.16 Guwahati

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व्यक्ति को सुकर्म करने के लिए सतत प्रयास करना चाहिए गुवाहाटी, 14 जुलाई। परम पावन आचार्यश्री महाश्रमणजी ने प्रातःकालीन अपने मुख्य प्रवचन में आत्मा के शाश्वत सत्य को उजागर करते हुए कहा कि प्राणी का यह शरीर अस्थायी है और आत्मा एक स्थायी तत्व है। यह शरीर विनाशधर्मा है पर आत्मा को न तो काटा जा सकता है, न सुखाया जा सकता है और न ही जलाया जा सकता है। यह आत्मा रुपी तत्व अमर है। आत्मा शरीर को धारण करती है। उस शरीर के विनाश होने पर आत्मा दूसरे शरीर को धारण करती है। यह आत्मा के पूनर्जन्म का सिद्धांत है। कुछ- कुछ आत्माएं अनन्त- अनन्त जन्म ग्रहण करती है और फिर सिद्धत्व को भी प्राप्त हो जाती है। पर कुछ आत्माएं अनन्त जन्मोें के बाद भी मोक्ष का वरण नहीं कर पाती, इनका पूूनर्जन्म होता रहता है। आचार्यप्रवर ने इस पूनर्जन्म के कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कषायों के प्रवर्धमान होने के कारण पूनर्जन्म होता है। अगर ये कषाय शांत हो जाए तो पूनर्जन्म का सिससिला रूक सकता है। ये कषाय ही पूनर्जन्म का कारण है। पूज्यवर ने आगे फरमाते हुए कहा कि आत्मा के पूनर्जन्म को आस्तिक लोग स्वीका...

Acharya Mahashraman Pravachan 14.07.16 Guwahati

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व्यक्ति को सुकर्म करने के लिए सतत प्रयास करना चाहिए गुवाहाटी, 14 जुलाई। परम पावन आचार्यश्री महाश्रमणजी ने प्रातःकालीन अपने मुख्य प्रवचन में आत्मा के शाश्वत सत्य को उजागर करते हुए कहा कि प्राणी का यह शरीर अस्थायी है और आत्मा एक स्थायी तत्व है। यह शरीर विनाशधर्मा है पर आत्मा को न तो काटा जा सकता है, न सुखाया जा सकता है और न ही जलाया जा सकता है। यह आत्मा रुपी तत्व अमर है। आत्मा शरीर को धारण करती है। उस शरीर के विनाश होने पर आत्मा दूसरे शरीर को धारण करती है। यह आत्मा के पूनर्जन्म का सिद्धांत है। कुछ- कुछ आत्माएं अनन्त- अनन्त जन्म ग्रहण करती है और फिर सिद्धत्व को भी प्राप्त हो जाती है। पर कुछ आत्माएं अनन्त जन्मोें के बाद भी मोक्ष का वरण नहीं कर पाती, इनका पूूनर्जन्म होता रहता है। आचार्यप्रवर ने इस पूनर्जन्म के कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कषायों के प्रवर्धमान होने के कारण पूनर्जन्म होता है। अगर ये कषाय शांत हो जाए तो पूनर्जन्म का सिससिला रूक सकता है। ये कषाय ही पूनर्जन्म का कारण है। पूज्यवर ने आगे फरमाते हुए कहा कि आत्मा के पूनर्जन्म को आस्तिक लोग स्वीका...

सुनाम ( पंजाब )- महासभा अध्यक्ष श्री किशन जी डागलिया संगठन यात्रा

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सुनाम, दिनांक 7 जुलाई 2016 को तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी श्री यशोधरा जी के पावन सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के अध्यक्ष श्री किशन जी डागलिया की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में साध्वी श्री यशोधरा जी ने मंगल प्रेरणा देते हुए कहा - की लोग कहते हैं की युवाओं  में उत्साह  नहीं है , पर मैं कहती हूँ की आज के युवाओं में उत्साह बहुत है।  किशन जी डागलिया एवं   डालमचन्द जी बैद सक्रीय कार्यकर्ता हैं। जीवन से प्रेरणा मिलती है , भाषणों से नहीं। परिवारों की सूचि तैयार करनी चाहिए।  नेता वही सफल होता है जो कर्तव्य निष्ठ हो।  विशेष प्रेरणा देता हुए साध्वी श्री जी ने कहा - की श्रावकों के ही सहारे संघ की प्रभावना , श्रावकों के ही सहारे मोक्ष की आराधना।  साध्वी श्री नीति श्री जी ने कहा - की मेवाड़ वासियों का सौभाग्य है की मेवाड़ क्षेत्र का तेरापंथ महासभा का अध्यक्ष है।  ऐसे कार्यकर्ता जो तन, मन और धन से अर्पण करते हैं खुद को , वही संघ की से...

पूज्यप्रवर के चातुर्मासिक प्रवेश की भव्य तैयारियां

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🔸पूज्यप्रवर के चातुर्मासिक प्रवेश की भव्य तैयारियां 🔸कुछ ही पलों में शुरू भव्य जुलुस सहित विहार *चातुर्मास प्रवेश लाइव अपडेट गुवाहाटी से -📲 ABTYP JTN* तेरापंथ धर्मसंघ का सोशल मीडिया में विश्वस्त एवं सबसे बड़ा नेटवर्क

भव्य जुलुस के साथ पूज्य गुरुदेव का विहार

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🔸भव्य जुलुस के साथ पूज्य गुरुदेव का विहार 🔸आज होगा गुवाहाटी में चातुर्मास प्रवेश *चातुर्मास प्रवेश लाइव अपडेट गुवाहाटी से-📲 ABTYP JTN* तेरापंथ धर्मसंघ का सोशल मीडिया में विश्वस्त एवं सबसे बड़ा नेटवर्क

नव प्रभात के प्रथम दर्शन

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