साध्वीश्री लज्जावतीजी ‘अरिहंत शरण’
गंगाशहर स्थित शांति निकेतन सेवा केंद्र में चाकरी करने का अपना दायित्व निभा रही आचार्यश्री महाश्रमणजी की आज्ञानुवर्ती सुशिष्या सेवाकेंद्र व्यवस्थापिका साध्वीश्री लज्जावतीजी वय पचहतर वर्ष गुरुवार सांय आहार करने के समय अचानक अस्वस्थ होकर कुछ ही क्षणों में देवलोक गमन कर गयी, संसार की नश्वरता और अनिश्चितता का इससे अधिक और क्या विरल संयोग देखने को मिलेगा, कि जो कुछ देर पहले स्वंय अपने हाथों से अपना आहार कर रही थी और दूसरी साध्वियों को आहार करवा रही थी वो यकायक यहाँ से अगली मंजिल के लिए प्रस्थान कर जायेगी. हालाँकि सेवा केंद्र की दूसरी व्यवस्थापिका साध्वीश्री प्रबलयशाजी ने अन्य साध्वियों के साथ श्रावको एवं श्राविकाओं की उपस्थिति में रात्रि 7.20 बजे उन्हें चोविहार संथारा का प्रत्याख्यान भी करवाया और धर्माराधना भी सुनाई लेकिन गुरुवार रात्रि ही आधे घंटे पश्चात ही 7.50 बजे साध्वी लज्जावती जी अरिहंत शरण हो गयी. ठीक एक मुहर्त पश्चात उनकी पार्थिव देह को साध्वियों ने श्रावक समाज को सुपुर्द कर दिया. रात भर समाज की सभा संस्थाओं के सदस्यों ने जप ध्यान एवं आध्यात्मिक उपदेशात्मक गीतों क...