ईरोड में 27 वर्षीय युवक का 31 की तपस्या का पच्चक्खाण एवं अभिनंदन समारोह
इरोड. आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या समणी निर्देशिका विपुलप्रज्ञाजी एवं समणी आदर्शप्रज्ञाजी के सान्निध्य में श्री ओज बाबेल सुपुत्र श्री जतनलालजी - श्रीमती कलावती बाबेल (सरदारशहर निवासी, ईरोड प्रवासी) ने 27 वर्ष की युवावस्था में मासखमण ( 31 की तपस्या) का पच्चक्खाण किया। सुबह 8.20 बजे करपगम ले-आउट से सम्पूर्ण जैन समाज की शोभा यात्रा के साथ तपस्वी भाई तेरापंथ भवन पहुंचा। वहां आयोजित तप अभिनन्दन कार्यक्रम का शुभारंभ समणीवृंद द्वारा नवरात्र के नवान्हिक अनुष्ठान के मंत्रों के साथ हुआ। इस अवसर पर समणी विपुलप्रज्ञाजी ने फ़रमाया कि नवरात्रा का समय शक्ति जागरण का होता है। इस समय तपस्या करना वह भी मासखमण की तपस्या करना विशेष महत्व रखती है। ओज बाबेल ने पूरी जागरूकता एवम् जप तप के साथ जिस सादगी से तप अनुष्ठान किया वह युवा पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। समणीजी ने ओज को 31 का प्रत्याखान करवाया। समणीजी ने समधुर गीतिकाओं व प्रेरणादायक शब्दों के द्वारा तपस्वी का अभिवादन किया। इससे पूर्व सभाध्यक्ष श्री हनुमानमल दूगड़ ने सम्पूर्ण जैन समाज का हार्दिक स्वागत एवम् तपस्वी भाई का अभिनन्दन कि...