आओं अपनाएं नैतिकता एवं ईमानदारी का पथ
आज भारत देश की जनता के सामने दो प्रसंग है : एक है - देश के नायक प्रधान मंत्री श्री मोदी ने काले धन पर प्रहार करने के लिए 500 एवं 1000 रुपये के नोट बंद कर के देश में बढ़ रहे भ्रष्ट्राचार, आतंकवाद एवं बेईमानी आदि पर कड़ी लगाम कसने की कोशिश की । प्रशासनिक तौर पर लोगों को प्रमाणिकता या नैतिकता अपनाने हेतु यह कड़ा निर्णय लिया गया है ऐसा लग रहा है |
दूसरा - भारत देश कृषि प्रधान देश है तो, ऋषिप्रधान देश भी है | जहां अनेकानेक संत पुरुष ने जन कल्याण हेतु अपना जीवन व्यतीत कर दिया | जैन धर्म, भगवान महावीर के सिद्धांतो को जन जन तक पहुचाने वाले जैन साधू संत जो देश भर में पैदल यात्रा कर के लोगों को अहिंसा, नैतिकता एवं सद्भवाना की प्रेरणा दे रहे है |
भारत देश जब आज़ाद हुआ, इस समय व्याप्त सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने हेतु क्रांतिकारी आचार्य श्री तुलसी ने भारत के आज़ादी के वर्षों में अणुव्रत आंदोलन चला कर नैतिक एवं प्रामाणिक जीवन जीने हेतु सन्देश दिया । आपने एक गीत में कहा "सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से, राष्ट्र स्वयं सुधरेगा" । आपने छोटे छोटे संकल्पों द्वारा लोगों को प्रमाणिक जीवन ज्ञापन हेतु प्रेरणा प्रदान की | आज अगर गुरुदेव तुलसी के द्वारा चलाया गए अणुव्रत आंदोलन के तहत संकल्प लेकर लोग प्रामाणिक बनते तो, शायद आज देश के प्रधानमंत्री जी को देश हित में इतना कड़ा निर्णय नहीं लेना पड़ा होता ।
विद्वान संत आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने सापेक्ष अर्थशास्त्र (Relative Economy) के बारे में बहुत कार्य किया । जब आदमी के जीवन में असंतुलन की खाई बढ़ती जायेगी तो तनाव, हिंसा आदि भी बढ़ेगी । अगर जीवन में आध्यत्मिकता एवं आधुनिकता का संतुलन हो, धर्म एवं अर्थ का संतुलन हो तो जीवन स्वर्ग बन सकता है । आप अपने प्रवचनों में यदा-कदा “भाव शुद्धि” की प्रेरणा देते रहेते थे | जब लोगों में भाव शुद्धि बनी रहेगी तो प्रमाणिक एवं नैतिक जीवन शैली का स्तर अपने आप बढेगा |
आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी अहिंसा यात्रा द्वारा जन जन को नैतिकता का बोध दे रहें है | आचार्य श्री महाश्रमण जी ने करीब 10000 से अधिक किमी की पदयात्रा कर भारत के छोटे छोटे गाँवो में नैतिकता, ईमानदारी, नशामुक्ति जैसे देश हित के कार्य कर जन जन को लाभन्वित किया। हजारों हजारों की संख्या में लोगो को नैतिकता एवं प्रमाणिकता जीवन व्यवहार में उतारने हेतु सम्यक प्रेरणा पूज्य प्रवर ने दी |
कहा गया “जब जागे तब से सवेरा” आज हमारे पास महापुरुषों की सम्यक प्रेरणा भी है और साथ साथ अपने आप को सुधारने का यह अनुपम अवसर है । भारत देश के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम नैतिकता एवं प्रमाणिकता का पथ अपनाएं । आज से ही हम प्रतिज्ञा करें की कोई भी अनैतिक कार्य नही करेंगे । बेईमानी नहीं करेंगे । स्वयं के विकास एवं कल्याण के साथ साथ, परिवार, समाज एवं देश के विकास में हम तत्परता से कटिबद्ध बनेंगे | सिर्फ और सिर्फ तब ही हम आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ एवं आचार्य महाश्रमण जैसे महापुरुषों के पदचिन्हों पर चल पाएंगे एवं देश के लिए हमारा परम कर्तव्य अदा कर पाएंगे |
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| Editorial by Jain Terapanth News Note ban in The India. |

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