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Showing posts from December, 2016

साधक को शरीर के मोह का त्याग करना चाहिए : आचार्यश्री महाश्रमण

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-प्रवास के अंतिम दिन आचार्यश्री ने धुबड़ीवासियों को प्रदान की सम्यत्व दीक्षा (गुरुधारणा)- आचार्यश्री महाश्रमणजी           31 दिसम्बर 2016, धुबड़ी (असम) (JTN), तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने प्रवास के अंतिम दिन और साल के अंतिम दिन अर्थात शनिवार को शंकरदेव शिशु उद्यान (चिल्ड्रेन पार्क) में बने मंगल समवसरण के पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी मंगलवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि साधना करने वाला व्यक्ति देहावास को सदा के लिए छोड़ देता है। यह आत्मा और शरीर का मिलन अशाश्वत है। यह बना हुआ संबंध कभी न कभी टूटने वाला है। जिसका संबंध उसका वियोग अवश्य होता है। संयोग का अंत वियोग होता है। आदमी का शरीर अशाश्वत है, इसलिए आदमी को शरीर के प्रति अत्यधिक मोह नहीं करने का प्रयास करना चाहिए। जो साधक आत्मा के हित में लगा रहता है, वह देहावास से मुक्ति प्राप्त सकता है और मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। आचार्यश्री ने साधुओं और गृहस्थों को शरीर से मोह न करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जब मौत आती है तो अपने लोग परिजन या स्नेही जन भी व्यक्ति के लिए त...

Jain Terapanth News Bulletin 57/16

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अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ◆अंक 57/2016  ◆ शनिवार, 31 दिसम्बर 2016  ◆ पौष शुक्लपक्ष 2, संवत 2073  ◆ पृष्ठ 16* ✅ *पूज्य प्रवर का दैनिक प्रवचन* *जीवन बने शक्ति व शांति सम्पन्न - आचार्यश्री महाश्रमण* ✅ज्योत्स्ना गृहशोभा सेमीनार : कोलकत्ता ✅कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला : सिलीगुड़ी ✅सेवा कार्य : जोरहट ✅संगठन समाचार : भवानीपटना ✅सरगम : जयपुर ✅फुड  किट एवं चादर वितरण : इचलकरंजी ✅स्वस्थ परिवार स्वस्थ समाज कार्यशाला - KGF ✅जैन संस्कार विधि : बारडोली ✅जैन संस्कार विधि : विजयनगर ✅जैन संस्कार विधि : जयपुर ✅पच्चक्खाण समय सारिणी ✅विहार प्रवास ✅तत्वज्ञान कार्यशाला : हैदराबाद ✅जानने योग्य व्यावहारिक ज्ञान ✅अभ्युदय योजना

जीवन बने शांति व शक्ति संपन्न : आचार्यश्री महाश्रमण

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आचार्यश्री महाश्रमणजी           30 दिसम्बर 2016 धुबड़ी (असम) : आचार्यश्री महाश्रमणजी ने दूसरे दिन शुक्रवार को शंकरदेव शिशु उद्यान (चिल्ड्रेन पार्क) में बने मंगल समवसरण पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी मंगलवाणी से अभिस्नात करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में शांत का बहुत महत्व है। जीवन में शांति हो तो आदमी तरक्की कर सकता है, किन्तु अशांत और भयातुर आदमी को शांति प्राप्त नहीं हो सकती। दुनिया में पैसे का भी  महत्व है, किन्तु पैसे से शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती। जिसके मन में शांति है वह सीमित पैसे में जीवनयापन कर सकता है। आचार्यश्री शांति का विशेष महत्व बताते हुए कहा कि जितने भी बुद्ध, तीर्थंकर और अर्हत हुए हैं, सभी का आधार शांति ही रहा है और जो भविष्य में होंगे वे उनका आधार भी शांति ही होगा। जैसे प्राणियों लिए पृथ्वी आधार है, वैसे ही तीर्थंकर, बुद्ध और अर्हतों के लिए शांति ही आधार है। इसलिए आदमी को अपने जीवन में शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।            आचार्यश्री ने शांतमना व्यक्ति को शास्त्र का वेत्ता बताते ...

Jain Terapanth News Bulletin 56/16

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अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ◆ अंक 56/2016  ◆  शुक्रवार, 30 दिसम्बर 2016  ◆ पौष सुदी 1 2073 ◆  पृष्ठ  14 ✳पूज्य प्रवर का दैनिक प्रवचन ✳प्रेक्षाध्यान कार्यशाला - तेममं भीलवाड़ा ✳नेत्र एवं स्वास्थ्य जांच शिविर - भिवंडी ✳नशामुक्त अभियान - तेयुप इचलकरंजी ✳आत्म विश्वास ट्रेनिंग कार्यक्रम : बलांगीर ✳ज्ञानशाला प्रारम्भ : बर्धमान ✳ज्योत्सना गृहशोभा सेमीनार : कोलकाता ✳आगामी कार्यक्रम ✳विहार प्रवास ✳पंचांग

Jain Terapanth News Bulletin 55/16

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अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ◆अंक 55/2016  ◆ गुरुवार, 29 दिसम्बर 2016  ◆ पौष कृष्ण 15 (अमावस्या), संवत 2073  ◆ पृष्ठ 16 ✅ पूज्य प्रवर का दैनिक प्रवचन बोलने न बोलने का विवेक रखें ✅ अभातेयुप महामंत्री श्री विमल कटारिया को अंतराष्ट्रीय पाटीदार समाज का विशिष्ट व्यक्तित्व सम्मान ✅जैन कार्यवाहिनी कोलकाता का निर्देशिका विमोचन ✅राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक शिविर : दिल्ली ✅सांस्कृतिक संध्या : ज्ञानशाला प्रशिक्षण कार्यशाला ✅कैश लैश स्ट्रेसलैश इंडिया : रायचूर ✅प्रेक्षाध्यान शिविर : नोखा ✅तेरापंथ महिला मंडल जयपुर, शहर द्वारा कार्यशाला आयोजित ✅सेवा कार्य : जलगाँव ✅शिक्षा और चरित्र निर्माण  कार्यक्रम : अहमदाबाद ✅सामूहिक जन्मोत्सव : ठाणे ✅जानने योग्य व्यावहारिक ज्ञान ✅विहार प्रवास ✅पच्चक्खाण समय सारिणी ✅आगामी कार्यक्रम : विजयनगर ✅आओ जुड़े, युवा वाहिनी से

"गलत कार्य करने वाला भयभीत होता है" - आचार्यश्री महाश्रमण

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-त्रिदिवसीय प्रवास हेतु अहिंसा यात्रा व धवल सेना के साथ धुबड़ी की धरा पर  पूज्य प्रवर का एतिहासिक मंगल पदार्पण- -आचार्यश्री ने आत्मा की रक्षा करने का दिया ज्ञान- आचार्यश्री महाश्रमणजी           29 दिसंबर, धुबड़ी (असम) : बांग्लादेश की सीमा से पूर्वी ओर लगभग 690 किलोमीटर स्वाक्यर क्षेत्रफल का यह धुबड़ी जिला चावल, पटसन, मछली तथा अन्य उत्पादों के व्यापार का केन्द्र है। किसी जमाने में यहां माचिस का कारखाना भी चलता था जो समय की मार के कारण बंद हो चुका है। पद्म पुराण में वर्णित बिहुला-लखिन्दर से जुड़ा यह जिला मुख्यालय ब्रह्मपुत्र महानदी के किनारे बसा हुआ है। यहां स्थित धुबनीर घाट के नाम पर इस जिले का धुबड़ी नाम पड़ा। यहां कभी सिक्खों के गुरु तेगबहादुरजी का पदार्पण हुआ था। उसके बाद शायद पहली बार इस धरा पर किसी महासंत के रूप में आचार्यश्री महाश्रमणजी का पदार्पण हो रहा था जो वैश्विक शांति के लिए मानवता को जागृत करने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर यहां पहुंच रहे थे। आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ जैसे ही नगर की सीमा पर पहुंचे तेरापंथी सभा के सभी संगठनों के सदस्य,...

बोलने न बोलने का विवेक रखें : आचार्यश्री महाश्रमण

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-पानबाडी से लगभग 12 किमी का विहार कर पुज्यप्रवर पहुंचे गौरीपुर- -हाजरी का रहा क्रम, साधु साध्वियों को दी विशेष प्रेरणा- आचार्यश्री महाश्रमणजी         28 दिसम्बर 2016. गौरीपुर (असम) जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता , भगवान महावीर के प्रतिनिधि , अहिंसा यात्रा के प्रणेता महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार की सुबह पानबाड़ी स्थित बीएसएफ के 71 वें बटालियन के कैंप से गौरीपुर के लिए विहार किया। लगभग बारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री गौरीपुर पहुंचे। जहां गौरीपुर के श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री का स्वागत अभिनन्दन किया। आचार्यश्री तेरापंथी सभा गौरीपुर के अध्यक्ष श्री विजय सिंह चोरड़िया के यहां आवास में पधारे। यहीं आचार्यश्री का प्रवास हुआ। इसके उपरान्त आचार्यश्री प्रवास स्थल से कुछ दूरी पर स्थित पीसी इन्स्टीट्यूशन हायर सेकेण्ड्री स्कूल के प्रांगण में बने अहिंसा समवसरण पंडाल में पधारे।           जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता , भगवान महावीर के प्रतिनिधि , अहिंसा यात्रा के प्रणेता...

Jain Terapanth News Bulletin 54/16

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अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ■ अंक 54/2016 ■ बुधवार , 28 दिसंबर 2016 ■ पौष कृष्ण 14, संवत 2073 ■ पृष्ठ  16 ✅ पूज्यप्रवर का दैनिक प्रवचन आत्मा को जितना सबसे बड़ी विजय - आचार्य श्री महाश्रमण जी ✅ तेरापंथ सरताज आचार्य श्री महाश्रमण जी ने करवाए सेना के जवानों को अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्प ✅ राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक कार्यशाला द्वितीय दिवस - दिल्ली ✅ राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक कार्यशाला तृतीय दिवस : दिल्ली ✅ तेयुप विजयनगर द्वारा मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव ✅ संगठन यात्रा : पेटलावद ✅ वन नेशन वन मिशन : सूरत ✅ तेरापंथ कैलेण्डर का विमोचन : नागपुर ✅ शपथ ग्रहण समारोह : होसुर जैन तेरापंथ कार्ड वितरण -लाडनूं ✅ तत्व ज्ञान परीक्षा : अमराईवाड़ी-ओढव ✅ आध्यात्मिक मिलन जोधपुर ✅ विहार प्रवास ✅ आगामी कार्यक्रम : दिल्ली ✅ पच्चाखन समय सारिणी ✅ वर्कशाप ओन सेल्फ डिफेंस - लाडनूं ✅ तेरापंथ कार्ड

आत्मा को जीतना सबसे बड़ी विजय : आचार्यश्री महाश्रमण

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  -सीमा सुरक्षा बलों के बीच पहुंचे आध्यात्मिकता के महासंरक्षक आचार्यश्री महाश्रमण- आचार्यश्री महाश्रमणजी           27 दिसंबर 2016, पानबाड़ी , ( आसाम ), आचार्यश्री लगभग चौदह किलोमीटर का विहार कर पानबाड़ी स्थित सीमा सुरक्षा बल के 71 वें बटालियन के कैंप परिसर में पहुंचे। इस बटालियन के कमांडेंट श्री वीरेन्द्र दत्ता सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री का स्वागत किया। आचार्यश्री कैंप स्थित ऑफिसर इन्स्टीट्यूट भवन परिसर में  पधारे  सीमा   सुरक्षा   बल   के  71 वें   बटालियन   कैंप   के   जवानों   को   आत्मा   को   जीतने   का   गुर   सिखाने   आत्मविजेता ,  अखंड   परिव्राजक ,  अहिंसा   यात्रा   के   प्रणेता ,  जैन   श्वेताम्बर   तेरापंथ   धर्मसंघ   के   ग्यारहवें   अनुशास्ता   आचार्यश्री   महाश्रमणजी   अपनी   धवल   सेना   के   साथ...

Jain Terapanth News Bulletin 53/16

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  अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ◆ अंक 53/2016  ◆  मंगलवार, 27 दिसम्बर 2016  ◆ पौष कृ.14 संवत 2073 ◆  पृष्ठ  12 ✳पूज्य प्रवर का दैनिक प्रवचन ✳ राष्टीय ज्ञानशाला प्रक्षिशक कार्यशाला : दिल्ली ✳ भगवान पार्श्वनाथ जयंती : मालेगांव ✳ प्रेक्षाध्यान देता जीवन का समाधान कार्यक्रम : हिरियुर (कर्नाटक) ✳ निशुल्क फिजियोथैरेपी कैंप: किशनगढ ✳ स्वच्छ भारत अभियान : कालीकट ✳ कम्बल वितरण : KGF ✳ स्वच्छ भारत अभियान : कालीकट ✳ आगामी कार्यक्रम : राजाजी का करेड़ा ✳ विहार प्रवास ✳ पचखान

मनुष्य जन्म का उठाएं सुन्दर लाभ : आचार्यश्री महाश्रमण

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- बिलासीपाड़ा में दो दिवसीय प्रवास सम्पन्न कर गतिमान हुए शांतिदूत के चरण -   आचार्यश्री महाश्रमणजी          26 दिसम्बर 2016 बोगारीबाड़ी, धुबड़ी (असम), (JTN), आचार्यश्री महाश्रमणजी बिलासीपाड़ा में दो दिवसीय प्रवास सुसम्पन्न कर महासूर्य की भांति अपना आलोक दूसरे क्षेत्र को प्रकाशित करने के लिए निकल पड़े। सोमवार को प्रातः की मंगल बेला में आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ बोगारीबाड़ी की ओर प्रस्थान किया। नगर स्थित श्रद्धालुओं के आग्रह पर वत्सलता की प्रतिमूर्ति आचार्यश्री ने उनके घरों या प्रतिष्ठानों के समक्ष पहुंचकर उन्हें मंगलपाठ सुनाया और सभी को अपने शुभाशीष से अभिसिंचन प्रदान किया।           विद्यालय के प्रांगण में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने फ़रमाया की मनुष्य जीवन का लाभ उठाकर मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है। मनुष्य जीवन की जो पूंजी प्राप्त है, उसका लाभ उठाना चाहिए और अच्छे कर्मों के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने एक दृष्टांत के म...

Jain Terapanth News Bulletin 52/16

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अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ बुलेटिन ◆ अंक 52/2016  ◆  सोमवार, 26 दिसम्बर 2016  ◆ पौष कृ.13 संवत 2073 💠 पूज्य प्रवर का दैनिक प्रवचन आदमी अपने जीवन में शांति की कामना करता है - आचार्य श्री महाश्रमण 💠 रतलाम ATDC सेंटर भव्य उद्धघाटन समारोह उद्धघाटन समारोह में रतलाम शहर की प्रथम नागरिक डॉ. सुनीता यार्दे सहित कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित 💠 दिल्ली में ज्ञानशाला के रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत मंत्री मुनि श्री सुमेरमल जी लाडनू के सान्निध्य में राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आगाज। 💠 संगठन यात्रा : करवड़ (म.प्र.) 💠 संगठन यात्रा : भीलवाड़ा 💠 भगवान पार्श्वनाथ जन्मकल्याणक महोत्सव : कोलार 💠 सर्वधर्म सदभावना कार्यक्रम : बेल्लारी 💠 सेल्फ डिफ़ेन्स वर्क शॉप : दिल्ली 💠 आध्यात्मिक मिलन : पारस वड़ला ( वापी ) 💠 जैन तेरापंथ कार्ड वितरण समारोह : ठाणे, मुम्बई 💠 तेरापंथ कार्ड वितरण समारोह : डीसा 💠 भगवान् पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक एवं तेरापंथ कार्ड वितरण समारोह : कालीकट 💠 तेरापंथ युवक परिषद् कोलकाता ने किया कम्बल वितरण 💠 सर्वधर्म सदभावना कार्यक्रम : बेल्लारी ...

आदमी अपने जीवन में शांति की कामना करता है : आचार्यश्री महाश्रमण

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-मुख्यामुनी श्री एवं साध्वीवार्य श्री के उद्बोधन से श्रद्धालु हुए लाभान्वित- आचार्यश्री महाश्रमणजी           25 दिसम्बर 2016 बीलासीपाड़ा , धुबड़ी ( असम ) ( JTN), तेरापंथ धर्मसंघ के लगभग 256 वर्षों के इतिहास में पहली बार भारत की पूर्वोत्तर धरा को पावन करने वाले ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी मानों श्रद्धालुओं के वर्षों की प्यास को बुझाने के लिए अपनी ज्ञान , प्रेम और वात्सल्य की अविरल धारा प्रवाहित कर रहे हैं।          आचार्य श्री ने मंगल प्रेरणा पाथेय में शांति का मार्ग बताते हुए कहा कि दसवेआलियं के नवमें अध्ययन में समाधि के बारे में बताया गया है। चित्त की विशिष्ट शांति की स्थिति को समाधि कहा गया है। संसार में प्रत्येक आदमी को शांति की अपेक्षा होती है। आदमी अपने जीवन में शांति की कामना करता है। चित्त की शांति के लिए चित्त में प्रसन्नता होनी चाहिए। उक्त ग्रंथ में चार प्रकार की समाधियां बताई गई हैं विन...