अमूल्य मानव जीवन व्यर्थ ना गवाएं : आचार्य महाश्रमण
ज्ञान के महासूर्य आचार्य महाश्रमण पधारे ज्ञान सरोवर
मैसूरु से शांतिदूत का लगभग 13 किमी का हुआ विहार
21 नवंबर 2019, गुरुवार, ललिंगश्वर कोपल, कर्नाटक।
अपनी पावन वाणी से मैसूरवासियों को कृतार्थ बनाकर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का अहिंसा यात्रा का कारवां आज मैसूर से आगे बढ़ चला। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज प्रातः तेरापंथ भवन मैसूर से मंगल विहार किया। मार्ग में अनेक श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्यवर ने हिनाकल में भी अनेक श्रद्धालुओं को मंगल पाठ सुना कर आशीर्वाद प्रदान किया। लगभग 13 किलोमीटर का विहार कर का ज्योतिचरण स्टेट हाईवे 88 पर स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम ज्ञान-सरोवर में पधारे। ब्रह्मकुमारी के साधकों ने आचार्यवर का भावभीना स्वागत किया।
यहां प्रवचन सभा में अपनी पावन ज्ञान रश्मियां बिखेरते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने कहा हमारे स्वयं की आत्मा मित्र भी और शत्रु भी है। दूसरों को शत्रु-मित्र मानना स्थूल बात है। यह व्यवहार और ऊपर की बात है। बाहर का मित्र धोखा दे सकता है और कभी शत्रु भी सहायता कर सकता है। पाप कर्म करने वाली आत्मा खुद ही की दुश्मन बन जाती है। कंठ को काटने वाला दुश्मन जितना नुकसान नहीं करता उतना खुद की दुरात्मा नुकसान करती है। आदमी किए गए पाप कर्मों को स्वयं भोगता है कोई बांटने वाला नहीं होता है। कर्म विपाक में आकर जब फल देता है तो स्वयं को ही भोगना पड़ता है। आदमी पाप कर्म ना करें। एक दृष्टांत के माध्यम गुरुदेव ने समझाया कि एक मनुष्य जीवन मिला है, अच्छे रास्ते पर चलो। जो इस अमूल्य मानव जीवन को पाकर व्यर्थ गंवा देते हैं, वह नादान है, नासमझ है, दयनीय है।
ब्रह्माकुमारी आश्रम की लक्ष्मी दीदी ने कहा कि जैन धर्म प्राचीन धर्म है। जैन धर्म ने मानव को जीवन शैली सिखाई है। अहिंसा का पाठ पढ़ाया है। आज दुनिया में लोग तमोगुण प्रधान हो चुके हैं पर ऐसे तपस्वी साधु मनुष्य जीवन को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं। आचार्यश्री एक उदाहरण हैं। अहिंसा धर्म को अच्छी तरह समझ लें तो व्यक्तिगत जीवन में परिवर्तन हो सकता है।
ब्रह्माकुमारी आश्रम की दीदी शारदा बहन एवं लक्ष्मी बहन ने अहिंसा यात्रा का स्वागत किया। मैसूर सभा मंत्री विनोद जी बोरड ने पूज्य प्रवर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। श्री कैलाश जी देरासरिया व श्री महेंद्र जी नाहर ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।

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