Posts

Showing posts from April, 2020

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 11

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 11 ) दिनांक 30 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भीम जी स्वामी का दीक्षा संस्कार आचार्य भारमल जी स्वामी द्वारा जयपुर में हुआ । उन्होंने मां - कल्लू जी के साथ वि. सं. 1869 फागन कृष्णा 11 को दीक्षा ली । उनसे पहले उनके बड़े भाई श्री स्वरूपचंद जी स्वामी तथा छोटे भाई जीत मुनि ( जयाचार्य ) दीक्षित हो चुके थे । जीत मुनि को 6 महीनों पश्चात तथा भीम जी स्वामी को 4 महीनों बाद छेदोपस्थापनीय- चारित्र ( बड़ी- दीक्षा ) दे , भीम जी स्वामी को जीत मुनि से साधु- क्रम संख्या में बड़ा रखा गया । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मार...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 10

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 10 ) दिनांक 29 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भीम विलास 6 - 6 के अनुसार भीम जी स्वामी वैसे ही थे - ' तप संयम रो जोरो घणो छै , बले सूत्र - सिद्धांत रा जाण विषेखो '   वेदन आयां सम अहियासै , भीम रिषीश्र्वर एहवो देखो । जिनके पास तप का तेज है , संयम का बल है , सिद्धांत - सूत्र की विशेष जानकारी है , वेदना- कष्ट- परिषह सहने की क्षमता है , यह एक मोटा- सा परिचय है भीम ऋषीश्र्वर  का । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 9

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (  9 )  दिनांक 28 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - मोहिल -वाटी के बादशाह कहलाने वाले ऋषि चंद्रभाण जी के इलाके को अभिभूत कर , उनकी अभिमत - धारणाओं को दाट- पाट, जनता को तेरापंथ -दर्शन- रहस्य समझा थली में ठाट जमाने का श्रेय तपस्वी भीम जी को जाता है । भीम विलास 4 -7 बोलता है - 'भीम  कियो  थली  में  गहघाट' "तपस्वी भीम जी नै ठाट लगा दिए ।"  थली के लोग ऐसा कहने लगे थे । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करे...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 8

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला (  8  ) दिनांक 27 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी भीम जी स्वामी का अलग ही रंग था । व्याख्यान कला, कंठों का सुरीलापन , आगम -धारणा , जनता पर प्रभाव , स्वभाव में माधुर्य , साथी सहयोगी संतों का एकीपन और अवसरज्ञता  उनका तंत्र -तिलक था । थली जैसे प्रांत में तेरापंथ की जड़े जमाने में उन्हीं का विशेष योग रहा - जयाचार्य ने भीम विलास 4 -4 में लिखा है - देश थली में ठाट ,भीम - ऋषि आय नै  मत पातसा नो दियो दाट , लोगां नै समझाय नै' " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 7

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 7 ) दिनांक 26 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भीम जी स्वामी की तरकीब ने उन्हें आशु -कोप से आशुतोष बना दिया । मानो किसी ने खिरणी की जड़ सफेद -धागे में पहना दी हो । तपस्वी भीम जी ने उन्हें ऐसा परोटा , ऐसा संभाला , क्या कहना  ? दुर्वासा -वृत्ति से वाशिष्टि -वृत्ति में ला दिया । वे आपस में घुले तो ऐसे घुले ' दूध मिश्री ' ।  मुनि भागचंद जी ने वृत्ति - प्रकृति -बदलाव के साथ-साथ तपस्याएं भी खूब की । अंतिम 27 वर्षों में 27 मासखमण -तप कर एक कीर्तिमान बनाया । यह सब कुछ हुआ तपस्वी भीम जी स्वामी की बदौलत । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छाम...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 6

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 6 ) दिनांक 25 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - अ .सी .आ .उ. सा. का सदा जाप करते । निरतिचार चर्या और अभिग्रह तप तपते । पंच परमेष्ठी के कोटि -जपी साधक भीमजी स्वामी के सौम्य स्वभाव की अमिट- छाप लगी तपस्वी भागचंद जी पर । तपस्वी भीमजी में प्रकृति बदलने की एक अनूठी कला थी । मुनि भागचंद जी उग्र - स्वभावी, बीदासरी - रांगङ , छोटी-छोटी ना कुछ सी बात पर बिगड़ जाते । रूठना उनके लिए क्षण भर का काम था । इसी आवेश - तेश में वे कितनी ही बार संघ छोड़कर चले गए । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक प...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 5

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 5 ) दिनांक 24 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - अनुयायी तथा अन्य मतावलम्बी  लोग भी भीम जी स्वामी के दर्शन कर खुश होते । भीम जी तपस्वी की चारित्रचर्या  युक्त मनोहर मुद्रा देख मन में चैन - आनंदानुभूति करते । उनका सरस व्याख्यान और निर्मल वाणी सुन जनता प्रसन्न होती , क्योंकि भीम जी स्वामी में विशेषता थी - तपस्या के साथ वे पंच परमेष्ठी के आराधक थे । अ. सि. आ. उ. सा. का  सदा जाप करते । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 4

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 4 ) दिनांक 23 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - उष्ण- काल में बहुत बार आतपी- साधना- गर्म शिलापटृ पर लेटकर- आतापना लेते । तत्व ज्ञान के माहिर और बोल थोकड़ों के दक्ष- भीम जी स्वामी ने पूरी आगम बत्तीसी का पारायण किया था । स्वाध्याय के साथ-साथ ध्यान के विविध प्रयोग और जप- योग , उनकी अन्तर साधना थी । उन जैसे सेवाव्रती भी थोड़े ही होते हैं। " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयु...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 3

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 3 ) दिनांक 22 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - तपस्वी भीम जी स्वामी बड़े वैरागी , निर्जरार्थी , निर्लेप और दीदारू -ओपते संत थे । उनके दो विगय उपरांत जीवन भर विगय - खाने का त्याग था ।  पौष -माघ की ठिठुरती ठंडी रातों में भी वे एक पछेवङी  से ज्यादा कपङा नहीं ओढ़ते थे । एकांतर -एक दिन छोड़ एक दिन निर्जल उपवास करते । " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 2

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 2 ) दिनांक 21 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम --------------------- समरण  थी  सुख संपजै , जाप  जप्यां  जस भारी हो ।  मन  वांछित  मनोरथ फलै , भजन  करो  नर नारी  हो ।  वारूं  बुद्धि  विस्तारी  हो  ।  भजो  मुनि  गुणांरा  भंडारी  हो ।। " ओ  नर - नारियों  ! भीम जी स्वामी का भजन करो  ।  जिनका स्मरण सुख- आनंद देता है । जाप से भारी यश मिलता है । मन इच्छित मनोरथ पूरे होते हैं  । जरा बुद्धि- कला -अटकल- चतुराई- युक्ति लगाकर ऐसे गुण -भंडार मुनि का भजन करो ।" " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो म...

तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 1

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी   जीवन परिचय श्रृंखला ( 1 ) दिनांक 20 अप्रैल 2020 सब  दुख  भंजन -भीम      - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - वृद्ध  सहोदर  जीत नों , जस धारी , जयकारी  हो  । लघु  सहोदर  स्वरूप नों , भीम  गुणां  रो  भंडारी हो । सखर  सुजस  संसारी  हो । भजो  मुनि  गुणां रा भंडारी हो ।। 7।। " तपस्वी भीमजी- गुण फूलों की क्यारी , यशस्वी , जयकारी ,जीत के सगे बड़े भाई, स्वरूप मुनि के अनुज, जिनकी सुयशशोभा संसार जानता है ,ऐसे गुण भंडार मुनि का भजन करो।" " ॐ अर्हम " महा तपस्वी मुनि श्री भीम जी स्वामी के बारे में जयाचार्य श्री आगे और क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में ....... क्रमशः..... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार🙏🙏 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 18

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  18  ) दिनांक 19 अप्रैल 2020 अमीचंद जी बहुत कड़क तपस्वी तो थे ही ,स्वभाव से भी कड़क थे । जय मुनि से उनकी अंतरंग प्रीति थी ।  सुना है - बार - बार दिव्यत्व के साक्षात्कार में अमीचंद जी तपस्वी कहा करते - " मैं बिना बुलाये इसलिए आता हूं कि आपसे मुझे प्रीति है।" ये पांचों ही 'अ.भी. रा. शि. को.' तपोनिधि ऋषिवर जयाचार्य के यदा-कदा प्रत्यक्ष होते रहे हैं।   महातपस्वी  मुनि श्री भीम जी स्वामी  के   बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 17

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  17  ) दिनांक 18 अप्रैल 2020 वि. सं. 1896 चूरू की रचना अमी. ढाल 2- 5 में युवाचार्य जीत लिख रहे हैं- पूरण थारी आसता, एक चटक मन मांय । का जाणै मन मांहरो, का जाणै जिनराय ।। "अमीचंद जी !तुम्हारे पर मुझे पूर्ण विश्वास है । तुमसे मिलने की मन में एक चटक रहती है। इसे मैं जानता हूँ या भगवान जानते हैं।" गीत लिखते लिखते एक प्रकाश हुआ । जय महाराज ने उसका अंकन शब्दों में भि.गु. 2-10 में यों किया -गुण निधि तपस्वी अमी चंद जी ने प्रत्यक्ष प्रकाश किया- अमीचंद तपसी गुण दरियो, प्रत्यक्ष उद्योत करियो   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक क...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 16

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला (  16  ) दिनांक 17 अप्रैल 2020 शासन समुद्र भाग -4 के पृ. 143 में लिखा है - "उनके द्वारा जयाचार्य को कई बार आभास हुए । उनको स्वयं जयाचार्य ने अपने हाथ से लिपिबद्ध कर लिया । वे पत्र  (लाडनूं ) पुस्तक भंडार में सुरक्षित हैं ।" जयाचार्य श्री ने उन्हें परमदृष्टि - सजगप्रहरी के रूप में परखा । वे जय महाराज के प्रत्यक्ष थे । उनकी विचारणा- धारणा बहुत गंभीर ,संघ -हितैषी है- स्वयं जयाचार्य ने लिखा है- अमीचंद जी को देख मैं अमृत पिया - सा हो जाता हूँ- "   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/20...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 15

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  15  ) दिनांक 16 अप्रैल 2020 उनको याद कर जयाचार्य लिखते हैं - "पूरी तुझ मुझ प्रीत" तुम्हारी और मेरी प्रीति पूर्ण है । तुमने प्रत्यक्षी -करण में जो प्रकाश किया  । भगवान ही जानते हैं । मैं तुम्हारी बलिहारी जाता हूँ  - "प्रत्यक्ष उद्योत कियो भलो , जाणै जिन जय- कारी हो , ज्यांरी हूं बलिहारी हो " ( विघ्न हरण- 5) संत गुण माला में भी जयाचार्य श्री ने गाया - "पंचम काले कीधो भारी उजास कै , एहवो गुण किम बीसरूंजी" । तप:पूत ! तुमने जो कलिकाल में प्रकाश किया उसे कैसे भुलाया जा सकता है ?   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक क...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 14

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 14 ) दिनांक 15 अप्रैल 2020 मुनि अमीचंद जी उच्च कोटि के तपस्वी थे । वे आचार क्रिया निपुण , कुशल - व्यवहारी , अपनत्व और सेवा - सहयोग का जीवन जीने वाले थे । उनको याद कर जयाचार्य लिखते हैं - भगवान महावीर के युग में एक धन्ना अणगार हुआ पर यह दूसरा धन्ना इस दु:षम आरे में प्रगट हुआ लगता है । मैं बलिहारी जाता हूँ तपस्वी ! तुम्हारी करणी पर ।  ऋषियों के ऋषि ! तुम तो हमारे भाग्य से ही जन्मे हो ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 13

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  13  ) दिनांक 14 अप्रैल 2020 जयाचार्य श्री कृतज्ञ वाणी से बोलते हैं - चिंतामणि सुरतरु समो,भीम- अमीं दुख भंजन , निश्चल तन- मन स्यूं रट्यां, सुख पामें  सुप्रसन्न । "भीम जी स्वामी' चिंतामणि' जैसे और अमीचंद जी 'सुरतरु' के समान दुख -भंजन हैं । तपस्वी भीम जी का जाप इच्छापूर्ति और अमीचंद जी का स्मरण प्रसन्नता, आत्मसुख -आनंद देने वाला है। तन -मन को स्थिर कर उनका भजन करो ।"   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज ...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 12

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  12  ) दिनांक 13 अप्रैल 2020 "अमीचंद  नाम  ही गुण -निष्पन्न था  । तुम तो शरद -चंद्र थे । इस कलिकाल में तुमने भारी उजास किया " ।  यहां भी जयाचार्य की भाषा रहस्यभरी है । वे कहना चाहते हैं - सुदूर महाविदेह क्षेत्रीय आचार्यों से संपर्क जो इस समय दुर्लभतम है । तपस्वी ! तुमने उसे सुगम वार्तालापी  बना दिया ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 11

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  11  ) दिनांक 12 अप्रैल 2020 शुभ लेश्या , चढ़ते भावों में उनकी ऊधर्वारोही आत्मा तीसरे सनत कुमार कल्प में  उपेन्द्र के रूप में स्थिर हुई । उस रस -परित्यागी (जिनके जीवन भर- इक्षु उत्पादन से बने सभी मिष्ट- पदार्थों -सेलङी- वस्तुओं का त्याग था ) ने अंतिम आलोवना, आराधना, प्रतिक्रमण कर साधना संपन्न की । उस भावितात्म -अणगार ने अपना वचन निभाया । जयाचार्य के प्रत्यक्ष हुए । अपना परिचय दिया ।    महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेर...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 10

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला (  10  ) दिनांक 11 अप्रैल 2020 बोरावड़ (मकराणा) में तपस्वी ने पन्द्रह दिन चौविहार- तप पचखा । तीन दिन बीच-बीच में जल लेने की छूट रखी । तीसरे दिन निर्जल तेले में भयंकर प्यास उघड़ी । मुंह सूख गया  । होठों पर पपड़ी जम गई । मनुहारों के बाद भी जल नहीं लिया । केवल संकेत देते रहे- अमृत -कूप खुला है । तृषा- परीषह सहते - सहते प्राण छोड़ दिए ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज

"डॉ. चेतन सामरा" पर संपूर्ण जैन तेरापंथ समाज को है नाज़

Image
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ समाज के डॉ चेतन सामरा वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग में भीलवाड़ा के महात्मा गाँधी चिकित्सालय में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं । यह वही चिकित्सालय है जहाँ अभी तक के सभी कोरोना पॉजिटिव केस को डॉक्टर्स की टीम ने अपने हौंसले और आत्मविश्वास के दम पर नेगेटिव कर बड़ी उपलब्धि हांसिल की है जिसकी चर्चा आज देशभर में हो रही है । यहाँ डॉ चेतन सामरा की ड्यूटी आइसोलेशन वार्ड में है । चिताम्बा निवासी भीलवाड़ा प्रवासी डॉ. चेतन सामरा सुपुत्र श्री रोशनलाल जी सामरा ने वर्ष 2005 में बेंगलुरु मेडिकल कोलेज से एमबीबीएस की डिग्री ली और वर्ष 2012 में सफदरगंज अस्पताल से रेजीडेंसी की । इसके बाद वर्ष 2015 में बडौदा मेडिकल कोलेज से फोरेंसिक मेडिसिन में एमडी की डिग्री ली । इसके बाद डॉ चेतन विगत 3 वर्षों से भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय एवं भीलवाड़ा मेडिकल कोलेज में सेवाएँ दे रहे हैं । वे तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, भीलवाड़ा के सदस्य के रूप में भी सेवा क्षेत्र में सक्रिय है । डॉ चेतन सामरा ने कोरोना की इस महामारी के समय सभी के लिए यही सन्देश दिया है कि कोरोना का सामना करने ...

"डॉ. संजय कोचर" पर संपूर्ण जैन तेरापंथ समाज को है नाज़

Image
डॉक्टर संजय कोचर को ह्रदय से नमन- आज विश्व का प्रत्येक व्यक्ति दहशत में है, हर व्यक्ति इस लाईलाज बीमारी से डरा हुआ है लेकिन धरती पर मौजूद भगवान इसे ख़त्म करने के लिए अड़ा हुआ है। धरती के इस भगवान को कोटिशः नमन।  बीकानेर में भी लगभग 20 व्यक्ति कोरोना जाँच में अभी तक पॉज़िटिव आ चुके है। हमारे बीकानेर में क़ोरोना ट्रीटमेंट यूनिट के हैंड सेवा भावी परिवार से डॉक्टर संजय कोचर जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपनी टीम के साथ अग्रिम मोर्चे पर अपनी सेवाए दे रहे है । डॉक्टर कोचर मार्च माह के प्रारंभ से ही दिन रात 24 घंटे बीकानेर से क़ोरोना का ख़ात्मा करने के लिए निर्बाध रूप से अपना धर्म निभा रहे है। ऐसे महामना कर्मयोगी डॉ. संजय कोचर को ह्रदय से साधुवाद।  बीकानेर तेरापंथ समाज सहित सकल जैन समाज भी अपने इस होनहार शक्सियत पर गर्व अनुभव करता है । डॉ संजय कोचर का बीकानेर, गंगाशहर के आस पास के क्षेत्रों में विराजित चारित्रत्माओं के चिकित्सा सेवा के कार्यों में बहुत सहयोग रहता है

"डॉ. हर्षा मालू" पर संपूर्ण जैन तेरापंथ समाज को है नाज़

Image
जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज की डॉ. हर्षा मालू, DY Patil Hospital, नेरुल, नवी मुंबई में वर्तमान में  कोरोना जैसी महामारी की लड़ाई में लगातार अपनी सेवाएं दे रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हॉस्पिटल में कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है ।  सादुलपुर निवासी बेंगलौर प्रवासी स्व. उत्तमचंद जी मालू की सुपौत्री एवं, श्री रतनलाल जी बोथरा सादुलपुर, मुंबई की दोहिती एवं श्री कृष्ण कुमार, संगीता मालू की सुपुत्री डॉ. हर्षा मालू द्वारा कोरोना की विषम परिस्थितियों में दी जा रही सेवा हेतु अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ परिवार हार्दिक अभिनंदन करता है ।

"डॉ. जागृति नाहटा" पर संपूर्ण जैन तेरापंथ समाज को है नाज़

Image
जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज की डॉ.जागृति नाहटा LNJP Hospital, Delhi में वर्तमान में  कोरोना जैसी महामारी की लड़ाई में लगातार अपनी सेवाएं दे रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हॉस्पिटल में कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है ।  सरदारशहर के बेंगलोर प्रवासी स्व. बच्छराजजी (मास्टरजी) - लक्ष्मीदेवी नाहटा की यशस्वी सुपौत्री एवं श्री रविप्रकाशजी-जयश्री नाहटा की लाडली सुपत्री जागृति नाहटा ने बैंगलोर स्थित श्री भगवन महावीर जैन कॉलेज से 12 वीं तक कि पढ़ाई और बेंगलोर मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई पूर्ण की। जागृति नाहटा ने COMEDK UGET-2011 की परीक्षा में 17वां एवं सी.ई.टी.की परीक्षा में शामिल 1,40,000 परीक्षार्थियों में 140वां गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त किया था।

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 9

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 9 ) दिनांक 10 अप्रैल 2020 स्वर्गवास के बाद वे जयाचार्य को स्वप्न संकेत देते । जयाचार्य के स्वप्न - संकलन से ऐसा झलकता है। साध्वी पार्वतां जी बताया करती थी - वे जयाचार्य के प्रत्यक्ष थे । जब चाहो हाजर- नाजर उत्तर देते । वे ही तो महाविदेह क्षेत्रीय आचार्य जयजश और दीप गणी से संपर्क सूत्र जोड़ा करते।  जयाचार्य श्री लिखते हैं  - मेरे मन इच्छित पूरे करने वाले तपस्वी ! तुम्हारी विचारशील आलोचना बहुत गंभीर थी। तुम गुणग्राही महिमावान होने के साथ-साथ दिए वचन के बड़े पाबंद निकले ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | ht...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 8

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 8 ) दिनांक 9 अप्रैल 2020 यों तो कहीं भी तपस्वी अमीचंद जी की व्यवस्थित तप- तालिका नहीं मिलती । पर जब जयाचार्य 'हेम - नवरसा' जैसे ग्रंथ में 'विकट तप्त खंखर देह कीधी' - तपस्वी ने विकट तप से तपा कर शरीर को कंकाल जैसा कर दिया- लिखकर  कुछ गंभीरता की सुचना देते हुए प्रतीत होते हैं और ' तप- रूप सुधा वृष्टि बरषै ' - जिनके नभ -कूप से तप- रूप अमृत बूंदें झरती हैं '- लिखकर तो उसे और पुष्ट करते हैं । तपस्वी की तपस्याएं लोमहर्षक रही होगी।  जयाचार्य  श्री  के  शब्दों  में  -  '  घोर तप सुणी काया धड़कै ' - उनके कठोर -घोर -तप को सुनकर ही शरीर थर -थरा उठता  है पर क्या-क्या तप तपा ?  अब कहां ढूंढे  ?   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभ...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 7

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 7 ) दिनांक 8 अप्रैल 2020 तपस्वी अमीचंद जी स्वामी ने अभिग्रह लिया । ' जब जीतमल जी स्वामी मुझे  ' मूर्ख  ' कहेंगे तभी पारणा लूंँगा ' । मनाते-  मनाते तीसरा दिन हो गया , न अन्न, न जल । तीसरे दिन , तीसरा प्रहर आ गया पर तपस्वी जी ध्यान ही नहीं खोल रहे थे । जीत मुनि के मुंह से उठते  - उठते निकला - ' मूर्खों के अभिग्रह की भाषा कोई मूर्ख ही समझेगा ' तपस्वी  ! यह कैसी मूर्खता ! और तपस्वी का ध्यान खुल गया ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/ प्रसारक ...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 6

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 6 ) दिनांक 7 अप्रैल 2020 तपस्वी अमीचंद जी ने ई. 1816 से 1830 तक के चौदह वर्षीय साधना काल में चोविहार ( निर्जल) 1 से लेकर 10 तक उपवास- तप की लड़ी की । उनके अभिग्रहों का विस्तृत- क्रमबद्ध- विवरण तो उपलब्ध नहीं होता पर सुना है चौदह वर्षों में उन्होंने बिना अभिग्रह कभी आहार ही नहीं लिया  । जिस दिन अभिग्रह पूरा नहीं होता ,उस दिन निर्जल उपवास कर लिया करते । बहुत बार तो उनके संकल्प, ध्यान- स्वाध्याय मूलक होते अथवा हेम मुनि या जीत मुनि के शब्दों पर होते । उन्होंने एक बार अभिग्रह लिया जो तीन दिन बाद पूरा हुआ। अभिग्रह भी विचित्र था, कल्पना से परे कहिए । जीत मुनि मुझे आ कर कहे - ' 'तपसी  ! यह कैसी मूर्खता  ?' तो ही मैं आहार पानी मुंह में लूँगा । यह कैसे संभव था कि जीत मुनि ऐसे शब्द फरमायें और तपस्वी का संकल्प- अभिग्रह पूरा हो ।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... ...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 5

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 5 ) दिनांक 6 अप्रैल 2020 पंच ऋषि स्तवन गाथा 3-4-5-6 में जयाचार्य श्री गाते हैं - धोरी  जिन- शासन  धुरा, अहोनिशि  में अधिकारी हो । परम दृष्टि मैं परखियो, जबर विचारणा थांरी हो ।। सुजस दिशा अनुसारी हो, प्रगट्यो ऋषि तूं भारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। 6 ।। " तपस्वी  ! तुम जैसे धोरी- नागोरी बैल- के कंधों पर रात दिन अधिकार पूर्ण जिन - शासन की धुरी - शासन- रथ का जुआ है ।  परमदृष्टि ! मैंने तुम्हें परखा है । तुम्हारी विचारणा - चिन्तवना बहुत गंभीर है । हमारे सौभाग्य से ही तुम्हारे जैसे भारी - वजनदार महान् तपस्वी ऋषि प्रगट हुए । ऐसे गुण भंडार मुनि का भजन करो ।। 6 ।।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुट...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 4

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 4 ) दिनांक 5 अप्रैल 2020 पंच ऋषि स्तवन गाथा 3-4-5-6 में जयाचार्य श्री गाते हैं - संत-  धनो आगे सुणयो, ए प्रगट्यो  इण आरी हो । प्रत्यक्ष उद्योत कियो भलो, जाणै जिन - जय कारी हो ।। ज्यांरी हूं बलिहारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।।5।। भगवान महावीर के युग में - ' धन्ना - अणगार ' हुआ सुना। इस आरे - कलिकाल  में यह दूसरा 'धन्ना'  प्रगट  हुआ - तपस्वी  अमीचंद  जी ।  मैं बलिहारी जाता हूँ । तपस्वी ! तुमने प्रत्यक्षी - करण में भारी प्रकाश किया जिसे जिनेश्वर देव ही जानते हैं । ऐसे गुण भंडार मुनि का भजन करो ।। 5 ।।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मार...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 3

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 3 ) दिनांक 4 अप्रैल 2020 पंच ऋषि स्तवन गाथा 3-4-5-6 में जयाचार्य श्री गाते हैं - उष्ण - शीत - वर्षा - ऋतु  समै, वर  करणी  विस्तारी हो। तप - जप  कर तन -तावियों , ध्यान अभिग्रह  धारी हो ।। सुणतां इचरज  कारी  हो । भजो  मुनि  गुणां  रा  भंडारी हो ।।4।। गरमी, सर्दी और वर्षा- काल में श्रेष्ठ करणी -ऋतु- तपस्या का विस्तार किया  । जप- तप से शरीर को तपाया । ध्यान -अभिग्रह धारी ! तुम्हारा ध्यान- अभिग्रह, जप- तप सुनते ही आश्चर्य होता है । ऐसे गुण भंडार मुनि का भजन करो ।। 4 ।।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के ...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 2

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 2 ) दिनांक 3 अप्रैल 2020 पंच ऋषि स्तवन गाथा 3-4-5-6 में जयाचार्य श्री गाते हैं - सखर सुधारस सारसी, वाणी सरस विशाली हो । शीतल चंद सुहामणो, निमल - विमल गुणन्हाली हो ।। अमीचंद अघ-टाली हो । भजो मुनि गुणा रा भंडारी हो  ।।3।। पापभीरू तपस्वी अमीचंद जी की वाणी सखर - रंगत घुली, अमृत सी रसभरी, विशाल - गंभीर, महत्वपूर्ण थी । तपस्वी शीतल चांद- सा सुहावना निर्मल- नितरा हुआ साफ- जल जैसा विमल- शुद्धोपयोगी और गुण- पारखी था । ऐसे गुण भंडार मुनि का भजन करो ।। 3 ।।   महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में......... क्रमश... 👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक "जय जय जय महाराज" से साभार  लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻 जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें | https://www.facebook...

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 1

Image
ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय श्रृंखला ( 1 ) दिनांक 2 अप्रैल 2020 उनका जन्म मेवाड़ " गलुँड " गांव के आंचलिया परिवार में हुआ । वे भरा पूरा समृद्ध कुटुंब, पत्नी -पुत्र छोड़ दीक्षित हुए। उनका दीक्षा संस्कार मुनि श्री हेमराज जी स्वामी के हाथों लावा सरदारगढ़ में विक्रम सम्वत 1873 मृगसर कृष्णा 6 को संपन्न हुआ। वे जपी- तपी- ध्यानी -अभिग्रही और प्रशांत संत थे। उनकी व्यवहारिकता, वचनमाधुर्य, चातुर्य और सेवा ने सहगामियों के मनो को जीत लिया ।उनकी तपस्या में विशेषता थी -समत्व की साधना । वे केवल भूखे प्यासे रहकर जिहृइंद्रिय- विजयी ही नहीं थे, शीतकाल में जहां राजस्थान की धरती में आदमी कांपने लगता है, कपड़े ओढ़ने के बाद भी कंप-कम्पी नहीं मिटती, वहां तपस्वी अमीचंद जी उत्तरीय पछेवङी- वस्त्र हटाकर, दरवाजे के सामने खड़े हो ,एक- एक प्रहर तक पिछली रात को अभिग्रह संकल्प के साथ खड़े- खड़े ध्यान जाप करते ।उष्ण काल में धूप आतापना लेते । सूर्य तापी तपते । गरम-गरम पत्थर शिला -पट पर लेट कर ध्यान योग साधते। यह सब वे स्वेच्छा सहिष्णुता के अभ्यास में...

ॐ भिक्षु जय भिक्षु जप | आचार्य महाश्रमण द्वारा तेरापंथ के आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु के अभिनिष्क्रमण दिवस पर इंगित

Image
परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा प्रदत्त आध्यात्मिक संपोषण 4 -  दिनांक 1.4.2020 (संदर्भ - पॉइंट 3 से) कल 2 अप्रैल को चैत्र शुक्ला नवमी है। परम पूज्य आचार्य भिक्षु का अभिनिष्क्रमण दिवस है। उस उपलक्ष्य में प्रातः करीब 9 बजे से 10 बजे तक व्यक्तिगत रूप में भी "भिक्षु आराधना" का उपक्रम यथासंभव-यथानुकूलता रखा जा सकता है। उसका प्रारूप इस प्रकार है - ॐ भिक्षु, ॐ भिक्षु, ॐ भिक्षु ॐ - जय भिक्षु जय भिक्षु जय भिक्षु जय का लय बद्ध जप (करीब आधा घंटा)। भिक्षु स्वामी पर रचित गीतों का संगान अथवा धार्मिक साहित्य का स्वाध्याय (करीब आधा घंटा)। श्रावक-श्राविकाएं ' भिक्षु आराधना ' के दौरान यथासंभव सामायिक भी करें।