थोड़े से लाभ के लिए अपनी ईमानदारी की संपदा को कुर्बान कर दे तो उन्हे भी पछताना ही पड़ता है - आचार्य श्री महाश्रमण जी
14 दिसंबर 2020, सोमवार, अक्किनेपल्लीवेरी लिंगोटम, हैदराबाद, अपनी पावन वाणी से जनमानस में सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति का संदेश देने वाले अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी आज प्रात: चित्याल से मंगल विहार कर कामिनेनी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (KIMS), अक्किनेपल्लीवेरी लिंगोटम में पधारे।
अमृत देशना देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा- हम थोड़े से भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए धर्म के पथ से विचलित न हों। थोड़े लाभ के लिए अधिक खोने वाले को पछताना ही पड़ता है। प्राचीन दृष्टांत है कि चार दोस्त परदेश से कमाई करके घर आ रहे थे। रास्ते में ढ़ाबे में खाना खाया व काफी दूर जाने पर उसे ख्याल आया कि ढाबे वाले को 1 कांकणी (कोड़ी) ज्यादा दे दी। उसने दोस्तों से कहा चलो उससे वापिस लेकर आते है। तीन दोस्तों ने तो जाने से इंकार कर दिया व उसे भी समझाया लेकिन वह नहीं माना और अर्जित धन को एक पेड़ के नीचे गाड़ कर कोड़ी लेने चला गया। कोड़ी तो वह ले आया पर उसका वह कमाया हुआ धन किसी ने चोरी से निकाल लिया। अब वह पछताने लगा लेकिन क्या करता। भौतिक सुखों के लिए अपने साधुत्व को छोड़ देने वाले की भी यही हालत होती है। गृहस्थ भी यदि थोड़े से लाभ के लिए अपनी ईमानदारी की संपदा को कुर्बान कर दे तो उन्हे भी पछताना ही पड़ता है। हमें यह सीखना है कि न तो थोड़े लाभ के लिए ज्यादा खोयें और न आलस्य में समय गंवायें। धर्म करके भौतिक सुखों की कामना करने वाला नादान होता है, हम इससे बचने का प्रयास करें यह काम्य है।
विहार से पूर्व KIMS इंस्टिट्यूट के प्रबंधकों के विशेष निवेदन पर परिसर का अवलोकन किया एवं आशीर्वाद प्रदान किया। सायं लगभग 6 किमी का विहार कर पूज्य गुरुदेव पमानगुण्डला स्थित हाई स्कूल में पधारें।

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