प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शांतिवन में युगप्रधान आचार्य महाश्रमण जी ने कहा सबके प्रति मैत्री भाव से ही विश्व शांति संभव
ब्रम्हाकुमारी मुख्यालय पदार्पण पर दादी रतन मोहिनी ने किया आचार्यश्री का भावपूर्ण स्वागत
हजारों ब्रम्हाकुमारी सदस्यों को युगप्रधान ने प्रदान किया प्रेरणा पाथेय
17.02.2023, शुक्रवार, आबू रोड, सिरोही (राजस्थान), हजारों हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर मानवता के समुत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशस्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी मुख्यालय में पावन पदार्पण हुआ। ब्रह्माकुमारी संस्थान के विशेष निवेदन पर शांतिदूत पूर्व निर्धारित यात्रा पथ में परिवर्तन कर आज यहां पधारे एवं 87 वें त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव में अपना पावन सानिध्य प्रदान किया। कल आचार्य प्रवर का प्रवास कॉस्मो रेसीडेंसी में था जहां से मध्यान्ह में विहार कर पूज्य प्रवर आबू रोड स्थित जैन मंदिर में पधारे। आज प्रातः लगभग तीन किलोमीटर विहार कर सीआईटी इंजीनियरिंग कॉलेज में गुरुदेव का पदार्पण हुआ।
देश-विदेश में फैले ब्रह्माकुमारी संस्थान के आबू रोड स्थित मुख्यालय प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, शांतिवन में जब युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी का प्रथम बार आज पदार्पण हुआ तो मानो यह अध्यात्ममय प्रांगण एक नई ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। ब्रम्हाकुमारी शांतिवन पदार्पण पर संस्थान की प्रमुख दादी रतन मोहिनी जी, बीके जयंती दीदी ने शांतिदूत का भावभीना स्वागत किया। इस दौरान कुछ देर आध्यात्मिक चर्चा वार्ता भी हुई। तत्पश्चात आचार्यश्री ने परिसर का भी अवलोकन किया। ज्ञात हुआ की अभी महोत्सव में सम्मिलित होने हेतु देश विदेश से 10 हजार से भी अधिक संख्या में ब्रम्हकुमार एवं ब्रम्हाकुमारी यहां पहुंचे हुए है। सेक्रेटरी BK मृत्युंजय कुमार एवं दादी रतन मोहिनी द्वारा भिक्षा ग्रहण करने की अर्ज पर आचार्य प्रवर ने अपने अनुग्रह से उन्हें अनुगृहित किया।
प्रवचन सभा में उपस्थित ब्रम्हाकुमारी संगठन से जुड़े हजारों सदस्यों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा – शरीर और आत्मा का योग जीवन है व आत्मा से शरीर का अलग हो जाना मृत्यु। आत्मा और शरीर का अत्यान्तिक वियोग होता है वह मोक्ष। जब तक शरीर और आत्मा का संबंध जुड़ा रहेगा यह जन्म मरण का चक्र चलता रहेगा। स्थाई रूप से दुःख मुक्ति व जन्म मरण से छुटकार राग-द्वेष के समाप्त होने पर ही संभव है। हम इस संसार में रहते हुए भी पद्म-पत्र व कमल-पत्र की तरह अनासक्त रहने का प्रयास करे। जीवन में सुख-दुःख व अनुकूलता-प्रतिकूलता आती रहती है पर उसमें भी समता के भाव रखना एक विशेष उपलब्धि है। जो नहीं है उसको प्रधानता न देकर जो हमें प्राप्त है उसमें सुखी रहने का प्रयास करें।
शांतिवन आगमन के संदर्भ में आचार्य श्री ने आगे कहा कि यात्रा के दौरान जगह जगह ब्रम्हाकुमारी की बहनों से मिलने का काम पड़ता रहता है। हर बार ये हमारे वहां आती हैं आज मैं यहां आया हु। ब्रम्हाकुमारी परिवार सद्भावना का एक उदाहरण है। संगठन में एक उदारता का दर्शन होता है। जब व्यक्ति की चेतना निर्मल होगी तभी समाज, राष्ट्र व विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। हमारे भीतर सबके प्रति मैत्री, प्रेम की भावना और बढ़ती रहे। ब्रम्हाकुमारी संगठन आध्यात्मिक विकास करता रहे अपने आचरणों से पाठ पढ़ाता रहे मंगलकामना।
कार्यक्रम में साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा ने सारगर्भित वक्तव्य दिया। मुनि कुमारश्रमण जी ने आचार्य प्रवर का परिचय प्रस्तुत किया। ब्रम्हाकुमारी संगठन के सेक्रेटरी BK मृत्युंजय कुमार ने आज के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए आचार्यश्री का भावपूर्ण स्वागत किया। BK गीता बहन ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम संचालन संचालन शांतिवन की कार्यवाहक BK सविता जी ने किया। इस दौरान संगठन द्वारा साहित्य से शांतिदूत का अभिनंदन किया गया।






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