भौतिकता के लिए नैतिकता को न छोड़े – आचार्य महाश्रमण


जालोर 13.02.2023,  सोमवार, सिलदर, सिरोही (राजस्थान), अपने पावन प्रवचनों से ज्ञान गंगा बहाते हुए मानवता के मसीहा युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी गांव–गांव, नगर–नगर को निरंतर पद यात्रा कर रहे है। नैतिकता, सद्भावना एवं नशामुक्ति के संदेश देते हुए मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापित करते हुए आचार्यश्री का आज जालोर से सिरोही जिले में मंगल पदार्पण हुआ। आचार्य बनने के बाद आज प्रथम बार पूज्य चरणों से सिरोही जिला भी पावन बना। प्रातः पावटी से गुरुदेव ने मंगल विहार किया। जैसे जैसे गुरुदेव की यात्रा आबू की ओर बढ़ रही है पहाड़ी क्षेत्र भी इस ओर बढ़ता जा रहा है। विशालकाय पहाड़, हरे भरे खेतों के मध्य पहाड़ी तलहटी में विहार करती आचार्यश्री की यात्रा नयनाभिराम दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। मार्गवर्ती सिरोड़की आदि कई स्थानों पर ग्रामीणों ने श्रद्धानत हो शांतिदूत से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग 13 किलोमीटर का विहार कर आचार्यप्रवर सिलदर के राजकीय विद्यालय में प्रवास हेतु पधारे। मध्यान्ह में पुनः 03 किमी विहार कर गुरुदेव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पुनावा में पधारना हुआ। 


मंगल प्रवचन में युगप्रधान गुरुदेव ने कहा– आर्हत वाणी है कि अल्प लिए, थोड़े के लिए अधिक को नहीं खोना चाहिए। जिसमें लाभ कम हो व नुकसान ज्यादा हो, ऐसा काम करना बुद्धिमत्ता नहीं होती। साधुत्व एक बड़ा धन है व संपदा है तथा उसको ग्रहण करने के बाद उससे मन को विचलित होकर घर चले जाना एक प्रकार की भटकन है व कम के लिए ज्यादा को खोने जैसा है। तुच्छ भौतिक आकर्षणों के लिए साधना के मार्ग से नहीं भटकना चाहिए। 


कहानी के माध्यम से आगे प्रेरणा देते हुए आचार्यश्री ने कहा – धर्म की जगह धन के प्रति आकर्षण, आसक्ति होना उत्तम बात नहीं है। धर्म ही है जो अगले जीवन परलोक में भी हमारे साथ जाता है। भौतिक पदार्थ यही पीछे छूट जाते है। अर्ह्नक ने भी धन के बदले धर्म का चुनाव किया। धर्म कोई ऐसा कपड़ा नहीं जो जब चाहा पहन लिया और जब चाहा उतार दिया। व्यक्ति धन व भौतिकता के लिए नैतिकता को न छोड़ें और धर्म के मार्ग पर चलता रहे।

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