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Showing posts from February, 2014

नवगठित महासभा टीम पहुचीं गुरु चरणों में

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मलकीसर.28.02.14. नवगठित महासभा टीम गुरु चरणों में  पहुचीं. दर्शन सेवा का लाभ लिया एवं  भावी योजनाओं पर चिन्तन कर पुज्य प्रवर को निवेदन किया. 

ANUVRAT GARDEN INAUGURATED

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Ahmadabad : 26th Feb 2014. A senior citizen park , named "Anuvrat Garden " was inaugurated in the Shahibag area of Ahmadabad city by the Ahmadabad Municipal Corporation.The garden was inaugurated by the city mayor, Mrs. Minakshi Patel . The executives and members of local Terapanth sabha, mahila mandal and Anuvrat Samiti were also present. Report : Priyadarshini Jain Source : Ashok Bagrecha, Jain Terapanth News

ANUVRAT-JEEVAN VIGYAN WORKSHOP BY TEYUP ICHALKARANJI

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Terapanth Yuvak Parishad Ichalkaranji is organizing monthly workshops Anuvrat & Jeevan Vigyan  in schools this year on account of Acharya Tulasi Birth Century & golden jubilee of A.B.T.Y.P.  In this seq uence, today, a workshop was programmed in Modern English High School. Around 200 students attended this workshop. Sri pankaj Jogad - President & sri Vijas Surana - Secretary gave their speeches. Vice President - Sri Sanjay Vaid Mehta gave knowledge on the topic : ANUVRAT : KYA VA KYON ?(WHAT & WHY?) . Sri Rajesh Surana provided information about Jeevan Vigyanand made students practice Mahapran Dhwani, Gyan Kendra Preksha & exercises to enhance memory etc. Ms. Shirolkar - Principal , all the teachers and Sri Dilip Mehta and Sri Santosh Bhansali etc., were also present. Sri Vikas Suarana - Secretary : T.Y.P. - Ichakaranji informed that West zone Anuvrat Sankalp Yatra would reach Ichalkaranji on 27th Feb,2014. Report : PRIYADARSHIN...

अभातेयुप स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष में शाखा परिषदों द्वारा सेवा के विशेष कार्य

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१७ फरवरी. अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के  स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष में केन्द्रीय परिषद् के निर्देशानुसार देश भर की शाखा परिषदों ने अपने अपने क्षेत्रो में जरुरतमंदो की सेवा के विशेष कार्य किए. प्रस्तुत है उनमे से कुछ की झलक :

FREE KIDNEY CHECK UP CAMP BY TEYUP VIJAYNAGAR

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      BANGALORE : 16/02/2014 ON ACCOUNT OF GOLDEN JUBILEE YEAR CELEBERATIONS OF A.B.T.Y.P. , VIJAYNAGAR BRANCH ORGANISED FREE KIDNEY CHECK UP CAMP AT ACHARYA TULASI DIAGNOSTIC CENTRE. AROUND 250 PEOPLE GOT BENEFITS OF THE SAME. THE SPONSORS - SRI SHANTILAL PRAKASH CHAND BABE'S FAMILY WAS HONORED BY T.Y.P. SRI VIMAL JI KATARIYA : TREASURER, A.B.T.Y.P. , SRI RAJESH JI CHHAJED : PRESIDENT, T.Y.P. - VIJAYNAGAR & ALL THE TEAM MEMBERS CONTRIBUTED TO MAKE THIS EVENT SUCCESSFUL. REPORT : PRIYADARSHINI JAIN SOURCE : Abhishek Kavdiya , Sanjay Vaid Mehta , Jain Terapanth News — in Bangalore .

शरीर के साथ आत्म चिकित्सा का भी महत्व : आचार्य महाश्रमण

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बीकानेर। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े सात बजे आचार्यप्रवर महाश्रमणजी मुनिवृंदों के साथ नाहटा भवन से प्रस्थान किया। महाश्रमणजी का पानमल राजेन्द्र कुमार पारसमल नाहटा भवन परिवार के यहां गुरुवार को तेरापंथ भवन से आगमन हुआ था। मझले-मझले कदमों से महाश्रमणजी आगे बढ़ते हुए पीबीएम अस्पताल परिसर में पहुंचे जहां आचार्य तुलसी कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र परिसर में कोबाल्ट केन्द्र के लोकार्पण तथा प्रेक्षा कॉटेज एवं आचार्य तुलसी बॉन मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट की भूमि पर मंगलपाठ के बाद आयोजित अभिनन्दन कार्यक्रम में अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। शिष्य को गुरु से ज्ञान मिलता है और गुरु को शिष्य से सेवा मिलती है। अध्यापक विद्यार्थी को शिक्षा देता है और विद्यार्थी द्वारा अध्यापक को शुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। डॉक्टर मरीज के लिए भगवान का रूप होता है। महाश्रमणजी ने 'डॉक्टर शरणं गच्छामिÓ कहते हुए कहा कि स्वास्थ्य बिगडऩे पर हम डॉक्टर के पास जाते हैं और वह हमारे शारीरिक कष्ट को मिटा देता है। डॉक्टर की शरण में कई मरीज आते हैं और डॉक्टर कइयों की शारीरिक पीड़ा दूर करते हैं। उन्होंने कह...

NAMAN : SELF COMPOSED POEM COMPETITION BY MAHILA MANDAL MUMBAI

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NAMAN : POEM COMPETITION BASED ON CONTRIBUTIONS OF ACHARYA SRI TULASI TERAPANTH MAHILA MANDAL , MUMBAI ORGANISED NAMAN : SELF COMPOSED POEM COMPETITION BASED ON THE CONTRIBUTIONS OF ACHARYA SRI TULASI ON 14/02/2014 AT LODHA DHAM. AROUND 300 LADIES INCLUDING MRS. KANTA DEVI TATER : PRESIDENT ( MAHILA MANDAL - MUMBAI) ,MRS. BHARTI SETHIA : VICE PRESIDENT & MRS. RACHNA HIRAN : SECRETARY. 40 LADIES TOOK PART IN THIS COMPETITION. THE RESULTS ARE AS FOLLOWS: 1ST : MRS. MEENA BADALA 2ND : MRS. DIMPLE HIRAN 3RD : MRS. SUMAN CHAPLOT & MAMTA KACHHARA 4TH : MRS.ALKA MEHTA (JTN REPRESENTATIVE) 5TH : MRS. SEEMA KOTHARI REPORT: PRIYADARSHINI JAIN SOURCE : MRS. ALKA MEHTA

आचार्यश्री महाश्रमण का गंगाशहर से हुआ विहार

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बीकानेर। आचार्यप्रवर महाश्रमण का गुरुवार को प्रवचन के बाद करीब 11:35 पर तेरापंथ भवन से विहार हुआ । आचार्यप्रवर के विहार  पूर्व गंगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में गुरुवार को प्रात: 9.30 बजे मंगल भावना समारोह का आयोजन किया गया। आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने व्याख्यान में कहा कि साधु और गृहस्थ की जीवनचर्या में बहुत अंतर होता है। साधु की जीवनचर्या संयमप्रधान होती है। चलना, बैठना, उठना, खड़े रहना, नींद लेना व बोलने सहित सभी कार्यों में संयम होता है।  हर प्रकृति में साधु को संयम से ओतप्रोत रहना चाहिए। किसी भी क्रिया से जीव हिंसा न हो ऐसा प्रयास रहे। साधु विशेष रूप से ध्यान रखे कि खुले मुंह न बोलें, मुखवस्त्रिका हर समय रहनी चाहिए। आहार करते समय बोलना नहीं चाहिए। बाल मुनिश्री प्रिंस कुमार को अपने समक्ष बुलाकर महाश्रमणजी ने मुख वस्त्रिका के बारे में पूछा तथा जब मुखवस्त्रिका न हो तो किस प्रकार मुंह पर हाथ रखकर बात की जाए। बाल मुनिश्री प्रिंस कुमार द्वारा सब सही-सही विधि प्रस्तुत किए जाने पर महाश्रमणजी ने कहा कि वे संतुष्ट हैं कि छोटे-से संत में इतनी समझ आ गई है। आचार्यश्री ने...

अंतराष्ट्रीय युवा सम्मेलन का सिलीगुड़ी में आयोजन

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सिलीगुड़ी. ०९ फर. जैतेस ब्यूरों. अभातेयुप के तत्वावधान में तेयुप सिलीगुड़ी द्वारा  अंतराष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आयोजन साध्वी श्री प्रमिलाकुमारीजी के सान्निध्य में किया गया. जिस में नेपाल भूटान सहित १९ शाखाओ २५९ युवकों  ने भाग लिया.  कार्यक्रम का शुभारम्भ नमस्कार महामंत्र से हुआ . श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन हुआ .स्वागत व्यक्तव्य संदीप पारेख ने दिया .  साध्वी चारुलता जी समनि संघ प्रज्ञा जी ने गीतिका का संगान किया. साध्वी आस्थाश्रीजी, समणी भावित प्रज्ञाजी ने भी कार्यशाला को सम्बोधित किया .   "जैन संस्कार अपनी पहचान"  इस विषय पर साध्वी परम प्रभाजी एवं श्री कमल पुगलिया ने मुख्य वक्ता के रूप में युवको का मार्गदर्शन किया. अभातेयुप अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर, सहमंत्री सुरेन्द्र सेठिया , संगठन मंत्री अमित नाहटा,  श्री बजरंग सेठिया, श्री संजय नाहटा,  श्री  पंकज डागा आदि  ने कार्यशाला में अपने विचार रखे एवं अभातेयुप की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी. 

परिवर्तन में मौलिकता और संस्कृति हो : आचार्य श्री महाश्रमण

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बीकानेर। आदमी को जीवन में आगे बढऩे के लिए सुविधावादी मनोवृत्ति का त्याग करना चाहिए। आलस्य त्याग कर कठोर जीवन जीना चाहिए। जो व्यक्ति ऐशो-आराम और आलस्य में लिप्त रहता है तथा सुविधावादी मनोवृत्ति रखता है उस व्यक्ति के जीवन में आगे बढऩे की संभावना नहीं रहती। उक्त विचार आचार्यश्री महाश्रमण ने शनिवार को तेरापंथ भवन में अपने व्याख्यान के दौरान कहे। आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा दुश्मन उसका आलस्य ही होता है और परिश्रम परम मित्र होता है। परिश्रम के समान कोई बन्धु नहीं है। निर्धारित विषय 'मौलिकता और परिवर्तनÓ पर व्याख्यान देते हुए महाश्रमणजी ने कहा कि हमारे जीवन में अपेक्षित परिवर्तन को स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन परिवर्तन उतना ही हो जितनी मौलिकता हो। केवल परिवर्तन... परिवर्तन... करने से कोई परिवर्तन नहीं होता। आवश्यकता इस बात की है कि आप जो बदलाव कर रहे हैं उसमें संस्कृति तथा मौलिकता होनी चाहिए। अपनी संस्कृति को छोड़कर किया गया परिवर्तन सही नहीं हो सकता। भारत के पास ग्रंथों-शास्त्रों का विशाल खजाना है। अध्ययन से हमें मौलिकता की जानकारी मिल...

अन्तर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन 9 फर. को

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सिलीगुड़ी, 08 फरवरी 14 । जैतेस ब्यूरों। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में कल दि.09 फरवरी 2014 को 'अंतर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन' तेरापंथ भवन सिलीगुड़ी में आयोजित होगा। इसी के सम्बन्ध में आज तेयुप सिलीगुड़ी शाखा द्वारा प्रेस कोंफ्रेंस बुलाई गयी। जिसमें तेयुप सिलीगुड़ी शाखा के अध्यक्ष श्री संदीप पारख ने पत्रकारों को अधिक जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री प्रमिलाकुमारीजी के सान्निध्य में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर करेंगे एवं अभातेयुप सहमंत्री श्री सुरेन्द्र सेठिया एवं संगठन मंत्री श्री अमित नाहटा भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में नेपाल, भूटान, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, सिक्किम आदि क्षेत्रों के युवक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में युवाओं को राष्ट्र, समाज एवं संघ के प्रति दायित्व बोध एवं संस्कार जागरण के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएंगा। आज के युग में जहा कि संसकारों का लोप होता जा रहा है, ऐसे युवा सम्मेलनों के आयोजन महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट: हेमंत बै...

राष्ट्रीय सेवा योजना, सापेक्ष अर्थशास्त्र तथा अणुव्रत महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार

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  बीकानेर। राष्ट्रीय सेवा योजना, सापेक्ष अर्थशास्त्र तथा अणुव्रत महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को गंगाशहर स्थित रामपुरिया भवन में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। युवा अधिकारी एवं कार्यालयाध्यक्ष मधुबाला ने बताया कि सेमिनार में समस्त विश्वविद्यालयों एवं निदेशालयों के उप कुलपति एवं कार्यक्रम समन्वयक उपस्थित थे। सेमिनार में करीब 15 जनों ने एनएसएस के अंतर्गत जो गतिविधियां हुई उनकी समीक्षा प्रस्तुत की। मधुबाला ने बताया कि एनएसएस युवा कार्य और खेल मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। कार्यक्रम में मुनिश्री अक्षय कुमार, जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय लाडनूं की कुलपति चारित्रप्रभा, भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के डिप्टी सैक्रेटरी एस.एल. मीणा, कुलपति चन्द्रकला पंड्या, बिन्नाणी कॉलेज की प्रिंसिपल चित्रा पंचारिया, नेहरु शारदा पीठ के प्रिंसिपल वेद शर्मा तथा कॉलेज शिक्षा निदेशालय से एनएसएस समन्वयक नत्थूलाल उपस्थित थे। एम.एस. कॉलेज की व्याख्याता एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा ने बताया कि एनएसएस किस प्रकार कार्य करता है तथा एनएसएस का दृष्टिको...

आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी सुरत समिति द्वारा विभिन्न कार्यक्रम

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लिलुवा बंगाल मर्यादा महोत्सव

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लिलुवा बंगाल में साध्वीश्री अणिमा श्री के सान्निध्य में  मर्यादा महोत्सव कार्यक्रमआयोजित हुआ।

गुरु का कष्ट शिष्यों का कष्ट होता है : आचार्य महाश्रमण

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गुरु का कष्ट शिष्यों का कष्ट होता है : महाश्रमण बीकानेर। अगर साधु स्वाध्याय नहीं करता है, स्वाध्याय नहीं करता है केवल व्यर्थ वार्ताएं करता रहता है तो उसका संयमरूपी पौध विनाश को प्राप्त हो सकता है। आचार्य तुलसी ने बहुत स्वाध्याय किया और आगमों का अध्ययन किया था। उक्त विचार आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने निर्धारित विषय 'बलिदानों की अमर कहानीÓ विषय पर शुक्रवार को तेरापंथ भवन में  व्याख्यान के दौरान कहे। आचार्यश्री ने कहा कि आचार्य भिक्षु का जीवन बलिदानों की कहानी कहता है। आचार्य भिक्षु ने आचार्य रघुनाथ महाराज से दीक्षा ली थी। भीखणजी नाम से प्रसिद्ध  रहे आचार्य भिक्षु रघुनाथजी के शिष्य थे। गुरु के शिष्य तो अनेक हो सकते हैं पर सभी शिष्य एक समान हों ये कोई जरुरी नहीं। इसी तरह भीखणजी भी अपने गुरु के आज्ञाकारी शिष्य थे। गुरु का कष्ट शिष्य का कष्ट होता है। शिष्य गुरु के पास आते हैं तो गुरु उनके मस्तक पर आशीर्वाद रूपी हाथ रखता है। यदि ऐसा न हो तो शिष्यों को शोध करना चाहिए कि गुरु का आशीर्वाद उन पर क्यों नहीं है। तेरापंथ धर्म संघ का सूत्र पात करने वाले आचार्य भिक्षु ने अ...

अल्पसंख्यक की धारा ही संविधान से हटा दी जाए : आचार्य महाश्रमण

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गंगाशहर, ०५ फरवरी.  मर्यादा महोत्सव कार्यक्रम में आए डॉ. मुरलीमनोहर जोशी ने कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक दर्जा मिला है, लेकिन महावीर और वीर अल्प कैसे हो गए यह चिंता का विषय है। देश में बड़े-बड़े चिकित्सालय, धर्मशालाएं, सेवा केन्द्र तथा निर्धनों के लिए श्रेष्ठ सेवा देने वाला जैन समाज अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। डॉ. जोशी ने महाश्रमणजी से कहा कि वे जैन समाज को सीख दें कि जैन अल्पसंख्यक नहीं हो सकते। जो इस देश में रह रहा है, कमा रहा है और जीवनयापन कर रहा है वह अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। हम सब एक देश के हैं। सर्वधर्म सद्भाव से रहें। अल्पसंख्यक बहुसंख्यक का भेद मिटाकर रहें। हमारा यही घोष हो कि विश्व में एक आध्यात्मिक समाज की रचना हो। इसके बाद महाश्रमणजी ने अल्पसंख्यक पर चर्चा करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक धारा संविधान से हटा देनी चाहिए। ऐसी धारा को निकाल दिया जाए तो सही रहेगा। सिर्फ जैन समाज के लिए ही नहीं सब जाति वर्ग के लिए इसे हटा देनी चाहिए। साधु को तो इस धारा से कोई लाभ नहीं लेना, लेकिन धारा रहेगी तो श्रावक इसका लाभ उठाने के लिए लालायित रहेंगे। श्रावक का स्वार्थ...

150 वां मर्यादा महोत्सव : मुख्य समारोह

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मर्यादा पत्र का किया वाचन आचार्यश्री महाश्रमण ने मर्यादा पत्र का वाचन किया। यह पत्र आचार्य भिक्षु ने 1859 में मुनिश्री भारमलजी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए एक मर्यादा पत्र लिखा था। महाश्रमणजी ने इस ऐतिहासिक पत्र की हिन्दी प्रतिलिपि का वाचन करते हुए कहा पत्र के अनुसार चातुर्मास कहां करने हैं, शिष्य का गुरु के प्रति कर्तव्य का उल्लेख किया गया है। पत्र में लिखा गया है कि अपने आचार्य की आज्ञा के बिना कुछ भी नहीं करना है। आज्ञा और सेवा का महत्व दिया गया है। स्वयं का शिष्य-शिष्याएं न बनाएं। हम अपनी मर्यादाओं के प्रति सचेत रहें। संघ की मर्यादाओं के प्रति जागरुक रहें तभी विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हाजरी का दिखा अनूठा नजारा मर्यादा महोत्सव के तीसरे दिन आचार्यश्री महाश्रमणजी के समक्ष सभी साधु-साध्वियों ने कतारबद्ध खड़े होकर हाजरी दी। दीक्षाक्रम से खड़े साधु-साध्वियों को आचार्यश्री ने संकल्प दिलाए। सभी पंक्तिबद्ध दीक्षाक्रम में खड़े साधु-साध्वियों ने धर्मसंघ के एक गुरु की आज्ञा में रहने का संकल्प लिया। संतों की अपने गुरु के प्रति आज्ञा व समर्पण देख हर...

विवेकपूर्ण सद्पुरुषार्थ करने वाला भाग्यशाली : आचार्य महाश्रमण

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गंगाशहर। 150वें मर्यादा महोत्सव के तृतीय दिवस गुरुवार को नैतिकता के शक्तिपीठ आचार्य तुलसी समाधि स्थल के प्रेक्षाध्यान प्रांगण में 12:15 बजे कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मुनिश्री दिनेश कुमार ने जयघोष के साथ मंगल गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। महोत्सव में आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने व्याख्यान में कहा कि हमारी दुनिया में वह आदमी भाग्यशाली होता है जो विवेकपूर्ण सद्पुरुषार्थ करता है। सम्यक् पुरुषार्थ तपस्या में, संयम में होता है। आचार्य भिक्षु पराक्रमी पुरुष थे उनमें श्रद्धा का भाव विशिष्ट था। आचार्यश्री ने कहा कि जो दया देह को पोषण देती है, जिस दान से देह को सहायता मिले वह लौकिक और जो दान, दया आत्मा का पोषण करती है वह लोकोत्तर कहलाता है। एक साधु किसी गृहस्थ को ज्ञान का दान, अध्यात्म की शिक्षा का दान देता है तो वह लौकिक और यदि गृहस्थी किसी साधु को शुद्ध आहार या उसकी सेवा करता है तो वह लोकोत्तर होगा। भूखे को भोजन करवाने से उसका पेट भरता है उसकी आत्मा को तृप्ति मिले यह जरूरी नहीं। आचार्य भिक्षु ने दान, दया और अनुकम्पा आदि विषयों पर अपना मन्तव्य प्रस्तुत किया था। आचार्य...

आचार्य महाश्रमणजी द्वारा मर्यादा महोत्सव पर प्रदत्त निर्देश

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गंगाशहर. ०६ फरवरी. मर्यादा महोत्सव के तीसरे दिन महाश्रमणजी ने उपस्थित समस्त साधु-साध्वियों को कहा कि साधु के पास ज्यादा उपकरण नहीं रहने चाहिए। आवश्यकता से अधिक उपकरण हमारे लिए बोझ बन जाते हैं। खासतौर पर विहार के समय तो बहुत सीमित उपकरण साथ में रखने चाहिए। ध्यान रहे कि एक साधु के पास एक बैग से ज्यादा उपकरण न रहे। काशीद का चातुर्मास के दौरान त्याग रखें। विहार में आप काशीद को साथ ले सकते हैं। आलू जमीकंद में आता है इसलिए इसका प्रयोग न करें। साधु लोग जहां लम्बा प्रवास करें अर्थात् दो-तीन दिन रहना पड़े जहां वहां सांसारिक स्त्रियों के चित्र न लगे हो और यदि कम समय रहना हो तब तो कोई खास बात नहीं। साध्वियों के लिए भी यही व्यवस्था है। साध्वियों को जहां प्रवास करना हो वहां सांसारिक पुरुषों का चित्र न हो। महाश्रमणजी ने कहा कि सेवा का क्रम जो बांधा गया है वह अब हटा दिया गया है। अब सेवा जो भी चाहे कर सकता है। तीन चाकरी का कर्जा हमारे ऊपर रहता है उसको अवश्य पूरा करें। विहार के दौरान ध्यान रखें कि मार्बल, नमक अथवा किसी भी फैक्ट्री में जाकर मंगल पाठ न सुनाएं। सप्ताह में पांच शुद्ध सामा...
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गंगाशहर। 05 फर.। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा की 100 वीं वार्षिक साधारण सभा 5 फरवरी की शाम को आयोजित की गयी। जिस में सत्र 2014-16 के लिए रतनगढ़ निवासी कोलकाता प्रवासी श्री कमलजी दुगड़ को तेरापंथी महासभा का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। श्री दुगड़ ने मनोनयन होने के तुरंत पश्चात पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी, मंत्री मुनि सुमेरमल जी एवं साध्वी प्रमुखा कनक प्रभा जी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी द्वितीय चरण : अभिनव सामयिक आराधना

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गंगाशहर। बुधवार को नैतिकता के शक्तिपीठ तुलसी समाधि स्थल के प्रेक्षाध्यान प्रांगण में 150वें मर्यादा महोत्सव के द्वितीय दिन एवं आचार्य तुलसी जन्मशताब्दी समारोह के द्वितीय चरण के अंतिम दिन के अवसर पर आचार्यप्रवर महाश्रमण ने अपने व्याख्यान में कहा कि शिष्य विचार करता है कि मैं अपने गुरु की महापूजा करुं क्योंकि उनसे मुझे अनुशासन और ज्ञान प्राप्त होता है, उनसे शिक्षण-प्रशिक्षण मिलता है। शिष्य का बहुत गहरा संबंध गुरु के साथ होता है। संसार में पिता-पुत्र का संबंध, भाई-भाई का संबंध तथा अनेक संबंध होते हैं लेकिन गुरु-शिष्य का संबंध इतना मजबूत बन जाता है कि उसके आगे सारे संबंध, रिश्ते-नाते गौण हो जाते हैं। गुरु-शिष्य का संबंध आध्यात्मिक होता है, धार्मिक होता है। गुरु सखा भी होता है, गुरु भाई भी होता है और गुरु माता-पिता व भगवान तुल्य भी होता है। अच्छा गुरु मिलना सौभाग्य की बात होती है। जीवन जिसका त्यागपूर्ण और गरिमामय होता है, जो ज्ञान की आराधना करते हैं तथा जो ज्ञान का दान देता है वही अच्छा गुरु होता है। जिस गुरु में संयम, त्याग और ज्ञान नहीं वह किसी काम का नहीं। केवल उपदेश, ...

भारत सरकार द्वारा आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी पर विशेष सिक्के जारी

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तुलसी जन्म शताब्दी समारोह के द्वितीय चरण में सिक्के के लोकार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आयोजन समन्वयक जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि गंगा-जमुना संस्कृति का शहर है बीकानेर और यहां की विशेषता है यहां कोई साम्प्रदायिक दंगे नहीं हुए हैं क्योंकि यह संतों मुनियों का स्थल है यहां आचार्य तुलसी जैसे महान् संतों की पावन भूमि है। उन्होंने नैतिकता के शक्ति पीठ पर भारत के वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम का स्वागत करते हुए कहा कि वित्तमंत्री ने आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में 20 रुपए व 5 रुपए का सिक्का जारी करके आचार्य तुलसी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने मर्यादा महोत्सव में आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी के अवसर पर महाश्रमणजी के सान्निध्य में 20 रुपए व 5 रुपए के सिक्के का अनावरण किया। अपने वक्तव्य में चिदम्बरम ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे तुलसी जन्म शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने का मौका मिला। मैं आभारी हंू कि श्रीमती सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुझे इस कार्य के लिए अनुमति दी। जैन धर्म अहिंसा के पथ पर सबसे आगे है। महा...

साधु-साध्वियों को सौंपे सेवा केन्द्र के दायित्व

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गंगाशहर। 4 फरवरी. 150वें मर्यादा महोत्सव के इस अवसर पर महाश्रमणजी ने साधु-साध्वियों को सेवा केन्द्र का दायित्व सौंपा। लाडनूं सेवा केन्द्र के लिए साध्वीश्री भाग्यवती, बीदासर सेवा केन्द्र के लिए साध्वीश्री सत्यप्रभा, गंगाशहर सेवा केन्द्र के लिए साध्वीश्री चन्द्रकला व साध्वीश्री पुण्यप्रभा, श्रीडूंगरगढ़ के लिए साध्वीश्री उज्ज्वलरेखा, राजलदेसर के लिए साध्वीश्री कुन्दनप्रभा को सेवा केन्द्र का दायित्व सौंपा। वहीं साधुओं के लिए छापर सेवा केन्द्र के लिए मुनिश्री सुरेश कुमार, जैन विश्व भारती के लिए मुनिश्री हिमांशु को सहव्रती संत का दायित्व सौंपा।   सेवा ही परम धर्म : आचार्यश्री महाश्रमण एक-दूसरे से जोडऩे का साधन है सेवा। सेवा एक ऐसा ऐसा ग्रंथ है जिसे वह व्यक्ति पढ़ सकता है जिसमें सेवा का भाव है। परम धर्म के रूप में सेवा की पहचान है। दान भी सेवा का अंग है। अगर तुम साधु को दान देते हो तो तुम्हें धर्म का लाभ मिलता है और गरीबों को, असहायों को और जरुरतमंदों को दान देते हो तो श्रेष्ठ दयालु बनते हो। दूसरों को देने से जो संतोष मिलता है वह खुद के खाने से नहीं मिलता। उक्त प्...

आत्मकल्याण के लिए दीक्षा ही सर्वस्व मार्ग : महाश्रमण

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गंगाशहर। आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी द्वितीय चरण के चौथे दिन के कार्यक्रम में रविवार को  सुबह 9.30 पर जैन मुनि दीक्षा समारोह प्रारंभ हुआ। मुनिश्री महावीर कुमार ने गीत एवं घोष से शुरुआत की। आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने व्याख्यान में कहा कि हमारी आत्मा अनादिकाल से परिभ्रमण कर रही है। कोई समय नहीं बताया जा सकता क्योंकि आदि बिन्दु तो है ही नहीं परन्तु परिभ्रमण का अंत हो सकता है। कुछ आत्माओं के भीतर ऐसा भाव उत्पन्न होता है कि परिभ्रमण का अंत करना है। ऐसी आत्मा भव्य होती है। भव्य आत्माएं बहुत कम मिलती है। किसी भी आत्मा को भव्य बनाना हमारे हाथ में नहीं होता वह तो नियति होती है। भगवान महावीर भी किसी आत्मा को भव्य नहीं बना सकते। आत्मा अभव्य है तो है, कैसे भी कर्म उसको भव्य नहीं बना सकते। भव्य आत्मा ही वीतराग के पथ पर चल सकती है। जैन शासन की दीक्षा के बारे में बताते हुए आचार्यप्रवर ने कहा कि दीक्षा तो व्रतों का संग्रहण है। दीक्षार्थियों के भाग्य की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें संयम के पथ पर अग्रसर होने का और एक गुरु के अनुशासन में रहने का अवसर मिला है। आज्ञा के प्रति परम...

आचार्यप्रवर ने किया तीन दीक्षार्थियों का दीक्षा संस्कार

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  दीक्षार्थी प्रिंस ने दीक्षा समारोह में कहा कि सब पूछते हैं कि तुम इतने छोटे हो, तुमने दीक्षा क्यों ली है। मैं आप सबसे पूछता हंू आप इतने बड़े हैं और अभी तक दीक्षा क्यों नहीं ली। आत्मा कभी छोटी-बड़ी नहीं होती। मुझे भी दूसरे बच्चों की तरह दौडऩा अच्छा लगता है लेकिन मैं मोक्ष की राह पर दौड़ूंगा। दूसरे बच्चों की तरह मुझे भी गोदी अच्छी लगती है लेकिन मुझे माता-पिता की गोदी नहीं गुरुदेव की गोद चाहिए। ऐसा आशीर्वाद चाहता हंू कि गुरुदेव आपकी सेवा करके फटाफट मोक्ष प्राप्त करुं।   मुमुक्ष प्रसिद्धि ने कहा कि जन्म-मरण से मुक्त होने की चाह को आज राह मिल गई। एक खुशी को लेकर जब बार-बार खुश नहीं हो सकते तो एक दुख से बार-बार दुखी नहीं होना चाहिए। आज का दिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है जो मुझे मोक्ष का मार्ग दिखलाने वाला गुरु मिल गया है।   मुमुक्ष रजनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि वह सौभाग्यशाली है कि उसे अपनी जन्मभूमि में दूसरी बार जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आज मंगल घड़ी में मुझे मंगल अभ्युदय प्राप्त हुआ है। वर्तमान जीवन में सद्गुरु, सद्धर्म मिलना दुर्लभ है...

शासनश्री साध्वी राजकुमारी गोगुन्दा का देवलोक गमन

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शासन श्री साध्वी राजकुमारी गोगुन्दा का आज दिनाक ०२:०२:२०१४ सुबह ५ बजकर २ मिनट पर चौविहार संथारे में देवलोक गमन हो गया . शासन श्री साध्वी राजकुमारी जी की वैकुंठि यात्रा : उदासर Jain Terapanth News, Udasar