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Showing posts from January, 2016

वर्धमान महोत्सव का प्रथम दिवस गुलाबबाग

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गुलाबबाग़, 29 जन. अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण जी ने वर्धमान महोत्सव का प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं को अपने जीवन में वर्धमान होने की प्रेरणा प्रदान की। वर्धमान भगवान महावीर का नाम है। उनके इस नाम का शाब्दिक अर्थ होता है बढ़ता हुआ। इस वर्धमान शब्द की व्याख्या के साथ आरंभ हुआ आज का वर्धमान महोत्सव। आचार्य श्री ने फरमाते हुए कहा कि- वर्धमान होने से हम आत्मा के आसपास रहने लगते हैं, जिससे जीवन के कषायों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। हमारा रूझान आत्मा के प्रति होना चाहिए। शरीर नश्वर है लेकिन आत्मा नहीं। इसलिए अपनी आत्मा को पुष्ट बनाएं उसे मोक्ष के पथ पर अग्रसारित करने का निरंतर प्रयास करें। इससे आदमी का कल्याण हो सकता है। शरीर को साफ रखना अलग बात है, किन्तु जब तक आत्मा की सफाई नहीं होगी आदमी के जीवन में विशेष बदलाव नहीं आ सकता। इसलिए प्रत्येक मानव को अपने जीवन में वर्धमानता लाने का प्रयास करना चाहिए।  उन्होंने साधु-साध्वियों के बढ़ते सिंघाड़े को वर्धमान महोत्सव का मुख्य कारण बताया। साथ सभी साधु-साध्वियों को प्रकृति प्रदत्त सभी वस्तुओं को संयम के साथ उपभोग करने का मंत्र दे...

तेरापंथ सरताज, आचार्य श्री महाश्रमण जी के वरदहस्त से तेरापंथ शासन में दीक्षित होंगे मुमुक्षु पारस डागा

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Mumukshu Paras Daga : Bio-Data (Jivan Parichay).

आचार्यश्री महाश्रमण से नशामुक्ति हेतु संकल्पित हुए पूर्णिया पुलिस के करीब 200 जवान

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नशामुक्त समाज की स्थापना करने को आचार्यश्री ने दिया संदेश, आह्वान बिहार सरकार का तो सानिध्य अहिंसा यात्रा के प्रणेता व शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण जी का। अवसर संकल्प का। संकल्प नशामुक्त बिहार बनाने का। उपस्थिति कानून व उसके प्रहरियों की। माहौल बिहार में बदलाव का। इन सबके मिलन का गवाह बना पूर्णिया जिला का गुलाबबाग का पाट व्यवसायी भवन।  बिहार सरकार के उत्पाद व मद्य निषेध विभाग के मंत्री अब्दुल जलील मस्तान व डीएम पंकज कुमार पाल भी बने इस संकल्प के गवाह . गुलाबबाग, २९ जन. - - दोपहर के समय पाट व्यवसायी भवन में श्रद्धालुओं के स्थान पर पुलिस व प्रशासन के प्रहरियों अर्थात बिहार पुलिस के जवानों की उपस्थिति आज कुछ अलग ही माहौल बना रही थी। वर्धमान महोत्सव का मंच भी अब बदलाव की ओर था। वह मंच अब धीरे-धीरे नशामुक्त बिहार के आह्वान पर मद्य निषेध अभियान के तहत संकल्प लेने का बन चुका था। समय के साथ उस मंच पर मंचासीन हुए अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण जी तो आज उनके साथ मंच पर जिले डीएम पंकज कुमार पाल, एसपी निशांत कुमार तिवारी के साथ ही बिहार राज्य सरकार में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभ...

अपने आप को देखें : आचार्य महाश्रमण

गुलाबबाग, 26 जन. गणतंत्र दिवस के अवसर पर आचार्यश्री महाश्रमण जी ने प्रात:कालीन प्रवचन के दौरान कहा कि देश के हर नागरिक का यह पहला कर्तव्य बनता है कि वह संविधान का सम्मान करे। उसके प्रति अपनी निष्ठा रखे। किसी को भी संविधान का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि ‘अपने आप को देखने की साधना’सबसे प्रमुख है। 'स्वयं को देखना’ अध्यात्म की साधना में सबसे उच्च कोटि की साधना बताई।  हमारी आंखे हमेशा सामने वाले को ही देख पाती हैं अपने चेहरे को नहीं। यदि आदमी को अपना चेहरा देखना हो तो उसे दर्पण या किसी ऐसी वस्तु का आश्रय लेना पड़ता है जो उसके उसके चेहरे को प्रदर्शित कर सके। आध्यात्मिक दृष्टि से अपने आपको देखने का आशय है अपने बारे में जानना। जैसे मैं कैसा हूं, मेरे अंदर क्या कमी है, क्या दुर्गुण है, कौन सा दोष है, कौन सी अव्यवहारिकता है। ये सभी अपने आपको देखने के बिन्दु हैं। आत्मा को देखना ऊंची भूमिका होती है इसलिए आदमी को अपनी कमियां देखनी चाहिए और उसे दूर करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। अपने आपको जानने के लिए आदमी ...

भोग से आत्मा का शोषण, त्याग से आत्मा का पोषण : आचार्य श्री महाश्रमण

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 गुलाबबाग, 27 जन. परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज अपने प्रात:कालीन उद्बोधन ने फरमाया कि शरीर को बाहर से सुन्दर बनाने के लिए आदमी न जाने क्या-क्या करता है। कितने प्रकार के फैशनेबल वस्त्र व आभूषण आदि। इसमें बाहर से आदमी सुन्दर दिखने भी लगे ऐसा हो सकता है लेकिन जब तक अंतरात्मा सुन्दर न हो तब तक आदमी के बाहर की सुन्दरता आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन में सुन्दर नहीं कही जाती और आत्मा को सुन्दर बनाने के लिए त्याग करना पड़ता है। आत्मा को सुन्दर बनाने के लिए यहीं एक उत्तम साधन है। त्याग से आत्मा का पोषण होता है। आत्मा को बेहतर पोषण मिलने पर वह परम को पाने के पथ पर अग्रसर होती है।  त्याग का महत्व आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा है तो वहीं व्यवहारिक जीवन में भी त्याग की शक्ति का कोई जोड़ नहीं है। अभाव के कारण से यदि कोई आदमी भोग नहीं कर पा रहा है इसका यह मतलब कदापि नहीं होता कि वह त्यागी है। त्यागी वह आदमी कहलाता है जिसके पास उपभोग का साधन उपलब्ध हो इसके बावजूद भी वह उसका प्रयोग न करे, उससे मुंह मोड़ ले वह त्याग कहलाता है। त्याग से आत्मा का पोषण होता है। भोग से शरीर...

"गणतंत्र दिवस पर कैसे पाएं प्रेक्षाध्यान एवं अणुव्रतों के द्वारा स्वतन्त्रता" : दुर्ग (छतीसगढ़)

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आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री गुप्तिप्रभा जी का 26 जनवरी पर दुर्ग छत्तीसगढ़ में आयोजित " गणतंत्रता दिवस पर कैसे पाएं प्रेक्षाध्यान एवं अणुव्रतों के द्वारा स्वतन्त्रता" कार्यक्रम जैन समाज के मध्य पदमनामपुर काॅलोनी मे हुआ। साध्वी श्री जी ने कहा- आज के दिन भारत के संविधान लिखा गया था। आज के दिन को गणतंत्र दिवस के रूप मे मनाया जाता है । इसी समय में क्रांति की मशाल हाथो मे थाम आचार्य श्री तुलसी ने जनता को मानवता का पाठ पढाने की भावना लेकर सरदारशहर मे प्रारम्भ किये गये "अणुव्रत आन्दोलन " का अवदान देने दिल्ली पधारे। प्रभुदयाल जी डाबडीवाल' जैसे श्रावकों के माध्यम से नेताओं से मिलने का कार्य शुरू किया। पंडित जवाहरलाल नेहरू आचार्य तुलसी से बहुत प्रभावित हुए। प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने स्वयं आकर आचार्य तुलसी से अणुव्रत के नियम स्वीकार कर अणुव्रती बने। आचार्य तुलसी ने चरित्र निर्माण पर जोर दिया जिस प्रकार एक लाख मे से एक हट गया तो सारे शुन्य का मूल्य घट गया वैसे ही लाखों लोगो का अन्य निर्माण सब ठप्प है जब तक चरित्र निर्माण ठप्प...

समय का अकंन हो : आचार्य श्री महाश्रमण

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 24.01.2016                                                             गुलाबबाग, 24 जन. अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री के नेतृत्व में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेश को लेकर चल रही अहिंसा यात्रा आज सुबह खुश्कीबाग से गुलाबबाग पहुंची।  स्कूली छात्रों का एक समूह अपने हाथों में अहिंसा यात्रा के संकल्पों का स्लोगन लेकर चल रहे थे तो दूसरे छात्रों का समूह बैंड-बाजे के साथ। कहीं शंख ध्वनि, तो कहीं भगवान महावीर के जीवन चरित्रों की झांकियां।  विभिन्न मंगल जयकारों से गूंजते वातावरण में आचार्यश्री की धवल सेना गुलाबबाग की दूरी तय कर रही थी तो ऐसा लग रहा था जैसे मानव जीवन के सभी पापों का नाश करने के लिए स्वयं पापनाशनी मोक्षदायनी गंगा अपनी धवल धारा के साथ प्रवाहित हो रही हो। सभी श्रद्धालुओं को अपने दर्शन व आशीर्वाद से पवित्र करते सबसे पहले आचार्यश्री ने नये बने नव उद्घाटित हो रहे तेरापंथ भवन पधार कर मंगल पाठ प्रदान किया। वहां...

धर्म उत्कृष्ट मंगल : आचार्य श्री महाश्रमण

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भट्ठा बाजार, पूर्णियाँ, 21 जून महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने प्रात:कालीन उद्बोधन में फरमाया कि श्वेताम्बर तेरापंथ सम्पद्राय में बत्तीस आगमों की मान्यता है। इनमें 11 अंग, 12 उपांग, 4 मूल, 4 छेद, 1 आवश्यक का समावेश है। इन बत्तीस आगमों में चार मूल नाम से जो आगम है। उनमें एक है दसवेआलियं। यह बहुत बड़ा नही है, छोटा ही है। हमारे कितने साधु-साध्वियों ने दसवे आलियंम को कंठस्थ किया है। इस में साधु आचार की बातें बताई गयी है। पांचवें अध्ययन में साधु को गोचरी कैसे करना है?, चौथे अध्ययन में साधू को छः काय जीवों की अहिंसा का कैसे पालन करना, सातवें अध्ययन में साधु को बोलना कैसे है? दसवें अध्ययन में भिक्षु  कौन होता है?, भिक्षु में क्या-क्या योग्यता होनी चाहिए? आदि का वर्णन है. इसकी दो चुलिकाएँ है। एक चुलिका में यह बताया गया है कभी साधु का मन अस्थिर हो जाए और घर जाने की भावना मन में आ जाए तो घर जाने से पहले अठारह बातों को पढ़ लो। यह अठारह बातें पहली चुलिका में बताई गई है। जैन शासन में भगवान महावीर के कुछ वर्षों बाद एक आचार्...

बिहार-उत्तर बंगाल स्तरीय व्यक्तित्व विकास कार्यशाला ’दर्पण' का अयोजन

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भट्टा बाजार पूर्णिया. 19 जन.। परमपुज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में व अ.भा.ते.यु.प. के तत्वाधान में बिहार-उत्तर बंगाल स्तरीय व्यक्तित्व विकास कार्यशाला ’दर्पण’ का अयोजन किया गया । कार्यशाला में उपस्थित संभागियों को पावन पाथेय प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमणजी ने दिनचर्या को व्यवस्थित करने एवं नशामुक्त व नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ तपोमुर्ति मुनिश्री कमलकुमारजी द्वारा नमस्कार महामंत्रोच्चारण के साथ हुआ। तेयुप पूर्णिया द्वारा मंगलाचरण गीतिका का संगान हुआ।. केन्द्रीय संयोजक श्री मनीष दफ्तरी द्वारा श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया गया. तेयुप भट्टा-मधुबनी अध्यक्ष श्री निर्मल जैन ’’नीरू’’ द्वारा स्वागत वक्तव्य किया गया. अ.भा.ते.यु.प. सहमंत्री श्री पंकज डागा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अभातेयुप के पूर्व अध्यक्ष श्री संजय खटेड ने जैन जीवन शैली के 9 सुत्रों को बहुत ही सरल भाषा में प्रतिपादन किया. उन्होंने युवा शक्ति को सकारात्मक चिंतन (Positive Thinking) का महत्त्व भी बताया. ...

कषायों का उपशमन हो : आचार्य माहाश्रमण

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भट्ठा बाजार, पूर्णियाँ.  20 जन.    परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने प्रात:कालीन प्रवचन में फरमाया कि-  आदमी में गुस्सा देखने को मिलता है.. वीतराग पुरूष जो दसवें गुणस्थान के पार, ग्यारहवें से भी पार बारहवें में पहुँच जाते है उनमें तो बिल्कुल भी गुस्सा नही होता है। भीतर में भी बिल्कुल गुस्सा नही होता है। परन्तु साधारणतया जो लोग छठे गुणस्थान तक रहने वाले है उनके तो कभी मन में, कभी वाणी में, कभी शरीर में गुस्सा देखा जा सकता हैं। गुस्से से आदमी खुद भी परेशान हो जाता है और दुसरों कोे भी परेशान कर देता है। गुस्से से निजात पाने के लिए क्षमाशील बनने एवं शान्त रहने का अभ्यास करना चाहिए, सहिष्णुता की अनुप्रेक्षा करनी चाहिए., प्रेक्षाधान आदि का प्रयोग करना चाहिए। हमें गुस्से को छोड़ने का या कम करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अहंकार भी नही करना चाहिए। आदमी को पैसे का, रूप का घमण्ड नही करना चाहिए। अहंकार को मृदुता से जीता जा सकता है। आदमी को माया से बचना चाहिए। छल कपट नहीं करना चाहिए। छल कपट को ऋजुता से जीतने का प्रयास करना चाहिए। लोभ, लालच भी नहीं करना चाहिए। ...

स्वाध्याय से सत्यं शिवं सुन्दरम् की प्राप्ति : आचार्य महाश्रमण

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भट्ठा बाजार, पूर्णिया. 18 जन. अहिंसा यात्रा आज सुबह रानीपतरा से भट्ठा बाजार पूर्णिया पहुंची। रास्ते में हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री महाश्रमणजी के दर्शन किये। भट्ठा बाजार पहुंचते ही यात्रा का भव्य स्वागत किया गया है। स्काउट एंड गाइड के बच्चे जहां अपने ड्रेस में सजकर ढोल-नगाड़े बजा रहे थे तो वहीं अन्य बैंड पार्टियां भी अपने भक्ति धुनों से लोगों को आकर्षित कर रही थी। वहीं स्कूली बच्चे अपने हाथों में स्लोगन लिखे तख्तियों से लोगों को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का पाठ पढ़ा रहे थे। पूज्यप्रवर ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में श्रद्वालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि- स्वाध्याय करने का धार्मिक व व्यवहारिक जीवन में विशेष महत्व होता है। स्वाध्याय का संधि विच्छेद करते हुए बताया कि इसका सीधा अर्थ स्वयं का अध्ययन होता है। जब आदमी स्वयं का अध्ययन कर ले तो अपने आप वह वास्तविक सुधार कर सकता है और अपना समूल विकास कर सकता है। स्वाध्याय करने से ज्ञान का नैतिक विकास होता है। सत्यता की पहचान होती है। उसके बाद जीवन को शांति व सौहार्दपूर्वक तरीके से व्यतीत किया जा सकता है। सत्य को जानने से चेतना...

तेरापंथ प्रॉफेशनल फोरम उदयपुर का राष्ट्रिय अध्यक्ष की उपस्थिति में सेमिनार

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From: abhishek pokharna <abhishekpokharna@ymail.com>; To: Jtn Mahavir Ji Semlani <jtnmain@gmail.com>; Subject: Udaipur news Sent: Mon, Jan 18, 2016 4:13:04 AM तेरापंथ प्रॉफेशनल फोरम उदयपुर द्वारा कृषि महाविद्यालय सभागार में कैरियर गाइडेंस एंव कॉउंसलिंग पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में उपस्थित 400 से अधिक विद्यार्थियो एंव अभिभावको को वक्ताओं ने संबोधित किया । मुन...

अभातेयुप के निर्देशन में तेयुप कटिहार द्वारा ATDC का शुभारंभ

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अभातेयुप के निर्देशन में तेयुप कटिहार द्वारा ATDC का शुभारंभ परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी  के मंगल पाठ के साथ हुआ  ATDC कटिहार का  शुभारम्भ  अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के मानव सेवा को समर्पित उपक्रमों में से एक उपक्रम आचार्य तुलसी डायनोस्टिक सेन्टर (ATDC) है। अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी. सी. भलावत ने यह संकल्प संजोया है कि दो साल में कम से कम पूरे भारत वर्ष में 40 ATDC का शुभारम्भ करना है। आज कटिहार में परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण के सानिध्य में ATDC का शुभारंभ किया गया। परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने महती कृपा करवाते हुए ATDC सेंटर पधार कर मंगल पाठ प्रदान करवाया. अभातेयुप के पूर्व अध्यक्ष श्री पदमचन्द पटावरी एवं पूर्व अध्यक्ष श्री रतन दूगड़  ने ATDC शुभारम्भ की जैन संस्कार विधि पूर्ण करवायी.  अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी. सी. भलावत,  महामंत्री श्री विमल कटारिया ने डेढ़ महीने की अल्प अवधि में ATDC प्रारम्भ करने हेतु तेयुप कटिहार के विशेष प्रयासों की सराहना की. ATDC प्रभारी श्री संदीप कोठारी, कटिहार के एम.एल.ए श्री तारकिश...

आस्तिक हो या नास्तिक - अणुव्रती जरुर बने

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H.H. Acharya Mahashramaji at Katihar  कटिहार, 14 जन. अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने प्रात:कालीन प्रवचन में फरमाया कि  दो विचारधाराएँ रही है- एक आस्तिक विचार धारा और दुसरी नास्तिक विचार धारा। आस्तिक विचार धारा का कथन है कि आत्मा का स्थायी अस्तित्व है ,पूर्व जन्म और पुर्नजन्म होता है, किये हुए कर्मों का फल मिलता है। आत्मा मोक्ष में भी जा सकती है। यह मान्यता आस्तिक विचार धारा की है। नास्तिक विचार धारा का कथन है कि कोई पुर्नजन्म नही होता है, कोई परलोक नहीं,  कोई पूण्य-पाप का फल नहीं। यह नास्तिक विचार धारा है। धार्मिक जगत में आस्तिक विचार धारा आधारभुत तत्व है। अगर आत्मा का शाश्वत अस्तिव नहीं  है, पूर्नजन्म नहीं है फिर तो धर्म की आवश्यकता बहुत ही कम रह जाती है। अगर आगे आत्मा का अस्तित्व है इसलिए धर्म की साधना की उपयोगिता है कि कैसे आत्मा मोक्ष में जा सके। परन्तु कोई अधार्मिक कहलाने वाला आदमी जो पुन:जन्म में विश्वास न करने वाला हो तो उसको भी अणुव्रत जैसे वाद को अपनाना चाहिए। नैतिकता, संयम, अहिंसा के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए ताकि ...

प्रतिस्रोत से पाएं भीतर का खजाना

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कटिहार.13, जनवरी. महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि सांसारिक सुखों के मार्ग पर चलना आसान है, लेकिन संसार में रहने के बावजूद सांसारिक दिशा के विपरीत दिशा में चलने की हिम्मत रखना ही मनुष्य के जीवन की विशेषता है। यही मार्ग उसके जीवन को धन्य बनाता है और मोक्ष के द्वारा तक ले जाता है। सांसारिक मार्गों पर चलना अनुस्रोत कहलाता है तो इससे अलग आध्यात्मिक मार्ग बनाकर आत्मसाक्षात्कार करना प्रतिस्रोत का उत्तम उदाहरण है। झूठ, फरेब, लालच, हिंसा, मोह-माया अनुस्रोत के उदाहरण हैं तो अहिंसा, संतोष, सच्चाई, सत्कर्म प्रतिस्रोतगामिता के सबल उदाहरण हैं। प्रतिस्रोत में चलने का अभ्यास करना चाहिए ताकि जीवन सुखमय और शांतिपूर्वक व्यतीत हो और इह लोक के साथ परलोक को भी संवार सके। आचार्य प्रवर ने आगे फरमाते हुए कहाॅ कि आदमी रोटी, कपड़ा, मकान, आभूषण, धन, शादी, बच्चों आदि के मोह माया में पड़ जाता है। अपने इन्हीं विचारों व ईच्छाओं की पूर्ति में वह परेशान व दुखी होता रहता है, किन्तु इसके विपरीत साधु-संत इन सब समस्याओं से दूर रहकर अपने जीवन को सच्चाई व अहिंसा के मार...

अनासक्त बने : आचार्य श्री महाश्रमण

05.01.206  बनमनखी। अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमणजी आज सुबह जानकीनगर से  महर्षि मेहिदास की जन्म भूमि बनमनखी पधारें।  स्कुली  बच्चों ने एवं समस्त ग्रामवासियों ने पूज्यप्रवर का भव्य रैली के साथ स्वागत किया। महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि आदमी आसक्ति से काम करता है, पदार्थो में  मोह रखता है तो कर्म उसके चिपक जाते है। एक आदमी रहन सहन के व्यवहार में अनासक्ति रखता है,  मोह मुक्त रहता है तो उसके चिकने कर्मों का बन्ध नहीं होता । सर्वज्ञ केवल लज्ञानी पूर्णतया निर्मोह होते हैं। उनमे कषाय, मोह, आसक्ति नहीं है तो उनके कर्म भी नहीं चिपकते। साधु को अनासक्ति की साधना करनी चाहिए।  गृहस्थों को भी अनासक्ति की साधना करनी चाहिए। अध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो अनासक्ति की साधना करनी चाहिए। यह आसक्ति एक बन्धन है। विषयों में आसक्त मन बन्धन का कारण है, जबकि विषयों से विमुक्त मन होता  मुक्ति की ओर ले जाने वाला बन जाता हे। आचार्यश्री के सान्निध्य में सभी ग्रामवासियों ने जीवन में सद्भावना, नैति...

नागपुर में प्रेक्षा प्रशिक्षण क्लास का आयोजन

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जीवन विज्ञान अकादमी, नागपुर द्वारा संचालित बच्चों की साप्ताहिक क्लास। आज की क्लास में भक्ताम्बर स्तोत्र  के श्लोकों का उच्चारण अभ्यास प्रशिक्षक आनन्दमल सेठिया एवम श्रीमती अनीता अगरकर द्वारा करवाया गया।साथ ही बच्चों को प्रेक्षा गीत , मंगल भावना भी याद कराए जा रहे है। आसनों का अभ्यास के साथ और भी काफी प्रयोग सीखाए जा रहे हैं। बच्चे काफी मनोयोग पूर्वक सारे प्रयोग सीख रहे हैं। कई मनोरंजक प्रयोग भी कराए गए । क्लास में आने वाले सभी अजैन बच्चों ने शाकाहार का संकल्प स्वीकार किया। नोरतन ओसवाल

समता सुख का आधार : आचार्य श्री महाश्रमणजी

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कटिहार, 12 जनवरी। महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि जैन शासन में समता को महत्व दिया गया है। समता धर्म है और अध्यात्म की साधना का कोई केन्द्रीय तत्व है तो वह है समता। शास्त्र में कहा गया- समता की  साधना कर अपने आप को विशेष बनाएँ। परम शान्ति को पाने का राजमार्ग है समता की साधना करना। आचार्य प्रवर ने आगे फरमाते हुए कहा कि- सुर्य का उदय होता है। उदय के समय भी सुर्य लाल होता है और सुर्य अस्त के समय भी लाल होता है। तो जो स्थिति उदय काल में है। वही स्थिति अस्त काल में है। दोनों में समता है। इसी प्रकार जो महान लोग होते हैं  उनकी अनुकुलता और  प्रतिकुलता दोनों स्थितियों  में  एकरूपता होती है। साधु समता में रहे।  लाभ-अलाभ, सुख-दु:ख, जीवन-मरण, निन्दा-प्रशसा, मान-अपमान सब स्थितियों में समता रखने का प्रयास करना चाहिए। समता के विशेष साधक होने के कारण संत लोग सुखी होते हैं। सुख का मूलआधार समता की साधना होती है।  समस्या होने पर ज्यादा दुखी नही बनना चाहिए। तनाव से हमें बचना चाहिए और समस्याओं को हल करने का प...

जोधपुर जाटाबास किशोर मंडल द्वारा मिशन सुरक्षित राहे का आयोजन

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अभातेयुप द्वारा किशोर मंडलों हेतु निर्दिष्ट "One Nation One Mission" के तहत 2016 के प्रथम माह जनवरी में देशभर में "Mission सुरक्षित राहें " अभियान चलाया जा रहा है। इसी के अंतर्गत जोधपुर जाटाबास किशोर मण्डल ने पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प मेले के दौरान नुक्कड नाटिका की प्रस्तुति दी। तेरापंथ किशोर मण्डल अखिल भारतीय प्रभारी श्रेंयाँस कोठारी ने सभी को सुरक्षित राहें संबंधित संकल्प पत्र बताए। तेरापंथ किशोर मण्डल जोधपुर प्रभारी निखिल मेहता एवं संयोजक प्रतीक भण्डारी ने नाटिका का मंचन किया। तेरापंथ युवक परिषद् मंत्री मितेश जैन ने लोगों को हेलमेट नहीं पहनने के नुकसान के बारे में अवगत कराया। मेले में पधारे सभी आगंतुकों ने उत्साह के साथ राहें सुरक्षित करने का संकल्प लिया। किशोर अर्हम जैन ने चोटिल बनकर लोगों को इंगित किया की सड़क पर हर तरफ ध्यान देना चाहिए। इनके साथ अमित जैन, जयेश सिंघवी, निखिल सुराणा, मनीष मालू, मोहित चौधरी, विपुल चौपडा, नवरत्न चोरडिया, महेन्द्र मेहता, विनोद सुराणा आदि उपस्थित थे।

चेन्नई : तेयुप ने किया प्रेक्षाध्यान - जीवन विज्ञान सेमिनार का आयोजन

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तेयुप चैन्नई के तत्वावधान में जीवन विज्ञान एवं प्रेक्षाध्यान सेमिनार का आयोजन रखा गया । प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री हरीश भंडारी ने  विल्लीवाकम ज्ञानशाला हेतु दो घंटे के सत्र को  और  किलपॉक ज्ञानशाला हेतु करीब एक घंटे तक चले सत्र में ज्ञानार्थियों को संबोधित किया । बच्चों ने योगिक क्रियाएँ, प्राणायाम ,ध्यान, आदि की प्रस्तुति दी। इस सेमिनार मे 94 बच्चों ने भाग लिया एवं 20अध्यापक भी उपस्थित थे..

ज्ञानार्थी शिशु संस्कार बोध परीक्षा : दादर

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आज दादर (मुम्बई) तेरापंथ भवन में शिशु संस्कार बोध की परीक्षा का आयोजन हुआ । वर्ली, एलफिंस्टन, दादर से लगभग  50 विद्यार्थियों ने भाग लिया । पंकज कोठारी एवं निलेशजी चंडालिया की तरफ से सभी विद्यार्थियों को गिफ्ट वितरित किये । दादर तेयुप अध्यक्ष सुरेशजी धाकड़,  पंकज कोठारी, नीलेश चंडालिया, कल्पना धाकड़, पिंकी कोठारी रजत मारू,  कुसुम धाकड़ का सक्रीय सहयोग रहा  ।