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Showing posts from October, 2014

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के प्रतिनिधिमंडल ने की महामहिम राष्ट्रपति से भेंट

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🔅🔅🔅 नई दिल्ली । तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के  प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी से भेंट की । राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अंकुर बोरदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि फोरम के प्रतिनिधिमंडल ने मुनि श्री रजनीश कुमार जी, मुनि श्री जयकुमार जी, मुनिश्री मुदितकुमार जी के मंगल  सान्निध्य और राष्ट्रीय अध्यक्ष सलिल लोढ़ा व महामंत्री पंकज ओस्तवाल के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति से भेंट की । भेंटवार्ता के दौरान महामहिम राष्ट्रपति को भीलवाडा की सुविख्यात फड़ पेंटिंग भी भेंट की गयी । इस अवसर पर फोरम के राष्ट्रीय महामंत्री पंकज ओस्तवाल ने महामहिम राष्ट्रपति को फोरम द्वारा संचालित गतिविधियों एवं योजनाओं की जानकारी दी। इस पर महामहिम राष्ट्रपति ने सम्पूर्ण तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम को बधाई के साथ साथ अपनी शुभकामनाएं भी दी । ______________________________ www.jainterapanthnews.in www.facebook.com/jainterapanthnews1 www.twitter.com/terapanth_news  

दिल्ली में दो दिवसीय ज्ञानशाला स्नातक प्रशिक्षक दीक्षांत समारोह व ज्ञानशाला प्रशिक्षक सम्मेलन का आयोजन

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30 - 31 अक्टूबर  दिल्ली में  परम श्रद्धेय आचार्यवर की पावन सन्निधि में वर्धमान समवसरण में ज्ञानशाला स्नातक प्रशिक्षक दीक्षांत समारोह व ज्ञानशाला प्रशीक्षक सम्मेलन का आयोजन समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें 22 में 20 अंचलों से 357 प्रशिक्षको ने भाग लिया। ज्ञानशाला स्नातक प्रशिक्षक दीक्षांत समारोह 2009 से 2012 के मध्य जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा ज्ञानशाला प्रकोष्ठ द्वारा नियोजित व संचालित त्रिवार्षिक ज्ञानशाला प्रशिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 397 प्रशिक्षकों को डिग्री व स्मृति चिन्ह वितरित किए गए।   समुपस्थित प्रशिक्षकों को ज्ञानशाला के राष्ट्रिय संयोजक श्री सोहनराज चोपड़ा , वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री डालमचंद नोलखा , कार्यक्रम संयोजक श्री महेंद्र कोचर , श्री गोविंद बाफना , श्री जसराज बुरड़ के हाथों प्रदान किया गया। मुंबई ज्ञानशाला ने गीत का संगान करते हुए इसकी महत्ता को विभिन्न रूपों में प्रदर्शित किया। राष्ट्रिय संयोजक श्री सोहनराज चोपड़ा ने अपनी प्रस्तुति दी। मंत्री मुनि श्री ने अपने वक्तव्य में कहा – प्रशिक्षक प्रतिदिन श्रुत सामायिक करे। इसके माध्य...

जैन तेरापंथ न्यूज़ के चतुर्थ स्थापना दिवस पर JTN इ-न्यूज़लेटर लोकार्पित

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जैन तेरापंथ न्यूज के चतुर्थ स्थापना दिवस पर साध्वी श्री सुदर्शना श्री जी के सानिध्य में तेरापंथ भवन सुरत में अभिनव सामायिक का आयोजन तेयुप सुरत द्वारा किया गया.  इस अवसर पर तेयुप सूरत मंत्री श्री पवन फुलफ़गर द्वारा जैन तेरापंथ न्यूज़ के कार्यों की जानकारी  दी।  करीब ३०० श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक रूप से अभिनव सामयिक की.  जैन तेरापंथ न्यूज़ सम्पादकीय समिति सदस्य श्री राजेश सुराणा ने इस उपक्रम  को धर्म संघ की सूचनाओ का तटस्थ एवं सबसे अधिक विश्वासपात्र  माध्यम बताया और उम्मीद जताई की अब वो दिन दूर नही जब जैन तेरापंथ न्यूज़ का अपना टीवी चेनल के रूप में आपके सामने आये।   इस अवसर पर जैन तेरापंथ न्यूज़ द्वारा प्रकाशित इ-न्यूज़लैटर का भी लोकार्पण अभातेयुप के राष्ट्रीय  अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने वीडियो कोंफ्रेंसिंग के माध्यम से किया. उन्होंने अपने वीडियो सन्देश में जैन तेरापंथ न्यूज़ के सम्पादक श्री महावीर सेमलानी एवं पुरी टीम को हार्दिक बधाई भी प्रेषित की. 

निःशुल्क ऑखो की चिकित्सा एवं हुदय रोग जांच शिविर का आयोजन

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2 9-10-2014 हिरीयुर (कर्नाटक). मानव सेवा मे अग्रसर हिरीयुर रेडक्रॉस संस्था, अणुव्रत समिति एवं तेरापंथ सभा हिरीयुर के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय तेरापंथ भवन मे M.R.T एवं वीम्स होस्पिटल बेंगलोर के सहयोग से निशुल्क ऑखो की चिकित्सा एवं हुदय रोग संबंधी जांच शिविर का आयोजित किया गया। स्थानीय लोगो ने इस शिविर का लाभ लिया. तेयुप हिरीयुर ने प्रशंसनीय सहयोग दिया। फोटो साभार नरेश तातेड, रिपोर्ट- हिरीयुर जैतेस से तेजराज चौपडा

हमारे जीवन में विनम्रता और सम्मान का भाव आना चाहिए - आचार्य महाश्रमण

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2014  आज अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण जी ने वर्धमान समवसरण में समुपस्थित कोलकाता से समागत संघ व विशाल जनमेदनी को संबोध प्रदान करते हुए फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में कहा गया-आदमी के अन्दर संस्कार हैं, विभिन्न भाव हैं। आयरो में कहा कि यह आदमी विभिन्न विरोधी भावों वाला है। कभी जिसको संतोषी देखा था उसे कभी लोभ में भी देखा जा सकता है। यह पॉजिटिव नेगेटिव चलता रहता है। वीतराग को यह सब नहीं सताते। व्यक्ति में अहंकार भी आ जाता है। मैं अमीर व्यक्तियों को 3 सलाह देता हूँ। 1) पैसे का घमंड नहीं करना चाहिए। 2) धन के प्रति ज्यादा मोह नहीं रखना चाहिए। क्यों कि कफ़न में जेब नहीं होती है। फिर भी व्यक्ति की आसक्ति नहीं छूटती। आचार्य महाप्रज्ञ जी इच्छापरिमाण और भोगोपभोग परिसीमन की बात करते थे। यह व्रत जीवन में आते हैं तो लोभ पर ब्रेक लग सकता है। 3) धन का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। व्यसनों में रूढ़ियों में पैसे को नहीं गवाना चाहिए। आदमी के जीवन में पैसे का सदुपयोग होना तो ठीक है। पर गलत कार्यों में पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अहंकार को छोड़ने से बात बन ...

TPF राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

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तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न। फोरम के सभी सदस्य सामंजस्य की भावना के साथ आगे बढ़ें - मुनि श्री रजनीश कुमार जी नई दिल्ली । तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के सभी सदस्य सामंजस्य की भावना के साथ आगे बढ़ें और अपने धर्मसंघ के गोरव में अभिवृद्धि का प्रयास करें। ये विचार मुनि श्री रजनीश कुमार जी ने तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आध्यात्म साधना केंद्र, नई दिल्ली में संपन्न हुई बैठक में व्यक्त किये । बैठक की अध्यक्षता फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सलिल लोढ़ा एवं संचालन राष्ट्रीय महामंत्री पंकज ओस्तवाल ने किया। फोरम के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अंकुर बोरदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में सर्वप्रथम गत बैठक के मिनट्स सदन के समक्ष रखे गए जिसका सभी ने ॐ अर्हम की ध्वनि के साथ अनुमोदन किया। तत्पश्चात राष्ट्रीय अध्यक्ष सलिल लोढ़ा ने फोरम द्वारा वर्तमान में संचालित योजनाओं एवं आगामी योजनाओं के साथ साथ सिलीगुड़ी में प्रस्तावित लॉ कोलेज सम्बन्धी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। फोरम के मुख्य ट्रस्टी श्री धनराज वैद एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय ध...

"विरोधों में न घबराने वाले प्रतिश्रोत गामी थे आचार्य तुलसी" -आचार्य महाश्रमण

नई दिल्ली,25 अक्टूबर 2014 आज तुलसी जन्म शताब्दी के समापन समारोह में अति विशिष्ट महानुभावों, राजनेताओं तथा सम्पूर्ण देश से समागत अति विशाल जन मेदनी को संबोधित करते हुए शांति दूत, महामना, परम पूज्य आचार्य महाश्रमण जी ने फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में कहा गया है जो महर्षि होते हैं वो पराक्रम करते हैं। उनका पराक्रम कल्याण के लिए होता है। स्वयं और दूसरों के कल्याण के लिए, ऐसे ही महर्षि आचार्य तुलसी ने आज से सौ वर्ष पहले जन्म लिया,जन्म शताब्दी ख़तम होने को है। आचार्य तुलसी 20वीं सदी में धरती पर आये और 20वीं सदी में ही उन्होंने अंतिम श्वास लिया। उन्होंने अनेक प्रसिद्ध कार्य किये। उनका विरोध वि बहुत हुआ। पर विरोधों में न घबराना विरल होता है। दुनिया में अनेक लोग ऐसे होते हैं जो विघ्न बाधाओं से डर कर अधुरा कार्य छोड़ देते हैं। पर आचार्य तुलसी ऐसे संत थे जो विघ्न बाधाओं से न डर कर आगे बढ़ते थे। तेरापंथ के वे अधिशास्ता, अनुशास्ता आचार्य थे। आचार्य तुलसी में उच्चता और गंभीरता दोनों थी। ऊंचाई और गहराई दोनों साथ मिलना मुश्किल होता है। पर वे ऐसे व्यक्ति थे जिनके पास दोनों गुण थे। मेरा जीवन मेरा दर्श...

"आचार्य तुलसी एक विश्व संत "-स्वामी चिदानंद सरस्वती

25  अक्टूबर !  आज स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने आचार्य तुलसी को अपनी श्रद्धाजंली देते हुए अपने वक्तव्य के माध्यम से कहा कि हजारों बुझे हुए दीपक एक दीपक नही जला सकते लेकिन एक जला हुआ प्रकाशमय दीपक हजारों दीपक को जला सकता है। आचार्य तुलसी एक ऐसा ही महादीप है जिसने हर दीप में अपनी प्रज्ञा, साधना से करोड़ो बुझे हुए दीपकों को प्रज्वलित कर दिया। दिवाली की रात गयी है करोड़ो-2 रूपये बरबाद किए। दीपक जले और बुझ गए, कितना प्रदुषण फैला। करोड़ो दीप थोड़ी देर के लिए जले और सदा के लिए बुझ गए परन्तु एक ऐसा दीप जला जो सदा के लिए जला रह गया। Guru is never gone, guru is always on. महापुरुष कभी जाया नही करते हमेशा विद्यमान रहते है। सिर्फ चौला ही बदलता है कभी आचार्य महाप्रज्ञ के रूप में कभी महाश्रमण के रूप में। दीप अपने लिए नही दुसरे के लिए जलता है प्रकाश देता है। जलते तो हम भी है पर दूसरो से दुसरो के लिए नही। जो दूसरो के लिए जलते हैं वो आचार्य तुलसी महाश्रमण बनते है। जलें दूसरों के लिए दूसरों से नहीं। संतों के हर पल दिवाली रहती है। कहा जाता है सदा दिवाली संत की चारो काल बसंत की। जिस दिन जीवन में नशा...

दीपावली के पावन दिवस पर पूज्य प्रवर का संदेश

आर्हत वाड्मय में कहा गया है इस भरत क्षेत्र में 24 तीर्थंकर बने हुए हैं। सिद्धों से और परमात्मा स्वरुप आत्माओं से प्रार्थना की गयी कि तीर्थंकर मेरे पर प्रसन्न रहे, मुझे आरोग्य प्रदान करें, मुझे बोधि का लाभ प्राप्त हो और सिद्धि प्राप्त हो। मुझे निर्वाण प्राप्त हो। सिद्धि मिलनी चाहिए। चंद्रमाओं से भी ज्यादा निर्मल है सिद्ध भगवान। परम उज्जवल होते हैं सिद्ध भगवान। सूर्य से भी ज्यादा प्रकाश करने वाले सिद्ध, सागर के समान गंभीर होते हैं सिद्ध भगवान। दीपावली के पावन दिवस और भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में पूज्य प्रवर ने फरमाया कि आज कार्तिक कृष्ण अमावस्या है। दीपावली का त्यौहार है। यह प्रकाश का पर्व है। सामान्यत: अमावस्या की तिथि काली तिथि होती है इसका महत्व नही होता परन्तु कार्तिक अमावस्या की तिथि बहुत महत्व रखती है कार्तिक अमावस्या के साथ भगवान राम, भगवान महावीर जैसे तेजस्वी पुरुष जुड़ गये इसलिए इस अमावस्या का महत्व बढ गया। भगवान महावीर ने केवल ज्ञान रूपी सूर्य प्राप्त किया इसलिए वह लोकोत्तम पुरुष है। भगवान राम भी वनवास से लौटे थे। राम शब्द तो परमात्मा से जुड़ा हुआ है। कितन...

आचार्य महाप्रज्ञ जी की कविताये

वर्तमान उज्ज्वल करना है विस्मृत कर दो कुछ अतीत को, दूर कल्पना को भी छोड़ो सोचो दो क्षण गहराई से, आज हमें अब क्या करना है वर्तमान की उज्ज्वलता से भूत चमकता भावी बनता इसीलिए सह-घोष यही हो, ‘वर्तमान उज्ज्वल करना है’ हमने जो गौरव पाया वह अनुशासन से ही पाया है जीवन को अनुशासित रखकर, वर्तमान उज्ज्वल करना है अनुशासन का संजीवन यह, दृढ़-संचित विश्वास रहा है आज आपसी विश्वासों से, वर्तमान उज्ज्वल करना है क्षेत्र-काल को द्रव्य भाव को समझ चले वह चल सकता है सिर्फ बदल परिवर्तनीय को, वर्तमान उज्ज्वल करना है अपनी भूलों के दर्शन स्वीकृति परिमार्जन में जो क्षम है वह जीवित, जीवित रह कर ही, वर्तमान उज्ज्वल करना है औरों के गुण-दर्शन स्वीकृति अपनाने में जो तत्पर है वह जीवित, जीवित रह कर ही, वर्तमान उज्ज्वल करना है दर्शक दर्शक ही रह जाते, हम उत्सव का स्पर्श करेंगे परम साध्य की परम सिध्दि यह, वर्तमान उज्ज्वल करना है कविता की क्या परिभाषा दूँ कविता की क्या परिभाषा दूँ कविता है मेरा आधार भावों को जब-जब खाता हूँ तब लेता हूँ एक डकार वही स्वयं कविता बन जाती साध्य स्वयं बनता सा...

"मोक्ष से जोड़ने वाला- योग" - आचार्य श्री महाश्रमण जी

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नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2014  आज द्विदिवसीय "National Conferance on Integration of yoga in medical science" के प्रथम दिवस पर वर्धमान समवसरण में उपस्थित धार्मिक जनों को संबोधित करते हुए पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि आर्हत वाड्मय में कहा गया है- आदमी के पास आत्मा नाम का तत्व है  चैतन्य नाम का तत्व है। आत्मा अलग है शरीर अलग है।शरीर और आत्मा का संयोग है तब तक जीवन है। दोनों का अलग हो जाना ही मृत्यु है। आत्मा का शरीर से बिलकुल अलग हो जाना मोक्ष है। नास्तिक विचार धरा में शरीर और आत्मा को एक ही माना गया। परन्तु यह संगत नहीं लगता। योग को व्यख्याहित करते हुए गुरुदेव ने कहा- हम दूसरों को देखते हैं, अपने आप को देखना ही योग है। "योगः चित्त वृत्ति निरोधः" चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ही योग है। अभिधान चिंतामणि में आचार्य हेमचन्द्र ने अष्टांग योग का उल्लेख किया है। शरीर मन और वाणी तीनों की प्रवृतियों को कम करना भी योग का कार्य है। श्वास पर ध्यान केन्द्रित करना, अनुप्रेक्षा करना, इच्छाओं पर संयम करना इत्यादि योग के ही प्रयोग हैं। योग व अध्यात्म को मिश्रित करते हुए पूज्यप्रवर ने कहा...

साधक हर समय जागरूक रहे - मंत्री मुनि सुमेरमल जी

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जो आदमी जीवों अजीवों को जनता है , वह संयम को भी जान लेता है। श्रावक के लिए नव तत्वों को जानना जरूरी है। जीव , अजीव , पुण्य , पाप , आश्रव , संवर , निर्जरा , बंध और मोक्ष। जीव अजीव का बोध होने के बाद त्याग प्रत्याख्यान आता है और फिर त्याग में भी दृढ़ता। आत्मा शाश्वत है और शारीर अशाश्वत है। मृत्यु के लिए कोई भी अवसर/समय नहीं है। प्रकृति का नियम है शरीर एक दिन अवश्य छुटेगा। शरीर छुटे तो छुटे पर आत्मा का सम्बन्ध ना छुटे। साधना की भावना न छुटे। इतनी निष्ठा होनी चाहिए कि अपने आदर्शों के लिए कुछ भी जाए तो जाए पर आदर्श न जाए। 2 प्रकार के आदर्श बताये जाते है: 1. व्यक्तिपरक आदर्श: किसी व्यक्ति को सामने रखकर उसकी जीवन शैली का निर्धारण करना। 2. सिद्धांत परक आदर्श: किसी तथ्य को सामने रखकर आदर्शों का निर्धारण करना। शास्त्रकारों ने कहा है श्रावक को 6 काय , जीव अजीव का बोध होना चाहिए , तत्व ज्ञान होना चाहिए। यह भी कहा गया है कि श्रावक में सम्यग दर्शन , सम्यग श्रद्धा भी होनी चाहिए। सच्चाई यथार्थ के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। वही सत्य है जो "जिन" भगवानों ने निर्दिष्ट किया है। सच्चाई के ल...

तेरापंथी सभा द्वारा गंगाशहर अणुव्रत संगोष्ठी का आयोजन

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"शिक्षक और विद्यार्थी" विषयक अणुव्रत संगोष्ठी का तेरापंथी सभा, गंगाशहर आयोजन...... गंगाशहर की स्कूलों के लगभग 950 विद्यार्थी उपस्थित  Shri Rajendra Sethia speaking to students during Anuvrat Seminar at Gangashahr जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा गंगाशहर द्वारा शिक्षक और विद्यार्थी विषयक अणुव्रत संगोष्ठी आयोजित की गई। अतिथि-वक्ताओं ने कहा कि अणुव्रत मानव मात्र के लिए आचरण प्रधान धर्म है। अणुव्रत पालन से लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है। छोटे छोटे संकल्पों से आचरण को परिष्कृत कर ही हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेंगे। मुख्य वक्ता हाजी सरदार अली पडि़हार ने बालकों को लोभ से दूर रहने के लिए भी कहा। मुनि शांति कुमार ने गुरुदेव तुलसी के अणुव्रत पालन संबंधी वक्तव्य का संदर्भ देते हुए इससे जन जन को जोड़ने की बात की। मुनि पीयूष कुमार, साध्वी चंद्रकला, साध्वी मृदुल यशा, मुनि राज कुमार ने भी अणुव्रत नियमों के बारे में बताते हुए इनके पालन से जीवन सुखी बनाने की प्रेरणा दी। गीतिकाएं भी प्रस्तुत की गई। श्रावक राजेंद्र सेठिया, किशन बैद ने मुख्य वक्ता एवं आयोजन में पहुंची छह स्कूलों के 950 छात्रो...

सम्यक्त्व के 5 दूषण होते हैं- मंत्री मुनि श्री सुमेरमल जी

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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2014  आज वर्धमान समवसरण में उपस्थित धार्मिक जनों को संबोधित करते हुए मंत्री मुनि प्रवर ने फ़रमाया- हमारे जीवन में सम्यक्त्व का बड़ा महत्त्व है। सम्यक्त्वी बनने का मतलब बहुत बड़ी सम्पदा प्राप्त करना। हमें सम्यक्त्व की बड़ी हिफाजत के साथ निगरानी रखनी चाहिए। एक बार सम्यक्त्व हाथ से गया तो अनेक भव बढ़ाने वाला हो जाता है। दृढ आस्था व् जागरूकता के साथ आगे बढ़ना, कि कोई गलत कार्य न हो जाये। सम्यक्त्व के 5 दूषण होते हैं- 1) शंका 2) कांक्षा 3) निर्विचिकित्सा 4) पर पाषंड प्रशंसा 5) पर पाषंड परिचय संसार में अनेक मत हैं प्रलोभन हैं, जब सीमित बुद्धि होती है तो वहां कुतर्क होता है। यदि हमारे भीतर पूर्ण आस्था है तो बाहर का प्रलोभन हमारा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा। धर्म के मामले में ले दे के काम चलने वाली बात नहीं होती है। तत्व समझ कर धर्म धारण किया जाता है। अगर कोई मुझे भटकाना चाहता है तो मैं अपने आप क्यों भटकू? गलत का अनुसरण क्यों करू? हमें सम्यक्त्व के खातिर प्रतिकूलता का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। धार्मिक बनें, दृढ़ता रखें। थोड़ी बहुत प्रत...

टी.पी.ऍफ़. मुंबई द्वारा हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट सेमीनार

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Terapanth Professional Forum Mumbai in association with Shri Tulsi Mahapragya Foundation organised a seminar on housing society management. 12 अक्तूबर. मुंबई. (जैतेस), तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम मुंबई एवं श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन द्वारा हाउसिंग सोसाइटी मैनेजमेंट सेमीनार का आयोजन किया. गया. मुख्य वक्ता सीनीयर एडवोकेट श्री एस.जी. देशमुख ने हाउसिंग सोसाइटी व्यवस्थापन से जुड़े विविध विषयों पर पर उपस्थितो को विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया. सीनीयर एडवोकेट एवं हाई कोर्ट काउंसेलर श्री रामचंद्र आपटे ने कन्वेयेंस डीड के बारे में लोगो को जानकारी दी. सी.ए. रमेश प्रभु ने री-डेवलपमेंट कब करना, बिल्डर से करार आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी. इतनी बहुउपयोगी जानकारी प्राप्त कर उपस्थितों का उत्साह जिज्ञासा समाधान सत्र में देखने को मिला. Terapanth Professional Forum Mumbai in association with Shri Tulsi Mahapragya Foundation organised a seminar on housing society management. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ संघगायिका मीनाक्षी भूतोडिया के मंगल गान के साथ हुआ. तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम क...

"साधना का लक्ष्य हो-तिन्नाणं तारयाणं" - आचार्य श्री महाश्रमण जी

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2014 आज 13वें अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षाध्यान शिविर के अन्तिम दिन एकांत वास की पूर्णता पर आचार्य प्रवर का सानिध्य प्राप्त हुआ। आज मुनि कुमार श्रमण जी ने बताया कि रशिया, स्वीडन, युगांडा व भारत देश के कुल 69 प्रतिभागियों ने भाग लिया। रशिया के Kurgan शहर से आये ग्रुप ने प्रेक्षा गीत का बहुत सुन्दर संगान किया। ज्ञातव्य रहे अकेले कुरगन शहर में लगभग 1000 व्यक्ति प्रेक्षाध्यान करते हैं। यही ग्रुप उन्हें वहां उस अनार्य देश में प्रेक्षा सिखाता है। इसके पश्चात स्वीडन, साइबेरिया व भारत से एक एक प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किये। प्रेक्षाप्रणेता आचार्य महाश्रमण जी ने उपस्थित शिविरार्थियों व देश के कोने कोने से उपस्थित जन मानस को संबोधित करते हुए फ़रमाया- आर्हत वांग्मय में कहा गया है - "संपिक्खए अप्प ग मप्पएणं" अर्थात अपने से अपने को देखना। हमारे पास आँखे है। हम आँखों से दूसरो को एवं अपने शरीर को भी देखते है। परन्तु भीतर में झांकना व अपनी पहचान करना बड़ी बात है। प्रेक्षा ध्यान साधना स्वयं को देखने की पद्धति है।  प्रेक्षाध्यान पद्धति की उपसंपदा दिलाई जाती है। उसम...

पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी का दिल्ली से कानपुर तक सम्भावित अहिंसा यात्रा पथ

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H.H. ACHARYA SHRI MAHASHRAMANJI VIHAR ROUTE (DELHI TO KANPUR) Subject to Change Acharya Mahashraman Yatra Route Delhi to Kanpur Page 1  Acharya Mahashraman Yatra Route Delhi to Kanpur Page 2

तेयुप सूरत द्वारा गुजरात स्तरीय किशोर मंडल कार्यशाला

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Gujarat State Level "Kishore Mandal  Sammelan" at Surat, Gujarat. सूरत। 12 अक्तूबर। साध्वी श्री सुदार्शनाजी के सान्निध्य में गुजरात स्तरीय किशोर मंडल कार्यशाला "हमारी संस्कृति-हमारी धरोहर" का उद्घाटन अभातेयुप के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने बैनर अनावरण कर किया। उन्होंने कार्यशाला के विधिवत उद्घाटन की घोषणा की। इससे पूर्व गुजरात भर से आये हुए लगभग 250 किशोर संभागियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया।तेरापंथ सभा सूरत के मंत्री श्री जीतेन्द्र तलेसरा ने स्वागत भाषण दिया।केन्द्रीय संयोजक श्री मुकेश गुगलिया ने किशोरों को संस्कारों को धरोहर के रूप में समाहित करने का आह्वान किया। अभातेयुप के उपाध्यक्ष श्री नरेन्द्र मांडोतर ने किशोरों को सफल बनने के गुर बताये। साध्वी श्री लक्षित प्रभाजी ने संस्कार निर्माण विषय पर किशोरों को उद्भोधन दिया।साध्वी श्री सुदर्शनाश्रीजी ने किशोरों को हमारें संस्कारों को जीने का आह्वान किया। उपस्थित सभी किशोरों एवं युवकों ने आजीवन नशामुक्त रहने का संकल्प लिया। उद्घाटन सत्र का सञ्चालन तेयुप सूरत के पूर्व अध्यक्ष अनुराग कोठारी...

दिल्ली में "नैतिकता की कार्यशाला" का आयोजन

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तेरापंथ कन्या मंडल , दिल्ली के द्वारा अध्यात्म साधना केंद्र के योगक्षेम भवन में 12 अक्टूबर को "नैतिकता की कार्यशाला" नामक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। अणुव्रत के नियमों पर आधारित प्रदर्शनी को व्याख्या द्वारा समझाया गया।  अणुव्रत पर आधारित P resentations के द्वारा भी विषय की सटीक प्रस्तुति दी गई। आज के समय प्रासंगिक इन नियमों को आज के सन्दर्भ में व्याख्यायित करने का कन्याओं ने सराहनीय प्रयास किया। साध्वी प्रमुखा श्री कनक प्रभा जी ने विशेष उद्बोधन में फ़रमाया- नैतिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए , नैतिकता का नियम जरूरी है। नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारें। कन्याएं आगे जा कर गृहणियां बनती हैं। आगे वह बच्चों में अच्छे संस्कार डाल सकती हैं। अपने परिवार समाज को स्वस्थ बना सकती हैं। कन्याएं smart बनना चाहती हैं। तो इन 5 गुणों को भी बढ़ाये। S- simplicity M-(good)mantality A-Ability (to do work) R- responsibility T- time management साध्वी प्रमुखा श्री जी से smartness का मन्त्र पा सभी अभिभूत हो गए। चित्र कार्यशाला का अवलोकन करने स्वयं पूज्यप्रवर भी पधारे तथा कन्या...