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Showing posts from August, 2015

तेयुप बैंगलोर

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साघ्वी श्री प्रज्ञा श्री जी ठाणा 4 का के सानिध्य मे अभातेयुप द्वारा निर्देशित अभिनव सामयिक कार्यक्रम तेयुप बैंगलोर द्वारा आयोजित किया गया। साघ्वी श्री जी ने सभी तेयुप सदस्यों   श्रावकों    ज्ञानशाला बच्चो गणमान्य व्यक्तियों को सामुहिक सामायिक दिलवाई। साघ्वी श्री जी सामायिक के महत्व को बताते हुए कहा कि अभिनव सामयिक के माध्यम से जप ध्यान स्वाध्याय आदि को करते हुए हम आत्मा का विकाश कर सकते है। सामुहिक सामायिक साधना गुरूदेव तुलसी के द्वारा शुरूवात करवाई गई थी आज पुरे भारत मे एक साथ तेयुप द्वारा आयोजित की जाती है इस अवसर पर तेयुप परामर्शक श्री ललित जी मांडोत श्री राजेन्द्र जी बैद सभा उपाध्यक्ष श्री कन्हैया लाल जी गिरीया श्री हेमराज जी मांडोत तेयुप अध्यक्ष श्री गणपत जी चोरडिया मंत्री संजय बांठिया कोषाध्यक्ष जंयतीलाल छाजेड सहमंत्री विनोद जी छाजेड तेयुप कार्यकारिणी सदस्य महिला मंडल तेरापंथ सभा ज्ञानशाला से गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे। संवाद साभार :JTN टीम बैंगलोर

तेयुप उधना द्वारा व्यक्तित्व विकास कार्यशाला

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अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद् उधना द्वारा अपने रजत जयंती वर्ष के शुभारम्भ के अवसर पर साध्वी श्री कैलाशवती जी के सान्निध्य में गुजरात स्तरीय व्यक्तित्व विकास कार्यशाला-"समय प्रबंधन" का आयोजन 15 अगस्त को तेरापंथ भवन उधना में किया गया ।  गुजरात भर से आये 16 शाखा परिषदों के लगभग 500 संभागियों को प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री कैलाशवतीजी ने युवाओं को अपने जीवन को रजत की तरह उज्जवल बनाने की प्रेरणा दी एवं जीवन में सफलता हेतु समय प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया । इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ साध्वी श्री द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ हुआ । तेयुप उधना के सदस्यों ने विजय गीत का संगान किया । अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने बैनर तथा तेयुप उधना के रजत जयंती वर्ष के लोगो का अनावरण किया और कायर्शाला प्रारम्भ की घोषणा की । राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया । उधना तेयुप के अध्यक्ष श्री मुकेश बाबेल ने अपने स्वागत वक्तव्य में आगुन्तक अतिथियों और कार्यशाला संभागियों का स्व...

आत्मिक उत्थान का अनुपम अनुष्ठान है - अभिनव सामायिक

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गुवाहाटी 16 अगस्त - साध्वी  श्री   अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद की तत्वावधान में तेरापंथ भवन के सुरम्य प्रांगण में अभिनव सामायिक का कार्यक्रम समायोजित हुआ।  विशाल परिषद ने इस आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़कर समता की साधना का आनंद लिया।  सैंकड़ो सैंकड़ो युवको ने सामायिक की वेशभूषा में बैठकर सामायिक की आराधना की।   साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने विशिष्ट शैली में परिषद को अभिनव सामायिक का अनुष्ठान करवाया।  जययोग की साधना जब चल रही थी तब लग रहा था पूरा स्थान प्राण ऊर्जा से भर गया है। ध्यानयोग की तल्लीनता देखकर लग रहा था मानो अंतर्यात्रा के द्वार उद्घोटित हो रहे है। स्वाध्याय भोग में अपने भावो की प्रस्तुति देते हुए कहा - अभिनव सामायिक का उपक्रम संयम की साधना का बीजारोपण है।  आत्मिक उत्थान का अनुपम अनुष्ठान है - अभिनव सामायिक।   चित्तभूमी   में समता के अवतरण की पृष्ठभूमि है - सामायिक।  तन , मन और वचन को संयमित करने की प्रयोगशाला है - अभिनव   सामायिक। सामायिक श्रावक के लिए साधु जीवन के ...

तेरापंथ स्थापना दिवस : गुवाहाटी

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गुवाहाटी 31 जुलाई। साध्वीश्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वीश्री मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में 'तेरापंथ स्थापना दिवस' का भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम समायोजित हुआ।  साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा - आज से लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व आचार्य भिक्षु ने धर्मक्रांति की, वो क्रांति पद प्रतिष्ठा के लिए नहीं थी, मान सम्मान, सुख सुविधाओ एवं हक़ के लिए नहीं थी। वो क्रांति थी सत्य के लिए, आचार शुद्धि  के लिए, शुद्ध साध्वाचार के पालन के लिए। सचमुच आचार्य भिक्षु अपने युग के विलक्षण महापुरुष थे। तत्कालीन साधु-समुदायों में पनपने वाली आचार विचार की विसंगति ने उनकी चेतना के द्वार पर दस्तक दी, जिसे वह अनसुना नहीं कर सके। उनकी प्रज्ञा ने उनका विश्लेषण किया।  उन्होंने समन्वय के मार्ग पर कदम बढ़ाए, पर चल नहीं पाए क्योकि सिद्धान्तो  के  साथ समझोता करना उनकी नीति नहीं थी इसलिए दृढ इच्छा शक्ति से उन्होंने क्रांति का आह्वान किया। उसी धर्मक्रांति की निष्पति हमारे जीवन में आये ताकि जीवन सदाबहार बन जाए।  साध्वीश्री मंगलप्रज्ञाजी ने अपने म...

नवकार मंत्र कार्यशाला एवं महिला मंडल शपथ ग्रहण

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---------- Forwarded message ---------- From: march1080 < march1080@yahoo.com > Date: Sunday, August 9, 2015 Subject: नवकार मंत्र कार्यशाला एवं महिला मंडल शपथ ग्रहण To: " JTNMAIN@gmail.com " < JTNMAIN@gmail.com > साध्वी काव्यलताजी ने चिकमगलूर में नमस्कार महामंत्र कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा की नवकार महामंत्र एक शक्तिशाली कवच है इसे धारण करने से व्यक्ति सफलता को प्राप्त कर सकता है । हमारा आभामंडल पवित्र बनता है । जीवन में दिशा और दशा को बदलने में महत्तवपूर्ण कार्य करता है ।इसलिए प्रतिदिन नवकार मन्त्र की एक माला फेरने का संकल्प करने का आग्रह किया । इस अवसर पर नवकार मन्त्र की चित्र प्रतियोगिता रखी गयी । जिसमे अनेक बहेनो ने हिस्सा लिया । उलेखनीय यह है की चातुर्मास प्रारम्भ होते ही चिकमगलूर के घरो में बारी से नवकार मन्त्र का अखंड जाप चल रहा है । और अब तक सभी के घरो में 100 से भी ज्यादा सामायिक हो रही है । साध्वीश्री के सानिध्य में तेरापंथ महिला मंडल का शपथ ग्रहण हुआ । निर्वतमान अद्यक्शा मंजुबाई भंसाली ने नयी निर्वाचित अद्यक्शा कमलाबाई गाद...

जैन विद्या दिवस एवं संगठन समाचार : हिरियुर (कर्नाटक)

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2 .8 .2015  रविवार को वरिष्ट उपासक, हिरियुर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री दीपचन्दजी बोकडिया की अध्यक्षता में जैन विद्या दिवस का आयोजन किया गया । ज्ञानशाला बच्चों द्वारा भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत की गयी।उपासक महोदय ने स्वरचित मुक्तकों द्वारा ज्ञानशाला के बच्चों को प्रेरणा दी। कार्यक्रम के मुख्य अथिति सह आंचलिक संयोजक श्री अरविंदजी बाफना ने जैन विद्या पर प्रकाश डाला एवम् जैन समाज को इसके प्रचार प्रसार में सहयोग के लिए आह्वान किया।हिरियुर सभा के पूर्व अध्यक्ष उदयराजजी चौपड़ा, देविका बाफना, मनाली डेलड़िया ने अपने विचार रखे।जैन विद्या परीक्षा में उत्तीर्ण हुए परीक्षार्थियों को पुरस्कृत किया गया।श्रीमती संजनागौतम चौपड़ा को जैन विद्या विज्ञ द्वितीय(नो वर्षीय पाठ्यक्रम पूर्ण) में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया । कार्यक्रम का कुशल संचालन दीपचन्दजी बोकड़िया ने किया। स्थानीय तेरापंथ भवन में ते.म.मं हिरियुर द्वारा सर्वसम्मति से श्रीमती संतोष बाफना को वर्ष 2015-16 के लिए ते.म.मं हिरियुर के अध्यक्षा के रूप मे मनोनित किया गया । नवनिर्वाचित टीम इस प्रक...

सम्मान समारोह व जैन विद्या सप्ताह कालांवाली में

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समण संस्कृति संकाय , जैन विश्व भारती के तत्वाधान में बनाऐ जा रहे जैन विद्या सप्ताह को कालांवाली के तेरापंथ भवन में मनाया गया| यह कार्यक्रम तेरापंथ सभा,  तेरापंथ महिला मंडल व युवक परिषद्  द्वारा संयुक्त रूप से मनाया गया | मंच संचालन रवि गोयल (अध्यक्ष तेयुप)व सिंद्धांत सिगला (पुर्व अध्यक्ष) ने किया | कार्यक्रम नमस्कार महामंत्र से शुरू हुआ | मंच पर मोहन वांसल (सभा मंत्री), दिनेश गर्ग (हरियाणा संगठन मंत्री), हरीश सिंगला(ट्रस्ट चैयरमेन ), दिवान चंद गोयल (अणुव्रत समिति संरक्षक ) और  संजीव जी वर्मा (कार्यक्रम संयोजक, तेयुप ज्ञानशाला प्रभारी, जैन विद्या केन्द्रीय व्यवस्थापक) उपस्तिथ थे बर्ष 2014 में होने वाली जैन विद्या परीक्षा व जैन विद्या कार्यशाला व महावीर जयंती पर हुऐ कार्यक्रम में भाग लेने वाले परीक्षीर्थीयों व प्रतिभागीयों को सम्मानित किया गया| अखिल भारतीय स्तर पर कनिष्ठ वर्ग में तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले हितेश गर्ग को भी सभा की और से सम्मानित किया गया | हालहि में उसे गुरूदेव के सान्निध्य में नेपाल में भी सम्मानित किया गया था | छोटी आयु में शुद्ध भगताम्बर ...

जैन विद्या का ज्ञान करना अनिवार्य अपेक्षा है - साध्वी श्री गुप्तिप्रभा जी

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  जैन विद्या दिवस :  झकनावदा झकनावदा, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री गुप्तिप्रभा जी के सानिध्य में जैन विद्या का कार्यक्रम मनाया गया। जिसका एक मात्र मुख्य लक्ष्य था ज्यादा से ज्यादा लोगो को जैन विद्या का समीचीन ज्ञान देना व विद्यार्थी तैयार करना। साध्वी श्री गुप्तिप्रभा जी ने फरमाया - आत्म भवन की नीव को मजबूत बनाने के लिए, अपने वैराग्य को वर्धमान बनाने के लिए, अपशम भाव को पुष्ट करने के लिए तथा गहन आध्यात्म का ज्ञान करने के लिए जैन विद्या का ज्ञान करना अनिवार्य अपेक्षा है। जब तक जैन विद्या का ज्ञान नहीं होगा तो अन्य ज्ञान लवण हीन रसवती के समान है। कार्यक्रम में साध्वी श्री मौलिकयशा जी, साध्वी श्री भावितयशा, उपासिका श्रीमती निर्मला दुधोड़िया, श्री शीतल मांडोत एवं जैन विद्या प्रभारी प्रकाश भाँगु ने गीत व वक्त्यव्य द्वारा अपने विचार प्रस्तुत किये। संवाद साभार : आशीष भाँगु, झकनावदा (मालवा) प्रस्तुति : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ से  महावीर सेमलनी, संजय वैद मेहता

सुदृढ़ नेतृत्व सुदृढ़ संगठन में सहायक-साध्वी प्रज्ञा श्री जी

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सुदृढ़ नेतृत्व सुदृढ़ संगठन में सहायक-साध्वी प्रज्ञा श्री जी अभातेयुप निर्देशित व्यक्तित्व विकास कार्यशाला विषय-नेतृत्व एवं संगठन शक्ति का आयोजन तेयुप बैंगलोर एवं किशोर मंडल के सयुक्त तत्वावधान में गांधीनगर स्थित तेरापन्थ सभा भवन में साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी के सानिध्य में आयोजित हुई। सामूहिक मंगलाचरण द्वारा कार्यशाला प्रारम्भ हुई। परिषद् के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री नवनीत मुथा ने स्वागत वक्तव्य दिया। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी ने फरमाया की किसी भी संगठन की शक्ति को संग्रहित करने हेतु सदुपयोग करने हेतु संघ समाज व राष्ट्र के विकास हेतु एक कुशल नेतृत्व की जरूरत होती है। साध्वी श्री जी ने आचार्य श्री महाश्रमण जी व अब्राहीन लिंकन आदि अनेक सुदृढ़ नेतृत्वकर्ताओ के उदाहरण के माध्यम से अपने विचार रखे। साध्वी श्री सरल प्रभाजी ने भी इस विषय पर अनेक संस्मरणों के माध्यम से विचार रखे। वक्ता के रूप में अभातेयुप के पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री दीप चन्द नाहर, श्री विनय वैद, श्री प्रकाश लोढ़ा ने अपने विचार रखे। कार्यशाला में तेयुप पधाधिकारी श्री वि...

दम्पति शिविर का आयोजन---हैदराबाद

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साध्वीश्री कुंथुश्री जी के सानिध्य में दम्पति  शिविर हैदराबाद, तेरापंथ सभा, तेयुप एवं महिला मंडल के तत्वध्यान में साध्वीश्री कुंथुश्री जी के सानिध्य में तेरापंथ भवन में दम्पति शिविर का आयोजन किया गया। सभी का स्वागत सभा अध्यक्ष और तेयुप अध्यक्ष द्वारा किया गया। महिला मंडल ने सुभकामना प्रेषित की।कार्यक्रम के प्रथम चरण में साध्वी   कुंथुश्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा की दम्पति का अर्थ जोड़ा होता है पति पत्नी के जोड़े को दम्पति कहा जाता है। एक चक्के से गाड़ी नहीं चल सकती। एक तार से बिजली नहीं जलती और एक हाथ से ताली नहीं बजती। अकेले स्त्री या अकेले पुरुष से न परिवार होता है न समाज और न सृष्टि होती। दम्पतिय जीवन को सुखी बनाने का एक सूत्र है - अनाग्रह चेतना का विकास। समन्वय,सामंजस्य, संवेदनशीलता, सहनशीलता आदि गुणों को अपनाकर सुखी जीवन जिया जा सकता है।  परिवार खुशहाल बन सकता है। दम्पतिय जीवन में सरस सुखद मधुर समता के दीप जलाये जा सकते है। साध्वी श्री कंचनरेखाजी ने भी अपने विचार सदन में रखे। कार्यक्रम का संचालन तेयुप के अमित नाहटा, ललित लूणिया, निर्मल दुगर, प्रक...

नववधू सम्मलेन विजयनगर

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दिनांक 11.08.2015. विजयनगर के अर्हम भवन में शासन श्री साध्वी श्री कंचनप्रभा जी ठाणा5 के सानिध्य में नव वधु सम्मलेन आयोजित हुआ। जिसमे "कैसे करे तेजस्विता का विकास" विषय पर बहनो को प्रशिक्षित किया गया। साध्वी कंचनप्रभा जी ने फ़रमाया महिलाओ का सौंदर्य आभूषणों से नहीं आंतरिक सद्गुणों के विकास से है। महिला को ममता की प्रतिमूर्ति कहा जाता है उनका जीवन देहलीज के दीपक के समान होता है जो 2 परिवारो को रोशन करता है। महिलाओ में सेवा भावना, सकारात्मक सोच, परिवार में सबके प्रति आत्मीयता का भाव हो तो स्वयं का एवं पुरे परिवार का तेजस्वी रूप निखार सकती है। इसके लिए महाप्राण ध्वनि,मैत्री की अनुप्रेक्षा और ज्योति केंद्र पे ध्यान देना जरुरी है। इस से भीतर का रासायनिक परिवर्तन होता हैं। अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा जी गन्ना एवं नवमनोनीत अध्यक्षा श्रीमति निर्मला सोलंकी ने अपने विचार व्यक्त किये। श्रीमती वीणा जी बैद ने शरीर के 13 चैतन्य केन्द्रो को जाग्रत कर तेजस्विता को बढ़ाने का रोचक प्रशिक्षण दिया। श्रीमती मंजू लुनिया ने अनुप्रेक्षा के प्रयोग करवाये एवं श्रीमती कुसुम डांगी ने सत...

Fwd: जाब - हरियाणा स्तरीय "व्यक्तित्व निर्माण कार्यशाला"

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---------- Forwarded message ---------- From: Naveen Jain < jainnaveen08@gmail.com > Date: 2015-08-13 13:45 GMT+05:30 Subject: जाब - हरियाणा स्तरीय "व्यक्तित्व निर्माण कार्यशाला" To: Jain TerapanthNews < jtnmain@gmail.com > सादर जय जिनेंद्र जी आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या शासन श्री साध्वी यशोधरा जी -ठाणा ६ के सान्निध्य में एवम् अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वाधान में पंजाब - हरियाणा स्तरीय "व्यक्तित्व निर्माण कार्यशाला" का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद् सुनाम द्वारा दिनांक 16.08.2015 को किया जा रहा है। नवीन जैन जैन तेरापंथ समाचार सुनाम -- Visit Us :  www.jainterapanthnews.in Like Us :  www.facebook.com/jainterapanthnews1

"जैन संस्कार विधि की गूँज अब भारत से बाहर भी"

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काठमांडू, (नेपाल), गंगाशहर निवासी और काठमाण्डू प्रवासी श्री ललितकुमार - श्रीमति लीला मरोटी के सुपौत्र एवं हेमन्त - रचना मरोटी के नवजात सुपुत्र का नामकरण आज 12 अगस्त को प्रातः10 बजे जैन संस्कार विधि से संपन्न हुआ।  जैन संस्कारक की भूमिका गंगाशहर निवासी काठमाण्डू प्रवासी श्री प्रदीप लालाणी ने निभाई। उन्होंने नामकरण संस्कार का सारा कार्य विधि विधान पुर्वक संपन्न करवाया उनके साथ सहयोगी के रूप में श्री इन्दरचंद सिंघी, श्री ललित मरोटी एवं मनीष नाहटा भी उपस्थित थे। इस अवसर पर समाज के गणमान्य लोग भी वहां उपस्थित थे। सभी ने इस प्रकार के आयोजन की प्रशंसा की। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि श्री प्रदीप लालाणी पूर्व में गंगाशहर रहने के दौरान अभातेयुप के संस्कार विधि प्रभारी व ABTYP JTN प्रतिनिधि श्री धर्मेन्द्र डाकलिया के साथ जैन संस्कार विधि के बहुत सारे आयोजनों में सहयोगी रह चुके है। Visit Us :  www.jainterapanthnews.in Like Us :  www.facebook.com/jainterapanthnews1

कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं अर्द्धवार्षिक अधिवेशन, सिरियारी

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अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं अर्द्धवार्षिक अधिवेशन, सिरियारी दिनांक 8, 9 अगस्त 2015. धम्मगिरी पर्वत की तलहटी में तेरापंथ के आद्य प्रवर्तक आचार्य श्री भिक्षु की निर्वाण भूमि सिरियारी में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा द्विदिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं अर्द्धवार्षिक अधिवेषन का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र द्विदिवसीय आयोजन का शुभारम्भ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर द्वारा विधिवत घोषणा से हुआ। अभातेयुप सदस्य श्री प्रमोद भंसाली ने विजय गीत का संगान किया। श्रावक निष्ठा-पत्र के वाचन के पश्चात श्री अविनाश नाहर ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में आचार्य श्री भिक्षु का पावन स्मरण करते हुए उनके प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्ष महोदय ने युवाओं को कर्मठ रहते हुए परिषद के सेवा संस्कार संगठन त्रिआयामी उदेश्य के प्रति सदैव जागरूक एवं सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। सहमंत्री प्रथम श्री संजय जैन ने अपने विचार प्रस्तुत किये। आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान के अध्यक्ष श्री मूलचन्द नाहर ने सभी युवाओं का स्वागत किया। इ...

सम्यक्त्व रत्न देना बड़ी आध्यात्मिक सेवा है : आचार्य श्री महाश्रमण

उपासक शिविर प्रारंभ  सम्यक्त्व रत्न देना बड़ी आध्यात्मिक सेवा है : आचार्य श्री महाश्रमण  परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने फरमाया कि- संवर मोक्ष का कारण होता है. संयम की चेतना से संवर को विकसित किया जा सकता है. चौथे गुणस्थान तक सम्यक संवर नहीं होता है. 5 वें गुणस्थान से सम्यक संवर शुरू होता है.सम्यक्त्व रत्न के समान दुसरा कोई रत्न, मित्र , बंधू नहीं है.  वह समय बड़ा महत्वपूर्ण है. सम्यक्त्व की प्राप्ति हो जाती है.  साधना का महत्वपूर्ण आधार सम्यक्त्व है.  उपासक शिविर का आज प्रारंभ हुआ है. उपासक-उपासिकाएं स्वयं के समयाक्त्व को पुष्ट करें तथा दूसरों को भी सम्यक्त्वी बनाने में अपना योगदान दे. किसी को सम्यक्त्व रत्न देना बड़ी आध्यात्मिक सेवा हो सकती है.  तेयुप विराटनगर द्वारा स्वागत गीत का संगान किया गया. महिला मंडल द्वारा गीतिका संगान द्वारा अभिनंदन किया गया. 

शास्त्र श्रवण है परम कल्याणकारी

दिल्ली। ४ अगस्त । आज श्रद्धेय मंत्री मुनिप्रवर ने भगवती सूत्र के बारे में बताया। उन्होंने फ़रमाया कि- आगम में  मनुष्य जन्म, शास्त्र श्रवण, उसमें श्रद्धा और उस पर आचरण दुर्लभ बताया गया है। कई बार मनुष्य जीवन तो मिल जाता है किन्तु श्रुति उसमें भी शास्त्र श्रवण नहीं मिल पाता। यह किसी भाग्यशाली को मिलता है । आगम वाणी को श्रवण  करना बहुत दुर्लभ है। परिवेश को बदलने और आस पास के वातावरण को प्रभावित करने का क्रम है- आगम स्वाध्याय ।  मंत्री मुनिप्रवर ने जयाचार्य के समय की एक घटना द्वारा आगम स्वाध्याय का महत्व बताया। एक बार जयाचार्य जिस हवेली में विराज रहे थे उसमें पीर रहता था। उन दिनों जयाचार्य का आगम स्वाध्याय चल रहा था। सभी संत भी आगम चितारते थे। आगम स्वाधयाय के कारण यक्ष(पीर) को कठिनाई होने लगी। रात्रि में  पीर ने जयाचार्य से कहा आप के आने से मुझे कठिनाई हो रही है, आप यह स्थान छोड़ दे।जयाचार्य ने पिछली रात्रि का प्रतिक्रमण कर संतो से कहा-सामान बांध लो, सुबह यह स्थान खाली करना है। उस हवेली से विहार कर पंचायती न्यौरे में आये। दूसरे दिन पीर न्यौरे ने आया और कहा आप वापस उस हव...

मंत्र दीक्षा आस्था निर्माण, संस्कार निर्माण और विकास के महापथ का वह प्रकाश- दीप है - साध्वीश्री अणिमाश्रीजी

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गुवाहाटी 2 अगस्त: साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में तेरापंथ भवन के सुरम्य एवं विशाल हॉल में मंत्र दीक्षा का भव्य कार्यक्रम समायोजित हुआ। जिसमे लगभग 200 बच्चों ने मंत्र दीक्षा स्वीकार की। तेयुप गुवाहाटी द्वारा सभी बच्चों को मंत्र दीक्षा सामग्री का किट प्रदान किया  गया।  साध्वीश्री अणिमाश्रीजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा - मंत्र दीक्षा आस्था निर्माण, संस्कार निर्माण और विकास के महापथ का वह प्रकाश- दीप है, जो जीवन के हर मोड़ को आलोकित करने वाला है।  बचपन वह मिट्टी है, जिसे चाहे जैसा आकार दिया जा सकता है।  इस उम्र में नमस्कार महामंत्र के प्रति श्रद्धा का बीज बोया जाता है, जो धीरे धीरे फलवान बनकर ज़िन्दगी के हर पड़ाव में सशक्त सहारा बनकर हमारे आस-पास खड़ा रहता है। महामंत्र के प्रति धनीभूत निष्ठां जब बचपन में ही प्रगाढ़ बन जाती है तो समूची ज़िन्दगी को रोशनी के सफर से जोड़ने  में कामयाब हो सकती है। शहरी जीवन शैली से जुड़ा हुआ यह बालक-बालिकाओं का समूह एक साथ सुनुपस्थित ह...